Come, let's do something for Bhojpuri...
Bishwajit yadav commented on Shyam Narain Verma's blog post गवना करवल बलमुवा , अपने चलेल परदेश !
मुकेश मिश्र (राजू बाबा) liked Shyam Narain Verma's blog post गवना करवल बलमुवा , अपने चलेल परदेश !
मुकेश मिश्र (राजू बाबा) commented on Shyam Narain Verma's blog post गवना करवल बलमुवा , अपने चलेल परदेश !
Dinesh Kumar Shukla commented on Shyam Narain Verma's blog post जहिया से गईल पिया छोड़ी के विदेशवा , मनवा लागत नईखे !
नवीन भोजपुरिया ( NB ) commented on Shyam Narain Verma's blog post गवना करवल बलमुवा , अपने चलेल परदेश !
नवीन भोजपुरिया ( NB ) liked Shyam Narain Verma's blog post गवना करवल बलमुवा , अपने चलेल परदेश !
शशि कुमार सिंह (SHASHI) liked Shyam Narain Verma's blog post झर झर झरेला हर नयनवा , सुगनवा उड़ी भागल ए राम !
शशि कुमार सिंह (SHASHI) liked Shyam Narain Verma's blog post गवना करवल बलमुवा , अपने चलेल परदेश !
Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" liked Shyam Narain Verma's blog post गवना करवल बलमुवा , अपने चलेल परदेश !
Shyam Narain Verma's blog post was featuredजीवन परिचय
श्री श्याम नारायण वर्मा का जन्म एक जुलाई सन् १९६८ में उत्तर पर्देश में बलिया जनपद के मनियर ब्लाक के पिलुई गांव में हुआ । इनके पिता का नाम श्री सुदर्शन वर्मा और माता का नाम श्रीमती सुनरी देवी था तथा आपके बाबा का नाम श्री फूलेना वर्मा था। आपकी एक बड़ी बहन , एक बड़े भाई , और एक छोटे भाई भी हैं । सन् १९८५ में आपकी शादी हीरावती वर्मा से हुई । आपका एक बेटा तथा दो बेटियाँ हैं । आप ने सन् १९८३ में हाई स्कूल तथा सन् १९८५ में इण्टरमीडिएट की परिक्षा यू पी बोर्ड इलाहाबाद से पास की तथा उस्मानिया यूनिवरसीटी हैदराबाद से बी ए किया । आप ट्रान्सपोर्ट कार्पोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड में भर्ती होकर हैदराबाद गये तथा हैदराबाद और दिल्ली , हरियाणा पर्देश के गुड़गाँव में काम किया और अभी महाराष्टर के भीवांडी में कायर्रत हैं। आपको हिन्दी और उर्दू में कामयाबी हासिल है । आपको कविता , कहानियां और गजल लिखने का शौक बचपन से है । आपने कई कवताएं , गजल तथा छोटी कहानियाँ भी लिखी । एक पच्चीस कहानियों का संग्ह मनोहर कहानियां के नाम से लिखे हैं । इन कहानियों में आपने समाज में फैली बुराईयों पर पर्काश डाला है और उसे दूर करने का पर्यास किया है । आप ने गाँव की जिन्दगी को बचपन से देखा है । आपकी कहानियाँ सरस एवं आसान है जिसमें गाँव की जिंदगी का झलक साफ नजर आता है । आप अपने कविता और कहानियों के माध्यम से समाज में फैली बुराईयों को दूर करने की कोशिश करते हैं ।
Posted on May 24, 2012 at 11:09am 0 Comments 3 Likes
Posted on May 23, 2012 at 4:15pm 3 Comments 10 Likes
Posted on May 22, 2012 at 12:09pm 0 Comments 0 Likes
Posted on May 21, 2012 at 12:05pm 1 Comment 0 Likes
Sanjeev Kumar said… वर्मा जी प्रणाम,
त ई बात बा?
अच्छा कवनो बात ना रवुआ अब पुरा के पुरा देवनागरी मे लिख सकेनी। रवुआ निचावा बडका अक्षरवा सन पर एक बार क्लिक करेम त ओजुगा पहुच जाऐम जहवाँ देवनागरी मे भोजपुरी लिखे के आसान से आसन तरीका बतलावल बा। रवुआ कवनो एगो के पकड लेम अउर सटा-सट भोजपुरी देवनागरी मे भोजपुरी भाषा लिखे लागेम।
आशा बा जे ऐह लिंक के पढला के बाद कवनो दिक्कत ना होई अगर तबो दिक्कत बुझाऐ त रिंकू बताऐम। कोशिश कईल जाई जे रावुर दिक्कत खत्म हो सके।
जय भोजपुरी
abhinandan gupta said…
abhinandan gupta said…
Sudhanshu kumar said…
jitendra rs chauhan said… namaste verma jee...ham t thik baani ..raur kais baani......maph kari late javab khatir....
jai bhojpuri
Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" said… pranaam,
thik baani, aapan sunaayin
© 2012 Created by Admin.