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सब केहू के जय भोजपुरी आ सादर सस्नेह प्रणाम बा..
एक भोजपुरी के किताब भेंटाइल ह, पढ़ रहला बानी अभी ओह किताब के जवना में सोरठा, दोहा, चौपाई, सवैया के भरपूर रस बा , त सोचनी ह कि रऊवा लोग से साझा करी ...
'एक हाली महाकवि अर्जुन सिंह "अशान्त जी" के रचित कालजयी भोजपुरी महाकाव्य "बुद्धायन" जरूर पढ़ी सभे, जवान की उन्ह के देह छोड़ला (३ जनवरी २००३) के करीब अढ़ाई साल बाद भोजपुरिया लोग के आर्थिक सहयोग से प्रकाशित भईल, जो की एक ऐतिहासिक पहल रहे ...
आ जब "अशान्त जी" के देहावसान हो गईल त ए महाकाव्य के पाण्डुलिपि बहुत जीर्ण-शीर्ण, छितराईल, आ काट-कूट से गजबजाइल रहे, जेकर संपादन के काम लिहनी आ सहर्ष पूरा कईनी भोजपूरी साहित्य के महान साधक "पाण्डेय कपिल जी"...
पाण्डेय कपिल जी लिखा तानी कि - "तुलसीदास- कृत रामायण बाँचे वाली भोजपुरी भाषी जनता के बुद्धायन बहुत रास आई".. आ सचहू एह किताब के एक बार जरूर पढ़ी सभे काहे कि हमरा ख्याल से तुलसीदास-कृत रामायण(जो कि अवधि में रचित बा) के बाद बुद्धायन ओह तर्ज एके एकमात्र महाकाव्य बा जवना में सोरठा, दोहा, चौपाई, सवैया के भरपूर रस बा ...'
लिखे में कवनो त्रुटि भईल होखे त क्षमा करेम सभे ...
राउरे आपन ...
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on May 27, 2012 at 9:00pm अवनीस जी प्रनाम आ जय भोजपुरी
बहुत नीमन जानकारी देहनी , मोका मिली चानस भेटाई त जरुर पढल जाई एह महाकाव्य के !
धन्यवाद एह के बारे मे बतावे खाति ।
जय भोजपुरी
Comment by Manoj Kumar on May 28, 2012 at 10:29pm अवनीश जी,
प्रणाम आ जय भोजपुरी.
बहुत उपयोगी जानकारी देहनी ह रउआ, सम्भव होखे त ''बुद्धायन'' के प्रकाशन के पता/ या जंहवा से प्राप्त हो सकेला, वहां के बारे मे भी जानकारी दे सकीं त कृपा होई. बहुत-बहुत धन्यवाद.
जय भोजपुरी.
Comment by Avanish Tiwari on May 29, 2012 at 1:26pm मनोज जी,
प्रणाम आ जय भोजपुरी.
एह किताब के एक प्रति हमरा लगे बा, काल्ह भा परसो ले हम पूरा ब्योरा उपलब्ध करा दें कि ई किताब कहा स एमिल सकी आ कईसे रउवा सभ के लगे पहुंची ...
जय भोजपुरी...
Comment by संजीव सिंह on May 30, 2012 at 12:33pm अवनीश भाई प्रनाम,
एगो बढीया जनकारी से रूररू करववले बानी। बहुत बहुत धन्यवाद।
जय भोजपुरी
Comment by Avanish Tiwari on June 7, 2012 at 9:09am सब केहू के प्रणाम आ जय भोजपुरी ...
देरी खातिर माफ़ी चाहब .
"बुद्धायन" के प्रकाशक :
महाकवि "अशान्त" स्मृति समिति,
अम्बिका स्थान, आमी, वाया - दिघवारा, सारण, बिहार ..
आ अगर एइजा से संपर्क नइखे हो पावत त इ किताब पटना में भी कुछ जगह उपलब्ध बा ... आ ना त एह सेवा खातिर हमरा से सम्पर्क कईल जा सकेला, हमरा बहुत खुशी होई ...
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