Come, let's do something for Bhojpuri...
Permalink Reply by संजीव सिंह on February 25, 2011 at 6:24pm
Permalink Reply by Rajnish Kumar Singh on February 26, 2011 at 3:52pm vah sanjeev bhai bahut hi sundar rachna aur sundar dhang se okar Prastuti..................
Dekh ke dil machal gail..............
Permalink Reply by संजीव सिंह on February 27, 2011 at 10:12am
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on February 26, 2011 at 4:06pm वाह वाह संजीव भाई वाह वाह
गरदा कई देहनी बवाल कई देहनी , माने गतरे गतरे राउर एक एक शब्द तरेर के पहुंचत बा !
पेश बा
दिल से निकलल हर बात एगो जज्बात होला
प्यार से बोली वोह बोली के एगो अजबे सौगात होला
कबो आजु ले अघाईल नईखे एह नेह छोह के बोली पे
जब दिल टुटेला त आंखि से भादो असि बरसात होला
Permalink Reply by संजीव सिंह on February 27, 2011 at 10:11am
Permalink Reply by संजीव सिंह on February 27, 2011 at 10:28am
Permalink Reply by संजीव सिंह on May 5, 2011 at 11:25am
Permalink Reply by Shyam Narain Verma on May 5, 2011 at 5:36pm
Permalink Reply by संजीव सिंह on May 7, 2011 at 1:29pm
Permalink Reply by संजीव सिंह on December 3, 2011 at 4:49pm तू आजा कि राग के मौसम अभी बितल नईखे,
आजा तू कि अभीयो सरेह मे तनी नमी बावे।
गुलाब के खुश्बु से रातरानी के महक तक ले,
सब कुछ बा हमरा गाँव मे बस तहरे कमी बावे।।
Permalink Reply by संजीव सिंह on December 26, 2011 at 9:16pm ऊ प्यार के सबुत देखावत रहे,
आँसू बहा के हमरा के मनावत रहे।
जिनगी मे बस तहरे से नाता बावे,
ऊ हमेशा ईहे हमरा के बतावत रहे।
अब रात मे सुते के फुरसत केकरा रहे,
ऊ रात हमरा के जगावत रहे।
बैचेनी जब हद से जादा बढे लागे,
त ऊ मन भर बतीयावत रहे।
आज...!
ऊ मोहब्बत करे वाला बदल गईल,
जे हर बातमे "हमार कसम" खात रहे।
Permalink Reply by संजीव सिंह on January 25, 2012 at 10:30pm साईन तक ले त हम करे नी
एगो विदेशी भाषा में
मननी हम आज़ाद हो गईनी
बाकीर कवना परिभाषा में
जन्म-दिन पर केक काट के
गाईले सन अँग्रेज़ी में
शादी-बियाह के नेवता भी
छपवाईले सन अँग्रेज़ी में
घोड़ी डोली के स्वागत खतिरा
बैण्ड-बाजा भी अँग्रेज़ी में
टाई कस के सभ बराती
ख़ूब सजे ला लोग अँग्रेज़ी में
सड़क पर नाचेनी सन
जाने कवना आशा मे
मननी हम आज़ाद हो गईनी
बाकीर कवना परिभाषा में
गणतंत्र के ऐह पावन बरषी प
अब ना जियेम कवनो झासा मे
आजे से शुरूआत क देहनी
साईन करेम अपना भाषा मे.
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