Come, let's do something for Bhojpuri...
का ऱवुआ याद बा कि अपने के आखरी बार मन भर कब हंसले रहनी? अईसन जोरदार हंसी कि हंसत-हंसत लोटपोट हो गईल होई, कि मुंह दुखाऐ लागल होखे, कि आंख से लोर निकलल होखे, कि पेट में बाथा उपट गईल होखे…। याद नईखे आवत नू! आज-काल्ह के तनाव वाला ऐह दौर में हंसी वाकई महंगा हो गईल बावे। लोग के लगे सब चीज खतीरा समय बा बाकीर हंसे-हंसावे खतीरा नईखे, जबकि हंसी के फायदा केतना बावे शायद केहु जानतो नईखे।
हंसी से बड़ कोवनो दवा नईखे. . .
ऐहबात के हमनी हमेशा सुनेनी जा, बाकीर मानले शायद कम बानी जा काहेकि बिना कवनो खर्चा के इलाज के बात बढीया से हजम ना होला। वईसे भी, जिंदगी के दवुडान अउर तनाव लोग के हंसल भुलावा देला बा। एगो आर्टीकल कही पढले रहनी कि पहीले लोग रोजो करीब 18 मिनट हंसत रहे, अब 6 मिनट ही हंसत बालो जबकि हंसल बहुत फायदा वाला बवो।
त आज से हमनी के ईहे करे के बा कि जादा ना त दिन भर में कम से कम 5 बार हंसल जाई अउर दोसरा के भी हंसावल जाई।
ऐह शहर मे कवनो मंदीर नईखे, कहँवा हम प्रभू से आशीश लेम।
सोचत बानी कि हर रोज एगो, रोअत इंसान के हम हँसा देम।।
Tags: संजीव
Permalink Reply by मुकेश मिश्र (राजू बाबा) on March 2, 2012 at 9:40pm हाहाहा ...हाहाहा....
हाहाहा ...हाहाहा....
एकदम गर्दा बा संजीव भाई !
हाहाहाहाहाहा..........
जीय खदेरन जीय !!
Permalink Reply by शशि कुमार सिंह (SHASHI) on March 2, 2012 at 10:06pm हाहाहा ...हाहाहा...हाहाहा ...हाहाहा...हाहाहा ...हाहाहा...
Permalink Reply by Sanjeev Kumar on March 2, 2012 at 8:58pm राजनीति
खदेरन जब चुनाव लडे के मन बनवले तऽ अपना बाबुजी से सहायता खतिरा राजनीति पऽ कुछ टिप्स मंगले...
खदेरन - बाबुजी हम नेतई करे के चाहऽ तानी। कुछ टिप्स दी ऐकरा खातिर...।
बाबुजी - बबुआ राजनीति के सबसे पहिलका एगो कठोर नियम होला। चलऽ पहिले ओकरे
बतावत बानी...।
खदेरन के बाबुजी खदेरन के छत पऽ भेज देहले अउर खुद निचा खडा हो गईले।
खदेरन - हँऽ बाबुजी बोली अब,,, हम छत पऽ खडा हो गईल बानी...
बाबुजी - बबुआ ढेर ना तु छत पऽ से निचा कुद जा...
खदेरन - बाबुजी हेतना उपर से कुदेम तऽ हाथ-गोड छटक जाई...
बाबुजी - अरे डेरा मत,,, हम बानी नू,,, हम तहरा के लोक लेम...
खदेरन हिम्मत कऽ के उपर से कुद गईले बाकीर उनकर बाबुजी अपना के बचावत ओजुगा से हट गईल रहले।
खदेरन (कोहरत) - बाबुजी रउआ तऽ कहले रहनी हई कि हम लोक लेम तऽ पिछा काहे हट गईनी हई...?
बाबुजी - देखऽ राजनीति के सबसे पहिला वसुल ईहे हवे कि जवन कहऽ ओकरा के कबो पुरा मत करऽ अउर कबो भी राजनीति मे अपना बाप पऽ भी विश्वास मत करऽ...।
Permalink Reply by मुकेश मिश्र (राजू बाबा) on March 2, 2012 at 9:42pm हा हा ...हा हा....हा हा...
राजनीति बवाल !
Permalink Reply by शशि कुमार सिंह (SHASHI) on March 2, 2012 at 9:54pm साचो बहुत सही टिप्स देहले बानी बाबुजी..
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on March 2, 2012 at 10:10pm हा हा हा हा हा हा
जीअ जीअ हो करेजा जीअ ...
Permalink Reply by Sanjeev Kumar on March 3, 2012 at 9:05pm हर्जाना
खदेरन जी अपना मोटर साइकिल पऽ सवार हो को कही जात रहले। तब तक आगा से आवत ट्रक से एक्सीडेंट हो गईल। एक्सीडेंट मे खदेरन जी तऽ केहु तऽ बाँच गईले बाकीर उनकर मोटर साइकिल के सत्यानाश हो गवुऐ। ऊ ट्रक ड्राइवर के खिलाफ अदालत मे हर्जाना के मुकदमा ठोक दिहले।
अदालत मे जज भी खदेरन जी के न्याय देहुवे। अउर उनका मोटर साइकिल के दाम मिल गवुऐ।
अंत मे जज खदेरन से पुछुवे - एक्सीडेंट तऽ बडा बिजोड रहे,,, रउआ बाँच कईसे गईनी?
खदेरन - हमरा संगे हनूमान जी उउर राम जी दुनु जाना रहुवे लो...
जज - मोटर साइकिल पऽ तीन गो सवारी बईठावल भी जुर्म बावे..., अब तहरो हर्जाना भरे के पडी।
Permalink Reply by शशि कुमार सिंह (SHASHI) on March 3, 2012 at 9:16pm हा हा हा हा हा हा.............. हा हा हा हा हा हा
Permalink Reply by मुकेश मिश्र (राजू बाबा) on March 3, 2012 at 10:16pm हा हा हा हा हा हा हा........ho ho ho.........
निमन फँसले खदेरन जी
Permalink Reply by Sanjeev Kumar on April 11, 2012 at 12:50pm देस के सुरक्षा
चईत के चिलात घाम से बाँचे खतिरा पाठक जी अउर खदेरन एगो गाछ के निचा बईठ के सुसतात रहुवे लोग।
अचानक पाठक जी कहनी - अच्छा खदेरन ई बतावऽ कि अपना देस के थल सेना के अध्यक्ष के लिखल एगो चिट्ठी से ई मालूम चलत बावे कि अपना देस के लगे गोला-बारूद के कमी बावे अउर हवाई रक्षा के ढेर औजार पुरान हो चुकल बाडे सन। तऽ का ऐह खबर के सुन के पाकिस्तान अउर चाइना भारत पऽ जब धावा बोलीहऽ सन तऽ हमनी का करेम सन?
खदेरन - पाठक जी रउआ बेकारे चिंता करत बानी। अपना देस के कवनो खतरा नईखे। पाकिस्तान तऽ खुदे कंगाल अउर खस्ताहाल मे बावे। ऐह से ओकरो लगे गोला-बारूद अउर राक्षा के सारा समान हमनीयो से खराब होई। अउप रहल चाइना तऽ ओकर गोला बारूद अउर हथियार के क्वॉलीटी ओकरा खिलवना अउर अउरी समान नियन ही घटीया होई जवना से भारत के सिपाही बिना कवनो हथियार के भी निपट लि लोग।
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