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जिउतिया (जीवित्पुत्रिका)व्रत

  असो 08/10/2012 के जीउतिया परल बा


दिनांक 08/10/2012 के जिउतीया व्रत बा l जवन कि हरतालिका तीज के ठीक २२ दिन बाद(आश्विन/कुआर कृष्ण, पक्ष अष्टमी ) के एगो और विशेष त्योहार पड़ेला जिउतिया,शुद्ध नाम हवे जीवित्पुत्रिका (जीवित लईकन के माइ के व्रत ) पहिले त जेकर बेटा होत रहे उहे ई व्रत करत रहे पर अब समय के साथ् साथ् सबके सोच भी बदलल बा अब सब सन्तान बेटा हो भा बेटी होखो ,के दिर्घायु और कल्याण बदे ई निर्जला व्रत कईल जाला ..........
.
बरियार के पौधा के पूजा--इ तप-पर्व के दिने बरियार केपौधा चारो तरफ सफाई,लिपाए कर के विशिष्ट दूत के तरह सजावल जाला माई लोग अक्षत रोली से ' अँकवार'देवेनी,और जैगो संतान होई तै गो सोन भा चाँदी के अर्धचन्द्राकार (लाकेट|) जिउतिया कि लाल रंग के धागा में गूथ के बनावल जाला फेर बरियार के पौधा में चढ़ा के संतान के पहिरावल जाला जेसे के संतान बरियार के जड़ के सामान मजबूत बने (बरियार के जड़ बहुत मजबूत होला )और माता लोग श्री रामजी के सन्देश देत ई गीत गवेला लोग "ऐ अरियार ए बरियार जा के राजा रामचन्द्र से कहि दीह (बेटा, बेटी का नाम)के माई जिउतिया भूखल बाली"।



फल-पकवान-जिउतीया मे भी कई तरह के फल और पकवान चढ़ेला जेमे .ठेकुआ,टिकरी पुआ पूरी
,सत्पुतिया के सब्जी ,नोनी के साग,कढी बरी ,बजका,खास बनेला ...जिउतीया के भोर मे सत्पुतिया के तरकारी और ठेकुआ बहरे "चिल्हो सियारो"के खाए खातिर रखल जाला ....

व्रत कथा --एह व्रत मे एगो चिल्हो सियारो के प्रचलित कथा सुनल जाला जवन ए तरह से बा ..
एगो बन मे सेमर के गाछ पर एगो चिल्हो (चील)राहत रहनी और ओकारे पास झाडी मे एगो सियारिन रहत रहे ..दुनु मे खुब पटत रहे ..चिल्हो जवन कुछ खाए के लेआवे ओमे से सियारिन के भी हिस्सा देवे और सियारिन भी चिल्हो के खुब खयाल राखत रहे ए तरह दुनु के जीवन निक से कटत रहे ,
एक् बार बन के पास गांव मे मेहरारू लोग जिउतीया के पूजा के तैयारी करत रहे लोग उ सब चिल्हो बडा ध्यान से देख्ली और उनका अपना पिछला जनम के कुल इयाद पड गईल तब सियारो और चिल्हो दुनु जाना जिउतिया भुखे के विचार कईलस लोग ,बडा निष्ठा और लगन से दुनु जाना दिनभर भुखे पियासे मंगल कामना करत भूखल रहे लोग .मगर रात होते सियारिन के भूख पियास लागे लागल और जब बर्दास्त ना भईल त जंगल मे जाके मांस और हड्डी खाए लागल चिल्हो के हड्डी खाय के कड कड आवाज आवे लागल तू उ पुछ्ली की "बहिन "तू का करतारू त सियारिन कहलि की बहिन भूख के मारे पेट कड़कडा रहल बा.. मगर चिल्हो के पता लाग गईल तब सियारिन के खुब लताडली की जब तोसे ब्रत ना निबाहे के रहल त पहिलाही कह देतू..सियारीन लजा गईली .चिल्हो रात भर भुखे पियासे ब्रत पूरा कईली ..
एकर परिणाम ई भईल की चील्हो के कुल सन्तान दीर्घायु सुखी और सम्पान भईलन और सियारिन के एक् एक् कर के कुल संतान खतम हो गईल .......
एसे कुल माइ लोग ईहे कामना करेला की सब चील्हो के तरह होखो सियारिन के जैसन ना ....
ई पर्व के व्रतविश्वास से जब पुत्र के प्राप्ति होला त लोककथा में दिहल गईल संकेत के अनुसार ओकर नाव "जीउत"रखाला
पुराण में जीवत्पुत्रिका व्रत की कथा के साथ जो जीमूत वाहन की कथा के भी जिक्र होला वह क पौराणिक जीमूतवाहन नाग कुल के रक्षा खातिर आपन देह के त्याग कईले रहलन ,

