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भोजपुरिया सिनेमा और माटी के खुशबु !

बहुत दिन से हम सोचत रहनी हां की भोजपुरी सिनेमा के ऊपर कुछ लिखे के , लेकिन हमरा वोह विषय के बारे में कम जानकारी होखला के वजह से लिख ना पावत रहनी हां , बहुत खोज बीन कईला पे बहुत चीज जाने के मिलल हा आ वोही आधार पे हम आपन विचार कुछ दुसरा जगह से मिलल चीज आ कुछ लोगन के भोजपुरी सिनेमा के बारे में लिखल समीक्षा के मिला के लिखत बानी |

सबसे पाहिले हम धन्यवाद से शुरू करब आ वोह में पहिला नाम बाटे" डा. चंद्रभूषण जी के " आगे बढ़ब ता हम धन्यवाद देब "विकिपीडिया" के फेरु ' जय भोजपुरी " के आ आगे आगे बढ़ब ता धन्यवाद बाटे एह जय भोजपुरी के सब सदस्य लोगन के और अंत में हम धन्यवाद देब 'नीरद जी " के , काहे की इन्हा के वजह से हम दू चार लाइन लिखे लायेक भईनी |

जी शुरुवात बा भोजपुरी भाषा से , जवन एगो क्षेत्रीय भाषा के रूप में बुझल जात रहे आ कुछ लोग ता एह के खाली बोली समझत रहे आ ई बस लोगन के रोज के जिनगी में एगो व्यवहार के भाषा बन के रह गईल रहे , जबकि सब लोगन के ई कहनाम रहे की आजादी के समय में भोजपुरी भाषा एगो बल के रूप में आपन असलियत देखवले रहल जवना के एगो अंग्रेज, ग्रियर्सन कहत बाड़े - “भोजपुरी एगो बहादुर जाति के व्यावहारिक भाषा ह, जवन परिस्थिति के अनुकूल बनल जानेले आ एकर प्रभाव भारत भर में बा। भारत के सभ्यता के उत्थान में बंगाली आ भोजपुरी के विशेष योगदान रहल बा। पहिला अपना कलम से आ दूसरा अपना लाठी के बल से ई काम कइले बा।” ता ऊ लोग जे ई समझत बाटे की भोजपुरी खाली एगो सामान्य बोले वाले भाषा हवे एह के पढ़ लेबे के चाही ता शायेद उनकर मुदायिल आँख चोनिहिया के खुल जाई|

खैर बात बाटे सिनेमा के ता हम अपना के वोही जगह पे राख के भोजपुरी में सिनेमा और ओकर इतिहास के बारे कहब , आ एह के असल शुरुवात विश्वानाथ शाहाबादी के सिनेमा "गंगा मइया तोहें पियरी चढ़इबो" से भईल रहे , आ एकरो पीछे एगो बात बाटे , असल में कैसे आज हमनी के तडपत बानी जा भोजपुरी खातिर ता वोह घरी भी कई गो भोजपुरिया लोग बोम्बे रहल लेकिन अपना माटी खातिर तडपत रहे|


वोही समय में भा कुछ दिन बाद १९६१ में "गंगा जमुना" दिलीप कुमार के अभिनय में आ अवधी (बोली ) संवाद अउर भोजपुरी गीत के साथ आईल रहे अउर बहुत बढ़िया प्रदर्शन रहे जवना से एह बात के हवा मिलल की क्षेत्रीय भाषा में भी सिनेमा बन सकेला , वोही घरी बंगला में भी सत्याजीत रे के सिनेमा " पाथेर पांचाली" आईल रहे जवन बहुत चलल , ता एह दुनो सिनेमा के कहल जा सकेला की क्षेत्रीय भाषा के ( कम से कम उत्तर भारत) एगो बढ़िया कारण दे दिहल क्षेत्रीय भाषा में सिनेमा बनावे खातिर |

