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स्वास्थ लाभ के जानकारी ( आपन डॉक्टर हमनी के खुद )

काफी सोचला के अबद ई लागल हा कि हमनी के स्वास्थ के जानकारी भी एक दुसरा से बाटे के चाही आ ई स्वास्थ लाभ घरवु तरिका के रही जवना में कुछ करे के नईखे ( माने ना कुछ पैसा अधिका खर्चा करे के बाटे ना ही कुछ ख़ास मेहनत करे के बाटे ना ही वोह खातिर कवनो औरु जोड़ जुपुत करे के बाटे ) बस घर में रोज वाला सामान , सब्जी , तरकारी आ और चीजन के सही तरीका से इस्तेमाल कईला पे कुछ बिमारी के इलाज हो सकेला आ कुछ बिमारी के आवे से बचावल जा सकत बाटे |

बस ता रउवा के जवन मालूम बाटे ऊहो एजुगा लिखी हमहू लिखब आ जे जे रउवा सब के जानकारी में बाटे उन लोगन के भी बतायी |

जय भोजपुरी !!!

Tags: घरेलु, जानकारी, भोजपुरी, स्वास्थ

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दिल के लिए फायदेमंद है टमाटर


लंदन। हो सकता है कि आपके घर में भी किसी बड़े-बुजुर्ग ने यह बताया हो कि टमाटर खाने से चेहरे पर लाली आती है। टमाटर के बारे में इस परंपरागत ज्ञान को अब वैज्ञानिक आधार भी मिलने लगा है और एक के बाद एक शोधों से इसके औषधीय गुणों के बारे में पता चल रहा है।
भारतीय मूल के एक शोधकर्ता ने ताजा शोध में बताया है कि टमाटर के बीजों से तैयार रस रक्तवाहिनियों में थक्का जमने से रोकता है। इससे हार्ट अटैक [हृदयाघात] एवं स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

रक्तवाहिनियों में बनने वाला खून का थक्का रक्त के बहाव में रुकावट पैदा करता है जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा पैदा होता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक एस्पिरिन की अपेक्षा टमाटर के बीजों का रस इन बीमारियों की रोकथाम में ज्यादा कारगर साबित होता है। खून को पतला बनाने के लिए लाखों लोग एस्पिरिन का सेवन करते हैं। एस्पिरिन से आंतरिक रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है। हाल ही में किए गए शोध के मुताबिक 'टमाटर के बीजों का रस का सेवन आंतरिक रक्तस्राव के खतरे को काफी कम कर देता है।'

टमाटर के इस्तेमाल का जहां महज 18 घंटे में असर दिखाता है वहीं एस्पिरिन से ठीक होने में 10 दिन लगते हैं। टमाटर व एस्पिरिन दोनों प्लेटलेट्स को नियंत्रित करते हैं। खून का थक्का जमने के लिए प्लेटलेट्स ही जिम्मेदार होती हैं। धूम्रपान, खून में कोलेस्ट्राल के उच्च स्तर और तनाव के कारण प्लेटलेट्स के आकार में ऐसे बदलाव आते हैं, जिनकी वजह से थक्के जमने की आशंका बढ़ जाती है। एस्पिरिन थक्का जमने के प्रभाव को कुछ हद तक कम कर देती है लेकिन टमाटर के बीजों का रस थक्का जमने की प्रक्रिया को एस्पिरिन के मुकाबले ज्यादा धीमा करता है।
एबरडीन [स्काटलैंड] के रोवेट इंस्टीट्यूट आफ न्यूट्रीशन एंड हेल्थ में प्रो. असीम दत्ताराय ने टमाटर के बीजों से पड़ने वाले प्रभाव की खोज की है। दत्ताराय पौधों में प्रभावकारी थक्कारोधी रसायन की खोज कर रहे थे।


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स्रोत - जागरण
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navin bhai

Raua bahot badhiya jaankari dele baani, somawar ke ham kuchh swasthya sambandhi jankari post karab eh forum me
नियमित ब्रश करने से याददाश्त तेज

