हो सकेला थोड़े दिन खातिर ..लेकिन जब तक मन से लड़का और लड़की के सब लोग बराबर के ना समझी ...इ रोगवा रहबे करी.....अबे नया नया जोश बा...और समाज में जब एकर स्वीकारोक्ति हो जाई त फेर वुहे बात .....चलीं कुछ दिन के खातिर त होखबे करी...शायद फेर लोग बुझी जा .
दहेज के मिटावे खातिर प्रेम विवाह के समर्थन कईल हमरा नजर मे सम्स्या के हल नईखे । प्रेम विवाह एगो अलग चीज हवे आ जवना खातिर ना कवनो योजना बनावे के पडेला ना कवनो विचार , ई त बस कभी जोश मे आ के त कभी होश मे आ के हो जाला । हम ज्यादा विस्तार से प्रेम विवाह मे चक्कर मे ना जाईब लेकिन ह दहेज के कारण कई गो प्रेम विवाह् के टुटत देखले बानी ।
जी बबुआ के अगर मारकेट मे भाव लाग गईल बा त बबुआ के घर वाला कवनो कीमत पे उनुकर प्रेम विवाह ना होखे दी आ अगर तनी ढेर मिलत बा आ साथ साथ मे बहुत सारा चीज घलुआ मे मिलत बा त बबुवा भी अपना प्रेम के तिलांजली , श्रद्धांजली दे के दहेज के पनपावे के अभियान मे जुट जालन ।
एह से हमरा नईखे लागत की प्रेम विवाह कवनो हल बा , ह जवन प्रेम विवाह भईल बा बिना दान दहेज के उ एक तरह से उपहार बा समाज मे बाकी अउर कुछ ना । आ उ उपहार बा जति धर्म ,रुढिवादिता के खिलाफ आ एगो नया सोच के जनम भी देत बा ( नीमन बा की बाउर बा ई बहस के मुद्दा बा ) लेकिन ई सोच के नईखे होत की दहेज के बात बा ।
का प्रेम विवाह दहेज के समस्या के समाधान हौवे? वाकई में दहेज एगो बहुत बॅड समस्या बा. जेवना क समाधान बहुत मुश्किल बा | बाकी हमरी विचार से प्रेम विवाह एकर समाधान नईखे. अधिकतर देखल गाईल बा की प्रेम विवाह सफल ना हो पावे ला. 60-70% प्रेम विवाह असफल ही होला और तलाक़ क नौबत आ जाले. एमा सोचे वाली ई बात बा की कैसन ज़िंदगी सही बा प्रेम विवाह( बिना दहेज क) क के कुछ दिन की बाद तलाक या दहेज देके पूरा शांतिपूर्ण सुखमय ज़िंदगी. अरेंज मैरिज अधिकतर कामयाब ही होले | कुछ अपवाद के छोड़ के...
सबसे पहीले त दहेज का ह?
एमा दो तरह क बात बानी स 1: लॅडिका वाला मुँह खोले के भा कहु दूसरा की माध्यम(अगुवा) से माँगत बा.
2: दूसरा लईकी वाला अपने आप अपनी लईकी के अपनी सामर्थ्य की हिसाब से डेत बा. त का इहो दहेज की श्रेणी में आई?
केहु अपनी लईकी के खाली हाथ बीदा ना कईल चाहे ला | कहु अगर अपनी लईकी के अपनी मर्ज़ी से कुछ डेत बा त एमा केवन ग़लती बा?? मान लेई हमार 3 गो संतान बाड़ स 2गो लाईका और 1गो लईकी. त का हमरी कमाई की पर लईकी क हक़ नईखे? ई हम मानत बानी की ओके दूसरा की घरे जाए के बा त हम ओकी अपनी बचत क 10%भी ना दे सकेली?? बाकी 90% पर त 2गो लाईकन क हक़ बटले बा| हम अपनी लईकन खातिर सुख सुविधा क हर साधन उपलब्ध करावत बानी त लईकी के हम कुछ ना दे सकेली?????
दहेज वाकई में समाज की ऊपर एगो बहुत बॅड कलंक बा..बाकी एकर ख़ात्मा भाईल बहुत मुश्किल लागत बा.. कान्हे की बहुत आदमी अपनी मर्ज़ी से लईकन की शादी में दहेज (उपहार भी कही सकेली) देत बान . जबकि दूसरा आदमी ओ आदमी क उदाहरण देके ज़बरदस्ती दहेज माँगत बाड़ की फलाना की लाईका की शादी में हाई हाई सामान मिलल ह त का हम उनसे कम बानी हमके उनसे अधिके चाही...
और कुछ आदमी बाड़ की शादी की बाद लईकी की उपर दहेज खातिर दबाव डालत बान जेवन की सरासर ग़लत और क़ानूनन अपराध भी ह.
दहेज लोभियन की उपर एगो लईकी क साहसिक तमाचा हमरी पिछला ईगो दहेज की उपर कोमेंट के इहानवा देख सकेली