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भोजपुरिया सिनेमा और माटी के खुशबु !

बहुत दिन से हम सोचत रहनी हां की भोजपुरी सिनेमा के ऊपर कुछ लिखे के , लेकिन हमरा वोह विषय के बारे में कम जानकारी होखला के वजह से लिख ना पावत रहनी हां , बहुत खोज बीन कईला पे बहुत चीज जाने के मिलल हा आ वोही आधार पे हम आपन विचार कुछ दुसरा जगह से मिलल चीज आ कुछ लोगन के भोजपुरी सिनेमा के बारे में लिखल समीक्षा के मिला के लिखत बानी |

सबसे पाहिले हम धन्यवाद से शुरू करब आ वोह में पहिला नाम बाटे" डा. चंद्रभूषण जी के " आगे बढ़ब ता हम धन्यवाद देब "विकिपीडिया" के फेरु ' जय भोजपुरी " के आ आगे आगे बढ़ब ता धन्यवाद बाटे एह जय भोजपुरी के सब सदस्य लोगन के और अंत में हम धन्यवाद देब 'नीरद जी " के , काहे की इन्हा के वजह से हम दू चार लाइन लिखे लायेक भईनी |

जी शुरुवात बा भोजपुरी भाषा से , जवन एगो क्षेत्रीय भाषा के रूप में बुझल जात रहे आ कुछ लोग ता एह के खाली बोली समझत रहे आ ई बस लोगन के रोज के जिनगी में एगो व्यवहार के भाषा बन के रह गईल रहे , जबकि सब लोगन के ई कहनाम रहे की आजादी के समय में भोजपुरी भाषा एगो बल के रूप में आपन असलियत देखवले रहल जवना के एगो अंग्रेज, ग्रियर्सन कहत बाड़े - “भोजपुरी एगो बहादुर जाति के व्यावहारिक भाषा ह, जवन परिस्थिति के अनुकूल बनल जानेले आ एकर प्रभाव भारत भर में बा। भारत के सभ्यता के उत्थान में बंगाली आ भोजपुरी के विशेष योगदान रहल बा। पहिला अपना कलम से आ दूसरा अपना लाठी के बल से ई काम कइले बा।” ता ऊ लोग जे ई समझत बाटे की भोजपुरी खाली एगो सामान्य बोले वाले भाषा हवे एह के पढ़ लेबे के चाही ता शायेद उनकर मुदायिल आँख चोनिहिया के खुल जाई|

खैर बात बाटे सिनेमा के ता हम अपना के वोही जगह पे राख के भोजपुरी में सिनेमा और ओकर इतिहास के बारे कहब , आ एह के असल शुरुवात विश्वानाथ शाहाबादी के सिनेमा "गंगा मइया तोहें पियरी चढ़इबो" से भईल रहे , आ एकरो पीछे एगो बात बाटे , असल में कैसे आज हमनी के तडपत बानी जा भोजपुरी खातिर ता वोह घरी भी कई गो भोजपुरिया लोग बोम्बे रहल लेकिन अपना माटी खातिर तडपत रहे|


वोही समय में भा कुछ दिन बाद १९६१ में "गंगा जमुना" दिलीप कुमार के अभिनय में आ अवधी (बोली ) संवाद अउर भोजपुरी गीत के साथ आईल रहे अउर बहुत बढ़िया प्रदर्शन रहे जवना से एह बात के हवा मिलल की क्षेत्रीय भाषा में भी सिनेमा बन सकेला , वोही घरी बंगला में भी सत्याजीत रे के सिनेमा " पाथेर पांचाली" आईल रहे जवन बहुत चलल , ता एह दुनो सिनेमा के कहल जा सकेला की क्षेत्रीय भाषा के ( कम से कम उत्तर भारत) एगो बढ़िया कारण दे दिहल क्षेत्रीय भाषा में सिनेमा बनावे खातिर |

