पागल कुकुर बाजार में जइसन
काटत चलत खुरी खुरी बा..
असही मद में चूर लोग ही
बेचत इ भोजपुरी बा
बाटे घमंड ,हम हई प्रचंड
ना संस्कार, ना मापदंड
जहर जात पात के बा भरत
फैलत सब के दिल के दुरी बा
असही मद में चूर लोग ही
बेचत इ भोजपुरी बा
जब उम्मीद के नया दौर भइल
"काला कौवन" के खुबे मौज भइल
कुलही हंस फसा के फसरी में
कइल आपन मुह उजर मजबूरी बा
असही मद में चूर लोग ही
बेचत इ भोजपुरी बा
कुछ त बाड़े बहुते लरबर
बिन खबर बनावे लें खबर
जब भ इ ल बेमारी छपास के
त कुछुवो छापल भी जरुरी बा
असही मद में चूर लोग ही
बेचत इ भोजपुरी बा
-पंकज प्रवीण
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