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जैय भोजपुरी आ प्रणाम,

ब्रिज भईया से प्रेरणा ले के हमहु आपन ऐगो आप बीती लिखे के हिम्मत कईनी ह आब रऊआ सब बताईब हम केतना सफ़ल भईली येह मे,

लईकरी के बात हवे तब हम ५-६ साक ले रहल होईम........

आज से २०-२५ सल पहीले जब केतहु  भी.सी.आर आबत रहे त पुरा जवार मे येकर प्रचार होखत रहे
ओह बेर सगरो ईहे चर्चा होखत रहे कि भाई फ़लना जगह सिनेमा आईल बा. आ ई कुलेह प्रोग्राम शाम मे होखत रहे
काहे से की लोग आपना काम-धम निपटाके आरम से आ सके,

हमनीओ के गांव मे भी.सी.आर आबेके रहे ठाकुवारी मे(जहा ठाकुर जी के पुजा होला)

आब हमरा घरे बाबुजी के मलेटरी शासन चलेला केहु के हिम्मत नईखे की बिना आदेश के हील भी जाव....
आ उनकर रुल रहे लईका लोग ईह सब प्रोग्राम मे ना जा सकेला (बरीयतो जाय के मनाही बा)

हमरा ओह समय मालुमे नईखे की ई सिनेमा का होला अब कैसे जाई देखे ................

तब आपना छोटका भाई के पटाबे के सुरु कईनी आ पलान बनल ................

ओह समय बाबुजी भट्टा पर मुंशी के काम करत रहे आ रोज शाम के ७ बजे खना खा के भट्टा पर सुते चल जात रहे

त हमनी के पलान बनल की जब बाबुजी चल जईहे आ सब लोग  सुत जाई तब हमनी के दुनो जना जाईल जाई

गांव मे लोग ८-९ बजेला सुत जाला आ ४-५ जाग जला (शहर मे उल्टा होला)

ओहे भईल हमनी के निकल्ली जा सिनेमा देखे खतिर करेजा त कपते रहे...........

जब मुखिया जे के दुरा तकला पहुचनी ह त देखतानी की बाबुजी साइकिल पर चरल आ रहल बारन....

आब का करी भागतो नईखे बनत ईजोरीया रात मे साफ़ साफ़ लौकत रहनी ह ...........

साइकिल हमनी के पास आ के रुकला पुछलन की कंहा जात बारे रे..................

हम त कुछो न बोलनी छोटका कहल्स सिनेमा देखे...................

बाबुजी कहले चल घरे सिनेम देखावतानी........................

अब कुलहे पलान त हमरे रहे ................................

बाबुजी साइकिल से चल दिहले अ हनी के पिछे-पिछे चले लगनी

करेजा त हेतना जोड़-जोड़ से धरक्त रहे की हुम बता न सकिले.........

छोटका तेजी मे घरे के ओरी भागल जात रहे शायद ओकरा के बुझात रहे की बाबुजी साँचो सिनेमा दिखईहे.........

हुम तनी भारी कदम से...........हमराआ के मालुम रहे का होखे बल बा...........

दुआरी पर पहुचते क्रची (बांस के लकरी जे से दांत साफ़ कईल जला) छोट्का पे बरसे लगल

घर के सब लोग उठ के दौरल की क भईल सुतली रत मे .....................

हम तनी देरी से पहुचली आ ऐक-आध क्रची परल की दादी के पकर के रोय लगनी..........

आब दादी के बारी रहे बाबुजी के ढेर सुनईलस ...................

बेचारा छोटका के ता ............... सऊसे देह बबरा उग गैल रहे.................

तब से आजु ले हम सिनेमा देखे ना गईनी ............ .............

आब दिल्ली मे पी.भी आर सुनेले बकी देखे ना गईनी हा .............