फेरु का विश्वनाथ शाहाबादी जवन एगो बहुत बड व्यवसायी रहलन बिहार से उनका के राजेंद्रा बाबू के प्रोत्साहन मिलल अउर ऊ भोजपुरी में सिनेमा बनावे खातिर बोम्बे चहुप गईलन आ ओजुगा जाई के दादर में एगो होटल " प्रीतम " में रुकलन काहे की ऊ होटल भोजपुरियन के रुके अड्डा रहे |वोजुगा उनकर भेंट नसीर हुसैन से भईल जवन पाहिले से भोजपुरी में एगो कहानी लिख के तैयार रहलन फेरु का रहल १९६१ में ई दुनो जाना मिल के भोजपुरी में सिनेमा बनावे खातिर तैयार हो गईल लो आ फेरु " गंगा मइया तोहें पियरी चढ़इबो" के बनावे के जोजना बनल | फेरु का उन्हा लोगन के बनारस के कुंदन कुमार से भेंट हो गईल आ उनका के एह सिनेमा के निरदेशन के जिमा दे दिहल गईल आ साथ साथ में बनारस से ही एह सिनेमा के हीरो (असीम ) अउर हीरोइन (कुमकुम ) मिल गईल लो आ संगीत के जिमेदारी चित्रागुप्त के दे दिहल गईल | फेरु का ई सिनेमा के मुहूर्त १६ फ़रवरी १९६२ के पटना के शहीद मैदान में भईल |

ई सिनेमा बहुत चलल लोग बहुत पसंद कईल आ अईसन स्थति हो गईल लोग गाँव गाँव से एह के देखे खातिर बैलगाड़ी से टम टम से आवे लागल | बनारस में ता ई प्रकाश टाकीज में लागल रहे आ प्रकाश टाकीज के सामने मेला लेखा स्थिति हो गईल रहे आ लोग ई कहे की " गंगा नहा विश्वनाथ जी के दरशन करा अउर गंगा मईया के देख के जा "

फेरु का जब "" गंगा मइया तोहें पियरी चढ़इबो" आईल आ ओकर हालात देख के कई गो भोजपुरी सिनेमा आईल जईसे -

विदेशिया,
लागी नाहीं छूटे राम,
नइहर छूटल जाय,
हमार संसार,
बलमा बड़ा नादान,
कब होई गवना हमार,
जेकरा चरनवा में लगलें परनवा,
सीता मइया,
सइयां से भइलें मिलनवा,
हमार संसार और भौजी

अउर आकाशवाणी पटना से कुछ नाटक जईसे लोहा सिंह , विधवा नाच नचावे , सोलह सिंगार करे दुलहिनिया अउर गंगा रहे |



चलत रही

Tags: Bhojpuri, खुशबु, भोजपुरी, माटी, सिनेमा

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पाहिले धन्यवाद बाटे सब लोगन के जे लोग एह विषय के टिपण्णी देबे लायक समझल हां |

हम खाली एगो माध्यम बानी सही का बा गलत का बा वोह के पहुचावे के आ वोही खातिर सब लोग एजुगा जुटल बाटे|

हम ता बस एगो चीज कहब की जवन नीमन बाटे वोह के नीमन कहे खातिर हम छाती ठोक के कहब आ जवन बाउर बाटे वोह के बाउर कहे में ना लाजायिब ना डेरायिब |

मनोज भाई सही कहनी हा एगो अलगा से ग्रुप बना के ( फिलिम खातिर और प्रश्नावली खातिर ) वोह में हमनी के एह सब चीजन के बारे में सब भोजपुरियन के बतावल जा सकेला की भोजपुरी में नीमन का बाटे और बाउर का बा |

उमेद बाटे एडमिन लोग एह के देखि आ ई सन्देश पढ़ के एह पे कुछ काम करी |

जय भोजपुरी
नवीन जी,

आज पहिला बेर शायद केहू के आलेख पर कॉमेंट करे में हाथ काँपता... सच्चाई ई बा कि हमरो लगे एतना जानकारी ना रहे, ई पढला से पहिले... फिल्मी दुनिया के इतिहास के बारे में हमरा बहुत जानकारी नइखे, एकर वजह इ बा कि हम फिल्म बहुत कम देखेनी, आ भोजपुरी फिल्म ओह स्तर के बनते नइखी सन, कि देखल जा सको. एह से पहिले भोजपुरी फिल्म के बारे में अनिल ओझा नीरद जी के ई आलेख पढले रहनी साल 2006 में...

