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हमनी अक्षम बानीं कि मूर्ख ?

सब भाई बहिन लोगन के तिरसठवां गणतंत्र दिवस के हार्दिक बधाई। जवना घरी देश आजाद भइल रहे त इंग्‍लैंड के ज्‍यादातर बुद्धिजीवी लोग के ई कहनाम रहे कि भला 500 रियासत के जोड़ के बनल ई देश एक संगे केतना दिन टिक पायी। जवना देश में सैकड़न गो भाषा आ अतना विविधता बा कि एक इलाका आ दूसरा में कवनो दूर-दूर तक मेल नइखे ऊ कतना दिन टिकी। 10-15 साल से पहिलहीं ई टुकड़ा-टुकड़ा हो जाई, बाकिर आज 63 साल के बादो ना खाली इहां लोकतंत्र बांचल बा बलुक अड़ोसी-पड़ोसी से तुलना कइल जाव त बहुत मजबूत लउकत बा। पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश, श्रीलंका इहां तक कि चीन के तुलना में भी हमनी के लोकतंत्र काफी मजबूत आ सफल साबित भइल बा। रउआ सभे के मालूम होखी कि चीन में ढंग से बोले तक के आजादी ना मिले अउर मीडिया से ले के सरकार तक में काम करे वाला लोग प तमाम तरह के प्रतिबंध बा। एह सब के श्रेय अगर केहू के जात बा त ऊ भारत के आम लोग के सहनशीलता अउर लोकतंत्र में आस्‍था के जात बा। ओइसन सपूतन के जात बा जे एतना भ्रष्‍टाचार, कुशासन अउर विषम परिस्थिति में भी बेहतर भविष्‍य के प्रति आपन श्रद्धा के कम नइखे होखे देले। 

अइसन अच्‍छाई से भरल आ भला लोग के देश में घनघोर आशावादी होखला के बादो हमरा मन में बहुत सारा सवाल बा जवन आज गणतंत्रता दिवस के अवसर पर रउआ लोग के सोझा राखे के मन कर रहल बा।

आजादी के समय राष्‍ट्रभक्ति आ राष्‍ट्रवाद अपना चरम पर रहे, धीरे-धीरे ऊ कमजोर भइल बा, खाली भारते में ना दूसरा देशन में भी बाकिर एह दूनों में तनी अंतर रहल। हमनी के देश के साथ समस्‍या ई बा कि पूरा-पूरा राष्‍ट्र बने से पहिलहीं राष्‍ट्र कमजोर होखे लागल। एकर सबसे बड़ कारण हमरा समझ से ई बा कि भारत के उच्‍च वर्ग के भीतर राष्‍ट्र खातिर कवनो आस्‍था नइखे। आज राष्‍ट्रीयता, आपन भाषा आ संस्‍कृति से लगाव अउर भावना ओहिजे बांचल बा जहां पिछड़ापन (खास तौर से आर्थिक पिछड़ापन) बांचल बा। एकरा के कई स्‍तर प देखल जा सकेला।

हमनी के जब स्‍कूल में पढ़त रहीं जा त 15 अगस्‍त आ 26 जनवरी एगो बड़का त्‍योहार होत रहे जवना के तइयारी 15 दिन पहिलहीं शुरू हो जात रहे। रउआ सब के मालूम होई कि दिल्‍ली में 26 जनवरी के छुट्टी रहेला। इहां के स्‍कूल (खास तौर से प्राइवेट) में भारत माता के जय, महात्‍मा गांधी के जय कहल पिछड़ापन के निशानी मानल जाला एह से अइसन नारा ना लगे।.....

-भारत युवा लोग के देश मानल जाला आ इहां प्रधानमंत्री आ राष्‍ट्रपति ही ना कवनो महत्‍वपूर्ण पद प पहुंचे खातिर बूढ़ होखल जरूरी मानल जाला। इहां तक कि 50-60 साल के उमिर तक लोग युवा कवि आ युवा आलोचक कहात रहेला। इ विसंगतिए कहल जाई कि एह साल हमनी के मुख्‍य अतिथि थाइलैंड के प्रधानमंत्री यिंगलुक सिनवात्रा 44 साल के उमिर में प्रधानमंत्री बनल रही उनकर जन्‍म 20 जून 1967 के भइल रहे।