जैय भोजपुरी

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Comment by Ajit Rai on March 30, 2011 at 10:20am
ई त खराब बात बा! पिटैइयो गाईल आ सिनेमा ना मिलल !
Comment by Sudhir Kumar on March 30, 2011 at 10:36am

शशि जी, प्रणाम आ जय भोजपुरी,

बहुत ही खतरनाक निकलल राउर ई संस्मरण... सिनेमा भी ना देखे के मिलल, आ पिटाई भइल, ऊ अलग से। अबकी बेर दिल्ली में जय भोजपुरी परिवार के कवनो कार्यक्रम होई, त रउआ खातिर परदा पर सिनेमा देखे के व्यवस्था कइल जाई...। ;)

Comment by sanjay kumar singh on March 30, 2011 at 10:41am
शशि जी प्रणाम ,

भी सी आर के चक्कर में पिटैला के बाद  पी वी आर में भी जाए से रोआं कांपत बा ....................
बहुत खूब ........शानदार .............

जय भोजपुरी
Comment by शशि कुमार सिंह (SHASHI) on March 30, 2011 at 10:48am

जैय भोजपुरी आ प्रणाम सुधीर जी,

हा हा हा हा हा हा हा.................
रऊआ के बहुत बहुत धन्यवा हमरा सिनेमा देखाबे के व्यवस्था करे के वादा खातिर............

जय भोजपुरी
Comment by sanjay panday on March 30, 2011 at 11:01am

shashi bhaiya parnam |

ka karaba jekara se janamat na banat ,okara ke maralo na avele |

ha ha ha hahahahhaha V.C.R. ke dar P.V.R. ME JAYE SE ROKAT BA |

sahi ba bhaiya lagal rahi |

agala bhag ke johat bani |

jai bhojpuri

sanjay pandey

Comment by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on March 30, 2011 at 12:48pm

हा हा हा हा हा हा हा हा

 

माने बृज भाई के चलते केतना लोगन के राज के बात बहरी आई ( राज माने पिटईला के ) अब बुझा ता हा हा हा हा हा ।

 

कवनो बात ना शशि भाई , पी वी आर मे अबकी सीना चाकर कई के चउडा के जाई फिलिम देखे केहु मारी ना रउवा के हा हा हा हा हा 

 

बहुत खुब , बाकी अईसन पिटापट लगभग सबके भईल होई ई हमरा बुझा ता काहे की हमरो भईल बा हा हा हा हा

 

जय हो जय हो !

 

धन्यवाद वी सी आर से पी वी आर तक घुमावे खातिर !

 

जय भोजपुरी

Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on March 30, 2011 at 1:31pm
शशि भाई प्रणाम ,

बहुत निमन लागल राउर इ रचना लिखल देख के

बहुत सूनर शुरुवात भइल बा .....................

जे पिटाला लैकें मैं एक दिन ओह के फायदा मिल्लेला

एह बात के रउरा के अहसास भी होई !

बहुत सुंदर !

जय भोजपुरी जीय भोजपुरी !
Comment by Brij Kishor Tiwari on March 30, 2011 at 1:43pm

जय भोजपुरी ......... शशि जी

वाह जी वाह ........

हम त कही कि हमही ढेर होशियार रहनी .........

इहा त एक ले एक मामिला बा ..........जय हो 

Comment by Rajnish Kumar Singh on March 30, 2011 at 7:09pm

Jai ho ........

 E t gabe bhail e bhai oh ghari t babujee ke dar rahe t VCR na dekhni

Aab PVR par kaun pabandi ba bhai ...........

 Pranam aur jai bhojpuri............

Comment by शशि कुमार सिंह (SHASHI) on March 30, 2011 at 9:25pm

जैय भोजपुरी आ प्रणाम रंजनीश भाई,

आब त कोनो पाबंन्दी नईखे, बाकी लाईकारी मे बाबुजी पाबंन्दी लगबले
आ अब हम खुदे अपना आप पे पाबंन्दी लगौएले बानी...............
ठुराई करे के कुछ त बजह होला..................हा हा हा हा हा हा हा हा

 

जय भोजपुरी

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