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खामोश हो गइल भोजपुरी के निर्भीक आवाज...

जमशेदपुर। कई हाली सुन चुकनी ई खबर, लेकिन ना जाने काहे मन ई माने खातिर तैयारे नइखे होत कि निर्भीक जी अब एह दुनिया में नइखी। अभी 2 दिन पहिले ही अजय जी (निर्भीक जी के सुपुत्र) से बात भइल रहे त उहाँ का कहले रहनी कि "बाबुजी के तबियत बहुत खराब बा, आ उहाँ का अस्पताल में बानी।" अउर आज सबेरे-सबेरे वरिष्ठ साहित्यकार गंगा प्रसाद अरुण उनका निधन के खबर देहनी ह।

"भोजपुरी शब्दानुशासन" नाम से भोजपुरी व्याकरण के पहिला किताब (1975) लिखे वाला डा. रसिक बिहारी ओझा 'निर्भीक' भोजपुरी के शीर्षस्थ साहित्यकारन में से एक रहनी। भोजपुरी साहित्य के लगभग हर विधा (कहानी, कविता, कविता, व्याकरण, नाटक, यात्रा-वृतांत, धरोहर, संस्मरण, शोध-ग्रंथ आदि) में लिखे के क्षमता बहुत कम साहित्यकारन में मिलेला, अउर निर्भीक जी के एह कुल्ह में महारत रहे।

21 मई 1932 के बक्सर जिला के निमेज गांव में जन्मल निर्भीक जी के जिनगी के काफी लमहर हिस्सा जमशेदपुर में बीतल। उहाँ का एहिजे टेल्को (अब टाटा मोटर्स) में कार्यरत रहीं। 9 अप्रैल 2011 के दोपहर करीब साढे तीन बजे एहिजे स्थानीय टाटा मोटर्स अस्पताल में उहाँ का अंतिम सांस लेहला के खबर आवते साथ भोजपुरी साहित्य जगत में सन्नाटा छा गइल। वरिष्ठ साहित्यकार गंगा प्रसाद अरुण के शब्दन में - "निर्भीक जी का संगे-संगे भोजपुरी साहित्य के एगो युग के समापन हो गइल। भोजपुरी के शीर्षस्थ साहित्यकारन में शुमार निर्भीक जी के निधन से हमनी का मर्माहत बानी जा।"

अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के महामंत्री गुरुचरण सिंह निर्भीक जी के निधन के भोजपुरी साहित्य खातिर एगो अपूरणीय क्षति बतवलन। "निर्भीक जी के नांव भोजपुरी के शीर्षस्थ साहित्यकारन में लिहल जाला, अउर साहित्य के हर विधा पर उनकर पकड बेजोड रहे। उहाँ के निधन से देश भर के साहित्यकार लोग दुखी बा, अउर परमपिता परमेश्वर से उहाँ के आत्मा के शांति खातिर प्रार्थना कइ रहल बाटे।" निर्भीक जी का निधन से जमशेदपुर भोजपुरी सहित्य परिषद के अध्यक्ष जय बहादुर सिंह भी खासा व्यथित दिखलन - "जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य परिषद अउर हमरा खातिर ई एगो निजी क्षति हवे। निर्भीक जी के निधन से जवन जगह खाली भइल बा, ओकर पूर्ति निकट भविष्य में संभव नइखे लउकत।" 

वइसे त अपना स्वास्थ्य का वजह से निर्भीक जी लिखल कम कइ देले रहनी ह, लेकिन तबो "निर्भीक-संदेश" के भोजपुरी-हिन्दी के एगो बढिया साहित्यिक पत्रिका के तौर पर देखल जाला। उनकर प्रकाशित किताबन में भोजपुरी शब्दानुशासन, सुरतिया ना बिसरे, परिछाहीं, तमाचा, बुरबक बनली, हवा के बात, मेघदूत, शराफत के जुरमाना, खेल तमाशा, "घूमे चली जा" आदि प्रमुख बाटे, जबकि उहाँ के संपादन में "साक्षात्कार: भोजपुरी साहित्यकार", शाहाबादी रचनावली, हरिशंकर वर्मा स्मृति ग्रंथ, "एक से एक" आदि प्रकाशित भइल रहे।

साहित्य शिरोमणि, डॉ. जार्ज ग्रियर्सन सम्मान, भोजपुरी शिरोमणि अउर ना जाने केतना सम्मान अउर अलंकरण से नवाजल निर्भीक जी देश के लगभग सब भोजपुरी साहित्यिक संस्था से जुडल रहनी। भोजपुरिया डॉट कॉम अउर जय भोजपुरी परिवार का ओर से हमनी का निर्भीक जी के श्रद्धांजलि दे तानी जा, अउर अजय जी आ परिवार के बाकी लोगन के भगवान ई दुख सहे के शक्ति प्रदान करस, इहे प्रार्थना कइ रहल बानी। (साभार: भोजपुरिया डॉट कॉम)

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Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on April 12, 2011 at 3:33am

एडमिन जी प्रणाम आ जय भोजपुरी

 

भोजपुरी खातिर भोजपुरिया लोगन खातिर भोजपुरी साहित्य खातिर एगो ना भरपाई होखे वाला क्षति !

