Come, let's do something for Bhojpuri...

Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on December 4, 2009 at 3:53pm
Permalink Reply by Sudhir Kumar on December 4, 2009 at 5:31pm
Permalink Reply by NEHA SHARMA on January 29, 2010 at 6:35pm अपने ओह समय के याद करा देहनी एह डिस्कसन के माध्यम से जेकरा के हम व्यक्तिगत रूप से "भोजपुरी मनोरंजन के स्वर्णयुग" कहिला. लगातार ओह समय में एक से एक कार्यक्रम फिलिम आ रेडियो के मध्यम से लोग के बीच आईल आ ई बात के पता हमरा दादा-दादी आ माई-बाबूजी के माध्यम से मिलल. लेकिन जे मिलल ओकरा सुनकर के आ कुछ देखकर के आ सच कहीं त चर्चा करके हम ई निर्णय पर पहुंचानी की भोजपुरी मनोरंजन के ऊ समय ऐसन रहल ह जेकरा के "भोजपुरी मनोरंजन के स्वर्णयुग" कहल अतिश्योक्ति ना होई.
जैसन की हमरा जानकारी परिवार से मिळत रहेला, आज भी भोजपुरी फिलिम बन रहल बा लेकिन आज ओकर प्रतियोगिता हिंदी फिल्म से करे के कोशिस करल जा रहल बा. लेकिन पाहिले जे भोजपुरी फिलिम बनल ओकरा हिंदी फिलिम से प्रतियोगिता ना रहल हा बल्कि ओह समय में भोजपुरी फिलिम के एक प्रतियोगिता के रूप में हिंदी फिलिम लेवे लागल रहल ह. ओह समय के कुछ कलाकार जैसे की नासिर हुसैन, सुजीत कुमार, पद्मा खन्ना, राकेश पांडे इत्यादि लोग गाँव के ठेठ रूप के अपना अभिनय के माध्यम से फिलिम के पर्दा पर चमका के एह बात के साबित कर देहले की भोजपुरी फिलिम कभी भी हिंदी फिल्म के आपन प्रतियोगी ना मानी बल्कि हिंदी फिलिम के भोजपुरी फिलिम के अपना प्रतियोगी के रूप में देखे के मजबूर कर दिहिन. आ जैसन की घर में लोग कहेला की ओह समय में दर्शक के भीड़ से पता चल जात रहल ह की भोजपुरी फिलिम अपना आप में गाँव के सुगंध लेकर के फलनवा हॉल में आईल बिया आ एक एक फिलिम कई कई सप्ताह आ महिना भर तक सिनेमा हॉल में चलत रहल ह.
आज अगर भोजपुरी फिलिम के हिंदी फिल्म के प्रतियोगिता के भावना से ना बनाकर के भोजपुरी के प्रति ठेठ्ता के भावना से बनावल जाव त हम एह बात के एह साईट के माध्यम से अपने सभे के बीच दावा से कह सकिला की "भोजपुरी मनोरंजन के स्वर्णयुग" के वापसी जरुर होई आ हिंदी फिलिम के, भोजपुरी फिलिम से प्रतियोगिता करे के दौर आ जाई, भले ही पूरा भारत में मत आवो लेकिन बिहार, उत्तरप्रदेश के साथ साथ महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, मध्यप्रदेश इत्यादि में लाखो के संख्या में बसल भोजपुरिया भाई एह फिलिम के हिंदी फिलिम से ज्यादा दिन तक सिनेमा हॉल में चलावे खातिर मजबूर कर दिहें काहे की सिनेमा हॉल के कमाई चाहीं दर्शक से आ भोजपुरी फिलिम एक दिन हिंदी फिलिम से ज्यादा कमाई के जरिया बन जाई कुछ राज्य में.
