Come, let's do something for Bhojpuri...
प्रणाम आ जय भोजपुरी,
जय भोजपुरी परिवार के भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन के आयोजन ना सिर्फ हमनी लोगन खातिर एगो यादगार घटना बन गइल, बल्कि 1 लाख से बेसी लोगन के जमावडा के साथ जय भोजपुरी परिवार एह मिथक के तूरे में भी कामयाब रहल कि ऑनलाइन वेबसाइट जमीनी स्तर पर काम ना कइ सकेले।
एह सम्मेलन से जुडल खबर एहिजा देखल जा सकेला:
एक लाख लोग जुटल भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन में
छा गइलन आईजी गुप्तेश्वर पाण्डेय...
मंच पर भावुक भइलन भरत शर्मा
भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन : झलकियां
आपन बात : ई सम्मेलन खास रहल
जय भोजपुरी परिवार का ओर से एह अवसर पर नवीन भोजपुरिया (दुबई), संजय कुमार सिंह (सिवान), नवीन सिंह परमार (सिवान), पंकज प्रवीण, मोंटू सिंह, शशि कुमार सिंह, राजीव भोजपुरिया, सत्येंद्र कुमार उपाध्याय, ब्रजभूषण चौबे (सब दिल्ली से), बृज किशोर तिवारी (सोनभद्र), अवनीश तिवारी (पटना), अमित झा (मुंबई), अभिनंदन गुप्ता (बलिया), अजीत राय (भोपाल), ज्योति राय (देवरिया), भास्कर रंजन (जयपुर), पंकज कुमार, दीपक कुमार, सोनू (सब बक्सर से), अउर सुधीर कुमार (जमशेदपुर) उपस्थित रहलन। हमनी का चाहेब कि ई लोग आपन अनुभव एहिजा बाँटो, अउर परिवार के बाकी लोग भी एह कार्यक्रम पर आपन प्रतिक्रिया एहिजे दे सकेला।
एह सफलता पर सब केहु बधाई देत हमनी का रउआ लोगन से आगे भी अइसने सहयोग के उम्मेद राख तानी। आईं, भोजपुरी खातिर कुछ कइल जाव...
Permalink Reply by Brij Kishor Tiwari on December 6, 2011 at 7:35am
Permalink Reply by Pankaj Praveen on December 6, 2011 at 9:49pm प्रणाम आ जय भोजपुरी
admin ji parnam a jai bhojpuri |
bahut niman lagal bhaiy ae sab dekh ke a sun ke |
bahut bahut badhai ba raua ke a sab bhojpuria bhai ke |
jai bhojpuri
sanjay pandey
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on December 11, 2011 at 4:53am एडमिन जी प्रनाम आ जय भोजपुरी
आजुवे अईनी ह तनी एक दु दिन लागी अपना के सरिहारे मे , एक हाली नीमन से सरिहार लेबे दी फेरु हम सरिहार के नीमन से लिखब !
आ मय लोग से हम निहोरा करब की रउवा सभ भी आपन आपन बिचार लिखी !
एह से उत्साह त मिलबे करेला नीमन बाउर जाने के भी मिलेला जवना के फायदा आगे के कार्यक्रम मे मिलेला ।
जय भोजपुरी
Permalink Reply by Vratraj Dubey 'Vikal' on December 12, 2011 at 6:39pm करुनाकर कथा के किरपा आ मनोज बाबू के मनगर मदद के बल पर हमरा जय भोजपुरी परिवार से जूरे के मौका मिलल। जय भोजपुरी परिवार के बेवहार, विचार आ संस्कार के संगम हमरा के जंगम बना देहलस। सरधा सतकार से भरल होनहार करनधारन के दीदार खातिर हम पंजवार पहुँच गइनीं। उहाँ भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन के आयोजन रहे आ हमरा ओ अवसर पर भोजपुरी माई के ममता पावे के परयोजन रहे। हम उहाँ का देखनी आ का पवनी ई बतावल येगो गौरव के बात बा।
