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चंचल
चंचल हमार भतीजी हयी जे अभी एक साल आ ४ महिना के बाडी,,,,,,, ओह्के मासूम आ उज्जवल चेहरा देखला के बाद जवन सुख मिलेला उ हम बता नयिखी सकत..... इ कविता हमार चंचल खातीर.......
चंचल हा ओकर नाम, गोर रंग मासूम चेहरा, जेकर पहचान
पूरा घर के दुलरूवी जेकरा रोवे से निकले जान
चंचल ह ओकर नाम
फाल्गुन के महिना के ठंडा साफ़ आ नीला रहे आसमान
जब पहिला बार कल्पना कैनी का होई ओह्कर नाम
पूरा घर के आशा जागल पांच भाई में एगो बहिन के
कई के किनारा रूढीवादी बिचार के गवाइल मंगल गान
चंचल ह ओकर नाम
रात में जईसे सूरज चमकल भागल घोर अन्हार
दौडल घर में खुसी के लहर जैसे होखो कौनो त्यौहार
आईल जग में बंद आँख से कूल्ह चीज से अनजान
नारी के जीवन पूरा कईके भरलस मूरत में जान
चंचल ह ओकर नाम
देखत देखत लागल दिन बीते कब गोदी से बैठे सीखलस
समय के नाव में बैठ के जाने कब चले सीखलस
घर आँगन में किलकारी से बनल नया मधुगान
अब चेहरा पर मन के भावे वाला मोहक बा मुस्कान
चंचल ह ओकर नाम
बाबा के हयी तृप्ति उ, मैया के हयी बुचकुन
पापा के हई राजकुमारी, माई के गुडिया बाबु
भांति भांति के नाम नया नित, इहे ह पहचान
चाचा के चंचल बनके घुमे सबेर और साम
चंचल ह ओकर नाम
अब ता ओकर आदत हो गईल, सुबह सांझ के दर्पण हो गईल
खूब शरारत कईला पर भी हंस के टाले के आदत हो गईल
चेहरा देखले दिन बन जाई ऐसन मोह अनजान
भगवान् करस की ओकरा मिले सुख, आनंद तमाम
चंचल ह जेकर नाम ..... चंचल ह जेकर नाम

Views: 5

Comment by s. chauhan on September 6, 2010 at 5:10pm
हरेन्द्र जी प्रणाम आ जय भोजपुरी

हमार भगवान् से एहे दुआ बा की चंचल के ज़िन्दगी क हर ख़ुशी मिले आ सफलता उनकर कदम चूमे | अगर रऊआ इ रचना की साथ चंचल क फोटो भी दे देले रहतीं त और भी बढ़िया रहल रहित |


जय भोजपुरी
Comment by Brij Kishor Tiwari on September 6, 2010 at 6:13pm
जय भोजपुरी .........
अरे जिया हो .........हरेंदर बाबु
बहुत बढ़िया तरीका से लेखनी में ढालल गईल बा ......
धन भाग चंचल के कि ऐसन चाचा के भतीजी हई........
हमार बहुत आशीर्वाद बा उनका के ........
Comment by Harender K. Mishra on September 6, 2010 at 8:23pm
प्रणाम चौहान जी, चंचल के फोटो हम एहीजा लगा दे तानी .... धन्यवाद ब्रिज भाई जी

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on September 6, 2010 at 8:28pm
हरेन्दर भाई प्रणाम आ जय भोजपुरी

बहुते नीमन आ एक दम चंचल नियन गीत लिखनी । ई झेले वाली कविता ना हवे एह कविता मे दुलार बा प्यार बा पुचकार बा नेह छोह बा आ इहे कहाले कविता ।

वईसे त अभिवय्क्ति जईसे आ जाउ उ हमेशा बेजोड रहेले लेकिन जब ओकर संकलन पद्य मे हो जाला त दिल गुनगुना देला ।

कुछ ओइसने लागल ई राउर गीत के पढ के !

बधाई बा रउवा के आ चंचल के बहुत बहुत आशिर्वाद बा ।

धन्यवाद आ जय भोजपुरी
Comment by Mantu Singh on September 7, 2010 at 12:25pm
अब ता ओकर आदत हो गईल, सुबह सांझ के दर्पण हो गईल
खूब शरारत कईला पर भी हंस के टाले के आदत हो गईल
चेहरा देखले दिन बन जाई ऐसन मोह अनजान
भगवान् करस की ओकरा मिले सुख, आनंद तमाम

बहुत सुन्दर रचना हरेंदर भाई दिल खुश हो गईल एक-एक पंक्ति में जान बा... कमाल के रचना बा...
वैसे भी बच्चा के गलती पे गुस्सा कहाँ जी वोक्नी के त हर एक शरारत मन के मोह लेला..

चंचल के भगवान हर ख़ुशी देस, बहुत बहुत आशीर्वाद
jAI BHOJPURI
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on September 7, 2010 at 3:37pm
हरेंदर जी जय भोजपुरी ,

बहुत सुंदर
Comment by Ashutosh Ranjan on September 7, 2010 at 8:29pm
हरेंदर जी प्रणाम,

बहुत सुंदर रचना.....चंचल बबुनी के ढेर सारा आशिव्राद आ प्यार बा......

जय भोजपुरी
Comment by FAIYAZ AHMAD [RINKU] on September 7, 2010 at 10:10pm
हरेंदर भाई जय भोजपुरी,
बहुत सुंदर रचना..........
आ चंचल बबुनी के ढेर सारा प्यार |
Comment by Sudhir Kumar on September 8, 2010 at 1:38am
हरेन्द्र भाई, प्रणाम आ जय भोजपुरी, चंचल के प्रति राउर दुलार एह कविता में साफ लउक रहल बाटे। रउआ के साधुवाद आ बिटिया के आशीर्वाद बा।

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