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Anoop Srivastava

भारत माता - ( माई हमार )

समस्त भोजपुरियन के हमार सादर प्रणाम !
आज के हमार ई रचना, मुख्य रूप से नवीन भाई जी के प्रेरणा से प्रस्तुत बा । एके "एगो बाँहि कटल . . . " के बाद क्रम में जोड़ल जा सकेला ।
शीर्षक - भारत माता - ( माई हमार )
केहू मस्त , केहू त्रस्त , बाटे , केहू बीमार ,
कहीं तंगी के टीस , कहीं , मंदी के, मार ,
सभे बा, व्यस्त , केहू , सुने ना, गुहार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
काश्मीर होखे , चाहे , कन्याकुमारी ,
उहे मार - काट , उहे, कालाबाजारी ,
माँग सून, गोद सून, अपंग - लाचार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
अंग - भंग भइल, धर्म - भाषा के नाव पर,
नून छिड़क आवें नेता , जखम आ घाव पर,
देखि - देखि , हर ओर , भ्रष्ट - आचार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
जाने ना, कहवाँ , केकरी, नीयत में, खोट बा ,
काम केतनो गीरल, मकसद पइसा आ नोट बा ,
चोरी - चकारी, भीख , देहिं - व्यापार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
कर्जा के, बोझ तले, मरत, किसान बा ,
सूद-खोरवन के, ईहाँ ,भरत, मकान बा ,
आस, इन्साफ के अब , करल बा बेकार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
लिट्टे - लश्कर, जैश, भा उल्फा आ नक्सल ,
फइलल बा, हर ओर, मुश्किल बा चीन्हल ,
दस गो , दुश्मन, बाड़ेन, त, सौ गद्दार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
देवी - स्वरूप, जहवाँ, पूजल जालीं मुनियाँ ,
जन्मे से पहिले , काहें मारत बाटे दुनिया ,
लरिकिन के अकाल होई, लइकन के भरमार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
बड़ अधिकारी , चाहे , बिल्डर - व्यापारी ,
चोर - पुलिस, सबका से, बनल बा यारी ,
गलत, केहू होखे, भुगते, गरीबे - लाचार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
गली-गली, गुरू - पंडित, मुल्ला - उलेमा ,
एगो, भगवान जी के, केतना बा, खेमा ,
जोड़े बाला , तूरे खातिर, करत बा, प्रचार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
आ अन्त में,
नवीन जी के प्रेरणा से रचना तैयार बा ,
रउरियो सहयोग के, हमरा, इन्जार बा ,
चलीं आँसू पोछे , होखे तनिको जो प्यार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।

धन्यवाद ----- जय भोजपुरी ।
अनूप श्रीवास्तव

Views: 37

Rajeev Mishra "राजीव  भोजपुरिया" Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on April 19, 2010 at 9:58pm
जय भोजपुरी और प्रणाम अनूप भाई

बहुत निमन लिखले बानी
कहीं तंगी के टीस , कहीं , मंदी के, मार ,
सभे बा, व्यस्त , केहू , सुने ना, गुहार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
jitendra rs chauhan Comment by jitendra rs chauhan on April 19, 2010 at 11:08pm
जय भोजपुरी आ प्रणाम अनूप जी

वाह वाह का कविता बा.....राउर कविता दिल में छेद कर देत बा ......कमाल कर देले बा राउर कविता....

भारत माता के हर दर्द के कैसे बयां कईले बानी राउर पढ़ के दिल पसीज जात बा ...
हर एक बिमारी के जिक्र कईले बानी राउर .....कैसे इ भारत मात हर दुःख के सह के भी अपने लाल के बचा के रखे ले ....बाकी कुछ लोग बा जे अपने माई के अंचरा में ही दाग लगावत बा ....

राउर त हम फैन हो गईली ..... शानदार ......बहुत बहुत धन्यवाद...
नवीन भोजपुरिया ( NB ) Comment by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on April 20, 2010 at 1:58am
वाह , कहल जाला कि भाई उ जे एगो भाई के अरमान पुरा कई दे आ अरमान अईसन जे दुसरका भाई के वोह के एवज मे कुछ कहे खातिर कवनो शब्द ना रही गईल होखे , साफ साफ कही त निःशब्द हो गईल होखे बस कुछ अईसन हाल हमरो हो गईल बा आ एगो बात त हम कही सकेनी की अईसन जोड अगर कही मिली त भोजपुरिया समाज मे ही मिली ।

अनुप भाई प्रणाम आ जय भोजपुरी

बटोहिया लिखाईल रहल लोगन मे अलख जगावे खातिर कि देश के हर नवजवानन के एगो झण्डा के नीचे ले आवल जाउ, एगो उत्साह जगावल जाउ वोह लोगन के अन्दर जवना से लोग देश के प्रति आपन जिम्मेदारी के एहसास करो । हम बहुत बाद मे बटोहिया के पढनी , लेकिन आज राउर ई रचना हमरा के बटोहिया गीत के याद दिला देहलस ।

भारत माता के उपर हम काफी गीत पढले बानी , कुछ लोग भोजपुरी मे भी लिखले बा लेकिन का जाने काहे हमरा कबो उ Justification ना मिलल , पता ना काहे लेकिन ना मिलल ! हो सकेला लोग दिमाग लगा के लिख देले होखे , लेकिन राउर ई गीत दिल से लिखाईल बा काहे कि एह गीत मे एगो अजब तरह के अपील बा जवना से सुतल आदमी त आदमी गडाईल मुर्दा के सुनावल जाई त शायद उहो जाग जाई भारत माता के सेवा खातिर । हम ई अतिश्योक्ति ना दिल से लिखत बानी दिल से कहत बानी , काहे कि अगर एतना के बादो केहु ना जागी त फेरु वोह इंसान के इंसान त कबहु ना कहल जा सकेला । बस एतना अपील बा राउर एह रचना मे ।

आंख खोले वाली रचना बिया ई कसम से ।

साधुवाद अनुप भाई !