फेरु का विश्वनाथ शाहाबादी जवन एगो बहुत बड व्यवसायी रहलन बिहार से उनका के राजेंद्रा बाबू के प्रोत्साहन मिलल अउर ऊ भोजपुरी में सिनेमा बनावे खातिर बोम्बे चहुप गईलन आ ओजुगा जाई के दादर में एगो होटल " प्रीतम " में रुकलन काहे की ऊ होटल भोजपुरियन के रुके अड्डा रहे |वोजुगा उनकर भेंट नसीर हुसैन से भईल जवन पाहिले से भोजपुरी में एगो कहानी लिख के तैयार रहलन फेरु का रहल १९६१ में ई दुनो जाना मिल के भोजपुरी में सिनेमा बनावे खातिर तैयार हो गईल लो आ फेरु " गंगा मइया तोहें पियरी चढ़इबो" के बनावे के जोजना बनल | फेरु का उन्हा लोगन के बनारस के कुंदन कुमार से भेंट हो गईल आ उनका के एह सिनेमा के निरदेशन के जिमा दे दिहल गईल आ साथ साथ में बनारस से ही एह सिनेमा के हीरो (असीम ) अउर हीरोइन (कुमकुम ) मिल गईल लो आ संगीत के जिमेदारी चित्रागुप्त के दे दिहल गईल | फेरु का ई सिनेमा के मुहूर्त १६ फ़रवरी १९६२ के पटना के शहीद मैदान में भईल |

ई सिनेमा बहुत चलल लोग बहुत पसंद कईल आ अईसन स्थति हो गईल लोग गाँव गाँव से एह के देखे खातिर बैलगाड़ी से टम टम से आवे लागल | बनारस में ता ई प्रकाश टाकीज में लागल रहे आ प्रकाश टाकीज के सामने मेला लेखा स्थिति हो गईल रहे आ लोग ई कहे की " गंगा नहा विश्वनाथ जी के दरशन करा अउर गंगा मईया के देख के जा "

फेरु का जब "" गंगा मइया तोहें पियरी चढ़इबो" आईल आ ओकर हालात देख के कई गो भोजपुरी सिनेमा आईल जईसे -

विदेशिया,
लागी नाहीं छूटे राम,
नइहर छूटल जाय,
हमार संसार,
बलमा बड़ा नादान,
कब होई गवना हमार,
जेकरा चरनवा में लगलें परनवा,
सीता मइया,
सइयां से भइलें मिलनवा,
हमार संसार और भौजी

अउर आकाशवाणी पटना से कुछ नाटक जईसे लोहा सिंह , विधवा नाच नचावे , सोलह सिंगार करे दुलहिनिया अउर गंगा रहे |



चलत रही

Tags: Bhojpuri, खुशबु, भोजपुरी, माटी, सिनेमा

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नविन जी बहुत अच्छा रेसेअर्च करके लिखले बाड़ा भाई...चला कुछ ता आज बहुत बढ़िया भईल....आज अगर प्रशोतरी ना खेलल जाईत त तहार ई रूप ना नु दिखाई देले रहित एतना जल्दी....लागा रहा भाई अईसही ज्ञानवर्धक रचना आपन पेश करत रह...जा झार के भईवा......:)
लागी नाही छूटे राम - ई १९६३ में कुंदन कुमार के निरदेशन में आईल आ ई सिनेमा खूब चलल , आ एह के गीत संगीत भी खूब चलल , आ रउवा सब ता चित्रगुप्त जी के बारे में जान ही गईल बानी ता बस समझ ली की जब भी Old Is Gold के बात चली ता वोह में चित्रगुप्त जी के नाम पाहिले रहेला | ( चित्रगुप्त जी के दू गो लईका आनंद जी मिलिंद जी बाद में खूब नाम कमयिल लो )

