Come, let's do something for Bhojpuri...
Posted on August 30, 2010 at 2:30pm 0 Comments 0 Likes
यह ठीक है की प्रकृति ने, परमात्मा ने मनुष्य को बुधि, प्रतिभा, कौशल और विश्लेषण करने की विशेष क्षमताएं प्रदान कर रखी है | किन्तु इसी कारण मनुष्य सर्वश्रेष्ठ नहीं हो गया और जब तक यह सर्वश्रेष्ठ नहीं, तब तक इसे कोई अन्य सत्ता माननी होगी जो कि सर्वश्रेष्ठ, सर्वज्ञानी है | परमात्मा ने एक से एक अजूबे दिए है |
पता है, …घोंघे को अपना आहार खुरच खुरच कर खाना होता है अतः प्रकृति ने उसके जीभ में इतने अधिक दन्त लगा दिए हैं कि उसे भोजन करने में कोई परेशानी न हो | जीवशास्त्रियो के अनुसार…
ContinuePosted on August 16, 2010 at 11:43am 0 Comments 0 Likes
आदि मानव शायद कंद-मूल-फलाहारी ही होगा | कालांतर में मानव समाज मांसाहारी बना | जो बुद्धिमान ब्यक्ति थें, उन्हें यह नहीं जंचा | उन्होंने यह प्रतिबन्ध लगाया कि मांश ही खाना है तो यज्ञ में बलि दिए पशुओ का ही मांश खाना चाहिए | उनका हेतु था कि हिंसा रुके | इस प्रतिबन्ध से हिंसा में ठहराव जरुर हुआ लेकिन यह 'स्टे' साबित हुआ, 'स्टॉप' नहीं | पुनः यज्ञ एक सामान्य-क्रम बन गया | ऐसा होने लगा कि जो चाहता, यज्ञ करता और मांश खाता | तब भगवान् बुद्ध आगे आये | उन्होंने कहा - तुम्हे मांश खाना है तो खाओ, परन्तु…
ContinuePosted on August 13, 2010 at 12:13pm 4 Comments 0 Likes
एक बार एक प्रोफेसर के साथ मेरी बात चल रही थी | हम लोगों के विचार मिलते नहीं थे | अंत में प्रोफ़ेसर ने कहा - भाई, मै अठारह साल से काम कर रहा हूँ | जबसे तुमने पढ़ना शुरू किया होगा, मैंने पढ़ाना शुरू किया | प्रोफेसर साहब को चाहिए था कि वे मुझे कायल करते, परन्तु ऐसा न करते हुए जब उन्होंने मुझसे कहा कि मै इतने साल से शिक्षा का कार्य कर रहा हूँ तो मैंने उनसे मजाक में कहा..." <strong>अठारह साल तक बैल यदि यंत्र के साथ घूमता रहे तो क्या वह यंत्र शास्त्रज्ञ हो जायेगा ?</strong>…
Posted on August 12, 2010 at 12:59pm 2 Comments 0 Likes
बचपन में मैंने एक बार अपनी माँ से भिखारियों के बारे में शंका की थी | उसने जो उत्तर दिया वह अभी तक मुझे याद है | मैंने उससे कहा..."यह भिखारी तो हट्टा-कट्टा दीखता है | इसको भिक्षा देने से तो व्यसन और आलस्य ही बढ़ेंगे | वह बोली - जो भिखारी आया था, वह परमेश्वर ही था, ऐसा मानकर पात्रपात्रता का विचार कर | भगवान क्या अपात्र है ? पात्रपात्रता का बिचार करने का तुझे और मुझे क्या अधिकार है ? अधिक विचार करने की मुझे जरुरत ही मालूम नहीं होती | यह एक किताब को जीवन का जबाब था | इस उत्तर का प्रत्युत्तर अभी…
Continue
© 2012 Created by Admin.