लंदन। सुबह बिस्तर छोड़ते ही हमारा सबसे पहला काम ब्रश करना ही होता है। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक दांतों की सफाई व ताजगी के लिए ब्रश करना हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। हाल में किए एक शोध में बताया गया है कि वयस्कों द्वारा अपने दांतों की उचित देखभाल करना यानी नियमित रूप से ब्रश करना याददाश्त बनाए रखने में मददगार साबित होता है।

पहले के शोधों में भी दांतों की साफ-सफाई न रखने को डिमेंशिया [याददाश्त कम होना] समेत हृदयरोग, स्ट्रोक व डायबिटीज के लिए जिम्मेदार बताया गया था। न्यूयार्क के कोलंबिया कालेज के शोधकर्ताओं के मुताबिक मसूढ़ों की बीमारी मस्तिष्क की क्रियाविधि को प्रभावित करने के साथ पूरे शरीर में जलन पैदा करती है।

शोध में 60 साल व उससे ज्यादा उम्र के लोगों को शामिल किया गया। जिन लोगों में मसूढ़ों की बीमारी के लिए जिम्मेदार पैथोजन ज्यादा पाया गया उनमें याददाश्त संबंधी दिक्कतें देखी गईं। प्रमुख शोधकर्ता डा.जेम्स नोबल ने बताया, 'जिन लोगों में पैथोजन का उच्च स्तर पाया गया उनमें याददाश्त की गंभीर परेशानी देखी गई। शोध से साफ है कि दांतों-मसूढ़ों की उचित देखभाल न करने से डिमेंशिया का खतरा पैदा हो सकता है।'

'जर्नल आफ न्यूरोलाजी, न्यूरोसर्जरी एंड साइकाइट्री' में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक करीब 2400 पुरुषों व महिलाओं पर किए गए शोध में दांतों की बीमारियों को याददाश्त पर प्रभाव डालने वाला पाया गया। दांतों की बीमारी से पीड़ित 5.7 फीसदी लोगों को याददाश्त की सामान्य समस्या देखी गई जबकि 6.5 फीसदी लोगों को री-काल [दोबारा याद करना] व 22.1 फीसदी लोगों में लगातार भूलने की परेशानी देखी गई।

क्या है डिमेंशिया

डिमेंशिया को भूलने की बीमारी भी कहा जा सकता है। सामान्य रूप से यह समस्या उम्रदराज लोगों में सामने आती है। इसके चलते व्यक्ति की याददाश्त, एकाग्रता, बोलने की क्षमता प्रभावित होती है और उसे समस्याओं का निदान खोजने में परेशानी होती है।

शुरुआती लक्षण

-नियमित तौर पर हाल की घटनाओं, नाम व चेहरे भूलना
-चीजों को किसी स्थान पर रखकर भूल जाना
-समय को लेकर भ्रम की स्थिति
-चित्त में अस्थिरता
-साफ-सफाई का ध्यान न रहना
-निर्णय न कर पाना


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स्रोत - जागरण
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मधुमेह{दैबिटिज,चीनी के बेमारी} टाइप-३ ,अगर केहू के बा ता ओकरा खातिर कुछ जानकारी----
---जेकरा भी मधुमेह के बीमारी बा ओकरा चाही की एगो टॉफी हमेशा अपना पोक्केट में रखे, अचानक सुगर डाउन भैला पर इ बहुत काम आवेला/
---नियमित रूप से आपण आंख के पूरा चेकअप करवट रहे के चाही/
---नियमित रूप से किडनी के चेकुप करावे के चाही/
---CREATININE अगर १.२ होखे ता समझी की किडनी में कुछ दिकत बा,तुरत डॉक्टर से मिले के चाही/
---FASTING BLOOD SUGER-१०० से कम रहे के चाही /
---BLOOD UREA-45 से अगर ज्यादा बा ता,तुंरत डॉक्टर से मिले के चाही/
दामेंशिया थाइ रॉयड ग्लॅंड की इम प्रॉपर फंकशॉन से होता है.
योगा में शोल्डर स्टॅंड आसन या सर्ओौऊनगासन ( sarvaungasana) करने से थाइ रॉयड हेअल्थ ठीक होती है
या सौंफ खाने से भी ठीक होती है. दामेंशिया ज़्यादातर पासचमी देशों में होता ही. क्योंकी इंडिया में तो 35 के बाद जब खाना ठीक से नहीं पाचाने लगता है तो हमलोग सौंफ खाने लगते हैं. जो की एक होमे रेमेडी है

Saunph ka sharbat ek bahut hee healthy drink hai jo quick energy detee hai saath hee yaddashat theek kartee hia.

