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Replies to This Discussion

vah sanjeev bhai bahut hi sundar rachna aur sundar dhang se okar Prastuti..................

 Dekh ke dil machal gail..............

रजनीश भाई राउर स्वागत बा "एह दिल से वोह दिल तक" में.

वाह वाह संजीव भाई वाह वाह

 

गरदा कई देहनी बवाल कई देहनी , माने गतरे गतरे राउर एक एक शब्द तरेर के पहुंचत बा !

 

पेश बा

 

दिल से निकलल हर बात एगो जज्बात होला 

प्यार से बोली वोह बोली के एगो अजबे सौगात होला 

कबो आजु ले अघाईल नईखे एह नेह छोह के बोली पे

जब दिल टुटेला त आंखि से भादो असि बरसात होला

नविन भईया गर्दा रउआ कर देहनी महराज.

का खूब लिखले बानी... "जब दिल टुटेला त आंखि से भादो असि बरसात होला"....एक दम झकाश.
जय भोजपुरी
हमरा तन्हाई से हमरा कवनो शिकायत नईखे,
का भईल वोसे जे हमरा केहू मिलल नईखे.
तबो दुआ करें हम उनका खातिर,
ऊ सभ कुछ मिले उनका जे हमरा मिलल नईखे.
Very nice.............
पहिले त तन्हाईये से ही, दोस्ती रहे आपन,
कुछ दिन से दिल मे केहु, समाऐ लागल बा।
अभी तक पहचान ना पाईल, ई बैरी मनवा,
केकर याद रह-रह के, अब आवे लागल बा।।

केहु आपन हवे, आकी हवे केहु अपने पराया,
के ह ऊ? जे छुप-छुप के तडपावे लागल बा?
ना बैचेन भईल रहे दिल, कबो ऐतना पहिले,
अचानक धडकन के, के धडकावे लागल बा?

पवन के छुअन से, केहु के एहसास होत बा,
ईहो अब अपना साथ, कुछ उडावे लागल बा।
अलगे एगो खुश्बु, साँस से दिल मे मिलत बा,
अउर हर महक, अब त बहकावे लागल बा।।

केहु के बाट निहारे मे, सारा रात बित जाला,
अउर हर रात अब, इंतजार करावे लागल बा।
चाँद लेखा भटकत, अपनो निशा खत्म होला,
बाकीर भोर फेरु इंतजारे, सिखावे लागल बा।।

ऐ घाम के आग, पहीले त बर्दाश ना होत रहे,
अब घाम के भी, दिली-आग जरावे लागल बा।
बिगहा पार देखल भी, मुश्कील हो गईल तब से,
जब से मनवा केहु के, दर्शन करावे लगल बा।।

संजीव सिंह

तू आजा कि राग के मौसम अभी बितल नईखे,

आजा तू कि अभीयो सरेह मे तनी नमी बावे।

गुलाब के खुश्बु से रातरानी के महक तक ले,

सब कुछ बा हमरा गाँव मे बस तहरे कमी बावे।।

ऊ प्यार के सबुत देखावत रहे,

आँसू बहा के हमरा के मनावत रहे।

जिनगी मे बस तहरे से नाता बावे,

ऊ हमेशा ईहे हमरा के बतावत रहे।

अब रात मे सुते के फुरसत केकरा रहे,

ऊ रात हमरा के जगावत रहे।

बैचेनी जब हद से जादा बढे लागे,

त ऊ मन भर बतीयावत रहे।

आज...!

ऊ मोहब्बत करे वाला बदल गईल,

जे हर बातमे  "हमार कसम" खात रहे।

साईन

साईन तक ले त हम करे नी 
एगो विदेशी भाषा में
मननी हम आज़ाद हो गईनी
बाकीर कवना परिभाषा में

जन्म-दिन पर केक काट के
गाईले सन अँग्रेज़ी में
शादी-बियाह के नेवता भी
छपवाईले सन अँग्रेज़ी में

घोड़ी डोली के स्वागत खतिरा
बैण्ड-बाजा भी अँग्रेज़ी में
टाई कस के सभ बराती
ख़ूब सजे ला लोग अँग्रेज़ी में

सड़क पर नाचेनी सन
जाने कवना आशा मे
मननी हम आज़ाद हो गईनी
बाकीर कवना परिभाषा में

गणतंत्र के ऐह पावन बरषी प
अब ना जियेम कवनो झासा मे
आजे से शुरूआत क देहनी
साईन करेम अपना भाषा मे.

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