Come, let's do something for Bhojpuri...
Permalink Reply by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on April 19, 2010 at 10:17pm
Permalink Reply by Harender K. Mishra on April 22, 2010 at 3:39pm
Permalink Reply by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on April 22, 2010 at 6:50pm
Permalink Reply by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on April 22, 2010 at 6:51pm
Permalink Reply by Sudhir Kumar on May 26, 2010 at 2:25am
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on September 9, 2010 at 7:00pm
Permalink Reply by Harender K. Mishra on September 11, 2010 at 9:36pm
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on September 20, 2010 at 8:00pm
Permalink Reply by संजीव सिंह on January 31, 2012 at 6:47pm खुशी अउर गम
खुशी अउर गम त संगे संगे मिलल
तबो अपना धुन में चलल जात रहनी
सुर में गम आ खुशी के गावत रहनी
रो रो के उनकर याद मिटावत रहनी
केहू कहल
तु बहुते निमन राग मे गीत गावे ल
अपना भितर के दर्द-पिडा निकाले ल
बाकीर काहे तू भोजपुरी लोर बहावे ल
कंठ से हिन्दी गाना काहे ना गावे ल
तुरंत याद आईल
जब गा सकीले त लिख काहे ना लेम
उनका विरह के कागज प उतार देम
केहू पढी त सबक ली हमरा जनुन से
दर्द के घाव के पुरा लेखनी मे गार देम
बेबस हो गईनी हम
शब्द के जोडे मे बेबश कईलस हिन्दी
दर्द के अउर गहीर कईलस ई भाषा
अंग्रेजी के त अब पुछबे मत करी
निकाल देहलस एक दम से लासा
वापसी
भटकत भटकत जहावाँ छाया मिलल
सुस्ताऐ लगनी ओह आँचल मे दमतुरी
आँख के सोझा हमार आपन बहुते खास
माई रहली जेकरा कहल जाला भोजपुरी
किरीया
गोड छु के पहिले त माफी मंगनी
फेर किरीया खा के बतईनी अरमान
गलती अब कबो ना करेम ऐ माई
मरेम तबो भोजपुरी बनी हमार पहचान
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अगीला लाइन : लिखेम आज तोहरा गम के कहानी
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on February 1, 2012 at 9:00pm जब ,
भोजपुरी भाषा से
आपन खरची चलावे वाला
एगो कलाकार
भोजपुरी के बात
दोसरा भाषा मे दांवेला
जब
रिति रिवाज, संस्कार मे
सउनाईल , गोताईल
ओह उपजल माटी के
लोग
फुहर पातर गाना
अईंठाई के बतीसो दांत देखाई के
बडा चाव से गावेला
तब
बहुते भकसावन लागेला
आवे वाला दिन
का जाने काहे, कबो कबो
बडा भकसावन लागेला
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