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सपना
यु त मन के भावे वाला हर एगो चीज ह सपना
लेकिन ओकरा के पावल भि ह एगो सपना
आन्खि खोलके दुनिआ देखल, बन्द आन्खि से पावल
दुनिआ हो जाओ बस मे हमरा, सभे इहे चाहल
राह चले मे कष्ट बहुत बा, एह सभ से अन्जान
एक सान्स मे धरती नापब, लेहनि मन मे ठान
लाख रुकावट रहता रोकस, जाये के बा अब पार
जीत लेब इ दुनिआ एक दिन, बा बिस्वास अपार
जान तानी जिनगी के खेल मे सभ ना होला कामयाब
दान्व पे बाटे अब त कुल्ही, अब चाहे होखी बर्बाद
सुनले बानी कि किस्मत हरदम देबे सभ के धोखा
मान्गे वालन के कबो न देहलस ई जीते के मौका
पावे के चाहत मे जाने, कतने लोग के जीवन बीतल
आजुओ ओही मोड पे बाडे, जहा से चले सुरु कयीलन
तब काहे हम आपन जिनगी, एह किस्मत पे छोडी
हिम्मत, मन जुटा के काहे ना, हाथ के रेखा मोडी
लिखे के बा इतिहास नाया, रचे के बा आपन काया
अन्त मे सभे इहे पुछी, का पयनी आ का बा खोया
जीवन के बा एकही सपना, आपन नाम जग के जनावल
बन्द आन्खी से सपना देखल, आन्ख खोल के पावल
बन्द आन्खी से सपना देखल, आन्ख खोल के पावल
हरेंदर कु. मिश्र
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on July 18, 2010 at 3:04am
Comment by शशि कुमार सिंह (SHASHI) on July 18, 2010 at 3:31am
Comment by Brij Kishor Tiwari on July 19, 2010 at 7:43am Comment
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