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सादर प्रणाम,

आजु ढेर दिन पे कुछु लिखे बइठनी, तबले एक जने मित्र के एगो मेल आ गइल, बाति त साधारण रहे, बाकी सनेसा सोचे पे मजबूर क देहलस । काल्ह साँझी के घरे खातिर भी निकरे के बा, त सोचनी कि, पहिले ए अजीब समीकरणन के भोजपुरिया रुपान्तरण रउआ लोगन के साथे बाँट लीहल जा.....

.... 20 रुपया के नोट ढेर लागेला जब कौनो गरीब के देवे के होखे ।
.... ईहे 20 रुपया के नोट कम लागेला जब होटल में टिप देवे के होखे ।।

.... 3 मिनट खातिर भगवान के याद कइल केतना मुश्किल बा ।
.... बाकी 3 घंटा के फिलिम देखल केतना आसान बा ।।

.... भर दिन मेहनत के बाद, जिम गइला पे थकान ना होला ।
.... बाकी माई-बाप के गोड़ दबवला मे, थकान हो जाला ।।

.... वैलेन्टाइन डे खातिर लोग, पूरा बरिस इन्तजार करेला ।
.... बाकी मदर डे कब आवेला ई ना याद रहेला ।।

.... एगो रोटी ना देहलस ओ लइका के केहू ।
.... बाकी ऊ फोटउआ, लाखन में बिका गइल जवना में, ऊ लउका रोटी खातिर उदास बइठल रहे ।।


.... ई सनेसा दोसरा के फारवर्ड कइल बड़ा मुश्किल बा ।
.... बाकी बकवास चुटकुला फारवर्ड कइल त हमनी के फर्ज होला ।

--------- अजीब बा नू --------

धन्यवाद आ जय भोजपुरी ,
अनूप

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Comment by संजीव सिंह on January 20, 2012 at 1:45pm

अनूप जी प्रणाम,

अजीब ही ना बहुत अजीब बावे ई।

ऐह दुनिया मे सबसे बडका जवन बिमारी बावे ऊ हवे स्वार्थ। अउर कही ना कही ऐह सब कारण के पिछा भी स्वार्थ ही छुपल बावे।

वईसे बढीया ढंग से ऐह समीकरण मे आजु के अजीब-अजीब समस्या प गौर कईल गईल बावे।

धन्यावाद।

जय भोजपुरी

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on January 20, 2012 at 1:46pm

अनुप भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी 

राउर बात सोरह ना बीस आना सही बा आ एहि प एगो बात हम एक जगहा कहले रहनी त ढेर लोगन के माहुर लेखा लागल आ तीत लागल । 

बात इहे बा की हमनी के कब ले अपना जिम्मेवारी से भागब जा ? कब ले हमनी के दोसरा प अंगुरी उठाईब जा ! जिम्मेवारी एगो इंसान भईला के अपना क्षेत्र अपना माटी अपना भाषा अपना लोगन खाति । मय लोग हमरा के ओजुगा तडेच लिहल ! 

सांच पुछी त जहिया हमनी के अपना आरी कगरी देखे लागब जा ओहि दिन से सब सही होखे लागी बाकी हमनी के बात करब जा ओह चीझु के जवना के हमनी के कुछ कईये ना सकेनी जा आ जहा कुछ करे के रही ओकरा खाति ओह के अंगुरी देखाईब जा जेकरा उ करही के नईखे । 

लोग अधिकार आ हक के बात टांठे करेला आ कर्तव्य के बात प मेहरा जाला । 

उमेद बा राउर ई ब्लाग लोगन के आंखि आ दिल दिमाग तीनो के खोली । 

जय भोजपुरी 

Comment by FAIYAZ AHMAD [RINKU] on January 20, 2012 at 7:10pm

अनुपम भाई जय भोजपुरी,

राउर लिखल सोलह आना सच बा|

लोग बात लम्बा लम्बा करेला लेकिन जब ओह पर अमल करे के वक़्त आवेला तब लोग अपने बात भुला जाला|

  

Comment by Brij bhushan choubey on January 20, 2012 at 7:11pm

अनूप जी प्रणाम आ जय भोजपुरी ,

                 अजीब त ब़ा आ कतना अजीब ब़ा कहल मुस्किल ब़ा ,आ एमा केकर दोस ब़ा इहो कहल मुस्किल ब़ा 
                बाकि सोचह सही आ सार्थक रखे के चाही  हम त इहे कहं इहे करबो करीना 
           अगर भला किसी का क़र ना सको तो बुरा किसी का क्या करना |
 माई -बाबु माईबाबु ही ह आ  प्रेमिका प्रेमिके हिये सबका आपन आपन महत्व ब़ा केहुके कम नइखे आकल जा सकत |आपन कर्तव्य समझे के चाही भला चाहे  बुरा |
                                      अईसे त कहले गइल ब़ा ...की जइसन करब कमाई ओइसन आगा -आगा आई |
बाकिर के केकर बुराई  के केकर बड़ाई करो सबकर आपन  महामारी  ब़ा |
दुनो जगह पर उहे धंधा हेने - होने कके चाहे  निजी भा  सरकारी ब़ा || 
                                           जय भोजपुरी |
         
Comment by Ashutosh Ranjan on January 21, 2012 at 1:33am

अनूप जी प्रणाम,

राउर बात से हम आंशिक रूप से सहमत बानी, पूर्णतया ना...हम खुदे ना कबो भीख देनी आ ना टिप्स...भगवान् के इयाद त करीले..लेकिन झुठाहु अगरबत्ती देखावे में विश्वास ना करीं....आ जन्हा तक वेलेंतायीं डे भा मदर्स डे के सवाल बा..हम ओहुमें भरोषा ना राखिले..हाँ इ बात दीगर बा की केहू इयाद दिया देहलस भा कंही पढ़ लेहनी त सामान्य रूप से ओहिपर चर्चा क लेहनी...

माने हमार त कहे के लब्बोलुवाब इ बा की जवान राउर दिल गवाही देवे उचित के ओकरा के जरुर करीं आ दिमाग के दिल पे हावी मत होखे दी....शायद इहे रौवो कहल चाहत बानी....

जय भोजपुरी

Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on January 22, 2012 at 5:58pm
प्रणाम अनूप भाई जी !
एक दम सही बात सत्य
साँच तनी तीत होला
पर नीक होला समझे वाला के समझ जाये के चाहीं !
बहुते नीमन बात जेकर कौनो कीमत नइखे
अनमोल !
जय भोजपुरी जिय भोजपुरी !
Comment by sanjay panday on January 23, 2012 at 11:22am

anoop bhaiya parnam  a jai bhojpuri |

bahut sahi bada ajeeb ba ,ekdam soraho aane sanch|

bahut bahut dhanyavad |

jai bhojpuri 

sanjay pandey 

Comment by NOORAIN ANSARI on January 25, 2012 at 5:32pm
अनूप जी प्रणाम और जय भोजपुरी..
सामाजिक बिश्लेषण के कठोर सच के सजीव रूप से  चित्रण  कईल बा रवुआ   ये रचना में..
 
बहूत बहूत धन्यवाद..

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