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ई कईसन लडाई गरीबन खातिर ? छत्तीसगढ़ में नक्सली हमला, 73 जवान शहीद

गरीब आ विकास के नाव पे ई नरसन्हार , ई कईसन लडाई हवे गरीबन खातिर , का एह तरह के लडाई से गरीबन के स्थिति मे सुधार हो जाई ?

रायपुर।। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के गश्ती दल पर मंगलवार को हमला कर दिया, जिसमें 73 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए। मरने वाले सुरक्षाकर्मियों की संख्या और ज्यादा हो सकती है। पिछले चार दिनों में सुरक्षाकर्मियों पर नक्सलियों का यह तीसरा हमला है। 

पुलिस के अनुसार दंतेवाड़ा जिले के चिंतलनार इलाके में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के जवानों पर हमला बोला, जिसमें 73 से ज्यादा
सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए । इस घटना के बाद दंतेवाड़ा में जवानों ने व्यापक खोजबीन अभियान शुरू कर दिया है। बचाव कार्य भी जोरों पर हैं। नक्सलियों के इस हमले से गृह मंत्री पी. चिदंबरम हैरत में हैं। 

हमारे सहयोगी टीवी चैनल टाइम्स नाउ के अनुसार नक्सलियों ने उस समय सीआरपीएफ के जवानों पर हमला कर दिया, जब वे गश्त लगा रहे थे। घटनास्थल से घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए बस्तर जिला मुख्यालय से एक हेलिकॉप्टर भेजा गया है। बस्तर के डीआईजी टी.जे.लांगकुमेर ने कहा है कि यह सुनियोजित नक्सली हमला है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने पहले सीआरपीएफ के बंकर को उड़ा दिया और फिर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। 

गौरतलब है कि 2 अप्रैल को माओवादियों ने उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में जवानों पर हमला किया था, जिसमें कई सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस घटना पर दुख जताया है। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ की जगह पर खोजबीन करने वाले सुरक्षाबलों पर भी नक्सलियों की ओर से गोलीबारी की जा रही है। रमन सिंह ने कहा कि नक्सली समस्या का हल एक दिन में नहीं निकल सकता और प्रशासन को बेहद सावधान रहने की जरूरत है।


स्रोत - नभाटा

लाल झंडों के नीचे ये लोग कसम खाते हैं कि जब तक अपने उद्देश्यों को प्राप्त नहीं कर लेंगे चैन से नहीं बैठेंगे. ये कार्यकर्ता अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होते हैं और इनके दिमाग में इतना जहर भरा जाता है कि वे सही और गलत की पहचान करना ही भूल जाते हैं.

ये माओवादी गुरिल्ले हैं – जिन्हें अब आतंकवादी कहा जा सकता है. ये आतंकवादी विदेशी नहीं हैं, घर के ही हैं और घर में ही आग लगा रहे हैं.

(सरकार ने माओवादियों पर लाल आंख करते हुए उन्हे आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है. अब माओवादी भी लश्कर ऐ तैयबा, उल्फा और हिजबुल मुजाहिद्दीन की श्रेणी मे आ गए हैं.गौरतलब है कि बंगाल की वाममोर्चा सरकार शुरू से ही माओवादियों पर प्रतिबंध के खिलाफ रही थी और कहती आई थी कि प्रतिबंध लगाने से कुछ नही होगा. परंतु लालगढ में माओवादियों ने ही वाम सरकार के कई कार्यकर्ताओं को मार डाला और इलाके पर कब्जा कर लिया. अब माओवादियों को आतंकवादी संगठन घोषित करने पर भी विरोध शुरू हो गया है और जाहिर है वामदल इसमें सबसे आगे हैं.)

नक्सलवाद की शुरूआत:

नक्सली अभियान की शुरूआत पश्चिम बंगाल के दार्जीलिंग से हुई थी. 1967 में सीपीआई(एम) के कुछ कार्यकर्ताओं ने नक्सलबाड़ी के जमींदारों के खिलाफ बगावत कर दी थी. उस समय यह एक छोटा सा गुट हुआ करता था, लेकिन समय के साथ यह गुट पूरा वटवृक्ष बनता गया. 2004 इस आंदोलन के लिए बहुत महत्वपूर्ण था. इस वर्ष सभी छोटे छोटे गुट आपस में मिल गए और भारतीय कम्प्यूनिस्ट पार्टी (माओवादी) का गठन हुआ.

maoist


क्या चाहते हैं माओवादी?