हम भोजपुरी माई के गोड़ पर माथ नवाव तानी आ अपना अनुभव के कुछ बात बताव तानी।
अनुभव के फूल-
(१) सबेरे परभात फेरी से लेके १ बजे रात तकले लगातार अपार भीर के सँघे कवनो समारोह देखे के ई पहिलका अवसर भेंटाइल।
(२) आयोजन के सफल बनावे खातिर देस-विदेस में रहे वाला जवानन के जूटान जोस के परवान पर लउकत रहे। संस्कार में समरपन, बेवहार में विनमरता, विचार में बड़प्पन, आचार में आकरसन से भरल जय भोजपुरिया समाज के सहयोगी सुझाव आ तेयागी तेवर हमरा भीतर अटूट सनेह के सरिता बहा देहलस।
(३) मंच से भोजपुरिया लइकन के भोजपुरी पिआर, परचार आ ललकार सुन के मन बाग-बाग हो गइल।
जवना कार में लइकन के ललकार, जवानन के जयकार आ बुढ़वन के विचार जूट जाई ओकर निस्तार आ अधिकार अब केहू के रोकले ना रोकाई। हमरा बुझा गइल कि ई भोजपुरी स्वाभिमान समारोह विकास के बिहान के वीना बजा रहल बा।
आईं सब केहू मिल के स्वाभिमान से गाईं-
हमरा ई नाज बाटे हईं भोजपुरिया।
माटी हमर चन्नन हवे बोली हऽ मिसिरिया।।
हमरा ई नाज बाटे हईं भोजपुरिया।।
दुनिया में रहीं कहीं माटी ना भुलाइने
माटी हमर माई हवे महिमा के गाइने
माटिये के देहल हम खाइने खिआइने
माटिये के टीका कs माटी में लोटाइने
अनपुरना बसें हमर माटी के डेहरिया।
हमरा ई नाज बाटे हईं भोजपुरिया।।
कबुरी करेली हमरा दुअरा पे गैया
भोरे-भोरे फुदकेली आ के गौरेया
मौसी बिलाई लेली हमरो बलैया
हमनी के दुअरा पे बाजेला बधैया
करछेला कौआ नित ओरिया बँडेरिया।
हमरा ई नाज बाटे हईं भोजपुरिया।।
करम-धरम हमनी के सेवा सतकार हऽ
अतिथि जे आवे घरे देवता हमार हऽ
प्यार हमर पूँजी हवे मनवा उदार हऽ
खाँटी परिपाटी हमर नीक बेवहार हऽ
लछमी बोलेली हमरा घर के बहुरिया।
हमरा ई नाज बाटे हईं भोजपुरिया।।
भासा भोजपुरी हमर सबसे पुरान हऽ
सबका से समरथ हवे सबसे महान हऽ
ममता के मान हवे सिव जी के सान हऽ
येकरे देहल सजी दुनिया के ग्यान हऽ
येकरे जरावल हवे दया के दिअरिया।
हमरा ई नाज बाटे हईं भोजपुरिया।।
हमनी के धन-दौलत अँखिया के लाज हऽ
सरधा से भरल भोजपुरिया समाज हऽ
मनई के आदर कइल इहाँ के रिवाज हऽ
सादगी के जिनगी पे हमनी के नाज हऽ
बिहरें बरतराज इहाँ भोला भंडरिया।
हमरा ई नाज बाटे हईं भोजपुरिया।।
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on December 12, 2011 at 7:28pm गुरुजी राउर आसिरबाद रुपी ई एक एक सबद हमनी के भीतरी जोस भरि रहल बा आ एह सबदन मे जवन नेह छोह आ आसिरबाद मिल रहल बा ओह के हम अब सबदन से बान्हल नईखी चाहत , बस अतने कहब की राउर ई आसिरबाद भोजपुरिया लोगन खाति अमरित से कम नईखे !
जय भोजपुरी
Permalink Reply by Sudhir Kumar on December 13, 2011 at 11:38am गुरु जी, प्रणाम आ जय भोजपुरी,
राउर एक एक शब्द पढला के बाद आँखि में लोर भर गइल बाटे। अब कुछो लिखल मुश्किल बा, बस एतने कहब कि रउआ लोगन के आशीर्वाद से नवहा लोगन के ई टीम एही लेखां आगे बढत रही... जय भोजपुरी...