http://www.bhojpuria.com/jump.php?page=sahitya/film1.htm

वइसे भोजपुरिया डॉट कॉम का वजह से हमनी का लगे नया फिल्मन के ठीक- ठाक जानकारी आ जाला, लेकिन अगर सांच कहीं कि आज-काल्ह बन रहल भोजपुरी फिल्मन क नाम पर भोजपुरी के अपमानित करे के धंधा चला रहल बा कुछ लोग. हम केहू के नाम नइखी लेत, काहें कि हम एकरा में एह फिल्म इंडस्ट्री से जुडल हर शख्स के जिम्मेदार माँगेनी... मीडिया में बहुत हल्ला बा, आ भोजपुरी इंडस्ट्री के तथाकथित रुप से 2-3 गो सुपर स्टार भी मिल गइल बाडे, लेकिन पइसा कमाये के होड में सभ केहू भोजपुरी के आत्मा, आ भोजपुरी के संस्कृति के भुला चुकल बा.

हमरा बहुत दुख के साथ लिखे के पडता कि एह फिल्म इंडस्ट्री के जवन रवैया बा, ओकरा पर ना त हमनी के संस्कृति के कवनो छाप बा, आ नाहीं फिल्म बनाये वालन के एह बात से फर्क पडता कि समाज ओह फिल्मन के कइसन नजर से देख रहल बा. फिल्मकारन में होड लागल बा खाली फिल्म बनाये के, आ ओकर फार्मुला बहुत आसान बा, कवनो हिन्दी फिल्म के कहानी उठाव, ओकरा में जबरदस्ती 2-3 गो आइटम सांग डाल द, आ एगो अइसन आदमी के निर्देशक बना द, जेकरा भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के बारे में कवनो जानकारिये नइखे. भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के बेच के खाये के, आ ओकरा के सरे आम अपमानित करे के एह से गंदा प्रयास आज ले केहू ना कइल...

बात एहिजे खतम नइखे होत, कुछ लोग 2 कदम आगे बढ के लंदन शूटिंग करे चल जाता... अरे बेवकुफ, जेकरा लंदन ब्रिज देखे के होई, ऊ अंगेजी फिल्म ना देखी ??? ना त तहार टेक्नोलॉजी ओह से बढिया बा, आ नाही तहार फिल्मांकन... भोजपुरिया दर्शक के चाहीं गांव के माहौल, आ एगो अइसन कहानी, जवन कि ओकरा के आपन लागो. रउरा उठा के लिस्ट देख सकेनी, भोजपुरी में खाली ओही तरह के फिल्म (जइसे नदिया के पार, गंगा मइया तोहे पियरी चढइबो वगैरह) चलल बाडी सन, दोसर कवनो ना.

वइसे 1-2 फिल्म देखे के हम हिम्मत जुटवनी, त आधा में छोड के उठे के पडल... देख के लागल कि का साबित करे के कोशिश कइल जा रहल बा? कवना गांव में भोजपुरिया लइकी मिनी स्कर्ट पहिनेली सन ? गांव में पहिले नाच- नौटंकी आवत रहे, पर का कवनो नौटंकीवाली ओह तरह के कपडा पेन्हत होई... ??? कवना संस्कृति में लइकी पर वइसन अश्लील कॉमेंट कइल जाला, आ कवना गांव में ओतना अश्लील आइटम सांग गावल जाला. हमनी के संस्कृति में त भाभी के माई के दरजा दिहल जाला (वइसे हलका- फुलका हँसी- मजाक चलेला), लेकिन एह रिश्ता के जवन तस्वीर एह फिल्मन में पेश कइल जा रहल बा, ओकरा के देख के खुद के भोजपुरिया भइला पर लाज लागेला.

वइसे मीडिया में खबर त बहुत बढिया आ रहल बाटे, पर हम रउरा के बतावल चाहेब कि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के ई दौर भी अब खतम होखे के कगार पर बा. पिछला साल 60-70 गो फिल्म बनल, आ ओह में सब के सुपरहिट के दर्जा भी मीडिया में दिला दिहल गइल, लेकिन एगो हकीकत इहो बा कि मात्र अँगुरी पर गिने जाये लायक फिल्म ही आपन लागत निकाल पवली सन. फिल्म इंडस्ट्री के लोगन के अब भी अगर कवनो शक बा, त हमरा लगे ई साबित करे खातिर डाटा भी बाटे. एतना पर भी अगर इंडस्ट्री ना चेतल, त फेर एकरा के शायद भगवानो ना बचा सकेले...