उपर वाला से प्रार्थना बा की " निर्भिक " जी के आत्मा शांति देसु आ एह आघात के सहे खातिर घर वाला , पुरा इष्ट मित्र जन , भोजपुरिया समाज के सहे के ताकत ।


निर्भीक जी से हम कबो मिलल नईखी आ सुधीर जी से हम बहुत कुछ सुनले आ जनले बानी , इँहा तक की जवन व्याकरण आनलाईन करे के बात होत रहे उहो निर्भीक जी के लिखल व्याकरण हवे । 

 

आजु निर्भीक जी हमनी के बीच मे नईखी लेकिन उँहा के निर्भिकता भोजपुरी साहित्य आ भोजपुरिया समाज मे तब तक ले रही जब ले सुरज चनरमा रही लो !

 

जय भोजपुरी

Comment by Pankaj Praveen on April 12, 2011 at 8:17am

आदरनीय  निर्भीक जी के कमी कभी पूरा ना हो सकी लेकिन इ त प्रकीर्ति के नियम बा की जे एल बा ओकरा जाही के बा...भोजपुरी के निर्भीक आवाज के सत सत नमन बा और हिरदय के गहराई से श्रधान्जली बा ...

प्रवीण

Comment by sanjay kumar singh on April 12, 2011 at 8:58am
एडमिन जी प्रणाम आ जय भोजपुरी ,
भोजपुरी साहित्य जगत के सृजन में जब जब महान लोगन के योगदान के चर्चा होई त उ निर्भीक जी के बिना अधूरा  रही .कवनो भाषा के आत्मा ओकर व्याकरण होला आ निर्भीक जी भोजपुरी के आत्मा से नेह लगवले बानी . उन्हा के निधन संवसे भोजपुरिया समाज खातिर एगो बड़हन  क्षति बा . दिवंगत आत्मा के शान्ति खातिर भगवान् से प्रार्थना आ  एह भोजपुरिया सपूत के शत शत नमन .
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on April 12, 2011 at 12:41pm
प्रणाम एडमिन जी ,

प्रभु दिवंगत पुण्य आत्मा के शान्ती प्रदान करीं औरु पूरा भोजपुरिया परिवार के एह दुःख के सहे के ताकत दीं !
इ क्षति पूरा भोजपुरीया परिवार के ह ............एक हाली फेरु कोटी कोटी प्रणाम भोजपुरी के एह सपूत के !

जय भोजपुरी जीय भोजपुरी !
Comment by Brij bhushan choubey on April 12, 2011 at 1:23pm
इ समाचार पड़ के बहुत मन बिचलित आ दुखी भइल ''निर्भीक 'जी नियन आदमी जे समाज आ शिक्षा  खातिर कुछ करके के चाह लेके जियत होके ओइसन आदमी जब हरदम खातिर कही दूर चल जाल  ता ओकर भरपाई kail वाकई बहुत कठिन होला , निर्भीक जी हमेशा दूरदर्शी सोच लेके चले वाला आदमी रल्हन "भोजपुरी शब्दानुशासन"शाहित्यिक रचना एकर जियत जागत उदाहरण बा , .......उहाका आज के साहित्यकारन क  एगो दिशा दिखा देले बानी  अगर ओकर अनुसरण क के  केहू चले त बहुत दूर तक जा सकत बा आ सामाजिक शिक्षा के बड़ा सकत बा ........भोजपुरी साहित्य मे अमूल्य योगदान खातिर इहाँ क नाम  हरदम सम्मान  के साथ लियाई....आ वर्त्तमान आ अवेवाली पीडी ईहा के देखावल मार्ग के अनुसरण करी \
भागवान  एह दिवंगत आत्मा के शांति  देसु ...........जय श्री सीता रामA

Comment by Sudhir Kumar on April 12, 2011 at 4:52pm

आजो हमरा याद बा जब पहिला बेर निर्भीक जी से मिले उहाँ के घरे गइल रहनी, आ उहाँ के लैपटॉप पर भोजपुरिया डॉट कॉम देखवनी। कम्प्युटर आ इंटरनेट पर आपन भाषा के देख के उहाँ के खुशी के ठिकाना ना रहे। हमरा के शाबासी देहनी, आ कुछ दिन बाद जब भोजपुरिया डॉट कॉम के देश के सर्वश्रेष्ठ कल्चरल पोर्टल के अवार्ड मिलल रहे, त उहाँ का पीठ थपथपइनी। कुछ दिन बाद एह उपलब्धि खातिर जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य परिषद हमरा के सम्मानित भी कइले रहे, आ परिषद द्वारा प्रकाशित कुल्ह किताबन के ऑनलाइन करे के अनुमति भी देले रहे।

 

ना जाने केतना शाम हम उहाँ का घरे अजय जी (निर्भीक जी के लइका) का संगे बितवले बानी, एकर ठेकाना नइखे। ऐने व्यस्तता का चलते तनी मेल-जोल कम हो गइल रहे, लेकिन तबो उहाँ के चेहरा आजो आँखि के सामने बाटे। भोजपुरी माई के सच्चा सेवक एह युगपुरुष के हमार श्रद्धांजलि...!

Comment by संजीव सिंह on April 13, 2011 at 10:17am
भोजपुरी साहित्य में "निर्भीक" जी के योगदान के अतुलनीय बा. पत्थर प खिचल लकीर के मितावाल्जा सकत बा बाकि "निर्भीक" जी के कमी के पूरा नईखे कईल जा सकत.

हमार सत-सत नमन बा "निर्भीक" जी के
Comment by Ashutosh Ranjan on April 20, 2011 at 11:01pm

एडमिन जी प्रणाम,

भगवान दिवंगत आत्मा के शान्ति देस.  "निर्भीक"   जी के आत्मा के सही श्रधांजलि तभिये दिहल कहाई जब हमनी सभे आ नवहा पीढ़ी उन्हा के देखावल राही पर आगे बढे के प्रयत्न करी.

 

जय भोजपुरी

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