माओवादियों को वर्तमान शासन व्यवस्था पर विश्वास नहीं है और वे इसमें आमूल चूल परिवर्तन चाहते हैं. उन्हे लगता है कि वर्तमान शासन पद्धति शोषण करती है और गरीबों, महिलाओं तथा अल्पसंख्यकों पर अत्याचारों को प्रोत्साहन देती है.

ये लोग अमेरिका और अमेरिकन नीतियों के घोर विरोधी हैं तथा विश्व व्यापार संगठन जैसी संस्थाओं के भी खिलाफ हैं.

ऊपरी तौर पर देखा जाए तो इनका उद्देश्य एक ऐसे वातावरण का सृजन करना है जहाँ कोई भेदभाव ना हो, जातिप्रथा ना हो और अमीर और गरीब ना हो. सब समान हो.

लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ये सब बातें सुनने में अच्छी लग सकती है परंतु अब इस अभियान का उद्देश्य इससे कहीं आगे जा चुका है. नक्सलियों की पीठ के पीछे भारत विरोधी ताकतें लगी हैं और इनका मूल उद्देश्य सामाजिक समीकरण ठीक करना नहीं बल्कि भारत को अंदर से खोखला करना है.

कितना बडा यह अभियान?

इसका सही सही जवाब देना मुश्किल है लेकिन इस समय कोई 10 हजार हथियारबंद माओवादी लडाके देश में मौजूद हैं (कश्मीर में आतंकवादियों की संख्या इससे काफी कम है). देश मे कुछ 630 जिले हैं और उनमे से करीब 180 जिले नक्सल प्रभावित हैं. देश के जिन राज्यों मे नक्सलियों की अच्छी पैठ है वे हैं आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ, बिहार और महाराष्ट्र.

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कितने खतरनाक हैं माओवादी आतंकवादी?

काफी खतरनाक. शुरूआत में इनके पास लडने के लिए मात्र तीर कमान हुआ करते थे लेकिन आज उनके पास लगभग हर आधुनिक हथियार है. इन हथियारों में शामिल है एके47, कार्बाइन, सेल्फ लोडिंग गन, राकेट लांचर, बारूदी सुरंग आदि.

इस तथ्य पर गौर करिए – पिछले कुछ वर्षों में माओवादी आतंकवादियों ने जितने लोगों और सुरक्षाकर्मियों को मारा है उतने तो कश्मीर में भी नहीं मारे गए.

दिल्ली के समीप पकड़े गए एक आतंकवादी मदनी ने खुलासा किया था कि पाक स्थित आतंकवादी संगठनों का भारत के माओवादियों के साथ गहरे संबंध हैं. इससे स्पष्ट होता है कि दुश्मन देश इन लोगों का उपयोग कर भारत को खोखला करना चाहते हैं. माओवादियों के सक्रीय रहने से भारत को अपने रक्षा संसाधन देश के अंदर ही लगाने पडते हैं और इससे बाहरी आतंकवादियों को अपना अभियान चलाने में काफी आसानी हो जाती है.

भारत के लिए चिंता की स्थिति

नक्सलवाद भारत के लिए चिंताजनक है. एक तरह राज्य सरकारे तथा उनकी पुलिस नक्सलवादियों पर काबू पाने में विफल हो रही हैं और दूसरी तरफ माओवादियों के पाँव अब 180 जिलों से बाहर जा रहे हैं.

ऐसे में सरकार के लिए चिंता की बात यह है कि कहीं इनसे निपटने के लिए सेना का सहारा ना लेना पड जाए. भारतीय सेना भी गुप्त रूप से यह स्वीकार करती है कि पुलिस और अर्धसैनिक बलों के काबू से बाहर जा रहे माओवादी आतंकवादियों को कुछलने के लिए उन्हें मैदान में आना पड सकता है.

