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कबो कबो कहेलं सन की , अलग कश्मीर बा
हमरा त लागेला की ओहनी के जबर तकदीर बा.
बाटे तकदीर धनी इहा ,मिललबोले के आजादी
पाक में तू जा के बोला,आंखी अंगूरी घुसा दी
घर के इ बात बा त,दिल मजबूर बा
हमरा त लागेला की ओहनी के जबर तकदीर बा.
केतना जवान भइले,सीमा पे शहीद हो
तब जा के जागल, अमन के उम्मीद हो
राष्ट्र द्रोहियन के त बस, खून के होली के फितूर बा
हमरा त लागेला की ओहनी के जबर तकदीर बा.
बेटा मरल रहित अगर सीमा पे जा के
तब न एहसास होई माई अउर ममता के
दूसरा के जान बनल ओहनी के "मीठा खजूर" बा
हमरा त लागेला की ओहनी के जबर तकदीर बा.
Comment by Rajnish Kumar Singh on October 29, 2010 at 7:12am
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on October 29, 2010 at 3:19pm
Comment by Brij Kishor Tiwari on October 30, 2010 at 8:06pm
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on October 31, 2010 at 6:07pm Comment
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