वइसे एह विषय पर एगो अलग ग्रुप बनवला के बारे में हमार मामना ई बा कि एतना जानदार चीज के एगो ग्रुप में बाँधल ठीक ना होई (काहें कि ग्रुप के नाम फिल्म देख एक बहुत लोग ओहमें ना जाई), वइसे हम चाहेब कि एडमिन लोग एह पर चर्चा क के निर्णय लेव. एकरा के सामने रखल एह वजह से भी जरुरी बा, ताकि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के लोग के भी इ नजर आव. वइसे, शायद ओह लोगन के आँख के पानी बहुत पहिले मर चुकल बा, पर अगर केहू में 1% भी संस्कार बचल होखे, त ऊ लोग अब भी चेतो, ना त अब ढेर दिन नइखे बचल एह इंडस्ट्री के...

नवीन जी, लिखे त त बहुत कुछ आउर बा, लेकिन फिलहाल एतने कहब कि हमनी के भाषा आ संस्कार के बदनाम करे के, आ ओकरा के बेच के, आपन रोजी- रोटी चलाए के इजाजत केहू के ना होखे के चाहीं...

राउरे आपन,
सुधीर कुमार
navin ji rauaa koi bhi blog ya foraum post kareni ohme ekdam raaur kada mehnat nazar awela...esme bhi dikh rahal ba ki raua bhojpuri cinema ke bare me kitna research kaile baani...

rauaa aise hin search kar kar ke humni ke jankari det rahi bhojpuri ke vishay me..
अपने ओह समय के याद करा देहनी एह डिस्कसन के माध्यम से जेकरा के हम व्यक्तिगत रूप से "भोजपुरी मनोरंजन के स्वर्णयुग" कहिला. लगातार ओह समय में एक से एक कार्यक्रम फिलिम आ रेडियो के मध्यम से लोग के बीच आईल आ ई बात के पता हमरा दादा-दादी आ माई-बाबूजी के माध्यम से मिलल. लेकिन जे मिलल ओकरा सुनकर के आ कुछ देखकर के आ सच कहीं त चर्चा करके हम ई निर्णय पर पहुंचानी की भोजपुरी मनोरंजन के ऊ समय ऐसन रहल ह जेकरा के "भोजपुरी मनोरंजन के स्वर्णयुग" कहल अतिश्योक्ति ना होई.

जैसन की हमरा जानकारी परिवार से मिळत रहेला, आज भी भोजपुरी फिलिम बन रहल बा लेकिन आज ओकर प्रतियोगिता हिंदी फिल्म से करे के कोशिस करल जा रहल बा. लेकिन पाहिले जे भोजपुरी फिलिम बनल ओकरा हिंदी फिलिम से प्रतियोगिता ना रहल हा बल्कि ओह समय में भोजपुरी फिलिम के एक प्रतियोगिता के रूप में हिंदी फिलिम लेवे लागल रहल ह. ओह समय के कुछ कलाकार जैसे की नासिर हुसैन, सुजीत कुमार, पद्मा खन्ना, राकेश पांडे इत्यादि लोग गाँव के ठेठ रूप के अपना अभिनय के माध्यम से फिलिम के पर्दा पर चमका के एह बात के साबित कर देहले की भोजपुरी फिलिम कभी भी हिंदी फिल्म के आपन प्रतियोगी ना मानी बल्कि हिंदी फिलिम के भोजपुरी फिलिम के अपना प्रतियोगी के रूप में देखे के मजबूर कर दिहिन. आ जैसन की घर में लोग कहेला की ओह समय में दर्शक के भीड़ से पता चल जात रहल ह की भोजपुरी फिलिम अपना आप में गाँव के सुगंध लेकर के फलनवा हॉल में आईल बिया आ एक एक फिलिम कई कई सप्ताह आ महिना भर तक सिनेमा हॉल में चलत रहल ह.