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on December 12, 2011 at 8:15pm एडमिन जी प्रनाम आ जय भोजपुरी
हम अपना बात के सुरुवात कहा से करी ई बुझात नईखे आ जतना दिल से निकलत बा ओह के हम लिखे के कोसिस करत बानी ।
हम अगस्त मे भारत आईल रहनी आ हमरा छव महीना प छुटी मिलेला बाकी एह सम्मेलन खाति बिना कम्पनी के बतवले बिना छुटी मिलले हम टिकट कटा ले ले रहनी जवन की बाद मे कईसही घींच घांच के टानि टुनि के तनि कमे दिन खाति मिल गईल रहे , आ हतना जोगाड लगावे के कारन इहे रहे कि पिछिला साल के जवन आदत धरा गईल रहे उ अब छुटे आ टुटे वाला नईखे उ अदतिया दिन प दिन बढते जात बिआ आ भगवान एह अदतिया के आगहु एहिंग बरिआर राखस बस अतने मांगत बानी उपर वाला से ।
एह कार्यक्रम मे पहुंचे से पहिले हम कतना फोन संजय भाई प्रवीन जी सुधीर जी आ मोंटु भाई के कईले होखब उ हमही जानत बानी आ ई लो हमरा के कतना मने मन गरियवले होई लो ई इहे लो जानत होई ( रात दिन सांझ सबेर कबहु फोन कई दी ) बाकी एह लोगन के गरिया ( जे देले होई लो त ) हमरा सुनाईल ना एह लोगन के जोश जवन फोन प बतियावे मे मिलत रहे उ अउरी टानत रहे सिवान , पंजवार आवे खाति ।
टाईम प फ्लाईट मिल गईल , दिल्ली पहुंचनी त चेक करे खाति मोबाईल मे भारत वाला सिम डलनी , आहि हो दादा , खुसी के ठेकाना ना रहे ई देखि के , बाकी पहिला फोन गांवे लगवनी आ ओकरा बाद देखत बानी त बैलेंस 23 रुपिया के बा , अब सबेरे 7 बजे केकरा के जगाई आ कहा से रिचार्ज होई इहे सोचत , मोंटु भाई के फोन मेरवनी आ इहा के गर्मजोशी के देखत , हम 200 से पान स प चली अईनी आ बेचारु ई जोश मे पान स के रिचार्ज कई देहले । फेरु का , कबो सुधीर जी त कबो बृज भाई त कबो सतेन्दर भाई त कबो प्रवीन जी त कबो मोंटु भाई आ एहि मे बेरि बेरि संजय भाई के फोन होखे लागल , अपडेट लियाये लागल कईसे करे के बा के के केने बा के तरे आवत बा सब होखे लागल , पटना पहुंचनी राईट टाईम आ एजुगा बस इचिका से खा के ( संजय भाई किहा राति खा खाये के बेवस्था रहे एहि से ) गाडी आईल रहे निकल गईनी , सुधीर जी के छपरा से ले बे के रहे तले ले मालुम परल की इहा के छपरा से सिवान खाति निकल गईल बानी ।
जाड त असो ना परल ह पिछिला बेरि लेखा बाकी तबो एस यु भी के माजा लेत , गाँधी पुल प हडहडा के निकलत रिविर गंज मे आधा घंटा से बेसी जाम मे फंसत , 10 बजे ले ओहि जगहिया सुधीर जी आ संजय भाई भेटा गईल लो । हमरा संगे छेडी गांव के पुरनका प्रधान जी भी रहनी आ उँहा के पिछिला बेरि के मय चीझु बतावत संजय भाई के दुआर प पहुंचनी जा , बईठकी , चर्चा , कईसे का का आदि चीझन प बात होखे लागल आ कुछ इहे बतियावत बतियावत अढाई तीन बजि गईल , फेरु सुतल आदमी आ सबेरे , एक हाली फेरु , करु तेल वाला नहान , पहिले मुडि मे सेम्पु , फेरु देहि मे साबुन आ ओकरा बाद खांटी गांव के तेलहन के पिसवा के बनल करुवा तेल के देहि मे पोत पाति के नहाईल गईल तब मिजाज फ्रेशे ना एक दम टनक हो गईल ।
सिवान गईल आदमी , प्रेस कांफ्रेस आ एह मे तंग जी के एगो बात कि
सनई असि सारि सारि पानी मे पटक पटक
कुवार के घाम मे तानि के पसार देब
( लईनिया तनि गबडात बानी )
