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या त ओकर मुह तोड़ दी, या भोजपुरी बोलल छोड़ दी..

आज   जे  गन्दा  गावत  बा
उपर  से  गाल  बजावत  बा
या  त ओकर  मुह  तोड़  दी
या भोजपुरी बोलल छोड़ दी

एह नासमझ के, के दी समझ
केकरा खातिर उ गावत बा
जनता के कान पकल सुन सुन के
झूठे उ देह देखावत बा

फूहड़ता से बा भरल गगरिया
जी करता ओहनी के बोर दी
या  त ओकर  मुह  तोड़  दी
या भोजपुरी बोलल छोड़ दी

सही बात पर करे बखेड़ा
इ कहवा के रित बा भाई
भोजपुरी के अंग अंग बेचेले
कहे ले भोजपुरिया माई

तार तार होत जात चुनरिया
ओकरे फसरी से गला घोट दी
या  त ओकर  मुह  तोड़  दी
या भोजपुरी बोलल छोड़ दी

 

Views: 28

Tags: bhojpuri, bhojpuria, poeam

Comment by Sudhir Kumar on December 21, 2010 at 12:06pm

जीय शेर जीय... एकदम गरदा बा। अब भोजपुरी छोडे के त सवाले नइखे, त दोसर जवन ऑप्शन (ओकनी के मुँह तूडे वाला) बा, ओकर पालन होई, अउर शुरुआत होइये गइल बाटे, देखत जाईं कहाँ ले जाता ई लडाई।

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on December 21, 2010 at 12:09pm

प्रवीण जी प्रणाम आ जय भोजपुरी

 

बहुत ही सुन्दर आ समय कि हिसाब से एक दम लाजवाब रचना , बिल्कुल इहे सोच आ इहे विचार आ इहे तरिका बा ।

 

ना त ओकनी के मुह तुरल जाउ आ अगर दम आ हिम्मत नईखे त जा के केनियो मुह तोपी के बेहाया नियन , मउग नियन बईथ जाईल जाउ ।

 

आगाज करे खातिर धन्यवाद

 

जय भोजपुरी

Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on December 21, 2010 at 12:27pm

पंकज भाई प्रणाम ,

बहुत सुंदर आगाज बा रउरा एह रचना में ,

तार तार होत जात चुनरिया
ओकरे फसरी से गला घोट दी
या  त ओकर  मुह  तोड़  दी
या भोजपुरी बोलल छोड़ दी

एक रुदन अंतरात्मा के इहे हाल एहिजो बा भाई जी , भोजपुरी माई ह ओकरा खातिर

मुहे थुरल  जाई जी ,

जय भोजपुरी जीय भोजपुरी

Comment by भास्कर रंजन "सूर्य" on December 21, 2010 at 1:37pm

जिय जिय हो भोजपुरिया लाल . . .

 

शुरू हो गइल बा क्रांति,

ना जात ना पात, बस भोजपुरी के बात ई,
या त अपनो के एसे जोड लीं,

या भोजपुरी बोलल छोड दीं ।

 

जय भोजपुरी ।

Comment by NOORAIN ANSARI on December 21, 2010 at 2:49pm
 
प्रवीण जी प्रणाम,
बहूत धमाकेदार रचना महाराज..कविता के हर शब्द से क्रांति के बू आवत बा..
अगर हर केहू अईसन सोच के पालन करो  त उ दिन दूर नइखे जब भोजपुरी में
अश्लील गीत गए वाला गायक  लोग के वजूद हमेशा खातिर मिट जाई..
 
अईसन कविता समाज के रुख  मोड़ दी.
स्वस्थ समाज से नाता सबकर जोड़ दी.
अश्लील गायक लोग के सजा खुद-ब-खुद मिल जाई,
जब लोग वो लोग के गीत सुनल छोड़ दी.
 
बहूत-बहूत साधू बाद..
Comment by Pankaj Praveen on December 21, 2010 at 3:27pm

वाह , इहा त क्रांति के महफ़िल जमी गइल..

Comment by sanjay kumar singh on December 21, 2010 at 7:56pm

पंकज जी प्रणाम ,

रचना के एक -एक पंक्ति भोजपुरिया समाज के झकझोरे वाला बा |  राउर रुख आज के समय के शब्द देबे वाला बा | भोजपुरी के आँचल के तार तार होखे से बचावे खातिर एह  कुरुक्षेत्र  में  धर्मयुद्ध  के बिगुल  बजावल  आवश्यक  हो  गइल बा |
जय भोजपुरी

Comment by Brij Kishor Tiwari on December 21, 2010 at 8:32pm

जय भोजपुरी ......प्रवीण जी

वाह.........

एकदम झकास ,समय के अनुकूल ,बेहतरीन रचना .........

एह नासमझ के, के दी समझ
केकरा खातिर उ गावत बा
जनता के कान पकल सुन सुन के
झूठे उ देह देखावत बा

 

बहुते सार्थक लाइन .........

Comment by Vikash Rai on December 21, 2010 at 9:37pm

प्रवीण भाई जय भोजपुरी...........

लाजवाब............

.वाह ....एही तरे जा बढ़ा के..........
   भोजपुरी क नंगा नाच करे जे

   माई बहिन बदनाम करे जे

   आईं सब मिल के

   ओकर गर्दन मरोड़ दीं ..........

Comment by dr hari bansh singh on December 23, 2010 at 11:59am
बहुत सुंदर रचना भोजपुरी मे अश्लीलता के खिलाफ.गन्दा जे गाई,वोकर मुँह सड़ जाई, नरको मे जगह नही पाईअपना मातारी बेटी के कैसे .मुँह देखाईकवना दिन सरम से मर जाई. 

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