विदेशिया - ई १९६४ में भिखारी ठाकुर के लिखल नाटक के ऊपर बनल रहे , ई सिनेमा में जाती प्रथा , सामन्ती बेवस्था , और छुवाछुत के जवन बेमारी लागल रहे वोह के ऊपर रहे बनल रहे आ एहो सिनेमा खूब चलल , कहल जाला की भिखारी ठाकुर के पर्दा पे देखे के कई लोगन के सपना एही सिनेमा पूरा भईल |

लेकिन कहल जाला नु आँख लागे में भा लोगन के हहुयावे के आदत कबो न छुटी बस उहे भईल आ भोजपुरी फिलिम के सफलता देख के ढेर लोग कूद के आ गईल सिनेमा बनावे खातिर आ भईल ई की बाद में क्यों सिनेमा भहरा के गिर गईली सा |

काफी समय बाद १९७७ में सिनेमा आईल दंगल - एह के निर्माता बच्चू भाई शाह जवन विदेशिया के निर्माता रहलन "दंगल " बनवले , आ ई एकदम "विदेशिया " लेखा रहल एह में मिस इंडिया - प्रेमा नारायण भी रहली जवन वोह घरी खूब नामी रहली आ वोही घरी शोले आ के गईल रहे एह से एहू सिनेमा में घोड़ा के दौड़े के डाकू के पीछा करे चित्र फेरु भेड़ के लड़ाई अउर कुश्ती (दंगल ) के भी चित्र रहे अउर एह में डाकू के रूप में " कालिया " रहे | एह सिनेमा में नदीम श्रवण के संगीत रहे , इफ्तेखार अउर कन्हियालाल जईसन कलाकार लोग रहे | कहल जाला की नदीम श्रवण के शुरुवात अउर मील के पत्थर ( थूनी ) इहे सिनेमा रहे | लेकिन साथ साथ में भोजपुरी सिनेमा में व्यसाय अउर पैसा कमाए के चस्का लागे वाला सिनेमा इहे रहल |


फेरु बाद में राकेश पाण्डेय के ले के एगो अउर सिनेमा "बलम परदेसिया "आईल जवना में मोहम्द रफ़ी जी के गीत " गोरकी पतरकी रे मारे गुलेलवा जियरा उड़ उड़ जाय " बहुत चलल |

बाद में आरा के अशोक चाँद जी ( फिलिम विक्रेता रहलन ) अयिलन आपन फिलिम " गंगा किनारे मोरे गाँव " ले के अयिलन जवन पटना के अप्सरा सिनेमा में ३० सप्ताह ले चलल अउर ता अउर बोम्बे में " मीनरवा " ४ हफ्ता ले इक दम गरदा मचवलस माने हाउस फुल रहे | आ ई पहिला फिलिम रहे जवन मारिसस में भी चलल एह फिलिम से भोजपुरी फिलिम के भेष भूषा बदल गईल आ धोती कुर्ता से शर्ट - पतलून पे लोग आ गईल | कहल जाला की जेतना एह फिलिम के भाव मिलल जेतना ई फिलिम सफल भईल ओतना अउर कवनो भोजपुरी फिलिम ना भईल | एह सफलता में चूर अशोक जी के दुसरका फिलिम "दुल्हिन " आईल जवन बहुत बुरा तरिका से पटका गईल आ उनकर बहुत फजीहत भईल |


फेरु १९८२ में नदिया के पार आईल जवन भोजपुरी कम रहे आ हिंदी ज्यादा रहे लेकिन बहुत सारा संवाद एकर भोजपुरी में रहे एकर कहानीकार भोजपुरिया ( बलिया - बेलहरी जे केशव प्रसाद मिश्र जी रहनी आ हम खुद मिलल बानी उँहा से इलाहाबाद में) रहलन आ एकर शूटिंग जौनपुर में भईल रहे लेकिन गाँव के नाव रामपुर अउर बेलहरी रहल जवन बलिया के हवे | ई फिलिम के कालजयी फिलिम कहल जाला , बहुत चलल ई फिलिम एकर हीरो एगो मराठी रहे लेकिन ऊ ता प्यार के कहानी रहे , पूरा भोजपुरियन के हिला देहलस | तारा चन्द्र बडजात्या की एह फिलिम में रविन्द्रा जैन के संगीत रहे , जीजा , देवर , भौजी , साली अउर कई गो रिश्ता के देखावत ई फिलिम बहुत चलल अउर आज भी चलेला, एकर गीत भी बहुत बरियार आ हिट भईल |


