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Come, let's do something for Bhojpuri...

एगो सवाल सब भोजपुरिया भाई लोग से....

जय भोजपुरी....

सब भाई बंधू लोग के पियूष तिवारी के प्रणाम बा.....

एक बात रुआ सब से जाने के चाहत रहनी हा कि आखिर कहे हमनी के माई भाषा भोजपुरी के आठवीं अनुसूची में जगह नइखे मिळत....नीचे लिखल कुल भाषा आठवीं अनुसूची में शामिल बा :-
१. असमिया
२. बंगाली
३. बोडो
४. डोगरी
५. गुजरती
६. हिंदी
७. कन्नड़
८. कश्मीरी
९. कोंकणी
१०. मैथली
११. मलयालम
१२. मणिपुरी
१३. मराठी
१४. नेपाली
१५. उड़िया
१६. पंजाबी
१७. संस्कृत
१८. संथाली
१९. सिन्धी
२०. तमिल
२१. तेलुगु
२२. उर्दू
जहाँ तक हमरा मालुम बा नेपाली आपण देश के भाषा न हा...और मैथिलि बोले वाला लोग के संख्या हमनी से मतलब भोजपुरी बोले वाला लोग से भी कम बा....आखिर इतना सब के बावजूद भी भोजपुरी कहे नइखे शामिल होत आठवीं अनुसूची में और इतना नौटंकी और तमाशा कहे हो रहल बा.....हम एह्जा के सब वाद प्रतिवाद पढनी हा जून के भोजपुरी के अधिकार दिलावे खातिर बा.... हम ता बस ई जाने के चाहत बनी कि आखिर कहे ऐसन....जब मैथिलि और नेपाली हो सकत बा ता फेर भोजपुरी कहे न....आज भोजपुरिया लोग दुनिया के कौन कोना में नइखे लोग.....
रुआ सब के जवाब के इंतज़ार रही....
राउरे सब के आपण,
पियूष तिवारी

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पीयुष जी प्रनाम आ जय भोजपुरी

मैथिली नेपाली आ उपरा के बकियवा 20 भाषा वाला लोग जब आपस मे भेटाला मिलेला त अपने भाषावा मे बतियावेला बाकि जब भोजपुरिया लो आपस मे भेटाला मिलेला त भोजपुरी छोड के मय भाषा मे बतियावेला ।

ई सबसे बडहन कारन बा । जवना भाषा के अपना घर मे पुछताछ ना रही जे अपना माई के आदर ना करी ओकर पुछ भा ओकर आदर दोसर काहे आ कईसे करी ?

जय भोजपुरी

ई बतिया रुआ एकदम सही कहनी ऐ भाई जी.... हम ता कई बार लोग से सुन चुकल बनी जब हम भोजपुरी में बात करीले घर से चाहे केहू भाई बंधू से मिलला पर कि काहे ई भाषा बोल तार.... हमर जवाब रहेला कि हम जब बोले के सिखत रही ता हमरा के पाहिले भोजपुरी के बोलल सिखवाल गइल ता हम काहे न बोली तब कहीं जा के लोगवा के मुड़ी शर्म से झुकेला...... अरे नाज बा जी हमरा के हम भोजपुरिया प्रदेश के एगो भोजपुरिया हई......

जय भोजपुरी....

सबसे बड़ कारण ईहे बा जवन नवीन भईया बतबले बानी...
दुसर ऎगो करन जवन हमरा लौउकत बा उ हs ईतिहास मे कैईल गलती जब हम्नी के हिन्दी खतीर आपन कैथी लिपी के छोड़ देहनी जा आ देव्नागरी के भोजपुरी लिखाय लागग उ हमरा समझ से बहुत बड़ गलती रहे जेकर नतीजा ब कि लोग भोजपुरी के येगो बोली कह के नीकल जाला ..

जय भोजपुरी

sahmat baani  ji ham hun 

पियूष जी प्रणाम,

सीधा सा जवाब डेम हम राउर एह प्रश्न पर....जब हमहीं आ रउरा आपन भाषा के क़द्र ना करेम सन त दोसर से का अपेक्षा राखत बानी? जब हमही आ रउरा आपन भाषा के सम्रीधी में योगदान देवे के बजाय आपन नाम चमकावे भर के एगो संसाधन बना लेहम जा...जब हमहीं आ रउरा भोजपुरी मंच पर भी भोजपुरी बोले में लाजायेम जा..जब हमही आ रउरा खाली आपन नाम चमकावे के साधन मात्र एह भोजपुरी के बानवे के कोशिश करेम जा..त उहे होई जे अभी हो रहल बा..करोडो लोगन के भाषा के उपेक्षा,,,,,,,,,,,,,,
जय भोजपुरी 

piyush ji jai bhojpuri a parnam |

navin bhai bahut sahi kahat bade|

bhojpuri ke aathavi anushuche me jagah na milal

ta ekar jimmedar hamani bani ja |

kahe se ki hamani bhojpuri se jada hindi bha dosar bhasha

me byavahar kareni san|jabale hamani na sudharab table ehe haal rahi |

jai bhojpuri |

शशि भाई, आशुतोष भाई और संजय भाई प्रणाम और जय भोजपुरी,.....