दरअसल आजादी के बादो हमनी के पूरा सामाजिक व्‍यवस्‍था पहिलहीं जइसन दू हिस्‍सा में बंटल रहल। एगो शासक वर्ग आ दूसरका आम जनता जवना के जिम्‍मे सेवा के काम रहे। राष्‍ट्र के बचावे के पूरा जिम्‍मेदारी आजुओ इहे शासित आम जनता ढो रहल बिया जवना के बहुत चालाकी से भरमा के राखल गइल बा। ई काम कई स्‍तर पर भइल बा, आजादी के बाद महात्‍मा गांधी कहले रहले कि वायसराय हाऊस जवन अब राष्‍ट्रपति भवन कहाला ओकरा के अस्‍पताल चाहे कॉलेज बना दिहल जाव बाकिर कई सौ कमरा के एह मकान में आजुओ एगो व्‍यक्ति रहेला/रहेली जिनका के राष्‍ट्रपति कहल जाला।

अइसहीं हमनी के आस्‍था के केंद्र इंडिया गेट मूलत: द्वितीय विश्‍व युद्ध में जान गंवावे वाला देशी-विदेशी लोग के याद में बनावल गइल रहे। हमनी के प्रधानमंत्री आ राष्‍ट्रपति अंग्रेजन के खिलाफ आजादी के लड़ाई लड़ेवाला लोग के नाहीं उनका समर्थन में लड़ेवाला लोग के श्रद्धांजली देवे जाले। ए‍ह संदर्भ में एगो अउर अनुभव बतायीं, हमार एगो घर पंजाब के जालंधर जिला (अब नवाशहर) में बा जहां बाबा रहत रहनीं आ अब चाचा लोग के परिवार रहेला, हमरा घर से 2 किलोमीटर के दूरी प भगत सिंह के गांव बा, जेकरा बारे में हमरा परिवार आ ओह गांव के लोग के कवनो जानकारी नइखे। अइसहीं चंद्रशेखर आजाद के एगो मूर्ति इलाहाबाद के पार्क में लगा के हमनी के काम पूरा हो गइल बा। अपना शहीदन के याद करे आ श्रद्धांजली देवे खातिर एगो ढंग के स्‍मारक तक हमनी के ना बना पइनीं जा।

सांच पूछीं त हमनी के शिक्षा आ सरकार के प्राथमिकता में अइसन लोग खातिर जगह नइखे। असल में समस्‍या के शुरुआत आजादी के समय ही हो गइल रहे। लड़ाई केहु अउर लड़ल आ सत्‍ता पर अधिकार केहू अउर जमावल। जे लोग सत्‍ता में आइल ऊ लोग भारतीय कम अंग्रेज जादे रहे। ई लोग कुछो ना बदलल, वायसराय भवन अउर सेना के रेजिमेंट के नाम के का कहल जाव नया राजा लोग अंग्रेजन के शिक्षा व्‍यवस्‍था, उनकर भाषा नीति, उनकर न्‍याय व्‍यवस्‍था, उनकर प्रशासनिक तंत्र (आजुओ जिलाधिकारी कलक्‍टर कहाले, आ इनकर आतंको पहिलहीं जइसन बा) में कवनो बदलाव ना कइले, इहां तक कि किसान, मजदूर आ सिपाहियन खातिर पहिलहीं जइसन हेय द़ष्टि आजुओ देखे के मिलेला। एह बात के बहुत पहिले से प्रेमचंद जानत रहले एही से लिखले रहले कि ‘जॉन की जगह पर गोविंद नाम से काले अंग्रेज न आ जाएं।‘ 

