Come, let's do something for Bhojpuri...
Permalink Reply by Sudhir Kumar on August 8, 2009 at 4:57pm
Permalink Reply by Sudhir Kumar on August 9, 2009 at 8:25am
Permalink Reply by Sudhir Kumar on August 9, 2009 at 6:28pm
Permalink Reply by Anurag Upadhyay on August 11, 2009 at 4:16pm परमेश्वर जी,
बहुत आसानी से एतना बड सवाल उठा देहनी रउआ...
हम रउआ से सहमत बानी कि आज के जमाना में प्यार ज्यादातर मतलब के चीज हो गइल बा. अगर माई- बाबुजी खिसिया के लइका के कुछ बोल दे तारे त ऊ घर छोड के निकल जाता... 1-2 महीना के अपना प्यार (?) के पावे खातिर 20-22 साल के साथ के एक झटका में ठुकरा देता... कम से कम एकरा के प्यार ना कहल जा सकेला.
प्यार त त्याग सिखावेला, समर्पण सिखावेला, एक संगे रहे के आ सबके संतुष्ट रखे के सिखावेला, आ ओह सब से बढ के खाली देवे के सिखावेला, ओकरा बदले कुछ लेवे के भा पाये के उम्मीद रखे के ना... लेकिन एह कलयुग में आज प्यार भी भौतिकतावादी हो गइल बा, जवन कि हर कदम उठवला से पहिले ओकरा से का फायदा होई, इ देखेला.
अगर सांच कहल जाव त ज्यादातर लइका- लइकिन के प्यार आजकल सुन्दरता (शारीरिक आकर्षण) से शुरु होला... आ एह में ऊ समर्पण ही ना आ पावेला, कि ऊ अपना अंजाम तक पहुँचो... प्यार कबो शारीरिक सुख के, चाहे शादी के बंधन के मोहताज ना होला... इ त बस दोसरा के खुश देख के खुश रहे के सिखावेला, पर रउये बताईं, आज काल्ह केतना लोग अइसन प्यार करेला?
जहाँ तक भाई-भाई चाहे अपना परिवार में प्यार के बात बा, त इ रउआ से छुपल नइखे कि कइसे लोग अपना स्वार्थ खातिर परिवार के टूकडा- टूकडा क रहल बा, आ कई जगह त भाई- भाई दुश्मन हो जाता लोग, आ माई- बाबुजी के बुझात नइखे कि अपना जमीन- जायदाद के बँटवारा त क दिहल लोग, पर अपना निःस्वार्थ प्रेम के बँटवारा कइसे करो लोग?
एगो फिलिम आइल रहे "बागवान", जवन कुछ भी ओहमें देखावल गइल रहे, उहे शायद परिवार के ताना-बाना हो गइल बा भारत में. आदमी एतना स्वार्थी हो गइल बा कि खाली स्वार्थ खातिर कई महीना तक रात-रात भर जागे वाला माई-बाप के दर्द भी नइखे समझ पावत. रउआ अलग रहीं, एहमें कवनो दिक्कत नइखे, लेकिन कम से कम ओह माई- बाबुजी के बोझ त मत समझीं, जे रउआ के पाल-पोस के एतना बड बनवलस...
परमेश्वर जी, हम त इहे कहब कि कम से कम एह तरह के स्वार्थी रिश्ता के प्यार के नांव मत दीं, ओकरा अलावा कुछ भी कह सकेनी... (वइसे हर जगह कुछ ना कुछ exception होला, पर हम ज्यादातर लोगन के बारे में बात क रहल बानी, ओह कुछ लोगन के बारे में ना).
राउर विचार के इंतजार में...
राउरे आपन,
सुधीर कुमार
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