ई भाटपार रानी के बिचित्र जी के लिखल कुंवर सिंह खंड महाकाव्य से कुंवर सिंह के एगो डायलाग के बारे मे रहे कि भोजपुरी मे एक से बढि के एक उपमा आ भाव के ताव देखावे के तरिका बा जवन अउरी कवनो भासा मे हाली से भेटाला ना , आ ना भेटाई , तंग जी एगो बहुत ही बेजोड आ अनमोल धरोहर बानी भोजपुरी खाति उँहा के आपन एगो बात जवन बुला दोहा मे भईल रहे बतवनी की उर्दु मुशायरा मे जब उहा के शायरी पढत रहनी त हाला होखे लागे , दोसर पढे तबो हाला होखे लागे फेरु पुछवाल गईल सुने वाला लोगन से की का बात काहे त उ लोग कहल की तंग जी से भोजपुरी मे कुछ सुनल चाहत बानी जा । त कुछ अईसने बात से प्रेस कांफ्रेंस खतम भईल आ ओकरा बाद सिवान के कचहरी रोड मे शुरु भईल देहि के रगरा रगरी जब दिल्ली से आईल राजीव भाई , मोंटु भाई , सतेन्दर भाई , भास्कर भाई आदि लोगन से देहि रगरावल भईल , आ एकरा बाद कम्प्युटर वाटिका माने राजेश तिवारी जी से उँहा के दोकानिये मे पटका पटकी , चाह खाति मारामारी भईंस के लगे फोटो खिंचावल शुरु भईल त उ माहौल कुछ अलगे बयान करत रहे । सब मिला के माहौल एक दम टांठ आ बरिआर बनत रहे जवना खाति जय भोजपुरी के सदस्य लोगन के प्रयास , नवचेतना के लोगन के प्रयास कई महीना पहिले से शुरु भ गईल रहे ।
सिवान से खरीददारी आ आ संजय भाई के देखा देखी लखानी के चप्पल के खरीददारी कईला के बाद अन्हार भईला ले पंजवार पहुंचला के बाद आ एहि मे बृज भाई के फोन केने बानी केने बानी अभिनन्दन से बात , मोंटु भाई के अदरख आ पालकी ले के भर सिवान डगरल कुल्हि कई गो याद जवन लिखला मे ना समेटाई रहे आ तलेले एगो अदभुत सुख मिलल एगो भाई आ एगो बहिन के देखि के , जी अजीत भाई आ ज्योतिया के सिवान मे आईल एह प्रोग्राम मे उपस्थिति के देखि मन एक दम खुश हो गईल आ लागे लागल की धीरे धीरे सब नीमन होखे जात बा , आ एहि घरिये गुरु जी ( व्रतराज दुबे बिकल जी ) आ मनोज भाई के दर्शन माने सोने प सुहागा जईसन हो गईल , आ एहि कुल्हि के संगे संगे प्रभा प्रकाश डिगरी कालेज प पहुंचला के बाद मैदान देखि के इहे लागल की कतनो आदमी आ जाउ ई मैदान भरे वाला नईखे आ कुछ अईसने सोचत , दुबई से ले के गईल टार्च के रोशनी मे केनियो लिट्टी लिट्टी सुनाये लागल आ फेरु का चांपि के कोन सम्हार के ढीठे खाईल आदमी , हमरा देखे से अबकी के बृज भाई के सुधीर जी दबा देले रहनी लिट्टी खाये मे ।
भोरे भोरे भेंट होत बा दिल्ली वाला एगो अउरी टीम से एह टीम के इंतेजार मे हम राति भर जागल रहि गईनी जवना पे प्रवीन जी शशि भाई अवनीश भाई आदि लोग पहुंचल खुशी के बिस्फोट प बिस्फोट होत रहे ।
अगिला दिन बडका बिस्फोट ( खुशी अईसन फाटल की सगरे खुशी खुशी छितराईल रहे बस खुशी के बटोरे के रहे ) माने कि प्रभात फेरी , एह के बारे मे हम कुछ ना कहब , अपना मोबाईल से एगो बिडियो ले ले बानी देख लेब सभे उ बिडियो मय कहि दी , आ दुसरका बिस्फोट , स्वागत मे लागल स्वागत द्वार , बीर कुंवर सिंह द्वार , मंगल पांडे द्वार , प्रभावती द्वार , राजेन्दर बाबु द्वार आ नेह छोह से स्वागत नवचेतना के ओरि से गांव वाला लोगन के ओर से कस्तुरबा इंटर कालेज के ओर से , माने अब मन ना अगराउ त कब अगराउ आ फेरु का लउकत बा , भिखारी ठाकुर मंच । बिस्वास करी सभे हम अपना जिनगी मे बहुत सम्मेलन देखले बानी भोजपुरिये ना कई गो सम्मेलन बाकी कवनो सम्मेलन मे माटी से अपना लोगन से जमीन से ओह जमीन के लोगन से आ भाषा खाति एह तरह के नोह छोह आ ओह नेह छोह के प्रस्तुतिकरण आजु ले ना देखले रहनी ह ।