Source the Gazette Montreal
Akharote aur haldi world ke 10 brain food men ek hai. India men Alzymer ka percentage Nagayan hai. Iska karan Haldi ya Turmeric ka prayoge hai.
Haldi ek inflamatory medicine hai. Isee se hamlog chot par garam haldi ka lep lagate hai.
आंवला(त्रिदोषनाशक)

जी हाँ ,दुनिया में भगवान् के बाद आंवला ही सच्चा साथी बा ,जैसे अध्यात्मिक .आदिदैविक ,और अधिभौतिक कष्ट से परमात्मा मुक्ति दियावेलन ठीक ओही तरह ,हाड मांस के दुनिया में आंवला वात्, पित्त और का काफ्फ़ त्रिदोष के नास करेला,अही से एकराके अमृतफल भी कहल जाला, भारतीय जडी बूटी के पुरे विश्व में एगो आपन स्थान बा,ई जडी बूटी के द्वारा भयंकर से भयंकर रोग से भी छुटकारा मिल सकेला ई बात अब पूरा विश्व मानता,ओमे आंवल एगो महत्वापूर्ण फल और जडी मानल गइल बा ,और अभी एकर सीज़न भी चलता ,हर जगह आसानी से मिलभी जाला एकर कई तरह से प्रयोग में लेवल जा सकेला ,गरुड़ पुरान में ता एह तक कहल गइल बा कि यदि १०० साल तक जीए के इक्षा बा ता रोज आंवला के जल से नहा .
प्राचीन कल में आंवला के बुजुर्ग देवता के रूप में पूजल जात रहे ,आज भी माघ के शुकुल एकादशी और कार्तिक के शुकुल चतुर्दश क एकरे पेड़ के नीचे फूलमाला चदावल जाला और लोग पिकनिक मनावें लं आंवला के पेड़ के नीचे ताकि जैसे देवता के कृपा बनल रहे ओही तरह से आंवला के कृपा पूरे परिवार पर बनल रहे ,
आंवला ही एक अकेला ऐसन फल हा ज्के जोन भी तरह से खाए फायेदा ओतने करेला चाहे सुखा के ,उबाल के,चटनी बना के ,जैसे भी ओकर गुणवत्ता बनल रहेला ,
एम विटामिन सी ,ऐ ,केल्शियम .लोहा ,के अनूठा संगम बा ,करीब
१०० ग्राम आंवला के गुदा में --७२० ml विटामिन सी
१५ iu विटामिन ऐ
५० ग्राम --केल्शियम
१.२ ग्राम --लोहा
पावल जाला
आजकल ता हर जगह आंवल हर रूप में मिल जाला जैसे ,आंवला जूस,चूर्ण,मोराब्बा,jam jelly ,sqush ,आचार आदि ,

१-आंवला में एगो अंडा से भी ज्यादा बल होला.
२-. गर्भवती स्त्रिय के आंवला अवश्य खाए के चाही चाहे जोनों रूप में ले
-3. आंवला ब्लडप्रेशर वालन खातिर भी लाभप्रद ह।
4. आंवला टूटल हड्डि के भी जोड़ देला.
5. जे के नकसीर होत होखे (नाक से खून) सूखा आंवला राती में भिगा के उ पानी से सर धो lewe । आंवले का मुरब्बा खायें। आंवले का रस नाक में तप्कावे.

6. आंवले का चूर्ण मूली में भरकर खाये से मूत्राशय के पथरी में लाभ होला


7. आंवले के रस में शहद मिलाके खिला से से मधुमेह में लाभ होला.

