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एह पागल मन के गहराई...

जे दूर रहे
उ पास रहल
हर दम ओकरे
एहसास रहल
दू जिस्म रहे
एक साँस रहल
होठवा पे अइसन
प्यास रहल

जे पास बा
उ खास ना
ओकरा खातिर
एहसास ना
उ प्यार करे
फिर भी बात ना
ओकर बोली
बरदास ना

उ चली जाई
फिर याद आई
अंखिया फिर
आशु छलकाई
बितल बतिया
फिर दोहराई
के समझत बा
के समझाई
एह पागल मन
के गहराई...

'प्रवीण'

Views: 73

Comment by MANTOSH SINGH on November 11, 2011 at 12:09am



बहुत नीमन रचना बा
जय भोजपुरी

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on November 11, 2011 at 2:42am

प्रवीन जी प्रनाम आ जय भोजपुरी

 

बाडा गहिर अँदाज मे बहुत बरिआर बात आ एगो अलगे तरिका से , लाजवाब रुप मे , शब्दन के बेहतरीन उपयोग कईके एह रचना मे देखा देले बानी !

 

बहुत ही सुनर , नीमन आ दिल के छुवे वाली रचना ....

 

साधुवाद

 

जय भोजपुरी

Comment by भास्कर रंजन "सूर्य" on November 11, 2011 at 10:50am

प्रवीन भाई परनाम

ढेर दिन प राउर लिखल आज पढे के मिलल । लेकिन कहाला नु ... देर आये दुरूस्त आये :)

एगो एकदम बरियार आ साँचों मे मन के गहराई ले चल जाए वाला रचना के साथे आईल बानी ।

बहुते निमन रचना ।

 

धन्यबाद आ जय भोजपुरी ...

Comment by Brij bhushan choubey on November 11, 2011 at 11:10am

वाह वाह प्रवीन भाई वाह लाजवाब रचना

जे पास बा
उ खास ना
ओकरा खातिर
एहसास ना
उ प्यार करे
फिर भी बात ना
ओकर बोली
बरदास ना    ..का बात  एकदम मिजाज के हिलावे वाली बात |
एगो सुघर रचना खातिर बहुत बहुत बधाई  |
                      जय भोजपुरी |

Comment by Rajnish Kumar Singh on November 11, 2011 at 11:30am
ekdam sundar aur lajawab....
Comment by Anoop Srivastava on November 11, 2011 at 1:50pm
बहुत नीमन लिखले बानी प्रवीन भाई जी,
दिल से महसूस कइल एगो सच्चाई, एगो अनुभव ..चंचल मन के स्थिर क के मनोस्थिति के अहसास .... आगे अइसेही लिखे खातिर शुभकामना बा ..धन्यवाद आ जय भोजपुरी ।
Comment by Brij Kishor Tiwari on November 11, 2011 at 10:33pm

जय  भोजपुरी आ प्रणाम

बहुत सुन्नर ...बहुत सुन्नर ..........

उ चली जाई
फिर याद आई
अंखिया फिर
आशु छलकाई
बितल बतिया
फिर दोहराई
के समझत बा
के समझाई
एह पागल मन
के गहराई...

 

बहुत बरियार बात .........

Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on November 13, 2011 at 2:32pm
प्रवीण भाई जय भोजपुरी आ प्रणाम !
एक के शब्द अपना मे खुछु बतकही करत बुझात बा
एके के शब्द कुछु ख़ास बा !
बहुत सूनर रचना
जय भोजपुरी जीय भोजपुरी !
Comment by Chandra Prakash Dubey on January 16, 2012 at 10:50am

प्रवीण जी,

जय भोजपुरी,

बहुत ही भावना प्रधान रचना. शैली, वाक्य विन्यास आ रोचक.

एक दम मन से लिखल

मन के पास

मन केछुवे वाला .

असीम शुभकामना

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