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इ जे सिनेमा बा भोजपुरी !!

इ जे सिनेमा बा भोजपुरी
बढ़ी गइल बाटे दिल से दुरी
लोग दुखी बा अश्लीलता से
समझी तनकी इ मजबूरी

फिलिम निर्मात्ता अइसन बाने
निर्देशक, हीरो के संग मिलाके
रंग जमावत बा लोग अइसन
की जनता पानी मांगत बाटे

बाटे हिरोइन के परेशानी
दू चार साल के बाटे जवानी
एह से घर परिवार भुला के
फिलिम में कइले जात नादानी

जनता करे त करे काथी
एने फिलिम बा ओने माटी
लोगवा सोचत बाटे अइसन
सब घर चाची त केकरा पे ताकी

-पंकज प्रवीण

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Tags: Bhojpuri, Jai

Comment by Anoop Srivastava on November 15, 2010 at 3:19pm
वाह प्रवीन जी..... सब घर काकी त केकरा पे ताकी ...... ए गो ज्वलन्त समस्या के सहजता से पेश कइले बानी रउआ .. बहुत बढ़ियाँ .....।
Comment by SURAJ DWIVEDI 'SARAS' on November 15, 2010 at 3:36pm
PRAVEEN JI PRANAM,AA JAI BHOJPURI,E PA HAM ETNE KAHAB .^....BAHUT KHUB....^.
Comment by Ashutosh Ranjan on November 15, 2010 at 7:21pm
प्रवीण जी प्रणाम,

खूब लिखनी..निमन लिखनी ...एगो जवलंत समस्या के बहुत बढ़िया से उठवनी...जरूरत बा एह्कर विरोध के,,,,,बहिष्कार के,,,,सम्पूर्ण बहिष्कार के...

धन्यवाद,
जय भोजपुरी
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on November 15, 2010 at 9:37pm
प्रवीण जी प्रणाम आ जय भोजपुरी

बहुत बरियार लिखनी , बहुत ही जबरदस्त , ई सोच आ इहे दिमाग मे बात बईठ गईल बा आ सवाल बा की काहे आ कब तक ?

बहुत ही नीमन विचार आ सवाल !

माई के अरमान अधुरा बा
जहाँ सोना रहे अब घुरा बा
अब सम्मान लियाई हो
मय पईंचा उधार दियाई हो

बहुत बहुत धन्यवाद एह रचना खातिर ।

जय भोजपुरी
Comment by Mantu Singh on November 16, 2010 at 2:41pm
बहुत खूब पंकज जी बहुत खूब

निर्माता के मज़बूरी और दर्शक के कमजोरी के हमनी के समझत बानी जा पर जवन होता इ अच्छा नइखे होखत... एकरा के त रोके के ही परी

उत्कृष्ट रचना, बहुत बहुत धन्यवाद

jAI BHOJPURI
Comment by Sudhir Kumar on November 17, 2010 at 7:46am
प्रवीण जी, प्रणाम आ जय भोजपुरी,

बहुत ही बढिया लिखले बानी, आ कहल जाव त बहुत ही बढिया मुद्दा पर लिखले बानी। भोजपुरी सिनेमा में व्याप्त अश्लीलता के हटाये के समय आ गइल बा, आ बहुत जल्दिये एह दिशा में कुछ गंभीर कदम उठाये के पडी। एह दिशा में जनता के जागरुक बनाये खातिर राउर ई कविता "मील के पत्थर" साबित होई।

जय भोजपुरी...
Comment by Bimlesh Tiwari Kaushal on November 19, 2010 at 4:45pm
ई जे प्रवीण जी....बहुत बढ़िया लिखनी...बधाई...
Comment by Bishwajit yadav on November 26, 2010 at 8:42pm
keya baat hai pankaj bhaeya.......................
Comment by FAIYAZ AHMAD [RINKU] on November 28, 2010 at 8:14pm
प्रवीण भाई जय भोजपुरी,
ज़ोरदार कविता लिखले बनी रौवा
इ जे सिनेमा बा भोजपुरी
बढ़ी गइल बाटे दिल से दुरी
लोग दुखी बा अश्लीलता से
समझी तनकी इ मजबूरी

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