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Er. Dhiraj kumar shrivastava
Er. Dhiraj kumar shrivastava
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योगशास्त्र एवं आध्यात्म – 10. कोई सुप्रीम पावर है अन्यथा ऐसा सुनियोजित व्यवस्था कैसे संभव है ?

यह ठीक है की प्रकृति ने, परमात्मा ने मनुष्य को बुधि, प्रतिभा, कौशल और विश्लेषण करने की विशेष क्षमताएं प्रदान कर रखी है | किन्तु इसी कारण मनुष्य सर्वश्रेष्ठ नहीं हो गया और जब तक यह सर्वश्रेष्ठ नहीं, तब तक इसे कोई अन्य सत्ता माननी होगी जो कि सर्वश्रेष्ठ, सर्वज्ञानी है | परमात्मा ने एक से एक अजूबे दिए है |पता है, …घोंघे को अपना आहार खुरच खुरच कर खाना होता है अतः प्रकृति ने उसके जीभ में इतने अधिक दन्त लगा दिए हैं कि उसे भोजन करने में कोई परेशानी न हो | जीवशास्त्रियो के अनुसार घोंघे के जीभ में १२००…See More
Blog post by Er. Dhiraj kumar shrivastava Aug 30, 2010
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Er. Dhiraj kumar shrivastava commented on तरुण तिवारी's blog post 'आज स्वतंत्रता दिवस की ६४ वी वर्षगांठ पे मै तरुण आप सभी मित्रों को हार्दिक बधाइयाँ देता हुए कुछ सवाल आप सब से पूछना चाहता हू जो मेरे जेहन में काफी दिनों से कौंध रहे है.'
वो दिन दूर नही जब हमारे पूर्वजो के लिखे वेड ,उपनिषद भारत में नही बल्कि न्युयोर्क के WHITE HOUSE में प्राप्त होंगे और उन्हें पढ़ने के लिए हमें अमरीकियों कि आज्ञा लेनी पड़ेगी| बहुत खूब
Aug 16, 2010
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योगशास्त्र एवं आध्यात्म – 9. यज्ञ बलि

आदि मानव शायद कंद-मूल-फलाहारी ही होगा | कालांतर में मानव समाज मांसाहारी बना | जो बुद्धिमान ब्यक्ति थें, उन्हें यह नहीं जंचा | उन्होंने यह प्रतिबन्ध लगाया कि मांश ही खाना है तो यज्ञ में बलि दिए पशुओ का ही मांश खाना चाहिए | उनका हेतु था कि हिंसा रुके | इस प्रतिबन्ध से हिंसा में ठहराव जरुर हुआ लेकिन यह 'स्टे' साबित हुआ, 'स्टॉप' नहीं | पुनः यज्ञ एक सामान्य-क्रम बन गया | ऐसा होने लगा कि जो चाहता, यज्ञ करता और मांश खाता | तब भगवान् बुद्ध आगे आये | उन्होंने कहा - तुम्हे मांश खाना है तो खाओ, परन्तु…See More
Blog post by Er. Dhiraj kumar shrivastava Aug 16, 2010
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Er. Dhiraj kumar shrivastava commented on Er. Dhiraj kumar shrivastava's blog post 'योगशास्त्र एवं आध्यात्म – 8. शिक्षा शास्त्रज्ञ और है और शिक्षा का बोझ ढोने वाला और'
तिवारी जी, जीवन भावनामय हो जाए तब देखिए जीवन का आनंद ही कुछ और हो जाए |
Aug 16, 2010
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Blog posts by Er. Dhiraj kumar shrivastava Aug 13, 2010
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sanjay panday commented on Er. Dhiraj kumar shrivastava's blog post 'योगशास्त्र एवं आध्यात्म – 6. कर्म भाव : मूर्ति पूजा, गंगा-स्नान का रहस्य !'
dhiraj ji jai bhojpuri a parnam | bahut badhiya a gyan ke bat batavala bhai ji | sahi bat ba pahile man se viswash hokhe ke chahi fir bahar se kare ke chahi jab man me kapat rahi ta bahar ganga nahane se kya fayada | jai bhojpuri sanjay pandey
Aug 10, 2010
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योगशास्त्र एवं आध्यात्म – 6. कर्म भाव : मूर्ति पूजा, गंगा-स्नान का रहस्य !

नोट का वजन भला कितना होगा ? उसे सुलगाये तो एक बूंद पानी शायद ही गरम हो | पर उस पर एक मोहर लगी रहती है | उसी से उसकी कीमत होती है | और यही है मूर्ति पूजा का रहस्य | मूर्ति पूजा की कल्पना में बड़ा सोंदर्य है | यह मूर्ति पहले एक टुकड़ा ही तो थी पत्थर की; मैंने इसमे प्राण डाला भावना का | कोई पत्थर के टुकड़े कर सकता है, भला इस भावना के कोई टुकड़े कर सकता है ? कल्पना कीजिये की दो ब्यक्ति गंगा स्नान करने गए हैं | उसमे से एक कहता है -- लोग गंगा-गंगा कहते हैं, उसमे है क्या ? दो हिस्से हाइड्रोजन, एक हिस्सा…See More
Blog post by Er. Dhiraj kumar shrivastava Aug 9, 2010
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Er. Dhiraj kumar shrivastava updated their profile photo Aug 9, 2010

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Er. Dhiraj kumar shrivastava

योगशास्त्र एवं आध्यात्म – 10. कोई सुप्रीम पावर है अन्यथा ऐसा सुनियोजित व्यवस्था कैसे संभव है ?