चलत रही ......
एह तरह से दू दशक एगो "गंगा मइया तोहें पियरी चढ़इबो" ता दुसरका " दंगल " आ फेरु बाद में आईल ' नदिया के पार " के रहे
कुछ ता शुरुवात दंगल से हो गईल रहे बाद में लोगन के सामने फिल्मन के भरमार हो गईल लेकिन केहू पुरान फिल्मन लेखा कुछ ना दे पावल बाद में फिल्मन के चलावे खातिर गाँव के नाच ( शादी बियाह में आवे वाला नाच नौटंकी, बाई लोग ) के सहारा लिहल गईल और फिल्मन के मानक , गुणवत्ता एजुगे से बिगड़े लागल और बाद में जब बात तीसरा दसक के होखे लागल तब स्थिति और खडबडा गईल आ अब ई बाटे की एह में खाली बोले वाली भाषा भोजपुरी बा लेकिन वोह में ना भोजपुरियन के प्यार बाटे (देखि पाखी हेगड़े के हॉट सीन , निराहुवा के लटका झटका , बाकी बडका जाना के चोनिहायिल और भोजपुरियन के भारमावल ) और ना ही कवनो परिवार के चित्रण बा और साथ साथ में हीरो भा हीरोइन सब मुम्बईया ( पाहिले बोम्बे रहे ) रंग में रंगा गईल बा आ भोजपुरी संस्कृति , कला , और व्यवहार, विचार ता अब घोरहू कोतवारु हो गईल |

फिल्मन के नाव से ओकर भाव पता चलत बाटे , हमरा नायिख लागत की एह में हमके ढेर लिखे के पड़ी लेकिन कुछ नाव रउवा सब लोगन के सामने हम राखल चाहत बानी

ससुरा बड़ा पइसा वाला

ससुरा बड़ा पइसा वाला - कईसन सन्देश जात बाटे ऊ साफ बुझात बाटे

दरोगा बाबु आई लव यु - कुछ कहे लायक नईखे

देवरा बड़ा सतावेला - बाह जी बाह का नाव चुनायिल बाटे , भोजपुरी के दुर्गति कई देबे के बाटे , जेतना हो सके

तोहरे प्यार में पागल हो गइल -अरे जो मुहे माहुर फांक , पगलात काहे बाड़े

मार देव गोली केहू ना बोली - बहुत बढ़िया सन्देश बाटे एह फिलिम के नाव से , बस ई गोली मारे के ही सन्देश देत रही कुछ बाचल बा की जवन ई लोग पूरा करत बाटे

और भी बहुत सारा फिलिम बाड़ी सा , ई ता हमके कुछ नाव मालूम बाटे लिख देले बानी | हमके मालूम बाटे आ हम जानत बानी की ई बाजार के दौर बाटे आ एह समय में उहे चीज चलेला जवन बेचाला लेकिन बेचे वाला के सोचे के चाही ( इंसानियत के नाते , भोजपुरिया के नाते ) की ऊ का बेचत बाटे |

भोजपुरी सिनेमा जवना में परिवार के भाव , प्यार और दुलार के पुकार , रिश्ता के महत्वा , संस्कार लौकत रहे ओकर अब कवनो पता नईखे , अब ता जवन बेचात बाटे वोह के बेच देबे के बाटे |