आज अगर भोजपुरी फिलिम के हिंदी फिल्म के प्रतियोगिता के भावना से ना बनाकर के भोजपुरी के प्रति ठेठ्ता के भावना से बनावल जाव त हम एह बात के एह साईट के माध्यम से अपने सभे के बीच दावा से कह सकिला की "भोजपुरी मनोरंजन के स्वर्णयुग" के वापसी जरुर होई आ हिंदी फिलिम के, भोजपुरी फिलिम से प्रतियोगिता करे के दौर आ जाई, भले ही पूरा भारत में मत आवो लेकिन बिहार, उत्तरप्रदेश के साथ साथ महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, मध्यप्रदेश इत्यादि में लाखो के संख्या में बसल भोजपुरिया भाई एह फिलिम के हिंदी फिलिम से ज्यादा दिन तक सिनेमा हॉल में चलावे खातिर मजबूर कर दिहें काहे की सिनेमा हॉल के कमाई चाहीं दर्शक से आ भोजपुरी फिलिम एक दिन हिंदी फिलिम से ज्यादा कमाई के जरिया बन जाई कुछ राज्य में.
Bilkul thik likhal baa

NEHA SHARMA said:
अपने ओह समय के याद करा देहनी एह डिस्कसन के माध्यम से जेकरा के हम व्यक्तिगत रूप से "भोजपुरी मनोरंजन के स्वर्णयुग" कहिला. लगातार ओह समय में एक से एक कार्यक्रम फिलिम आ रेडियो के मध्यम से लोग के बीच आईल आ ई बात के पता हमरा दादा-दादी आ माई-बाबूजी के माध्यम से मिलल. लेकिन जे मिलल ओकरा सुनकर के आ कुछ देखकर के आ सच कहीं त चर्चा करके हम ई निर्णय पर पहुंचानी की भोजपुरी मनोरंजन के ऊ समय ऐसन रहल ह जेकरा के "भोजपुरी मनोरंजन के स्वर्णयुग" कहल अतिश्योक्ति ना होई.

जैसन की हमरा जानकारी परिवार से मिळत रहेला, आज भी भोजपुरी फिलिम बन रहल बा लेकिन आज ओकर प्रतियोगिता हिंदी फिल्म से करे के कोशिस करल जा रहल बा. लेकिन पाहिले जे भोजपुरी फिलिम बनल ओकरा हिंदी फिलिम से प्रतियोगिता ना रहल हा बल्कि ओह समय में भोजपुरी फिलिम के एक प्रतियोगिता के रूप में हिंदी फिलिम लेवे लागल रहल ह. ओह समय के कुछ कलाकार जैसे की नासिर हुसैन, सुजीत कुमार, पद्मा खन्ना, राकेश पांडे इत्यादि लोग गाँव के ठेठ रूप के अपना अभिनय के माध्यम से फिलिम के पर्दा पर चमका के एह बात के साबित कर देहले की भोजपुरी फिलिम कभी भी हिंदी फिल्म के आपन प्रतियोगी ना मानी बल्कि हिंदी फिलिम के भोजपुरी फिलिम के अपना प्रतियोगी के रूप में देखे के मजबूर कर दिहिन. आ जैसन की घर में लोग कहेला की ओह समय में दर्शक के भीड़ से पता चल जात रहल ह की भोजपुरी फिलिम अपना आप में गाँव के सुगंध लेकर के फलनवा हॉल में आईल बिया आ एक एक फिलिम कई कई सप्ताह आ महिना भर तक सिनेमा हॉल में चलत रहल ह.

आज अगर भोजपुरी फिलिम के हिंदी फिल्म के प्रतियोगिता के भावना से ना बनाकर के भोजपुरी के प्रति ठेठ्ता के भावना से बनावल जाव त हम एह बात के एह साईट के माध्यम से अपने सभे के बीच दावा से कह सकिला की "भोजपुरी मनोरंजन के स्वर्णयुग" के वापसी जरुर होई आ हिंदी फिलिम के, भोजपुरी फिलिम से प्रतियोगिता करे के दौर आ जाई, भले ही पूरा भारत में मत आवो लेकिन बिहार, उत्तरप्रदेश के साथ साथ महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, मध्यप्रदेश इत्यादि में लाखो के संख्या में बसल भोजपुरिया भाई एह फिलिम के हिंदी फिलिम से ज्यादा दिन तक सिनेमा हॉल में चलावे खातिर मजबूर कर दिहें काहे की सिनेमा हॉल के कमाई चाहीं दर्शक से आ भोजपुरी फिलिम एक दिन हिंदी फिलिम से ज्यादा कमाई के जरिया बन जाई कुछ राज्य में.
Aap likha aur kihu dekhe na ee ta na ho sakela
bada mehant se likhale baaden aap aur gyanprad baat hawe
Jai Bhojpuri Jai Ho AAPki

