JaiBhojpuri.com

Come, let's do something for Bhojpuri...

बाबू लोहा सिंह - एक याद!!

(इस्तुती पांडे के अनुरोध पर; यादों के गलियारे से, एक मील का पत्थर)
आकासबानी पटना से एगो प्रोग्राम होता था “चौपाल”. ई देहाती प्रोग्राम था. इसमें एगो मुखिया जी थे, जो हिंदी में बात करते थे, उनके अलावा बुद्धन भाई भोजपुरी में, बटुक भाई मैथिली में और गौरी बहिन मगही में. फॉर्मेट अईसा था कि बिहार का सारा भासा उसमें आ जाए. इसी में सुकरवार को बच्चा लोग का प्रोग्राम होता था हिंदी में “घरौंदा”. लेकिन चौपाल कार्यक्रम का सबसे बड़का आकर्सन था भोजपुरी धारावाहिक नाटक “लोहा सिंह”. ई नाटक बिबिध भारती के हवा महल में होने वाला धारावहिक “मुंशी एतवारी लाल” के जईसा था. लोहा सिंह, एक रिटायर फौज के हवलदार थे, जिनके पास फौज का सारा कहानी काबुलका मोर्चा पर उनका पोस्टिंग के दौरान हुआ था.

लोहा सिंह के परिवार में, उनके साथ लगे रहते थे एगो पंडित जी, जिनको लोहा बाबू फाटक बाबा कहते थे, नाम त उनका पाठक बाबा रहा होगा. उनकी पत्नी जिनका असली नाम कोई नहींजानता था, काहे कि लोहा बाबू उनको खदेरन का मदर कहकर बुलाते थे. इससे एतना त अंदाजा लगिए गया होगा आप लोग को कि उनका बेटा का नाम खदेरन था. खदेरन के मदर के साथ उनकी सहेली अऊर घर का काम करने वाली एगो औरत थी भगजोगनी. एगो करेक्टर त भुलाइये गए, लोहा सिंह का साला बुलाकी. घर में सब लोग भोजपुरी भासा में बतियाता था, लेकिन लोहा सिंह हिंदी में बात करते थे. ई पोस्ट हम जऊन हिंदी में लिखते हैं,बस एही भासा था बाबूलोहा सिंह का. ई धारावहिक का सबसे बड़ा खूबी एही था कि ई समाज में प्यार, भाईचारा अऊर मेलजोल का संदेस देता था. हर एपिसोड, गाँव में कोनो न कोनो समस्या लेकर सुरू होता था, अऊर अंत में लोहा सिंह जी के अकलमंदी से सब समस्या हल, दोसी पकड़ा जाता.
ई सीरियल का सबसे बड़ा खासियत था उनका बोली. एही बोली से बिहार का सब्द्कोस में केतना नया सब्द आया. फाटक बाबा, मेमिन माने अंगरेज मेम, बेलमुंड यानि मुंडा हुआ माथा, बिल्डिंग माने खून बहना ( ऐसा फैट मारे हम उसको कि नाक से बिल्डिंग होखने लगा), घिरनई माने घिरनी ... अऊर बहुत कुछ. हर नाटक का अन्त उनका ई डायलाग से होता था, देखिए फाटक बाबा, फलनवा का बेटी को अच्छा बर भी दिला दिए, ऊ दहेज का लालची को जेल भेजवा दिए, अऊर गाँव का बेटी को सब घर परिवार का सराप (श्राप) से मुक्ति दिला दिए. इसपर फाटक बाबा कहते कि को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो. अऊर नाटक खतम.

उनका एगो सम्बाद आजो हमरे दिमाग में ताजा है, जइसे कल्हे सुने हैं:
“जानते हैं फाटक बाबा! एक हाली काबुल का मोर्चा पर, हमरा पास एगो बाबर्ची सिकायत लेकर आया.
उसका पट्टीदारी में कोई मू गया था इसलिए ऊ माथा मूड़ाए हुए था. हमको बोला –
बाबू लोहा सिंह, बताइए त, आपका होते हुए कर्नैल हमरा माथा पर रोज तबला
बजाता रहता है. हम बोले कि हम बतियाएंगे. हम जाकर करनैल को बोले कि उसका घर
में मौत हो गया है, अऊर आप उसका बेलमुंड पर घिरनई जईसा तबला ठोंकते हैं. ई
ठीक बात नहीं है. करनैल बोला कि ठीक है, हम नहीं करेंगे. जानते हैं फाटक
बाबा, जब ई बात हम ऊ बाबर्ची को बताए त का बोला. ऊ बोला कि ठीक है बाबूसाहब
ऊ तबला नहीं बजाएगा त हम भी उसका मेमिन का नहाने का बाद जो टब में पानी बच
जाता है, उससे चाह बनाकर नहीं पिलाएंगे उसको.”

