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जे दूर रहे
उ पास रहल
हर दम ओकरे
एहसास रहल
दू जिस्म रहे
एक साँस रहल
होठवा पे अइसन
प्यास रहल
जे पास बा
उ खास ना
ओकरा खातिर
एहसास ना
उ प्यार करे
फिर भी बात ना
ओकर बोली
बरदास ना
उ चली जाई
फिर याद आई
अंखिया फिर
आशु छलकाई
बितल बतिया
फिर दोहराई
के समझत बा
के समझाई
एह पागल मन
के गहराई...
'प्रवीण'
बहुत नीमन रचना बा
जय भोजपुरी
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on November 11, 2011 at 2:42am प्रवीन जी प्रनाम आ जय भोजपुरी
बाडा गहिर अँदाज मे बहुत बरिआर बात आ एगो अलगे तरिका से , लाजवाब रुप मे , शब्दन के बेहतरीन उपयोग कईके एह रचना मे देखा देले बानी !
बहुत ही सुनर , नीमन आ दिल के छुवे वाली रचना ....
साधुवाद
जय भोजपुरी
Comment by भास्कर रंजन "सूर्य" on November 11, 2011 at 10:50am प्रवीन भाई परनाम
ढेर दिन प राउर लिखल आज पढे के मिलल । लेकिन कहाला नु ... देर आये दुरूस्त आये :)
एगो एकदम बरियार आ साँचों मे मन के गहराई ले चल जाए वाला रचना के साथे आईल बानी ।
बहुते निमन रचना ।
धन्यबाद आ जय भोजपुरी ...
Comment by Brij bhushan choubey on November 11, 2011 at 11:10am वाह वाह प्रवीन भाई वाह लाजवाब रचना
Comment by Rajnish Kumar Singh on November 11, 2011 at 11:30am
Comment by Brij Kishor Tiwari on November 11, 2011 at 10:33pm जय भोजपुरी आ प्रणाम
बहुत सुन्नर ...बहुत सुन्नर ..........
उ चली जाई
फिर याद आई
अंखिया फिर
आशु छलकाई
बितल बतिया
फिर दोहराई
के समझत बा
के समझाई
एह पागल मन
के गहराई...
बहुत बरियार बात .........
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on November 13, 2011 at 2:32pm
Comment by Chandra Prakash Dubey on January 16, 2012 at 10:50am प्रवीण जी,
जय भोजपुरी,
बहुत ही भावना प्रधान रचना. शैली, वाक्य विन्यास आ रोचक.
एक दम मन से लिखल
मन के पास
मन केछुवे वाला .
असीम शुभकामना
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