पाहिले धन्यवाद बाटे सब लोगन के जे लोग एह विषय के टिपण्णी देबे लायक समझल हां |
हम खाली एगो माध्यम बानी सही का बा गलत का बा वोह के पहुचावे के आ वोही खातिर सब लोग एजुगा जुटल बाटे|
हम ता बस एगो चीज कहब की जवन नीमन बाटे वोह के नीमन कहे खातिर हम छाती ठोक के कहब आ जवन बाउर बाटे वोह के बाउर कहे में ना लाजायिब ना डेरायिब |
मनोज भाई सही कहनी हा एगो अलगा से ग्रुप बना के ( फिलिम खातिर और प्रश्नावली खातिर ) वोह में हमनी के एह सब चीजन के बारे में सब भोजपुरियन के बतावल जा सकेला की भोजपुरी में नीमन का बाटे और बाउर का बा |
उमेद बाटे एडमिन लोग एह के देखि आ ई सन्देश पढ़ के एह पे कुछ काम करी |
जय भोजपुरी
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on February 5, 2011 at 9:26pm प्रणाम आ जय भोजपुरी
भोजपुरी सिनेमा आपन पचास साल पुरा कईल्स एह दु हजार एगारह मे , बहुत उतार चढाव देखे के मिलल , जवना मे शुरुवाती दौर मे भोजपुरी सिनेमा अपना स्वर्णिम युग से आगे बढल त बाद मे वोह के मानक बना के हिन्दी सिनेमा अपना के पारिवारिक , सांस्कृतिक, सांस्कारिक , आ व्यवहारिक दृष्टिकोण से स्थ्पाइत कईलस आ एकर नतीजा ई भईल की भोजपुरी सिनेमा कुछ समय खातिर शांत हो गईल काहे की नीमन नीमन फिलिम आवे लगलि स हिन्दी से बाद मे हिन्दी मे जब बी ग्रेड के फिल्म शुरु भईली स त वोह से प्रभावित हो के भोजपुरी मे भी लोग बी ग्रेड के प्रयोग कईल , चोली उतारल चढावल ठंढा बाड आदि चीजन के भरमार हो गईल आ ओकर नतीजा ई निकलल की अब भोजपुरी सिनेमा बी ग्रेड लायक भी नईखे ।
आजु स्थिति ई हो गईल बा की फरहा खान जब शीला के जवानी गीत के फिल्मांकन कईली त ऊ कहली की उनुकर उद्देश्य रहल भोजपुरी लेखा राउंची ( एकर माने होला , अभ्द्र , निम्न , अश्लील , गँदा , फुहड ) गीत बनावे के लेकिन बनि कलात्मक गईल ।
फिलहाल शीला के जवानी कईसन रहे ई ना मालुम लेकिन ई अतना तय बा की आजु के समय मे भोजपुरी गीत संगीत आ फिल्म माने राउंची हो गईल बा ।
शायद 50 बरिस बाद भोजपुरी फिल्म जगत अगर कवनो शब्द कमईलस त ई बा राउंची ।
आ एह शब्दन के आधार पे लोग भोजपुरिया क्षेत्र , समाज आ लोग के आंकत बा , एह से अब सोचे के बा की , का सही बा !
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एह विषय के शुरुवात पिछला साल भईल रहे लेकिन आजु एह लेख के उपयोगिता बुझाईल हा एह से आपन अनुभव के तनी औरि जोड के रउवा सभ के अदालत मे ले आईल बानी ।
जय भोजपुरी
नविन जी प्रणाम,
भोजपुरी फिलिम आ अश्लीलता एक दूसरा के पर्याय बन गईल बा आजू के डेट में..लेकिन कई जगह सुनात बा की कुछ लोग निमन फिलिम भी भोजपुरी में बनावे के प्रयास कर रहल बा...हम त इहे कहेम की "बीती ताहि बिसार दे आ आगे की सुध ले".... एह पचास सालन में यदी शुरू के कुछ सालन के छोड़ दिहल जाओ त बाकी भोजपुरी भाषा के, भोजपुरी भाषी के , भोजपुरी संस्कृति के, भोजपुरी क्षेत्र के एह भोजपुरियन फिल्मन द्वारा जेतना नुकसान पहुन्चावल गईल बा..शायदे कवनो औरी माध्यम से एह के नुक्सान पहुन्चावल गईल होई..
जे निमन फिलिम बनावात बा ओकरा के सपोर्ट कईला के काम बा...उम्मीद बा की आवे वाला समय भोजपुरी खातिर आ भोजपुरी फिल्मन खातिर स्वर्णिम काल होई...आ जे राऊंची के चक्कर में बा ओह्कर बोरिया बिस्तर गोल होई.....
बहुत बहुत धन्यवाद एह सदा जवलंत मुद्दा के एक बार फेरु से ऊपर उठवला खातीर..
जय भोजपुरी
Permalink Reply by Manoj Kumar on February 5, 2011 at 11:29pm
Permalink Reply by Rajesh Yadav on February 6, 2011 at 9:49pm नविन भाई प्रणाम आ जय भोजपुरी,
हम ता राउर ई लेखनी पढके कहे पर बाध्य बादीन की रौवान बहुत मेहनत आ आताह प्रयास कैले बाडिन्न एगो इतिहास जवन की आपन हा हम सबन के बिच तक पहुँचावे खातिर, रउरी एह योगदान के भुलाइल न जा सकेला.....
हम धन्यवाद् देहल चाहब आपके की इतना व्यस्त समय से समय निकालके इतना अदभुत्त जानकारी एकदम संग्रहालय की तरह हमन तक पहुचावानी और आगे भी इह प्रयाश जारी रही.
आशा नहीं पूरा विश्वास बा एक दिन ऊ जर्रोर देखे के मिली की पूरा समाज एह बात के समझी और जे नइखे समझत ओकरा के समझावे में कामयाब होई की फुर्पन में कुछु बा न, भाषा के मान मर्यादा एगो सीमा में ही रहके बदवाल जा सकेला.
सिनेमा उहे चलिहें जवान में कवनो निमं सन्देश होई...फुहर्कम नहीं होई.....इतिहास गवाह बा....
केहू रोक नहीं पाई........
कोटि कोटि धन्यवाद् आपके.
जय हिंद आ जय भोजपुरी.
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