ई नाटक के लेखक अऊर लोहा सिंह थे श्री रामेश्वर सिंह कश्यप, अऊर खदेरन को मदर थीं श्रीमती शांति देवी. कश्यप जी
पहले पटना के बी.एन. कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर थे, बाद में जैन कॉलेज आरा के प्रिंसिपल बने. लम्बे चौड़े आदमी, नाटक में कडक आवाज, लेकिन असल जिन्नगी में बहुत मोलायम बात करने वाले. एक दिन पुष्पा दी के ऑफिस में आए और बैठ गए. हम बगले में बैठे थे. पुष्पा दी पूछीं, “चाह (चाय) पीजिएगा, मंगवाऊं?” कश्यप जी बोले, “आपकी चाह छोड़कर और कुछ नहीं चाहिए.” आज दोनों हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ई लोग अपने आप में इस्कूल थे. कोई ट्रेनिंग नहीं, लेकिन अदाकारी देखकर कोई बताइए नहीं सकता है कि केतना गहराई है. बहुत कुछ सीखे हैं इन लोगों से, तब्बे एतना तफसील से चार दसक बाद भी लिख पा रहे हैं. अईसा लोग मरते नहीं हैं. ईश्वर उनके आत्मा को शांति दे!!

एगो बात त छूटिये गया:
खदेरन का मदर का तकिया कलाम था "मार बढ़नी रे" और फाटक बाबा का था "जे बा से बीच के बगल में".

-सलिल वर्मा

Views: 19

Tags: कश्यप, रामेश्वर, लोहा, सिंह

Comment by Sudhir Kumar on June 24, 2010 at 12:25pm
टीम एडमिन जी, लोहा सिंह के बारे में बहुत ज्यादा त हम ना जानेनी, लेकिन 4-5 साल पहिले सिंगापूर से केहू हमरा के ई नाटक भेजे के अनुरोध कइले रहे. लोहा सिंह के रचनाकार बाबु रामेश्वर सिंह कश्यप जी के घर हम तब देखले रहनी, जब 2006 में अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के दौरान सासाराम जाये के मौका मिलल रहे. साहित्यकारन के उनुकर एतना असर रहे कि उनका मृत्यु के कई साल बाद आयोजित हो रहल एह सम्मेलन के मुख्य हॉल प्रांगण के नांव "रामेश्वर सिंह कश्यप नगर" राखल गइल रहे. एकरा अलावा अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन बकायदा अपना हर अधिवेशन में एगो साहित्यकार के "रामेश्वर सिंह कश्यप सम्मान" देके सम्मानिक करेला. वइसे उनुकर नाटक के असर के व्यापकता के अंदाज एही से लगावल जा सकेला कि पूरा सासाराम में रामेश्वर जी लोहा सिंह (अपना काल्पनिक पात्र) के नांव से ही प्रासिद्ध बानी, आ बहुत कम लोग उनुकर असली नांव जानेला. भोजपुरी माई के अइसन सेवक, आ महान रचनाकार पर हमनी के गर्व बा...
Comment by Ashutosh Ranjan on June 24, 2010 at 2:36pm
आडमिन जी प्रणाम,

धन्याबाद एकबार फेनु से लोहा सिंग जी के ईयाद दिलावला खातिर. हमरा त काबो ई नाटक सूने के मौका ना लागाल बाकिर बाबूजी से सुंले रहीं. गर्व बा की हमणि के माटी में इन्हा के पैदा भानी आ आपण माटी के खुश्बू के फैलावानी.

धन्याबाद

जय भोजपुरी
Comment by Anoop Srivastava on June 24, 2010 at 3:42pm
एडमिन जी प्रणाम !
लोहा सिह नामक पात्र आ उनकरे अंदाज के बारे में, हम पहिले भी कइ लोग से सुन भइल बानी बाकी दुर्भाग्य से नाटक देखला-सुनला भा पढ़ला के मौका ना मिलल, आजु एइजा थोड़े-बहुत पा के नीक लागल, उम्मीद बा कि आगहुँ मिली ।
धन्यवाद आ जय भोजपुरी ।
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on June 24, 2010 at 5:13pm
टी ए बाबु प्रणाम आ जय भोजपुरी

लोहा सिंह , सिर्फ नाव काफी बा , काहे की ई नाम एतना मशहुर बा ( आज भी जब अपना ओर रेडियो पे कार्यक्रम के बारे मे बात होला) की आज भी पुरनिया लोग लोहा सिंह के नाव आ एह नाटक के नाव बहुत जोश आ खुशी से लेला ।