Navin Bhojpuria said:
पाहिले धन्यवाद बाटे सब लोगन के जे लोग एह विषय के टिपण्णी देबे लायक समझल हां |

हम खाली एगो माध्यम बानी सही का बा गलत का बा वोह के पहुचावे के आ वोही खातिर सब लोग एजुगा जुटल बाटे|

हम ता बस एगो चीज कहब की जवन नीमन बाटे वोह के नीमन कहे खातिर हम छाती ठोक के कहब आ जवन बाउर बाटे वोह के बाउर कहे में ना लाजायिब ना डेरायिब |

मनोज भाई सही कहनी हा एगो अलगा से ग्रुप बना के ( फिलिम खातिर और प्रश्नावली खातिर ) वोह में हमनी के एह सब चीजन के बारे में सब भोजपुरियन के बतावल जा सकेला की भोजपुरी में नीमन का बाटे और बाउर का बा |

उमेद बाटे एडमिन लोग एह के देखि आ ई सन्देश पढ़ के एह पे कुछ काम करी |

जय भोजपुरी

प्रणाम आ जय भोजपुरी

 

भोजपुरी सिनेमा आपन पचास साल पुरा कईल्स एह दु हजार एगारह मे , बहुत उतार चढाव देखे के मिलल , जवना मे शुरुवाती दौर मे भोजपुरी सिनेमा अपना स्वर्णिम युग से आगे बढल त बाद मे वोह के मानक बना के हिन्दी सिनेमा अपना के पारिवारिक , सांस्कृतिक, सांस्कारिक , आ व्यवहारिक दृष्टिकोण से स्थ्पाइत कईलस आ एकर नतीजा ई भईल की भोजपुरी सिनेमा कुछ समय खातिर शांत हो गईल काहे की नीमन नीमन फिलिम आवे लगलि स हिन्दी से बाद मे हिन्दी मे जब बी ग्रेड के फिल्म शुरु भईली स त वोह से प्रभावित हो के भोजपुरी मे भी लोग बी ग्रेड के प्रयोग कईल , चोली उतारल चढावल ठंढा बाड आदि चीजन के भरमार हो गईल आ ओकर नतीजा ई निकलल की अब भोजपुरी सिनेमा बी ग्रेड लायक भी नईखे ।

 

आजु स्थिति ई हो गईल बा की फरहा खान जब शीला के जवानी गीत के फिल्मांकन कईली त ऊ कहली की उनुकर उद्देश्य रहल भोजपुरी लेखा राउंची ( एकर माने होला , अभ्द्र , निम्न , अश्लील , गँदा , फुहड ) गीत बनावे के लेकिन बनि कलात्मक गईल ।

 

फिलहाल शीला के जवानी कईसन रहे ई ना मालुम लेकिन ई अतना तय बा की आजु के समय मे भोजपुरी गीत संगीत आ फिल्म माने राउंची हो गईल बा ।

 

शायद 50 बरिस बाद भोजपुरी फिल्म जगत अगर कवनो शब्द कमईलस त ई बा राउंची ।

 

आ एह शब्दन के आधार पे लोग भोजपुरिया क्षेत्र , समाज आ लोग के आंकत बा , एह से अब सोचे के बा की , का सही बा !

 

--------

 

एह विषय के शुरुवात पिछला साल भईल रहे लेकिन आजु एह लेख के उपयोगिता बुझाईल हा एह से आपन अनुभव के तनी औरि जोड के रउवा सभ के अदालत मे ले आईल बानी ।

 

जय भोजपुरी

नविन जी प्रणाम,

भोजपुरी फिलिम आ अश्लीलता एक दूसरा के पर्याय बन गईल बा आजू के डेट में..लेकिन कई जगह सुनात बा की कुछ लोग निमन फिलिम भी भोजपुरी में बनावे के प्रयास कर रहल बा...हम त इहे कहेम की "बीती ताहि बिसार दे आ आगे की सुध ले".... एह पचास सालन में यदी  शुरू के कुछ सालन के छोड़ दिहल जाओ त बाकी भोजपुरी भाषा के, भोजपुरी भाषी के , भोजपुरी संस्कृति के, भोजपुरी क्षेत्र के एह भोजपुरियन फिल्मन द्वारा जेतना नुकसान पहुन्चावल गईल बा..शायदे कवनो औरी माध्यम से एह के नुक्सान पहुन्चावल गईल होई..

