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Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on February 4, 2011 at 11:27pm प्रवीण जी प्रणाम आ जय भोजपुरी
अदभुत आ बहुत बरियार रचना , बहरवान्सु लोगन के इहे सच्चाई बा आ वोह मे हमहु बानी , बहुत नीमन से रउवा एक एक चीझु के देखा देले बानी बता देले बानी ।
सांचो सब कुछ छुटत जात बा आ एक दम से छुट रहल बा , सांचो नया नया लोग मिलत बा लेकिन जेकरा से जनम जन्मांतर के साथ बा ओकरा के छने छन मे लोग भुलाई देत बा ।
बहुत ही जब्बर रचना आ एक दम सांच बात आ रउवा भविष्य भी देखा देले बानी जवना के देख के कम से कम लोग सोचे के मजबुर हो जाई ।
बहुत लाजवाब शानदार आ बेहतरीन रचना !
साधुवाद !
जय भोजपुरी
Comment by Brij Kishor Tiwari on February 5, 2011 at 2:10pm जय भोजपुरी आ प्रणाम जी ........
बेजोड़ रचना..........
एकदम जमीनी सच्चाई ,
आज के बात ,
माटी के बात ,
जवार के बात ,
आपन बात ,
लोगन के बात,
नेह के बात ,
दुलार के बात ,
हर बात के बात ,राउर इ रचना ..............
घर छुटल , दुवार छुटल
माई के दुलार छुटल
लाख हजार के बदला में
जनम से जुडल जवार छुटल...
तब केकरा आंचल में राखब सर
अब ममता के दरबार छुटल
लाख हजार के बदला में
जनम से जुडल जवार छुटल...
वाह.........बहुत सुन्दर ....
Comment by Manoj Kumar on February 5, 2011 at 3:03pm
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on February 5, 2011 at 5:38pm
Comment by PRADEEP PATEL on February 5, 2011 at 6:34pm प्रवीण जी प्रणाम ,
अद्भुत बिया राउर रचना...अद्भुत एहसे काहे की इ रचना पढ़ला के बाद बाहरी निकलल रहनी हाँ तबो दिल आ दीमाग में एह कविता के एक एक लायीं गूंजत रहल हा....
बहुत बहुत धन्यवाद आ साधुवाद बा,
जय भोजपुरी
बहुत बढ़ियाँ प्रवीन जी ..... लाजवाब रचना ... धरातल से जुड़ल एगो अहसास ।
धन्यवाद आ जय भोजपुरी ।
Comment by Pankaj Praveen on February 8, 2011 at 12:32am
Comment by Manish kumar Rai on February 8, 2011 at 1:40am BAHUT HI BADIYA RACHNA BA. HUMRA JAISAN GULF ME RAHE WALA LOG PAR E KAVITA SAHI BAITHA TA. HUMRA BHI AANH BHAR GAIL BA.........................AAPAN U GOAN & BACHPAN YAAD KARKE.
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