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जमशेदपुर। कई हाली सुन चुकनी ई खबर, लेकिन ना जाने काहे मन ई माने खातिर तैयारे नइखे होत कि निर्भीक जी अब एह दुनिया में नइखी। अभी 2 दिन पहिले ही अजय जी (निर्भीक जी के सुपुत्र) से बात भइल रहे त उहाँ का कहले रहनी कि "बाबुजी के तबियत बहुत खराब बा, आ उहाँ का अस्पताल में बानी।" अउर आज सबेरे-सबेरे वरिष्ठ साहित्यकार गंगा प्रसाद अरुण उनका निधन के खबर देहनी ह।
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on April 12, 2011 at 3:33am एडमिन जी प्रणाम आ जय भोजपुरी
निर्भीक जी से हम कबो मिलल नईखी आ सुधीर जी से हम बहुत कुछ सुनले आ जनले बानी , इँहा तक की जवन व्याकरण आनलाईन करे के बात होत रहे उहो निर्भीक जी के लिखल व्याकरण हवे ।
आजु निर्भीक जी हमनी के बीच मे नईखी लेकिन उँहा के निर्भिकता भोजपुरी साहित्य आ भोजपुरिया समाज मे तब तक ले रही जब ले सुरज चनरमा रही लो !
जय भोजपुरी
Comment by Pankaj Praveen on April 12, 2011 at 8:17am आदरनीय निर्भीक जी के कमी कभी पूरा ना हो सकी लेकिन इ त प्रकीर्ति के नियम बा की जे एल बा ओकरा जाही के बा...भोजपुरी के निर्भीक आवाज के सत सत नमन बा और हिरदय के गहराई से श्रधान्जली बा ...
प्रवीण
Comment by sanjay kumar singh on April 12, 2011 at 8:58am
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on April 12, 2011 at 12:41pm
Comment by Brij bhushan choubey on April 12, 2011 at 1:23pm आजो हमरा याद बा जब पहिला बेर निर्भीक जी से मिले उहाँ के घरे गइल रहनी, आ उहाँ के लैपटॉप पर भोजपुरिया डॉट कॉम देखवनी। कम्प्युटर आ इंटरनेट पर आपन भाषा के देख के उहाँ के खुशी के ठिकाना ना रहे। हमरा के शाबासी देहनी, आ कुछ दिन बाद जब भोजपुरिया डॉट कॉम के देश के सर्वश्रेष्ठ कल्चरल पोर्टल के अवार्ड मिलल रहे, त उहाँ का पीठ थपथपइनी। कुछ दिन बाद एह उपलब्धि खातिर जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य परिषद हमरा के सम्मानित भी कइले रहे, आ परिषद द्वारा प्रकाशित कुल्ह किताबन के ऑनलाइन करे के अनुमति भी देले रहे।
ना जाने केतना शाम हम उहाँ का घरे अजय जी (निर्भीक जी के लइका) का संगे बितवले बानी, एकर ठेकाना नइखे। ऐने व्यस्तता का चलते तनी मेल-जोल कम हो गइल रहे, लेकिन तबो उहाँ के चेहरा आजो आँखि के सामने बाटे। भोजपुरी माई के सच्चा सेवक एह युगपुरुष के हमार श्रद्धांजलि...!
Comment by संजीव सिंह on April 13, 2011 at 10:17am एडमिन जी प्रणाम,
भगवान दिवंगत आत्मा के शान्ति देस. "निर्भीक" जी के आत्मा के सही श्रधांजलि तभिये दिहल कहाई जब हमनी सभे आ नवहा पीढ़ी उन्हा के देखावल राही पर आगे बढे के प्रयत्न करी.
जय भोजपुरी
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