8. रात के आंवले का चूर्ण भीगो के पानी पीये सुबह पेट साफ जाला । पाचन शक्ति बढ़ती है।

9. नित्य 1-2 ताजे आंवले का रस peeye से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं। पांच दिन तक बराबर पियें।

10. ताजा आंवला का रस शहद में मिलाके पियाला के बाद ऊपर से दूध पियें इसे स्वास्थ अच्छा रहेला दिन भर ताज़गी के अनुभव होला,आ नया शक्ति और भर जाला,यौवन में बहार आ जाई
11. आंवले का रस पिए से नेत्र ज्योति बढ़ेला ,
12. गर्भावस्था में उल्टी होहाय , त आंवले का मुरब्बा खाई सभे ।

13. आंवले के चूर्ण का उबटन चेहरा पर लगाये से चेहरा साफ रही दाग धब्बेदूर change जाई.
14. गर्मियों में चक्कर आवे या जी घबरात होखे त आंवले का शर्बत पीही,

15. आवाज बैठ गईल होये , त पिसल आंवला की फंली लें।

16. आंवाला में बाल करिया करे के गुण बा । आंवला बहुत खट्टा होला इसे सफाई अच्छा करेला, धोये के साथ साथ साथ रोज आंवले का सेवन करी,
17. सूखा आंवले का चूर्ण 2 चम्मच रोज रोटी में रखकर खायें। बुढ़ापा दूर रही जवानी बनल रही.


आंवले का जूस पीना चाहिऐ, पेट की तकलीफे दूर होगी.. आंवले का powder ले लो रोज ..घोल बनाकर पीयो..तो पेट ठीक रहेगा..७ दिन लगातार पीयो…मूलाधार केन्द्र की शुद्धि होती है…..शरीर स्वस्थ रखने के ऐसे तरीके है… श्री कृष्ण ने गीता मे बताये है आहार विहार से स्वास्थ्य ठीक रखेश्री आशा राम बापू.

jai bhojpuri

navin ji hamar husband tamatar na khayelan..lekin ab hum unka k jabardasti khiyaib tamatar.jankari khatir bahut bahut dhanyawad
भाई जे मांसाहारी हवे उहा लोगन खातिर बढीया खबर बाटे

नई दिल्ली। कहा जाए कि मांसाहारी भोजन में अंडा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, तो गलत नहीं होगा। चाहें तो उबाल कर खाएं या आमलेट बनाएं। ये दोनों न पसंद हो तो अंडों की भुजिया बना लीजिए। यह भी अच्छा नहीं लगता है तो अंडे की करी आजमा कर देखिए। यानी अंडे के कई फंडे हैं।

अंडा खाने के फायदे

-आंखों के लिए अंडा काफी फायदेमंद होता है। रोज एक अंडा खाने से कैरोटिनायड्स की कमी के चलते आंखों की कोशिकाओं में होने वाला क्षरण रोका जा सकता है। ल्यूटिन व जीजेंथिन नामक तत्वों से कैरोटिनायड्स का निर्माण होता है। किसी अन्य पदार्थ की अपेक्षा ये दोनों तत्व अंडे में प्रचुरता में पाए जाते हैं। यही नहीं रोज एक अंडा खाने से मोतियाबिंद का खतरा भी कम होता है।

-एक अंडे में 6 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन व शरीर के लिए आवश्यक 9 अमीनो एसिड पाए जाते हैं।

-हार्वर्ड स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ के शोध में अंडे को रक्तवाहिनियों में खून का थक्का जमने, हार्ट स्ट्रोक एवं हार्ट अटैक से बचाने में मददगार बताया गया है।

-अंडा केओलीन का अच्छा स्रोत है। एक अंडे में 300 माइक्रोग्राम केओलीन होता है। केओलीन मस्तिष्क, तंत्रिका व कार्डियोवेस्कुलर [हृदय-धमनी] तंत्र की क्रियाविधि को सुचारु बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

-अंडा ऐसा एक मात्र खाद्य पदार्थ है जिसमें प्राकृतिक रूप से विटामिन डी मौजूद होता है।