कब तक ले हिंदी सिनेमा और मुम्बई के नक़ल कई के काम होई , का भोजपुरी के कवनो औकात बा की ना , एगो समय रहल जब भोजपुरिया फिलिम और भोजपुरिया माटी के हिंदी सिनेमा देखावत रहे लेकिन अब कहा गईल ऊ खेत खलिहान , कहा गईल ऊ माटी के सोंह सोंह खुशबु , कहा गईल ऊ सामाजिक सोच के जनम देबे वाली विदेशिया , कहा गईल वोह परिवार के महत्व देबे वाली नदिया के पार का आज के समय में ई लटका झटका ही बहुत जरुरी हो गईल बाटे |

भोजपुरी सिनेमा जवन इक समय हिंदी सिनेमा के राह देखावत रहे आज कहे भटकत बाटे ? ( विमल राय के निहोरा कईला पे नजीर हुसैन 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो के कहानी सौप देहले ) आ कहल जाला की बरहज के मोती बीए के भोजपुरी के मिठास से हिंदी सिनेमा के जान पहचान के श्रेया जाला |आ अब का होत बाटे ऊ सब लोगन के लौकत बाटे |

एगो बात बहुत साफ़ आ ई सिद्ध हो गईल बाटे की भोजपुरिया माटी के खुशबु से जुडल फिलिम बहुत चलल बाड़ी सा | त़ा ई बात ता बहुत साफ़ लउकत बाटे की आज अगर भोजपुरियन के मांग माटी के खुशबु वाला फिलिम के बाटे ता भोजपुरी फिलिम से जुडल लोग मजबूर हो जाई गंगा मइया तोहें पियरी चढ़इबो ,विदेशिया , दंगल , नदिया के पार लेखा फिलिम देबे खातिर |

बस जरुरत बाटे एगो शुरुवात के , जरुरत बाटे बोले के , जरुरत बाटे कहे के , और करे के !

बस भोजपुरी सिनेमा पे आपन विचार आपन शोध के हम एजुगा ख़तम करत बानी और साथ साथ में हम धन्यवाद दिहल चाहत बानी मनोज जी के जे आज प्रश्नावली शुरू कईनी हां और वोह वजह से हम ई लिखे खातिर उखड गईनी हां !!
नविन जी बहुत अच्छा रेसेअर्च करके लिखले बाड़ा भाई...चला कुछ ता आज बहुत बढ़िया भईल....आज अगर प्रशोतरी ना खेलल जाईत त तहार ई रूप ना नु दिखाई देले रहित एतना जल्दी....लागा रहा भाई अईसही ज्ञानवर्धक रचना आपन पेश करत रह...जा झार के भईवा......:)

मनोज भाई जय भोजपुरी

एह में बहुत कम हम लिखले बानी , आ खोजला पे ऊ सब नेट पे मिल जाई , हम ता बस कही कही पे आपन बागी वाला भाव दे देले बानी आ कही कही के कुछ कम लागत बाटे ता लिख देले बानी |

बस हमार असल उद्देश्य रहल हाटे एह विषय के भोजपुरी में पेश करे के बस उहे सोच के हम ई लिख देले बानी | आ इतना जानत बानी की बहुत सारा चीज बहुत लोगन के ना मालूम होई या मालूम होई ता भुला गईल होई ता वोह चीजन के जानकारी इक बार फेरु से हो जाई |

जी ई बात ता सही बाते की रौवा प्रश्नावली से प्रेरित हो के हम तनी उखड गईनी हां आ हम खाली १२ गो लिंक के देख के ई लिख देनी हां | कोशिस रहे तनी और करे के लेकिन कवनो बात न उमेद बाटे हम सब चीज के धई ले ले बानी आ अगर छुटल होई ता बाकी सदस्य लोग वोह में जोड़ दी |