सही कहनी सभे भाई.....एकदम सही जगह पर पहुचल बनी सभे......लेकिन एकर कौनो काट या कौनो उपाय त होई नु......का कैल जव आखिर एकरा खातिर की भोजपुरी के आपण घर में ही बेइज्जत होखे से बचवल जा सके.....हमरा त एके उपाय एकर लौकत बा की आपण आपण इलाका जहाँ जहाँ हमनी के बनी ओह्जा ओह्जा भोजपुरी भाषा के अलख जलवाल जव......
हमर एक सुझाव बा एह्पर की जहाँ तक हम देख रहल बनी ई वेबसाइट पर सभे लोग सिवान, छपरा, सारण, बलिया और एहिके आस पास से बा,..तब कहे न हमनी के सब केहू के मदद से आपण आपण इलाका में मिल जुल के भोजपुरी केंद्र खोलल जव जेमे भोजपुरी साहित्य से जुडल किताब ,, भोजपुरी के आचा क्षेत्रीय बुजुर्ग जानकार लोग रहे......
रुआ सब के का विचार बा एह्पर भाई लोग...

piush ji pranam  navin ji ke bichar se hamahu sahmat bani

पियूष जी एकर सोझ जवाब त ई बा कि भोजपुरिया लोग के अपना भाषा से प्रेम नइखे।  भोजपुरी के बढि़या लेखक लोग हिन्‍दी में लिखेला ना कि भोजपुरी में। रउआ नागार्जुन के टक्‍कर के एगो नाम बता देहीं जे यात्री नाम से मैथिली में शानदार रचना करत रहीं। जेह दिन हमनी के आपसी राजनीति छोड़ के भोजपुरी के हित में सोचे लागब जा ओह दिन एह भाषा के वाजिब हक एकरा के मिल जाई।

नविन जि के बात से हम सहमत बानि कुछ लोग आपस मे भोजपुरी बोले मे
सर्माला और जे भोजपुरी खातिर थोड कर भि देला उ भोजपुरी के
देवता बने लागे ला  जैसे राजनितिक से जुड्ल आदमी कुछ भोजपुरी गायक
और सिनेमा बनाये वाला
चुछ सीनेमा के हिरो आ चुछ भोजपुरी गाना गावे वला जेकरा के
खालि भोजपुरि समाज ना बल्कि पुरा हिन्दुश्तान जानत बाटे
ई लोग के भोजपुरी के मान सम्मान के बारे मे ओकरा के कैसे अधिकार
दिलावल जय ओकरा उपर ना बात करिहे उ त बश दिखावे लागे ले कि हम हैई भोजपुरीय हिरो मने कि जनावे लगे ल लो कि
भोजपुरी हमरा से जियत बिया त कैसे भोजपुरी आठ्वी अनुसुची मे
आई लोगन के बतावे के परि कि भोजपुरी भोजपुरिया से नैखे जियत बोल कि भोजपुरीया भोजपुरी से जियत बा
त ज्यादा सोचला से निक बा कि मिल के कुछ कैल जव
आइ भोजपुरी खातिर कुछ कैल जाव

जय भोजपुरी

पीयूष जी प्रणाम,

बहुत गम्भीर सवाल उठवले बानी रउआ आ भाई लोग जउन कारण के साथ जवाब देहले बा ऊहे सही बा । कुल मिला के हर आदमी के अपने व्यक्तिगत स्तर से पहल करे के पड़ी, केहू दुसरा के मुँह तकले कुछु ना होई ....ए विषय पे एइजुक पहिलवों जब जब बतकही भइल बा, लोग के तिलमिलाहट आ आक्रोश निकरल बा .....हम त ईहे कहब कि, चउकी से चउका ले भोजपुरिया महक बिखेरल जरूरी बा ....साथे साथे गैर भोजपुरी लोग के भोजपुरी के सम्पन्नता आ मधुरता के बारे में, बतावत रहे के पड़ी ..धन्यवाद आ जय भोजपुरी भाई ।

Maithali ke pichhe kahe paral wara uho apne sarir ke ang wate.
Tohar bhash naikhe ta kehu ke ta jarur ba....
pl Mr Twari dont tag this type of massege.

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