यह मैदान देश के हृदय में स्थित है. उन्हे यदि लडाई लडनी पडी तो उनकी लडाई देश के नागरिकों के साथ ही होगी

स्रोत - तरकश

Tags: 73, ?, , कईसन, खातिर, गरीबन, छत्तीसगढ़, जवान, नक्सली, में, More…लडाई, शहीद, हमला

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Replies to This Discussion

कल हम एगो न्यूज़ चयिनल पर एगो फ्रोफेसर साईं बाबा के एस्तेत्मेंट सुन्वी ता हमर दिमागे घूम गौवे ...
उनके कहनाम रहुवे की जून घटना दंतेवाडा में भईल ओकरा बाद मिदनापुर में भईल उ गलती से हो गईल |
इ फ्रोफेसर नक्सली आन्दोलन के समर्थक हउवन|
इ हउवन फ्रोफेसर लेकिन हमरा इ नईखे बुझात की इंकार आखिया बह गईल बा की इनकर कान के पर्दा फट गईल बा इनकर आदिवासी लोग के दुःख लौकत बा लेकिन नक्सली सन के गोली और बारूद से उजडल घर ओर्नोह में रोवत बिलखत लोग नईखे लौकत ?
माओवादियों ने 'रेल सुरक्षा' का वादा किया


रेल दुर्घटना के पीछे माओवादियों का हाथ माना जा रहा है
माओवादियों के एक वरिष्ठ नेता ने मंगलवार को कहा कि उनके नियंत्रण वाले इलाक़ों से गुजरने वाली सभी रेलों को सुरक्षा दी जाएगी.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के प्रवक्ता कामरेड आकाश ने बीबीसी को फोन पर बताया कि वो भारतीय रेलवे से अपील करते हैं कि वो बिना किसी डर के सभी ट्रेनों को रात में चलाएँ.

उनका कहना था,''हम मालगाड़ी और यात्री गाड़ियों को पूरी सुरक्षा की गारंटी देते हैं. हम देशभर में किसी को भी किसी ट्रेन पर हमला करने की अनुमति नहीं देंगे. और जो ऐसा करने की कोशिश करेंगे, उन्हें कड़ी सज़ा दी जाएगी.''

माओवादी शुक्रवार की रेल दुर्घटना के पीछे हाथ होने से इनकार करते हैं. इसमें लगभग 150 यात्रियों की मौत हो गई थी.

माओवादियों ने इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों, भले ही वो उनके नजदीकी हों, सज़ा देने की घोषणा की थी
BBC
नवीन भईया प्रणाम

नक्सली आऊऱी ओलो के लड़ाई के बारे मे ता हम बस एटने कहेम की,

हम तो टूट गये बस एक घर बनाने मे,
और तुमने पलभर मे बस्तिया खाक कर दी.


जय भोजपुरी
बहुत खुब , जबरदस्त कहनी !
Navin Bhaiya aur eh blog par Aapan bahumulya vichar dewe wala log ke hamra taraf se Pranam Aur jai bhojpuri..............

Aj ham Danik Jagran
me ego samachar padhani ha Smt. Arundhati Rai ji ke
jawana me unkar e kathan hamra ke andar se hila dehlash ha ki
samaj me etna pratisthit aadami ke i kaisan galat vichar ba
yadi u kahti ki ham maovadi ke mudda ke aadhar par
samarthan kart bani t e kuchh samajh me aait lekin uha ke t
Sasatra vidroh ke samarthan kar ke samaj ke un bewa aurat,
Anath bachcha
,Putra viyog me kalpat Mai ke hirday pe
patthar ke war kar dihali e hamra bahut bura lagal ............
lekin u samaj ke sammaniya hai aur ham unka ke kuchh galat bat naikhi
kah sakat..... khair unka bare me raura sabhe aapan vichar bhi jaroor dehab sabhe
chalat chalt ego bat yaad aawat ba Jakar paw na phate bewai, so ka jane peer parai
Raura sabhe ke vichar ke intzaar rahi..........
रांची [दिलीप कुमार]। गरीबों को न्याय दिलाने के लिए बंदूक उठाने वाले नक्सली अब अपनी विचारधारा से कितनी दूर जा चुके हैं, गिरफ्तार नक्सल सुंदरी के बयान से इसका पता चलता है। कुख्यात माओवादी सब-जोनल कमांडर कुंदन पाहन हमेशा पांच-छह लड़कियां साथ रखता है, जिनका वह शोषण करता है।

