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"असो आईल बसंत ऋतू धीरे से" श्री निवास चतुर्वेदी

 
श्री निवास चतुर्वेदी जी के लिखल दू गो भोजपुरी गीत
     
"असो आईल बसंत ऋतू धीरे से 
एको बेर कोइलियो ना बोलली 
पापी पपिहरा रैनियो ना डोलली 
असो अमवा ना मौउरल  हा पीरे से 
 
एही फूलबगिया का फुलवो ना बोलल 
बेला ना फूलल चमेली ना फुलल
अब मांगीला दुआ फकीरे से 
 
पीपरो -पकडिया  के पाती ना झरल 
अमवा- महुवा के उढ़इयो   ना भरल 
का आई अब नदिया तीरे से 
 
का फ़गुआ का फाग मनाई 
का हम असो चईता  गाई  
असो बितले हा होरी अबीरे से 
असो आईल बसंत ऋतू धीरे से  
**************************************************************
काहे रे कोइलिया
 
काहे रे कोइलिया तू इतना सबेरे ही
कुहुकी उठे ना
सुनि-सुनि मोर मनवा महकी उठे ना 
आवेली बसंत ऋतू ,महुवा कोचाला
अमवा का मथवा पर मउर बन्हाला 
गम -गम गंधवा उडेला चारू ओरिया
गमकी उठे ना
 
चुहि -चुहिया का भोरवा गमकी उठे ना 
चरर मरर   बेले बांस बसवरिया 
मीठ मीठ रस लेले बहेले बयरिया 
राती क जगली आँखी करे बरजोरिया
चहकी उठे ना 
 
मोर बन का चिरैया चहकी उठे ना 
आंछिया के गछिया पर फुलेली तरईया
देखि देखि अँखियाँ में छटके गरिया 
देहिया में बारे जाने कीं अंजोरिया 
लहकी उठे ना 
 
रही रही मोर मनवा बहकी उठे ना
 
श्री निवास चतुर्वेदी
 
.
जय भोजपुरी

Views: 23

Comment by sanjay panday on February 25, 2011 at 5:39pm

didi parna a jai bhojpuri |

bahut sundar rachana |aab ekdam sahi kavita ba aaj kuch pate na chalat

ki kab kavan mausam ail|bahut badhiya

kahe re koylariya

padh ke ta ekdam gaav me pahutch gaini

bahut sundar post ba raur |

bahut bahut dhanyavad |

jai bhojpuri

sanjay pandey

Comment by Manoj Kumar on February 25, 2011 at 6:16pm

सरोज दी,

प्रणाम!

 

श्री निवास चतुर्वेदी जी के बहुत निमन कविता प्रस्तुत कईनी ह रउआ एहूज़ा.

 

बहुत-बहुत धन्यवाद.

 

जय भोजपुरी!

Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on February 25, 2011 at 6:32pm
प्रणाम दीदी ,

अतना सूनर रचना के एहिजा पोस्ट  करेके हार्दिक आभार बा ,

एह रचना के बारे में कुछु कहल सूरज के दीपक देखावे जैसन होई !

बहुत सुन्दरता से भोजपुरी के माला पिरव्ले बानीं  श्री निवास चतुर्वेदी !

कोटि कोटि नमन उंहा के लेखनी  के !

जय भोजपुरी जीय भोजपुरी !
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on February 25, 2011 at 6:34pm

बहिन प्रणाम आ जय भोजपुरी

 

प्रकृति के करीब , परम्परा आ ओह परम्परा से जुडल रिति रिवाज , आ ओह मे अभिव्यक्ति दिहल बहुत बरिआर काम हवे आ बहुत कठिन होला लेकिन जवना सरलता से श्रीनिवास जी फगुआ , बसंत , पतझर , पीपर , पकडी , पपीहरा कोईलर , चमेली आदि के एह रचना मे सजवले बानी उ साफ साफ भोजपुरी के एगो अलगे काव्यशैली के देखा रहल बा ।

 

एक प्रश्न चिन्ह भी खडा करत बा ई रचना, खासकर हई लाईन - 

 

"असो आईल बसंत ऋतू धीरे से 
एको बेर कोइलियो ना बोलली 
पापी पपिहरा रैनियो ना डोलली 
असो अमवा ना मौउरल  हा पीरे से
बहुत बहुत धन्यवाद एह बेजोड रचना से परिचय करावे खातिर !
जय भोजपुरी
Comment by संजीव सिंह on February 25, 2011 at 6:43pm
बडकी बहिना प्रणाम,

श्री निवास चतुर्वेदी जी द्वारा लिखल ई दुनु गीत बहुत सुन्दर बा. अउर ख़ास कर के जवान ढंग से बसंत
ऋतू के बारे में बतावल गईल बा एकदम लाजवाब बावे.

बहुत खुबशुरत रचना.

धन्यबाद एकरा के एजुगा पोस्ट करे खातिर.
Comment by Ashutosh Ranjan on February 25, 2011 at 8:48pm

सरोज दीदी प्रणाम,

श्री निवास चतुर्वेदी जी के लीखल इतना बेहतरीन कविता हमनी संगे बांटे खातीर राउर बहुत बहुत आभार.

 

जय भोजपुरी

Comment by Rajnish Kumar Singh on February 26, 2011 at 9:23am

Didi pranam ,

          Bahut hi sundar rachna se parichay karwani bahut hi achchha rachna ba ........

 Ekdam bhojpuriya prem aur mithash se ot prot ba...........

Comment by Anoop Srivastava on February 28, 2011 at 2:45pm

सरोज जी सादर प्रणाम ... ए अनमाल धरोहर के दर्शन करावे खातिर आभारी बानी सन ।

जय भोजपुरी ।

Comment by Shyam Narain Verma on March 9, 2011 at 4:15pm

Didi pranam ,

          Bahut hi sundar rachna se parichay karwani bahut hi achchha rachna ba .

 Ekdam bhojpuriya prem aur mithash se ot prot ba.

Dhanyabad

 

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