जय भोजपुरी
राउर आपने
नवीन भोजपुरिया
Sudhir Kumar Comment by Sudhir Kumar on April 20, 2010 at 3:03am
अनूप भाई... एकदम करेजा निकाल के ध देले बानी.

नवीन जी बटोहिया के जिक्र कइनी ह, आ अउर भी बहुत सारा गीत लिखल गइल बा एह देश खातिर. व्याकरण आ बाकी चीजन के बारे में त हमरा पता नइखे, लेकिन दिल में जवन भाव राउर रचना के पढला पर जागल, ऊ एह से पहिले कबो ना जागल रहे. हमरा ई लिखे में तनिको संकोच नइखे, कि ई भोजपुरी के अभी तक के सर्वश्रेष्ठ देशभक्ति गीत हवे...

अगर राउर इजाजत होखे, त हमनी का एकरा के भोजपुरिया डॉट कॉम पर भी राउर नाम आ फोटो का संगे पोस्ट कइल चाहेब. एही तरह लिखत रहीं अनूप भाई, वइसे त एह वेबसाइट पर राउर बहुत सारा फैन पहिलहीं से बाडे, लेकिन राउर फैन लोग के लिस्ट में एगो अउर नया नाम जुड गइल बाटे...

राउरे आपन,
सुधीर कुमार
शशि कुमार सिंह (SHASHI) Comment by शशि कुमार सिंह (SHASHI) on April 20, 2010 at 5:03am
jai bhojpuri Anup bhaia

sandar rachana baa, bharat mata ke dard ke bakhan bara hi sundar
dhang ke kale bani, deel ke chhu jala rauwar i rachana,

Desh bakti getan ke katar me rauar i rachana sabase aage baa
bhojpuri desh bhakti geet ke san baa, jai bho

koti koti naman yetana sandar rachana khatir

jai bhojpuri
sanjay kumar singh Comment by sanjay kumar singh on April 20, 2010 at 7:26am
अनूप जी ,प्रणाम !

भारत माता के दुर्दशा खातिर के जिम्मेद्दार बा ,राउर रचना के एक- एक वाक्य चीख -चीख के कहत बा | रुदन कई गो रूप में प्रकट होला ,लेकिन सबसे पीड़ादायक होला सिसक -सिसक के रोवल | एह स्थिति में अपने लोगन द्वारा पीड़ित व्यक्ति अपना पीड़ा के खुल के व्यक्त भी ना कर पावेला | हमनी के माई आज अपना बेट्वन से त्रस्त बाड़ी | राउर इ रचना ओ बेट्वन के सोचे के मजबूर करी जवान अपना स्वार्थ खातिर अपना माई के जामल दुसर संतति के शोषण करत बाडन स |

देश -भक्ति के भाव से लिखल गइल राउर इ रचना अपना में समाहित कैले बिया आज के सच्चाई के | आईं कुछ ऐसन कैल जाव जवना से अपना माई के मर्मान्तक पीड़ा कुछ कम कर सकीं जा |

बहुत बहुत धन्यवाद एह रचना खातिर , आ अप्रत्यक्ष रूप से इ एहसास करावे खातिर कि अपना माई के प्रति हमनी के का धर्म बा |

जय भोजपुरी
Kuldeep Srivastava Comment by Kuldeep Srivastava on April 20, 2010 at 9:21am
ka kahi anoop bhaiya padh ke rongta khda ho gaiyil u roatb ba mai humar kash e line ud ke jayit vo sabke khich ke tamacha marat jaun log apne swarth me e hal kah dehale ba e sab ke jimmedar ba dil ke chu dehale ba jaun tu likhle bad okra bare me kahe khatir kauno sabd nahi ba bus etna kahab ke ek panna me bhart mata ke dukh ke sagari dastan likh dehale bad
jai hind
Ravi Pratap Shahi Comment by Ravi Pratap Shahi on April 20, 2010 at 10:19am
अनूप...जी,
येही तरह से नवीन के कहला पर बढ़िया लिखल कर ..

बहुत ही मार्मिक चित्रण बा ..आज के हालात पर .
Anoop Srivastava Comment by Anoop Srivastava on April 20, 2010 at 12:41pm
रउआ सबके प्रणाम आ जय भोजपुरी !
रउआ सबके ई रचना नीक लागल, धन्यवाद, एकरा लिखला के सार्थकता ए बात में, बा कि, एमें छुपल दर्द, गुहार, सन्देश भोजपुरियन के माध्यम से अधिक से अधिक लोग में, पहुँचे । सुधीर भाई रउआ एकरा के भोजपुरिया डॉट कॉम भा कहीं भी पोस्ट करीं उद्देश्य पूरा होखल जरूरी बा ।
एक बेर फेर रउआ सबके बहुत-बहुत धन्यवाद ।
जय भोजपुरी
Harender K. Mishra Comment by Harender K. Mishra on April 20, 2010 at 3:13pm
अनूप जी जय भारत मात की,

एह रचना के हर शब्द एह तरीका से पिरोवल बा की जतना तारीफ़ कैल जाओ कम बा.....
हमरा शब्द के सीमा से परे बा...... बहुत बढ़िया....

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