भटिंडा। पंजाब में मजदूरन के कमी के हालत इ हो गइल बा कि रेलवे स्टेशन से
ही मजदूरन के अपना संगे ले जाये खातिर मारा मारी हो जाता। एह घरी बिहार
यूपी से आवे वाला मजदूरन के पंजाब में बीसों अंगूरी घिव में आ मुड़ी पूरा
कढ़ाई में बा। काहें की धान के बोवनी शुरु हो गइल बाटे अउर मजदूरन के भारी
कमी के कारण पूरा पंजाब में असही हाय-तौबा मचल बाटे। एहिजा स्थानीय किसान
लोगन के माथे पे एह समय बुवाई के चिंता के लकीर साफ लउक रहल बाटे।
आज कल पंजाब के भठिंडा, संगरूर आ अइसने कई गो स्टेशन पे किसानन के
बिहार से आवे वाला ट्रेन के इन्तजार अइसन रहत बा जइसे कि उनकर आपन कवनो
रिश्तेदार आवे वाला होखे। आ ओह लोगन का संगे रहता मजदूरन के देवे जाये वाला
सुविधा के वादा वाला बड़हन- बड़हन पोस्टर। मजदूरन से बात भइला के बाद
मोबाइल, मुफ्त बिजली का संगे-संगे मनोरंजन खातिर केबल टीवी के भी सुविधा
दिहल जात बा। मजदूरन के मजदूरी त डबल होइए गइल बा, ओकरा संगे-संगे खाना,
पहनना अउर रहना सब कुछ मुफ्त मिल रहल बाटे। एतने ना, मजदूरन के अउर दुसर
किसानन से मिले भी नइखे दियात काहें कि मजदूरी बढ़वला के लालच दे के मजदूरन
के बहकवला के भी डर बा।
पंजाब में जमीन के घटत जल स्तर के कारण
सरकार 10 जून से धान के बोवाई के समय मुकर्रर कइले बाटे, अउर मशीन से बोवाई
करवला पर धान के खेती के लागत बढ़ जात बा, ओकरा वजह से मजदूरन के मांग
अचानक से बढ़ गइल बाटे। दोसरा ओर, बिहार समेत कई गो राज्यन में मनरेगा अउर
लघु उद्योगं के विकास के चलते मजदूरन में स्वाबलंबन भा स्वरोजगार के प्रति
रुझान बढल बाटे, आ राज्य छोड के जाये वालन के संख्या में भारी कमी आइल बा।
जेकरा परिणाम-स्वरूप पंजाब में खेतिहर मजदूरन के संख्या में भारी कमी भइल
बा, जवन कि माँग में बढोतरी के मुख्य कारण हवे। .
खैर, मजदूरन के
कमी के कारण खेती के हाल चाहे जवन होखे लेकिन अगर बिहार के प्रगति के राह
कुछ दिन अउर अइसहीं रह गइल त पूरा देश में बोझ समझे जाये वाला मेहनती
बिहारी मजदूरन के प्रति लोगन के नजरिया बदले में देरी ना लगी।
bhojpuria.com se sabhar
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