कैलाश पर्वत पर भगवान शंकर माता पार्वती के कथा सुनावत कहेलन कि आश्विन कृष्ण अष्टमी के दिन उपवास रख के जे माता सायं प्रदोषकालमें जीमूतवाहन के पूजा करेनी और कथा सुने के बाद आचार्य के दक्षिणा देनी ऊ पुत्र-पौत्र के पूर्ण सुख प्राप्त करेनी व्रत के पारण दोसरका दिने अष्टमी तिथि के समाप्ति के पश्चात कईल जाला ई व्रत अपने नाम के अनुरूप फल देवे वाला व्रत हवे ...... भगवान सबके मंगल कामना पूर्ण करस ...


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Comment by Mantu Singh on September 24, 2010 at 4:36pm
जय हो
माई के त देखले रहिन जा इ पर्व करत पर इ बात के बारे में एतना बिस्तर पूर्वक ना पता रहे,

बहुत बहुत धन्यवाद दीदी एतना बिस्तर पूर्वक बतावे खातिर

और हाँ दीदी इ बरियार के पौधा के कुछ और नाम होला का? हम नईखी सुनले इ पौधा के नाम या कुछ और भी कहल जाला?

jAI BHOJPURI
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on September 24, 2010 at 5:07pm
बहिन प्रणाम आ जय भोजपुरी

बहुत ही बरियार जानकारी आ बरियार के पौधा के त हम भुलाईये गईल रहनी हा , अभी खा माई से पुछनी हा त बतवलस हा ।

आ बाकी बिधि जवन बतवनी उ आंखी देखले रहल हा आदमी लेकिन एतना बिधिवत तरिका से ना जानत रहल हा , बहुत बहुत धन्यवाद बा रउवा के बहुत बहुत धन्यवाद ।

आ पुरा विश्व के जीउतिया के एह पावन पर्व के बधाई बा ।

जय भोजपुरी
Comment by suman pathak on September 24, 2010 at 5:38pm
saroj di bahut bahut dhanywaad jiutia ke bare me itna sunder se detail me batawe khatir..

raua ke jiutia ke bahut bahut badhai ho..
Comment by Sudhir Kumar on September 24, 2010 at 5:51pm
सरोज जी, एह महापर्व के बारे में जानकारी देवे खातिर धन्यवाद...
घर में जिउतिया होत देखले रहनी ह, अब ओकरा बारे में सब कुछ पता भी चल गइल।
Comment by Brij Kishor Tiwari on September 24, 2010 at 5:54pm
सरोज बहिन जय भोजपुरी आ प्रणाम
बहुत नीमन तरीका से बतवली जिउतीया के बारे में ...........
बहुत नीमन ...........
खाली तनी तारीखवा सुधार दी (edit)क दी ...........बस
Comment by SURAJ DWIVEDI 'SARAS' on September 24, 2010 at 5:56pm
दीदी प्रणाम आ जय भोजपुरी।
बहुत नीक से रउरा जिउतिया के विवरण देले बानीँ।जेकरा एकरी बारे मे कुछु पता ना होखे उ सबकुछ जानि सकेला ई पढ़ि के।
बहुत बहुत धन्यवाद दीदी।
Comment by mrs. saroj on September 24, 2010 at 7:10pm
birj bhaiya bahut bahut dhayawad batawe khatir sahi me tareekh ta ekdame galat likhail rahe ,,,,,;-)ehi se kahala ki bad bujurg se salah le lewe ke chahi ....ha ha ha
jai bhojpuri
Comment by Brij Kishor Tiwari on September 24, 2010 at 7:15pm
हा हा हा हा हा हा हा हा .........
लबर लबर करे वाला भाई के, बहिन से तनी उलट पुलट होखे के पूरा संभावना रहेला ........
बस इहे नु की .......१० के ०१ लिखा गईल .........
हा हा हा.......
Comment by Ashutosh Ranjan on September 24, 2010 at 9:09pm
सरोज जी प्रणाम,
बहुत बरियार जानकारी देहनी...आ बरियार के पौधा त हमरा मालुम नईखे...बाकिर पूरा विधिवत जानकारी देवे खातिर धन्यवाद.

जय भोजपुरी
Comment by sanjay panday on September 25, 2010 at 11:14am
didi parnam a jai bhojpuri |
bahut badhiya jankari dehalu raua | halanki ham janat jarur rahani
lekin etana badhiya se na |
mai jiutiya sab par apan kripa banavale rakhas |
jai bhojpuri
sanjay pandey

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