Come, let's do something for Bhojpuri...
प्रणाम आ जय भोजपुरी,
जय भोजपुरी परिवार के भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन के आयोजन ना सिर्फ हमनी लोगन खातिर एगो यादगार घटना बन गइल, बल्कि 1 लाख से बेसी लोगन के जमावडा के साथ जय भोजपुरी परिवार एह मिथक के तूरे में भी कामयाब रहल कि ऑनलाइन वेबसाइट जमीनी स्तर पर काम ना कइ सकेले।
एह सम्मेलन से जुडल खबर एहिजा देखल जा सकेला:
एक लाख लोग जुटल भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन में
छा गइलन आईजी गुप्तेश्वर पाण्डेय...
मंच पर भावुक भइलन भरत शर्मा
भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन : झलकियां
आपन बात : ई सम्मेलन खास रहल
जय भोजपुरी परिवार का ओर से एह अवसर पर नवीन भोजपुरिया (दुबई), संजय कुमार सिंह (सिवान), नवीन सिंह परमार (सिवान), पंकज प्रवीण, मोंटू सिंह, शशि कुमार सिंह, राजीव भोजपुरिया, सत्येंद्र कुमार उपाध्याय, ब्रजभूषण चौबे (सब दिल्ली से), बृज किशोर तिवारी (सोनभद्र), अवनीश तिवारी (पटना), अमित झा (मुंबई), अभिनंदन गुप्ता (बलिया), अजीत राय (भोपाल), ज्योति राय (देवरिया), भास्कर रंजन (जयपुर), पंकज कुमार, दीपक कुमार, सोनू (सब बक्सर से), अउर सुधीर कुमार (जमशेदपुर) उपस्थित रहलन। हमनी का चाहेब कि ई लोग आपन अनुभव एहिजा बाँटो, अउर परिवार के बाकी लोग भी एह कार्यक्रम पर आपन प्रतिक्रिया एहिजे दे सकेला।
एह सफलता पर सब केहु बधाई देत हमनी का रउआ लोगन से आगे भी अइसने सहयोग के उम्मेद राख तानी। आईं, भोजपुरी खातिर कुछ कइल जाव...
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on December 20, 2011 at 10:14pm जान परान सुखल रहे , डराईबर के गारी प गारी दिआत रहे , संजय भाई बेरि बेरि आ के पुछस की कहा ले आईल बा ... आ सुधीर जी सांच पुछी त हमरा गांव से पंजवार के दुरी करीब करीब 70 किलोमीटर बा रोड परी , आ रोड रउवा देखते बानी बाकी गाडी के डराईबर 57 मिनट मे बैकड्राप ले के आ गईल बा ! प्रधान जी कहत रहले की हम खाली एक हाथे मोबाईल आ आ दोसरा हाथे गाडी के उपरा धरे वाला हैंडिल धईले रही गईनी लकडिया के गाडी मे बईठले रही गईनी !
कहत रहले की गाना बाजत रहे ले ले अईह पिया चुनरिया लाली लाली सजना ....
बाकी कईसहु पहुंचल आ फेरु .... अब हंसी बरत बा बाकी तब जीउ जान एक भईल रहे सुखि के ;-)
जय हो जय भोजपुरी ,, आ हम इहे कहब की जब नीमन होखे के रहेला त सब नीमन होला :-)
बिलकुल सही कहत बानी भईया और हम अईला के बाद जब ड्राईबर से पूछनी त कहत रहन कि भईया हमरा केवल पंजवार दिखत रहे स्पीड के काँटा ना...
आ पोल्थिन्वा के कैसे भुला गईल बानी भईया????? लादुइया रखे वाला???
हा हा हा हा हा
जवन जवन चीज़ आज सोच के हमनी का हसत बानी जा उ सब चीज़ ओह दिन फेफरी परा देले रहे का कईल जाई दादा...
जय हो जय हो
Permalink Reply by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on December 21, 2011 at 10:55am sahi kahni montu bhai jee ...............u chana waala ke chana garda rahe aajuo iyaad pari jala !
jai matti jai bhojpuri !
Permalink Reply by Pankaj Praveen on December 26, 2011 at 8:10pm भोजपुरिया स्वाभिमान -२ के एक एक एक पल अविस्मरनीय रहल ...अउर एगो भोजपुरिया अउर जय भोजपुरी परिवार के एगो सदस्य होखला के नाते ही हमरा भी एह आयोजन के हिसा बने के मौका मिलल..इ हमरा खातिर गर्व के बात बा..कार्यक्रम के आयोजन के एक एक पल जेकरा समय हम उपस्थित रहनी , रोमांचित करे वाला रहल ...लेकिन एक बात के अफ़सोस रही की कार्यक्रम के कुछ हिस्सा में हम उपस्थित ना रहनी काहे की उहा के लोग एक ही बात करत रहे कि "जे आइ जी साहब के विचार भा उहा के उपस्थिति में आयोजन में ना रहे उ कुछ ना देखलस "
Permalink Reply by Brij Kishor Tiwari on December 26, 2011 at 10:18pm जय भोजपुरी आ प्रणाम .............
पंजवार में दू गो बड़ा बढ़िया खीसा भईल ...............जे कि कुछे लोग जानत बाडन
खिसा नम्बर एक ........