बहुत बहुत धन्यवाद एह ब्लाग खातिर आ एह जानकारी खातिर , काहे की हम बस लोहा सिंह के नाव जानत रहनी हा लेकिन एतना विस्तार से कबो पढले ना रहनी हा ।

धन्यवाद आ जय भोजपुरी
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on June 24, 2010 at 9:00pm
टीम एडमिन जी प्रणाम,


पाहिले त रउरा के हार्दिक धन्यवाद एहिजा ब्लॉग में एह लेख के भेजला के ,

गाँव में कतना हाली अबो लोग कह्देल हाँ तू ही ना हव लोहा सिंह ,(इनकरा बारे में माई से सुनले रहनी )

एगो ग्रेट करेक्टर के रौआ अपना रचना में हर इमोसन के भर देले बानी,

एकबार फेर धन्यवाद्

जय हो
Comment by संजीव सिंह on June 24, 2010 at 10:22pm
Team Admin जी प्रणाम
बहुत ही बढ़िया जानकारी देहनी रौउआ. लोहा सिंग के कैरेक्टर साचो में खुबे बढ़िया बा. अगर हमार मेमोरी सही बा त आज भी "चौपाल" आकशवाणी पटना से साम के 6 बज के 45 मिनट पर प्रसारित होला. और एक से बढ़ के एक अच्छा अच्छा जानकारी से रूबरू करावेला. एकरा खानी त न बाकिर एकरे लेखा एगो प्रोग्राम रात के करब 9 साधे 9 बजे आकशवाणी भागलपुर से प्रसारित होला जेकर नाम "ढाबा" हवे. ओहुमे हमनी के बेहतरीन जानकारी मिलेला.

बहुत बहुत धन्यबाद एकरा खातिर.

जय भोजपुरी
Comment by शशि कुमार सिंह (SHASHI) on June 25, 2010 at 1:58am
जैय भोजपुरी टीम ऎडमीन जी
आकासबानी पटना से प्रोग्राम “चौपाल”. अभीयो आवता शाम के ६.३० मीनट से ७.३० मीनट ले
नाम मे तनी सा परिव्र्तन भैल बा नाम हवे “ खेतीगिरह्स्ती आ चौपाल ”
पात्रन के नाम भी लग्भग पहिलके बा, प्रोग्राम के फॉर्मेट भी पहिले के नीयन बटे

लोहा सिह भोजपुरी आ आकासबानी पे प्रसारित माहन्त्म नटक हबे
बहुत बहुत ध्न्यवद रऊवा के येह अतुल्य नाट्क से जैय भोजपुरी के सभी स्द्स्य
लोग के अवगत करवे खतिर,

जब हम गाव मे रहत रही (२००६ताक) त आकासबानी पटना पे हमेश लोहा सिह
नाट्क के फ़ेरु सुरु करे के फ़र्माईश आवत रहे, मलुम ना दुबरा सुरु भैईल कि ना
बहुत बहुत ध्न्यवाद
जैय भोजपुरी
Comment by Ravi Pratap Shahi on June 25, 2010 at 11:26am
हमन के पुरनका याद दियावे खातिर ,
बहुत धन्यबाद,

हमन के समय में मनोरंजन के साधन अबे नया नया पंचायत में रेडियो आईल रहे......घरे आईल त हमन के अचम्भा से देखनी जा...वू वाला रेडिओ आज कल के त शायदे केहू देखले होखे....एगो बैटरी रहे आ रेडियो के साथे बड़का चोंगा ...जौन लाउड स्पीकर के साथे आज कल गावें में बाजेला ..आ वो रेडियो में खाली लखनवु, पटना आ गोरखपुर के सेट्टिंग रहे ...
सांझी के सब लोग गर्मी में हथ पंखा लेके आ जiड़ा में कौड़ा के लागे चोंग्वा राख के सुने..६०-६२ . .........फेर त जौन प्रगति भईल...देखते , देखते आ रेडियो,ट्रांसिस्टर ..आ सब प्रोग्राम में गाँव के लोग लोहा सिंह वाला ख़ास क के सुने...एगो समय रहे कि हमन के तरफ सब लोग लोहा सिंह के नक़ल क के बोले.....
Comment by FAIYAZ AHMAD [RINKU] on June 26, 2010 at 10:44pm
एडमिन जी जय भोजपुरी,
"लोहा सिंह" के इतना विस्तार से जानकारी देबे खातिर बहुत बहुत धन्यवाद|

Comment

You need to be a member of JaiBhojpuri.com to add comments!

Join JaiBhojpuri.com

© 2013   Created by Admin.

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service