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अन्हरिया के मारल अंजोरिया के खोजे ,

चटक चांदनी में सांवरिया के खोजे !
जे जतरा के हर क्षण बना दे सुहावन ,
इ मन ऐसन सुघर बटोहिया के खोजे !!

बारूद के ढेर पर बैठल कबूतर ,
अमन के सिपाही ,संघतिया के खोजे !
माई से बिछडल बेटा के तन मन .
अंगूरी लपेटत अंचरवा के खोजे !!

माली पड़ल बाटे कवना भरम में 
सुखावे में  डाली के लागल बा रोजे !
सभे अपना जड़ के बा सींचे में लागल ,
"भोजपुरी" भी अपना भोजपुरियन के खोजे !!

जय भोजपुरी 

Views: 110

Comment by संजीव सिंह on February 20, 2012 at 7:45pm

प्रनाम संजय जी,

मन के बात कही तऽ नवीन भईया के एगो डीस्कसन मे रउआ जब ई कहले रहनी कि "हमरा लिखे  ना आवे..." तऽ मन मे बहुत तकलीफ भईले रहे। बाकीर...। रउआ भीरी से अईसन-अईसन रचना पढ के मन गदगद हो जात बावे। 

ई तऽ प्रकृती के नियम हवे कि केहू भी अकेले नईखे रह सकत। एगो संघतीया के दरकार जरूरी होला जिनगी के जिये मे, समुझे मे।

राउर कहल बात कि "भोजपुरी भी अपना भोजपुरियन के खोजे" मन के कवनो कोना मे हलचल जरूर कऽ देले बा। अउर ई सोचे पऽ मजबुर कऽ देले बा कि अहबहीयो हमनी "भोजपुरी" कारी ना घुसुकनी सन तब कब घुसकेम सन? 

बहुत बढीया संजय जी, बवाल बा एकदम...। हम मान लेत बानी कि रउआ लिखे ना आवेला बाकीर तबो अईसन-अईसन ढेर सारा रचना खतिरा आपन मन के केवाडी खोल के हम पेंडा जोहत बानी।

जय भोजपुरी 

Comment by sanjay panday on February 21, 2012 at 11:11am

sanjay bhiya parnam a jai bhojpuri |

bahut bejod rachana ba bhai ji |

aisan aisan ratan bharal ba jehan me 

ta nikalat kahe naikhe ,aur kahba ki hamara likhe na avat |

je adami har pratibha se purn hokhe okara ka na aai bhala |

aur bhejat rahi bhaiya ekdam garda ba raur lekh |

bahut bahut dhanyavad |\

jai bhojpuri |

sanjay pandey 

Comment by Rajesh Yadav on February 21, 2012 at 1:23pm

Sanjay Bhai Pranam aa Jai Bhojpuri,

सभे अपना जड़ के बा सींचे में लागल ,
"भोजपुरी" भी अपना भोजपुरियन के खोजे !!
Ego marmik bhaav ki sathe aa ekdam sanch kucho batawat ta kahin aash lagawat panktti badi san raur ii.
Jai Hind aa Jai Bhojpuri.
Comment by Rajnish Kumar Singh on February 21, 2012 at 2:32pm

Bahut bejod rachna ba  Sanjay bhaiya.........

  Raura ke sat sat pranam aur Jai bhojpuri....

Sach hamni ke jage ke hoi Bhojpuri khatir.... 

Hamni ke  "MAI BHASHA"  hamni ke pukarat badi.....

   Jai bhojpuri....

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on February 21, 2012 at 2:45pm

संजय भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी

बहुते गहिराह भाव ले ले बहुत दिन के बाद , बहुते साफ आ सोझ बतिआवत परतोख देखावत समझावत बुझावत राउर ई कुछ पंक्ति गागर मे पुरा के पुरा सागर समेट ले ले बिआ ।

सांचो , राउर गद्य लेखन होखे भा पद्य मय मे हम हरमेसा एक दम गहिर भाव देखले बानी आ जवना के पढला के बाद मन मे खलिहा शब्द ना नाचेला बलुक ओह शब्दन से निकलल भाव भी रहेला ।

मारक रचना , बेजोड , लाजवाब , उम्दा , बेहतरीन , अदभुत ...

साधुवाद

जय भोजपुरी

Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on February 21, 2012 at 4:24pm
संजय भाई जी प्रणाम !
आहा मन हरियारा गइल एह रचना के
पढ़ी के बहुते निमं लय ताल बनल बा
शब्द के एक एक पंक्ति से रस चुवत बा
बेजोड़ भाई जी बेजोड़ !
जय भोजपुरी जीय भोजपुरी !
Comment by Brij Kishor Tiwari on February 21, 2012 at 5:05pm
जय भोजपुरी आ प्रणाम संजय जी .........
बहुत बरियार बात कईनी जी ............
"सभे अपना जड़ के बा सीचे में लागल 
"भोजपुरी" भी अपना भोजपुरियन के खोजे" 
एह लाईन में लुकाईल "दरद" के "दरद" बहुत टीसsता  ...........
भगवान् सब भोजपुरिया के एह "दरद के टीस" बुझे के शक्ति देवस ...............
बहुत धन्यवाद ................,साधुवाद ...........
Comment by मुकेश मिश्र (राजू बाबा) on February 21, 2012 at 7:56pm

संजय भईया प्रणाम आ जय भोजपुरी!

बहुत बेजोड़ लेख बा. तीनो अंतरा बेजोड़ बा. अंतिम अंतरा मे जवन राउआ ब्यंग कैले बनी आज के भोजपुरी के पाहरूआ लो पर उ एकदम सटीक बा. जे आज अपना के भोजपुरी के पाहरूआ कहता उहे एकरा डाढ़ी के सुखावे मे लगाल बा. आ एकर दरद राउआ अंतिम लाइन मे झल-झल झलकता.

"भोजपुरी" भी अपना भोजपुरियन के खोजे !!

 

           जय भोजपुरी!

 

 

Comment by Chandra Prakash Dubey on February 23, 2012 at 10:22pm

संजय जी,

जय भोजपुरी ,

ब्यक्तिगत भावना 

माई से बिछडल बेटा के तन मन .

अंगूरी लपेटत अंचरवा के खोजे !!

आ  सामाजिक भावना 

सभे अपना जड़ के बा सींचे में लागल ,
"भोजपुरी" भी अपना भोजपुरियन के खोजे !!

से सराबोर इ रचना के माध्यम से रौवा अपना भासा के दशा भि कही देले बानी.

बहुत बहुत शुभकामना

Comment by Anoop Srivastava on February 24, 2012 at 5:41pm

बहुत बढ़ियाँ लिखले बानी संजय भाई,

अभाव से आवश्यकता आ आवश्यकता से उम्मीद के यात्रा के संक्षेप में बेहतरीन वर्णन कइले बानी रउआ ... बहुत बढ़ियाँ ... धन्यवाद आ जय भोजपुरी ।

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