कापी बटाये लागल प्रभात फेरी के बाद लड्डु दियाये लागल लोगन के आवाजाही शुरु हो गईल , एहि मे एगो अईसन आदमी से भेंट भईल जेकरा सोच के हम दिवाना त बहुत पहिले से रहनी बाकी सोझा सोझी देखि के आ बतिया के मन जुडा गईल । जी अमित झा , एगो फिल्मकार , निर्देशक , कहानी आ संवाद लिखे वाला भोजपुरी फिल्म माटी खाति जेकरा इनाम मिलल रहे , 20 गो से बेसी धारावाहिक आ 8-9 गो से बेसी फिल्मन खाति जे कहानी आ संवाद लिखले ओह आदमी से जे भोजपुरी मे फईलल अश्लीलता के धुर बिरोधी हवन आ बिरोध सोझा सोझी कई रहल बाडन । अमित भाई आपन कई गो संस्मरण हमनी के सोझा रखनी जवना के सुनला के बाद लागल की लोग भोजपुरी खाति परदा के पीछे भी लागल बा । आ संगे संगे एगो बात हम दिल खोल के कहल चाहब की जमीन से जुडल आदमी माने की डाउन टु अर्थ आदमी के बात होई त हमार अंगुरी साफ साफ अमित भाई के ओरि उठ जाई ।
खैर आगे बढल जाउ , हम ई ना कहब की का भईल काहे की उ पहिलही कहा चुकल बा , बस हम अतने कहब की हमरा आंखि मे लोर , चेहरा पे खुशी , दिल के बढत धडकन , गोड कांपत , ओठ हिलत , आंखि गोलियात बड बड होत , गमछी के लोर से भीजत पुरा दिन आ राति के एक बजि गईल आ एह कुल्हि से अपना आप के सम्हारे खाति जब भरत भईया गवले की " हम त चाहीला बिक जईती प्यार मे " तब मय देहि झाका झुमर करे लागल ।
हम जानत बानी की शब्द बेसी बाडन स बाकी हम इहो जानत बानी की एह प्रोग्राम के अपना शब्दन मे हम ना बता सकेनी काहे की हमार बेंवत , हमार औकात ओतना हईये नईखे , हम ओह बिहंगम , अदभुत , लाजवाब , बेजोड , बरिआर ,जिआ हिया के सुख देबे वाला दृश्य के अपना अंगुरी से अपना लैपटाप से लिख के बतावे के बेंवत आ औकात हमरा नईखे ।
बस इहे बुझि ली सभे की भोजपुरी के नीमन खाति हम अब तन मन धन से कई गुना तरिका से लागब ई हमरो मालुम नईखे बस अतना मालुम बा की आगे पिछिला से ढेर नीमन करे खाति हम अपना के झोंकि देब ।
एगो दुख भईल आ ई हमार निजी दुख ह , कई लोग कही के ना आईल , सब केहु के आपन आपन मजबुरी बा , एह से हम कुछ कहब ना बाकी हम अतना जरुर कहब की एक हाली उँहा सब के अपना दिल प जरुर हाथ राखि के सोची की एह बात के ....
हम जानत बानी की रउवा सभ के नजर मे ई ढेर लिखाईल बा , बाकी बिश्वास करी हम प्रोग्राम के दिन के बारे मे इचिको नईखी लिखले !
आगे खाति कई गुना जोश से हम लागल रहब बस अतने कहब
जय भोजपुरी
Permalink Reply by amitesh on December 13, 2011 at 1:27am ापने विदेस से पहूंच गईनी आ हमनी देसे मे रह के ना गईनी सन का कहीं एकरा खातिर ..अब पछतावे का होत..बाकी सम्मेलन के सफ़ल योजन ला शुभकामना आ इ कारवां चलत रहे..
Permalink Reply by Sudhir Kumar on December 13, 2011 at 11:46am जय हो नवीन भाई, एकादम सटीक अंदाज में, आ नपल-तुलल शब्दन में सब कुछ लिख देहनी रउआ। पढला पर एक-एक चीज आँखि के आगे घुमत लउकता... हमहुँ लिखे के कोशिश कइले रहनी ह, लेकिन तनी लमहर हो गइल बाटे। एडिट कइ के रात ले पोस्ट करे के कोशिश करब...।
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