सांझी खान, जब हम, एक राउंड खनवा निपटा दिहुवी , त ज्योतिया के देख के दया लाग गउवे , पूछनी ....का जयोति खाना वाना भईल ह , बेचारी संकोच में कुछ बोलबो ना करे .......केहू तरे दुनो भाई बहिन ( अजित आ जयोति) के खाए खातिर तैयार कईनी ,कहनी चलs लोग हम खियावतानी नु .............दुनो लोग के खाना खाये वाला रूमवा में कुर्सी लगवा दिहनी ,दूनो लोग के कुलही चिझु परोस परोस के खियावत रही , ओही जगहा पर , शशि जी पहिलही से पूरी तूरत रहनी .........आ पूरी तुरे में एकदम मस्त ........उहे मस्ती में खा पी के, उहा का चल दिहुवी ...........आ आपन मोबाईलवा ओहिजा भुला गौवी ..........मोबाईल पर हमार नज़र पर गईल .............कहनी कि पहिले मोबाईल हाथ में आवे द ! फेरु देखल जाई ..........कि शशि भाई के कईसे छकावे के बा .............
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धई के हम रूमवा ले बहरी जातानी आ धई के रूमवा में आवतानी ...............कि शशि भाई केने बानी ,अभिये त एहिजुगे रहनी ह ,
लेकिन काहे के..... शशि भाई के हाथ में नया नया कैमरा ,आ मंच पर भरत भईया ...........
खाना खात......... हाथ धोवत........फुल स्वीटर के बाही से मुह पोछ्त....शशि भई स्टेज के लगे .............
उनका के कहाँ होश कि हमार मोबाईल कहाँ बा ...........???
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पहुचनी उनका लगे ...........शशि भाई होने आपन कैमरा सईहारत लागल बानी ..........एकहू शोट मिस मत हो जाव
मन में आईल (अब छोटका भाई के ढेर परशान का करी ??)
कहनी ,....तनी आपन मोबाईल दी त ..फोन करे के बा ...हमार मोबाईल में बैटरी नईखे !!!
...........कैमरा के डोरी हाथ में लपेटत..........,हमरा ओरी तनी खिसिया के ताकत ( अरे भाई ..काहे ना खिसियास बस उहा का बटन दबावे वाला रही कैमरा के.... आ हम टोक दिहनी )
कुलही पैईट के पाकिट ले ,बुशत के पाकिट ले.......... हाथ से ठोक ठोक के देख लिहनी ........मोबाईल रहित तब नु मिलित ...?
अब त, शशि भाई के चेहरा पर ले फोटो खिचे वाला कुलही ख़ुशी हवा हो गईल .........
लेकिन का जानी का भईल ...........भगवान् जानस .........शशि भाई के चेहरा तुरते हरियर हो गईल .........
आ मुसुक गईनी उहा का ..........
कहतानी, रउवा मिलल ह का हमार मोबाईलवा ..........???
हमरो के मुश्की छूट गईल .........!!!
कहनी कि ............ ली अच्छा
खिसा नंबर दू .........
जवना पुस्तकालय में हमनी का रुकल रहनी जा ,हमनी के सब समान ओहिजे रहुवे, साँझी खान सबका के जाड़ लागे लागल ,दिन में त खाली बुशट पर सबकर काम चल गईल .........लेकिन राती खान बिना स्वीटर भा जाईकिट के चले मान के ना रहुवे..........
जेके जेके, जईसे जईसे, जाड़ लागे, ओहिजा से(पुस्तकालय से ) स्वीटर भा जाकेट जा के लियावे .............
ओही चक्कर में ........पुस्तकालय के चाभी कही हेरा गईल .........
अब केकरा से हेरायिल ..........हा हा हा हा हा ( नाव ना लिखब )हा हा हा हा हा ........
भईल कौनो बात ना ........दोसर चाभी से खोला जाई ......
पता लागल दोसर चाभी भी नईखे ओह ताला के .............जब परोगराम ख़तम भईल ...........
तब धयिलस फिकिर कि अब सुतल कईसे जाई ..........?
भईल कि ना होखे त ताला तुराव ........?
ताला बहुत बड़ त, ना रहे .........बाकिर, कमजोरो ना रहे !
ओह पंजवार के धरती पर बीरन के त कमी ना रहे ...........लेकिन बहुत बड़ समस्या ई कि ..........राती के अढाई तीन बजत बा ...........
सभे कोई बहरे से आईल बानी जा ............आ ओही राती ,धाये-धाये,ठाए ठाए कई के ताला तुरल जाई ......... कजुक कउनो बड समस्या मत बन जाव .......बाकिर कौनो राह भी ना रहे .........कईल का जाव ........
केहू इटा लियावता .........,केहू हथही तलवा के ममोरता ...........ताला काहे के टूटे जाव .......
एकाध जोर हमहू लगवनी ..........फेरु से भूख मति लाग जाव ..........एह डरे हम छोड़ दिहनी ........
तले, जवन टेम्पू से पुस्तकालय पहुचल रही जा ,डराईबर एगो बड़का पेचकस दिहलस ............
फेरु भईल उहे ...........
सभे राजीव जी के ओरी देखल ...........कहल गईल ............
.............का चुपी साध रहा बलवाना .............
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अब का............ राजीव जी ...खाली पेचकस्वा से, उ तलवा के "छू भर" दिहनी ..........
जादू लेखा ..........भक दे तलवा मुह बा दिहल ...........
फेरु मत पूछी सभे .........
केहू जुतवा खोलल .........केहू, उहो ना .........
एक बार बोलल गईल..............जय भोजपुरी ...........
आ, भर देह रजाई में ........
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जय भोजपुरी जिया भोजपुरी...
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on December 26, 2011 at 11:29pm हा हा हा हा हा हा हा
चाभी भुलईला के त हम जानत रहनी बाकी तुरईला के ना आ मोबईल भुलईला आ मिलला के हम ना जानत रहनी ह हा हा हा हा हा हा हा बहुत कहानी अभी बाकी बा !
जय भोजपुरी जिआ भोजपुरी
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