हमनी के आस -पास ,अगल- बगल कुछ ऐसन लोग बा जे अपना प्रयास से समाज में क्रांतिकारी बदलाव ले आइल बा लेकिन आज भी उ नाम अधिकांश लो खातिर अपरिचित बा | उ आपन काम करत जात बा ,बिना कवनो स्वार्थ- भाव के | ओकरा ना त मिडिया के ग्लैमर से मतलब ना प्रतिक्रियावादी लो के धमकी से | ओकरा मतलब बा त बस अपना काम से | आईं ऐसन महान लोगन के बारे में चर्चा कर के ओकरा प्रयास के नमन कैल जाव | हमार निवेदन बा कि रौवा सब आपन अनुभव भी एजुगा जरुर रखीं | शुरुआत हम कर देत बानी |
घनश्याम शुक्ल - शुक्ल जी के जन्म सिवान जिला के पंजवार गाँव में १९५० के करीब भइल रहे | परम्परागत ब्राह्मन परिवार में जन्म भैला के नाते बचपन से हिन् इहाँ के शादी विवाह आ अन्य संस्कार के अवसर पर पढ़े जाये वाला मंत्र याद करे के पडल | लेकिन इ सब काम में इहाँ के मन ना लागे | तनी बड़ भैला पर बाबूजी के सहमती से पढ़े खातिर सिवान चल गइनी | कम उम्र में ही गाँधी ,टैगोर , मार्क्स ,लेनिन जैसन अनेक विचारक लो के खूब बढ़िया से पढ़ लेहनी | समाजवाद के सिद्धांत इहाँ के खूब प्रभावित कैलस | पढ़ाई पूरा कर के शिक्षक के रूप में कार्य करे लगनी | सामाजिक जीवन के शुरुआत भी अब हो गइल रहे |
एक बार गाँव में हरिजन सहभोज के आयोजन करवनी | १९७० के दशक में एगो गाँव में एगो ब्राह्मन पुत्र ऐसन काम करी केहू सोचले भी ना रहे | कई प्रकार के धमकी मिलल , लेकिन शुक्ल जी केहू के ना सुननी | भोज में गाँव के हरिजन लो जाये से मना कर दिहलस त दोसरा गाँव से बुला के अपना हाथे खाना बनाके खियवनी | गाँव के लोग शुक्ल जी के सामाजिक बहिष्कार कर दिहलस , लेकिन उहाँ के ठान लेले रहनी कि हार ना मानब |
गाँव के लड़की सन के पढ़े खातिर हाई -स्कूल के स्थापना खातिर इहाँ के प्रयास रंग ले आइल | आज गाँव में भव्य भवन वाला मान्यता प्राप्त लड़की सन के हाई स्कूल बा | हाले में सरकार इंटर के भी मान्यता दे देले बिया |
गाँव के पुस्तकालय देखला के बाद केहू के विस्वास न होला कि एगो गाँव में इ संभव बा | ५ हजार से अधिक पुस्तक के संग्रह , प्रतिदिन अखबार , हर वर्ग खातिर पत्रिका एजुगा उपलब्ध बा | पुस्तकालय में एगो संगीत महाविद्यालय भी चलेला जवन प्रयाग ,संगीत समिति इलाहबाद से मान्यता प्राप्त बा | इ सब इहें के प्रयास के कारन संभव भइल |
सेवानिवृति के बाद इहाँ के गाँव में डिग्री कालेज खोले खातिर प्रयासरत बानी | अपना तरफ से ५० हजार रुपया आ द्स कठा खेत भी इ काम खातिर इहाँ के दान दे चुकल बानी |
आगे एह फोरम पर और लिखाई | रौवा लो के सहयोग अपेक्षित बा |
जय भोजपुरी