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परनाम आ जय भोजपुरी !
चीजन में कुछ चीज़,
बातन में कुछ बात,
जेकरा कभी ना देख पाईब,
इक्कीसवीं सदी में,
जोहते रह जाइब!
बच्चों में बचपन,
जवानों में यौवन,
शीशो में दरपन,
गाँव में अखाड़ा,
शहर में सिंघाड़ा,
टेबल के जगह पहाड़ा,
आउरी पाजामे में नाडा,
नैनन में पानी,
दादी के कहानी,
प्यार के दो पल,
नल-नल में जल,
संतान के बानी,
करण जैसन दानी,
घर में मेहमान,
मनुष्यता के पहचान,
पड़ोस के पहचान,
रसिकन के कान,
ब्रज के फाग,
आग में आग,
जोहते रह जाइब!!
Comment by Sanjeev Kumar on January 27, 2012 at 9:33pm अर्जुन जी प्रणाम,
निमन संदेश देले बानी अपना रचना के माध्यम से। अगर सोचल ना गईल, बुझल ना गईल अउर गुनल ना गईल त साँचो कुछ अमुल्य चीज्झन के हमनी ना देख पाऐम सन।
जय भोजपुरी
Comment by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on January 27, 2012 at 9:42pm अर्जुन जी प्रनाम आ जय भोजपुरी
नीमन सनेस आ नीमन बात बा , ढुंढते के " जोहते भा जोहत लिखाईत त अउरी नीमन लागित !
अउरी बलाग आ पोस्ट प राउर बिचार सोच के इंतेजार बा ।
जय भोजपुरी
अर्जुन जी प्रनाम,
बहुत बढ़िया....
धन्यवाद.
जय भोजपुरी
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