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डाईरेक्टर के .सिटी..............

एगो गांव में बहुत जोर शोर से नाटक के तैयारी चलत रहे । रामायण के कथा पर आधारित नाटक रहे । इलाका में जहाँ पांच आदमी जुटस एही नाटक के चर्चा रहे ।धीरे –धीरे दिन नियराये लागल ।चार दिन .....तीन दिन ...दू दिन.....बस काल्हुए त बा । लइका ‌बच्चा जय बजरंग बली आ जय श्रीराम के नारा लगावत गांव के परिक्रमा कर रहल बाडन स । एह सब माहौल से अलग नाटक मंडली के डाइरेक्टर के ओठ पर फफरी परल रहे । काहें ना परो –नाटक होखे के एक दिन पहिले हनुमान जी के रोल करे वाला बेचू भाई घर से खिसिया के दिल्ली भाग गइलन ..बिना केहु के बतवले ।

           

            सब साथी लोगन से विचार विमर्श के बाद डाईरेक्टर महोदय दोसर हनुमान के खोज में निकललन । प्रतिभा त काफी मिलल लेकिन केहू के डिल डौल हनुमान बने लायक ना रहे । थक हार के गांव के चट्टी पर चाय पीये खातिर पहुंचलन । ओजुगा जिलेबी बनावत बिरेंदर हलुआइ के देख के उनकर बांछ खिल गइल । जाके पुछ्लन .”.एक दिन में केतना कमा लेले बिरेंदर ? “ सौ रुपया कमा लिहिला – बिरेंदर कह्लन । डाइरेक्टर महोदय कह्लन ,” हम तहरा के दु सौ देम . बाकिर हमार एगो काम करे के पड़ी । “ दुनू आदमी के बीच कानाफुसी भइल आ बिरेंदर हलुआइ मान गइलन ।

                 

                 नाटक में हनुमान के पहिलका दृश्य आइल . अशोकवाटिका उजाड़ला के बाद हनुमान के रावण के सामने पेशी भइल .रावण गरज के पूछलस –“दुष्ट बानर तुम्हारी इतनी हिम्मत कि हमारी लंका में प्रवेश कर गये ? सिपाहियों इसको कड़ी से कड़ी सजा दो । “ हनुमान जी दुनू हाथ जोड़ के खड़ा हो गइलन, “ सरकार ! एमे हमार कवनो गलती नइखे ......हम ना बानर हई ना सियार .....हम चट्टी पर जिलेबी बेचेवाला बिरेंदर हलुआइ हई हुजूर ............हम्ररा के माफ करीं ....दु सौ रुपया खातिर हमरा गर्दन में फंसरी नईखे लगावेके....हमार जिलेबिये ठीक बा ............हम चलनी जिलेबी छाने ..........” डाईरेक्टर के सामने कवनो चारा ना रहे .........सिटी बाज गइल.........पी......पी पी.......


                        जय भोजपुरी

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Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on February 27, 2012 at 7:28am

हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा 

बात सही बा बिरेन्दर त फेरा मे परि गईले की दु स के चकर मे केने जेल मे डाले के उपाय हो गईल हा हा हा हा हा हा हा हा 

हा हा हा हा हा हा बहुत खुब ! 

जय भोजपुरी संजय भाई 

Comment by Brij Kishor Tiwari on February 27, 2012 at 1:26pm

जय भोजपुरी संजय भाई जी 

हा हा हा हा हा हा हा ......हा हा हा.............

जय हो .........
एगो रसरी छोड़े वाला कहानी त सुनले रही हनुमान जी पर ...........
ईहो  बेजोड़ संस्मरण बा .........
जय हो .........

Comment by मुकेश मिश्र (राजू बाबा) on February 27, 2012 at 5:17pm

संजय भईया जय भोजपुरी !

हा हा हा हा हा ...........

सय के दू स बनावे के चक्कर में बिरेन्दर हालुआई के त सँसरी टंगा गयिल.

हा हा हा हा हा हा हा ......हा हा हा.............

    हा हा हा हा हा हा हा हा.

 

Comment by Mantu Singh on February 27, 2012 at 5:19pm

हा हा हा हा हा हा हा
जबरदस्त.....

jAI BHOJPURI

Comment by संजीव सिंह on February 27, 2012 at 7:43pm

हा हा हा हा हा हा हा

हनुमान जी तऽ डेरा गईनी...

हा हा हा हा हा हा हा हा हा

बहुत बढीया रहल ई खिस्सा, हा हा हा हा...

पेट फुले लागल...

जय भोजपुरी

Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on February 27, 2012 at 9:41pm
प्रणाम भाई जी
हा हा हा हा हा हा हा
का कहल जाऊ बहुत
निमं लागल
जय भोजपुरी जिया भोजपुरी !
Comment by Satyendra Upadhyay "भोजपुरम" on February 28, 2012 at 12:37pm
हा हा हा हा हा हा हा
जय भोजपुरी
Comment by Ram Janma Sharma on February 28, 2012 at 3:44pm
hahahhahahah ka bat bababaaaaabahut badhiyayaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa
Comment by FAIYAZ AHMAD [RINKU] on February 28, 2012 at 9:13pm

hahahaaaaaaaaaaaaaa.......

bahut khubbbbbbbbbbbbbbb

Comment by Panchdev kumar kushwaha on February 29, 2012 at 2:32am

I like this  blog post.....

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