Come, let's do something for Bhojpuri...
समस्त भोजपुरियन के हमार सादर प्रणाम !
आज के हमार ई रचना, मुख्य रूप से नवीन भाई जी के प्रेरणा से प्रस्तुत बा । एके "एगो बाँहि कटल . . . " के बाद क्रम में जोड़ल जा सकेला ।
शीर्षक - भारत माता - ( माई हमार )
केहू मस्त , केहू त्रस्त , बाटे , केहू बीमार ,
कहीं तंगी के टीस , कहीं , मंदी के, मार ,
सभे बा, व्यस्त , केहू , सुने ना, गुहार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
काश्मीर होखे , चाहे , कन्याकुमारी ,
उहे मार - काट , उहे, कालाबाजारी ,
माँग सून, गोद सून, अपंग - लाचार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
अंग - भंग भइल, धर्म - भाषा के नाव पर,
नून छिड़क आवें नेता , जखम आ घाव पर,
देखि - देखि , हर ओर , भ्रष्ट - आचार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
जाने ना, कहवाँ , केकरी, नीयत में, खोट बा ,
काम केतनो गीरल, मकसद पइसा आ नोट बा ,
चोरी - चकारी, भीख , देहिं - व्यापार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
कर्जा के, बोझ तले, मरत, किसान बा ,
सूद-खोरवन के, ईहाँ ,भरत, मकान बा ,
आस, इन्साफ के अब , करल बा बेकार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
लिट्टे - लश्कर, जैश, भा उल्फा आ नक्सल ,
फइलल बा, हर ओर, मुश्किल बा चीन्हल ,
दस गो , दुश्मन, बाड़ेन, त, सौ गद्दार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
देवी - स्वरूप, जहवाँ, पूजल जालीं मुनियाँ ,
जन्मे से पहिले , काहें मारत बाटे दुनिया ,
लरिकिन के अकाल होई, लइकन के भरमार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
बड़ अधिकारी , चाहे , बिल्डर - व्यापारी ,
चोर - पुलिस, सबका से, बनल बा यारी ,
गलत, केहू होखे, भुगते, गरीबे - लाचार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
गली-गली, गुरू - पंडित, मुल्ला - उलेमा ,
एगो, भगवान जी के, केतना बा, खेमा ,
जोड़े बाला , तूरे खातिर, करत बा, प्रचार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
आ अन्त में,
नवीन जी के प्रेरणा से रचना तैयार बा ,
रउरियो सहयोग के, हमरा, इन्जार बा ,
चलीं आँसू पोछे , होखे तनिको जो प्यार ।
सिसक - सिसक, रोअत बा, माई हमार ।।
धन्यवाद ----- जय भोजपुरी ।
अनूप श्रीवास्तव
© 2012 Created by Admin.
You need to be a member of JaiBhojpuri.com to add comments!
Join JaiBhojpuri.com