Posted on August 30, 2010 at 2:30pm 0 Comments

यह ठीक है की प्रकृति ने, परमात्मा ने मनुष्य को बुधि, प्रतिभा, कौशल और विश्लेषण करने की विशेष क्षमताएं प्रदान कर रखी है | किन्तु इसी कारण मनुष्य सर्वश्रेष्ठ नहीं हो गया और जब तक यह सर्वश्रेष्ठ नहीं, तब तक इसे कोई अन्य सत्ता माननी होगी जो कि सर्वश्रेष्ठ, सर्वज्ञानी है | परमात्मा ने एक से एक अजूबे दिए है |

पता है, …घोंघे को अपना आहार खुरच खुरच कर खाना होता है अतः प्रकृति ने उसके जीभ में इतने अधिक दन्त लगा दिए हैं कि उसे भोजन करने में कोई परेशानी न हो | जीवशास्त्रियो के अनुसार…

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योगशास्त्र एवं आध्यात्म – 9. यज्ञ बलि

Posted on August 16, 2010 at 11:43am 0 Comments

आदि मानव शायद कंद-मूल-फलाहारी ही होगा | कालांतर में मानव समाज मांसाहारी बना | जो बुद्धिमान ब्यक्ति थें, उन्हें यह नहीं जंचा | उन्होंने यह प्रतिबन्ध लगाया कि मांश ही खाना है तो यज्ञ में बलि दिए पशुओ का ही मांश खाना चाहिए | उनका हेतु था कि हिंसा रुके | इस प्रतिबन्ध से हिंसा में ठहराव जरुर हुआ लेकिन यह 'स्टे' साबित हुआ, 'स्टॉप' नहीं | पुनः यज्ञ एक सामान्य-क्रम बन गया | ऐसा होने लगा कि जो चाहता, यज्ञ करता और मांश खाता | तब भगवान् बुद्ध आगे आये | उन्होंने कहा - तुम्हे मांश खाना है तो खाओ, परन्तु…

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योगशास्त्र एवं आध्यात्म – 8. शिक्षा शास्त्रज्ञ और है और शिक्षा का बोझ ढोने वाला और

Posted on August 13, 2010 at 12:13pm 4 Comments

एक बार एक प्रोफेसर के साथ मेरी बात चल रही थी | हम लोगों के विचार मिलते नहीं थे | अंत में प्रोफ़ेसर ने कहा - भाई, मै अठारह साल से काम कर रहा हूँ | जबसे तुमने पढ़ना शुरू किया होगा, मैंने पढ़ाना शुरू किया | प्रोफेसर साहब को चाहिए था कि वे मुझे कायल करते, परन्तु ऐसा न करते हुए जब उन्होंने मुझसे कहा कि मै इतने साल से शिक्षा का कार्य कर रहा हूँ तो मैंने उनसे मजाक में कहा..." <strong>अठारह साल तक बैल यदि यंत्र के साथ घूमता रहे तो क्या वह यंत्र शास्त्रज्ञ हो जायेगा ?</strong>…



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योगशास्त्र एवं आध्यात्म – 7. भिखारियों के बारे में शंका : क्या दिया, किसको दिया, कितना दिया, यह मुद्दा नहीं है | किस भावना से दिया, यह मुद्दा है

Posted on August 12, 2010 at 12:59pm 2 Comments

बचपन में मैंने एक बार अपनी माँ से भिखारियों के बारे में शंका की थी | उसने जो उत्तर दिया वह अभी तक मुझे याद है | मैंने उससे कहा..."यह भिखारी तो हट्टा-कट्टा दीखता है | इसको भिक्षा देने से तो व्यसन और आलस्य ही बढ़ेंगे | वह बोली - जो भिखारी आया था, वह परमेश्वर ही था, ऐसा मानकर पात्रपात्रता का विचार कर | भगवान क्या अपात्र है ? पात्रपात्रता का बिचार करने का तुझे और मुझे क्या अधिकार है ? अधिक विचार करने की मुझे जरुरत ही मालूम नहीं होती | यह एक किताब को जीवन का जबाब था | इस उत्तर का प्रत्युत्तर अभी…

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At 11:43am on August 2, 2010, नवीन भोजपुरिया ( NB )नवीन भोजपुरिया ( NB ) said…
प्रणाम आ जय भोजपुरी

http://www.jaibhojpuri.com/forum/topics/3634233:Topic:51348

देवनागरी मे लिखे खातिर कुछ जानकारी दिहल बा देख ली , शायद कामे आ जाई
At 7:11am on July 31, 2010, जय भोजपुरीजय भोजपुरी said…
प्रणाम ,जय भोजपुरी

राउर आगमन के दिल से स्वागत बा राउर विश्व के सबसे बड़ भोजपुरी के परिवार में,जय भोजपुरी परिवार सिर्फ इन्टरनेट पर लोगन के मेल मुलाकात के ही जरिया नइखे रही गइल, जय भोजपुरी परिवार भोजपुरिया और भोजपुरी के बारे में जाने के इच्छा रखे वाला लोगन के एक दूसरा से जोड़ी के भोजपुरी कला अउर संस्कृति के उत्थान खातिर समर्पित बा,

रउवा एह परिवार में लोगन से मेल जोल बढ़ाते हुवे ,ब्लॉग अउर ,फोरम के माध्यम से एक दूसरा के बिचार के जानते हुवे भोजपुरी कला अउर संस्कृति के उपर विचार बिमर्श करते हुवे भोजपुरिया लोगन के दुःख -सुख में शामिल हो सकत बानी.

ऐगो लिन्क दे रहल बनी सहायता, खातीर ऐह के पढ लेब

http://www.jaibhojpuri.com/page/rules-1

त जय भोजपुरी परिवार में आपन थोडा सा बहुमूल्य समय दे के ..

 
 
 

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