आ उहे उमेद हम रउवा से भी करत बानी आ और भी बाकी सदस्य लोगन से हम निहोरा करत बानी की रउवा सब के भोजपुरी सिनेमा के बारे में जवन भी अच्छा भा बुरा ( कोशिस अच्छा के रही ता तानी निक लागी ) समाचार रहे वोह से जय भोजपुरी के अवगत करावत रही |

जय भोजपुरी
Wah Navin bhai, raura ke jitna Dhanyabad Dehal jao u kam pari. Bhojpuri aage kayila khatir raur yi prayas sahi me kauno jabab nayikhe. Bahut achha ba. Bhojpuri cinema ke jankari ke upar raur ye lekhni.
bahut badhiya jankari navin ji eta malom rahe ki bhojpuri ke pahila sinema ganga maiya tohe piyari chadhebo rahe
lekin etana ditel me batave khatir dhanyabad,

बहुत खूब नवीनजी.....ग्रियर्सन के उद्दरण दे के आजु रऊआ हमार दिल जीत लेहनी...
बधाई........
Navin bhai...........

pura bhojpuri sinema ke itihas post kar dehala.aur sath-2 me jawan aaj bhojpuri sinema me
aslilata ba okaro par tikha tipadi kaela bani. aap ke ye post hamake bahut sunder lagal.

ye bhojpuri sinema ke aakh khole wala post ba.sath me hamani ke yehe pariyas rahe.
ki gandi film ke bahiskar karal jav. nahi t o din door na jab bhojpuri sinema ka halat

kharab ho jayi. oke door kare ke hamani ke aaj se parayas kare ke padi..............
aaj ke bhojpuri sinema me Gaon ke madai, hal chalawat kisan, hara bhara khet,
Gaon ke o aagan sab itihas ban ke rah jayi................

Jai bhojpuria......................
वाह !!!!!
"नविन भाई तहार जेतना बड़ाई करी कम बा काहेकी हमनी में से बहुत लोग ऐसन होइहें जेके भोजपुरी सहित्य और सिनेमा के बारे में इतना जानकारी होई.....
बहुत बहुत धन्यवाद भाई एह बतावे खातिर ..................
नविन भाई "बचपन में हम "बहरा बाबा" के किस्सा रेडियो में सुनत रही, हास्य व्यंग के बहुत बढ़िया प्रोग्राम आवत रहे पाहिले ,
आज राउर ई लेख पढला के बाद अचानक से याद आ गउवे ....नेट पर (youtube )बहुत सर्च भी कैनी पर कुछ डिटेल न मिलल .
खैर ई पढ़ कर मन खुश हो गइल..........
उम्मीद बा आगे भी ई तरह के जानकारी मिळत रही ...
जय भोजपुरी
नवीन जी बहुत बढ़िया लेक लिखले बानी. बल्म परदेशिया, गंगा मैया तोहे पियरी चडाईबो, लागी नही छूटे राम ई कुल फ़िल्मन में येतना शानदार गाना हन्व स की आज भी बहुत दिलचस्पी से सुनल जाल स.

आ जानत हाईं ए गानं क कलेक्सन आज भी हमरी मोबाइल में बा

ऐसन जानकारी खातिन आपक बहुत बहुत धन्यवाद
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bahut badiya chali prasnotari se kuch aur bhala ho gayil aur bhi jankari mil gayil bhai logan ke
नविन भाई बड़ी नीमन काम कईले बाड़अ...आ बहुत ही सृजनात्मक आ ज्ञानवर्धक बा...ईसहि लागल रहअ ...बहुत जरूरी बा अच्चा मटेरिअल के सभ भोजपुरियन लगे पहुचावाला के एक जगह पे.....हम सोचल बानी की सभ खातिर एहिजा अलग सेक्सन बन जाईत ता ज्यादा बढ़िया रहित.. जीसे की सिनेमा ...प्रश्नावली...इत्यादि..का कहत बानी??

जय भोजपुरी,

मनोज कुमार ओझा

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