-अंडा स्तन कैंसर की रोकथाम में भी मददगार होता है। हफ्ते में 6 अंडे का सेवन करने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा 44 फीसदी कम देखा गया।

-सल्फर समेत अन्य खनिज-विटामिन होने के चलते अंडा बालों व नाखूनों के लिए अच्छा होता है।

लेकिन एकरा मतलब ई ना की इक दम भकोस के खायिल जाउ काहे की ढेर खयिला पे नुकसान कई सकेला

अंडा खाएं लेकिन संभलकर


अंडे में मौजूद कोलेस्ट्राल डायबिटीज के मरीजों को नुकसान पहुंचा सकता है। रक्तवाहिनियों में जमने वाला कोलेस्ट्राल हार्ट अटैक व स्ट्रोक के लिए जिम्मेदार होता है।

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स्रोत - जागरण
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:)         
मधुमेह के मरीज लोग के अंडा के जर्दी { पिला हिस्सा } के निकल के खली सफ़ेद हिस्सा के खाए के चाही/एह से कौनो हानी न होई/

Navin said:
भाई जे मांसाहारी हवे उहा लोगन खातिर बढीया खबर बाटे

नई दिल्ली। कहा जाए कि मांसाहारी भोजन में अंडा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, तो गलत नहीं होगा। चाहें तो उबाल कर खाएं या आमलेट बनाएं। ये दोनों न पसंद हो तो अंडों की भुजिया बना लीजिए। यह भी अच्छा नहीं लगता है तो अंडे की करी आजमा कर देखिए। यानी अंडे के कई फंडे हैं।

अंडा खाने के फायदे

-आंखों के लिए अंडा काफी फायदेमंद होता है। रोज एक अंडा खाने से कैरोटिनायड्स की कमी के चलते आंखों की कोशिकाओं में होने वाला क्षरण रोका जा सकता है। ल्यूटिन व जीजेंथिन नामक तत्वों से कैरोटिनायड्स का निर्माण होता है। किसी अन्य पदार्थ की अपेक्षा ये दोनों तत्व अंडे में प्रचुरता में पाए जाते हैं। यही नहीं रोज एक अंडा खाने से मोतियाबिंद का खतरा भी कम होता है।

-एक अंडे में 6 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन व शरीर के लिए आवश्यक 9 अमीनो एसिड पाए जाते हैं।

-हार्वर्ड स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ के शोध में अंडे को रक्तवाहिनियों में खून का थक्का जमने, हार्ट स्ट्रोक एवं हार्ट अटैक से बचाने में मददगार बताया गया है।

-अंडा केओलीन का अच्छा स्रोत है। एक अंडे में 300 माइक्रोग्राम केओलीन होता है। केओलीन मस्तिष्क, तंत्रिका व कार्डियोवेस्कुलर [हृदय-धमनी] तंत्र की क्रियाविधि को सुचारु बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

-अंडा ऐसा एक मात्र खाद्य पदार्थ है जिसमें प्राकृतिक रूप से विटामिन डी मौजूद होता है।

-अंडा स्तन कैंसर की रोकथाम में भी मददगार होता है। हफ्ते में 6 अंडे का सेवन करने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा 44 फीसदी कम देखा गया।

-सल्फर समेत अन्य खनिज-विटामिन होने के चलते अंडा बालों व नाखूनों के लिए अच्छा होता है।

लेकिन एकरा मतलब ई ना की इक दम भकोस के खायिल जाउ काहे की ढेर खयिला पे नुकसान कई सकेला

अंडा खाएं लेकिन संभलकर


अंडे में मौजूद कोलेस्ट्राल डायबिटीज के मरीजों को नुकसान पहुंचा सकता है। रक्तवाहिनियों में जमने वाला कोलेस्ट्राल हार्ट अटैक व स्ट्रोक के लिए जिम्मेदार होता है।

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स्रोत - जागरण
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Ttamatar and saag are the two things which causes stones in kidney and other body part. Actually they contain Oxalate which combines with the Calcium (Milk) and forms the calcium Oxalate stones. So As it is said excess of every thing is bad.

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