गांव के झोलाछाप डाक्टरों से वह शक्तिव‌र्द्धक दवाएं व सेक्सुअल मेडिसिन भी अक्सर मंगवाता है। यह राज रांची में बुधवार को गिरफ्तार सिसिलिया गुड़िया उर्फ मोनिका दांग उर्फ रूपा ने खोला है। वह मूल रूप से मुरहू के रोन्हे की रहने वाली है और कुंदन की गर्लफ्रेंड है। वह सात साल से माओवादी संगठन से जुड़ी हुई थी। सुंदर होने के कारण कुंदन ने दूसरे दस्ते से उसे अपने पास बुला लिया था।

रूपा की कहानी, उसी की जुबानी

गिरफ्तार रूपा बताती है कि वह अपनी बहन के यहां रहकर पढ़ाई करती थी। उसके जीजा का नाम महमूद था, जिसका संबंध नक्सलियों से था। वहीं पर सिसिलिया का परिचय नक्सलियों से हुआ। सात वर्ष पहले वह पहली बार सारंडा में नक्सलियों के जत्थे से जुड़ी। वहीं उसने ट्रेनिंग ली और इसके बाद कई मुठभेड़ों में शामिल हुई। सिसिलिया ने अपनी लगन से शीर्ष नेताओं तक अपनी पहचान बनाई। किशनजी, अमिताभ बागची जैसे शीर्षस्थ नक्सली नेताओं से भी वह मिल चुकी है।

सारंडा में काम करते हुए उसकी मुलाकात पोड़ाहाट के सब-जोनल कमांडर प्रसाद जी से हुई। इसके बाद वह आ‌र्म्स सदस्य बनी और प्रसाद जी के साथ काम करने लगी। दस्ते में उसका नाम रूपा दिया गया। इसी बीच कुंदन पाहन की नजर रूपा पर पड़ी और वह उस पर फिदा हो गया। प्रसाद चूंकि कुंदन का जूनियर था, इसलिए उसने प्रसाद से कहकर रूपा को अपने दस्ते में शामिल करा लिया। इसके बाद से रूपा कुंदन के ही साथ थी। दस्ते में रहते हुए ही कुंदन ने रूपा को खूंटी से मोनिका दांग के नाम से कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिलाया। इसके बाद रूपा कुंदन के तकनीकी सेल से जुड़ गई।

तीन माह से बीच रांची में थी

एसएसपी प्रवीण कुमार ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि रूपा तीन माह से रांची के व्यस्त इलाके लोअर बाजार क्षेत्र में किराए के फ्लैट में रह रही थी। वह दस्ते के बीमार सदस्यों का रांची में इलाज करवाने से लेकर नए सदस्य व अतिथियों का स्वागत करती थी। कुंदन के लिए हथियार, कारतूस, चिट्ठियां, कूरियर आदि पहुंचाने का काम भी वह करती थी। इसमें गणेश नामक युवक उसकी मदद करता था। पुलिस गणेश की भी तलाश कर रही है। एक अन्य लड़की भी हिरासत में ली गई है, जिससे पूछताछ जारी है।

ऐसे पकड़ी गई महिला नक्सली

पुलिस को सूचना मिली कि रूपा कारतूस लेकर कुंदन दस्ते में जा रही है। रांची से खूंटी की तरफ जाते वक्त तुपुदाना पुलिस ने इसे गिरफ्तार कर लिया। इसके पास से एसएलआर के दस कारतूस व 12 बोर की 20 कारतूस मिले। उसके बैग से बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे माओवादी पोलित ब्यूरो के सदस्य अमिताभ बागची का बांग्ला में लिखा पत्र भी बरामद किया गया। यह पत्र 'के दा' के लिए लिखा गया है।

कौन है अमिताभ बागची

चुटिया पुलिस ने गत वर्ष रांची रेलवे स्टेशन के समीप से अमिताभ बागची को गिरफ्तार किया था। उसका पूरा नाम अमिताभ बागची उर्फ अमित उर्फ अनिल उर्फ सुमित उर्फ सुमंत उर्फ आरके दा उर्फ सुमानंद सिंह [श्याम कुखूर, कोलकाता] है। वह पोलित ब्यूरो, सेंट्रल कमेटी, ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो, सेंट्रल मिलिट्री कमेटी सहित कई अन्य कमेटियों का सदस्य है।


स्रोत - जागरण

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