जे निमन फिलिम बनावात बा ओकरा के सपोर्ट कईला के काम बा...उम्मीद बा की आवे वाला समय भोजपुरी खातिर आ भोजपुरी फिल्मन खातिर स्वर्णिम काल होई...आ जे राऊंची के चक्कर में बा ओह्कर बोरिया बिस्तर गोल होई.....

 

बहुत बहुत धन्यवाद एह सदा जवलंत मुद्दा के एक बार फेरु से ऊपर उठवला खातीर..

 

जय भोजपुरी

नवीन भाई,
प्रणाम आ जय भोजपुरी!

भोजपुरी सिनेमा के इतिहास के बारे में जेतना जानकारी खोजत रहनी ह, ओकरा से कईगुना ज्यादा जानकारी त राउर सौजन्य से एके ठईं मिल गईल. एह विषय पर विस्तार पूर्वक एतना गहन जानकारी देके एगो लमहर काम कईनी ह. ई संग्रह क के रखे वाला चीज ह. भोजपुरी सिनेमा के बारे में जाने के इच्छुक केहू खातिर ई सामग्री बड़ा काम के चीज साबित होई.
रहल बात आजकल के स्तरहीन आ फूहड़ फिल्मन के , त एकर का कहल जाव की जहाँ मीठा खुशबु तनको दिख जाला, उहाँ माखी अपने -आप भिनभिनाए लागेला. आजकल के भोजपुरी सिनेमा में ज्यादातर इहे हो रहल बा. कम मेहनत आ शार्टकट में सफलता पाए के अंधा कोशिश में लोग ई अहम बात भूल जालें कि एह रास्ता से प्राप्त सफलता भी पानी के बुलबुला लेखा होई. हाँ, जे कुछ नीमन काम करता, ऊ जरूर कायम रही.

बहुत- बहुत धन्यवाद के साथ,

जय भोजपुरी !!
नवीन भाई प्रणामआ जय भोजपुरी
आज कल लोग पैसा खातिर ईतना गिर जाई की आपन भाषा आउर संस्कार के सौदा करे पर उतारू हो जाई ई आज कल के लोकल गाना गावे वाला आउर फूहर सिनेमा बनावे वाला ई भुला जाला की जवन समाज के सहारे ओकरा उठे के बा ओकरे उ सौदा करत बाड़े जा ई लोग नईखे जानत की चार दिन के चाँदनी बा फेर अंधेरी रात बा खैर ईतना बढ़िया जानकारी देवे खातिर धन्याबाद
प्रदीप

नविन भाई प्रणाम आ जय भोजपुरी,

 

हम ता राउर ई लेखनी पढके कहे पर बाध्य बादीन की रौवान बहुत मेहनत आ आताह प्रयास कैले बाडिन्न एगो इतिहास जवन की आपन हा हम सबन के बिच तक पहुँचावे खातिर, रउरी एह योगदान के भुलाइल न जा सकेला.....

हम धन्यवाद् देहल चाहब आपके की इतना व्यस्त समय से समय निकालके इतना अदभुत्त जानकारी एकदम संग्रहालय की तरह हमन तक पहुचावानी और आगे भी इह प्रयाश  जारी रही.

 

आशा नहीं पूरा विश्वास बा एक दिन ऊ जर्रोर देखे के मिली की पूरा समाज एह बात के समझी और जे नइखे समझत ओकरा के समझावे में कामयाब होई की फुर्पन में कुछु बा न, भाषा के मान मर्यादा एगो सीमा में ही रहके बदवाल जा सकेला.

 

सिनेमा उहे चलिहें जवान में कवनो निमं सन्देश होई...फुहर्कम नहीं होई.....इतिहास गवाह बा....

 

केहू रोक नहीं पाई........

 

कोटि कोटि धन्यवाद् आपके.

 

जय हिंद आ जय भोजपुरी.

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