एकर सबसे बड़ कारण आज के शिक्षा बा, भारत में दू तरह के शिक्षा व्‍यवस्‍था बा एगो श्रमिक वर्ग खातिर जवना में कबो गलती से कुछ अफसर बन जाले आ दूसरका उच्‍च वर्ग खातिर जवना में अपवाद रूप में कुछ सामाजिक काम करेवाला लोग आ जाले। आजुओ भारत के तीनों सेना में अफसरन के कमी बा, काहे कि उच्‍च लोग के ई खतरनाक क्षेत्र बुझाला, भले तुलनात्‍मक रूप से सिपाही जादे खतरा झेलत होखे। आजुओ जब सिपाही के भर्ती होला त एतना बेरोजगार लोग जुटेला कि 2-4 लोग भगदड़ में मर-खप जाला, 1968 से पहिले तक हर स्‍कूल में एन.सी.सी. के ट्रेनिंग जरूरी रहे बाकिर सरकार ओकरा के खतम क देहलस। आज हालत ई बा‍ कि अगर रउआ देशप्रेम आ राष्‍ट्र के बात करब त सांप्रदायिक कहाए लागब। खाली दिल्‍ली ना ज्‍यादातर एलीट स्‍कूलन में एनसीसी के पढ़ाई ना होखे आ भारतमाता के जय आ गांधीजी के जय बोलल पिछड़ापन के निशानी मानल जाला। प्राइवेट के छोड़ीं दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूल में भी 26 जनवरी के छुट्टी रहेला। अमीर लोग के स्‍कूलन में ई सब फालतू के काम कहाला काहें कि ओइसन स्‍कूल चलावे वाला लोग खातिर गुरु, सेवा आ देशप्रेम आउटडेटेड शब्‍द ह। ओंहिजा स्‍कूल इंडस्‍ट्री ह, बच्‍चा सब कस्‍टमर हवे स आ शिक्षक लोग सेल्‍समैन ह, जेकरा के बढि़या पै‍केजिंग क के दुकान चलावे के होला। अगर रउआ ई पूछत बानीं कि सरकार से मुफ्त में जमीन आ दूसर सुविधा काहें मिलेला त रउआ अव्‍यावहारिक बानीं। 4 साल पहिले तक जब ले कोर्ट के डंडा ना चलल रहे तबले गरीब-गुरबा एह स्‍कूलन के ओर घुसे के त छोड़ीं ताके के भी हिम्‍मत ना कर सकत रहे। आजुओ एह स्‍कूलन से निकलेवाला लोग के भारत रहे लायक जगह ना बुझाला आ भारत के एको संस्‍थान आ शहर स्‍तरीय ना लउके। हाई स्‍कूल आ इंटर पास करते ई लोग कैंब्रिज आ ऑक्‍सफोर्ड के बारे में, अमेरिका में बसे के बारे में सोचे लागेला या फेर अपना बाप-दादा के कई तरह के जायज-नाजायज बिजनेस संभारेला।

 

हमनी के राष्‍ट्रपति मर्सिडिज प आ प्रधानमंत्री बीएमडब्‍ल्‍यू प चलेले। सवाल खाली ई नइखे कि एह कार कंपनी के भारतीय जनता के गाढ़ी कमाई के करोड़न रूपया के फायदा हो रहल बा बलुक मूल सवाल ई बा कि आजादी के 66 साल के बादो हमनी के आपन अइसन कार तक ना बना पइनीं जा जवना के चले लायक मानल जाव।

 

आजुओ हमनी के रक्षा करेवाली आ जान लड़ाववाली सेना आ आम जनता सरकारी अफसर लोग के सलामी देवे ले। कायदा के बात कइल जाव त आजादी के बाद ई लोग सलामी देवे के ना सलामी लेवे के हकदार बने के चाहत रहे या फेर तनी जनतांत्रिक ढंग से बराबरी के बात करीं त केहू के सलामी न ठोंके के चाहीं बाकिर ई सब बात छोड़ीं आ तनी व्‍यावहारिक बनीं, काहें कि आजुओ हमार आ राउर जिनगी के बनावे वाला आ हमनी के भाग्‍य लिखेवाला प्रभु लोग इहे बा। अइसन में अगर प्रसिद्ध कवि रघुवीर सहाय के पंक्ति हम याद ना करीं त रउए बताईं कि का करीं-

'' राष्ट्रगीत में भला कौन वह भारत भाग्य विधाता है 

फटा सुथन्ना पहने जिसका गुन हरिचरना गाता है’’ 

Tags: आजादी, कुमार, गणतंत्र, तिवारी, दिवस, प्रमोद

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प्रमोद जी प्रनाम आ जय भोजपुरी 

छब्बीस जनउरी के बहुत बहुत बधाई बा रउवा के भी आ जवन उमेद आस बन्हल बा हमनी के अपना देस के करता धरता लोगन से उ पुरा होखे । 

प्रमोद जी , पहिले त हम बधाई दिहल चाहब भोजपुरी के गद्य साहित्य के मजबुती देत एह लेख के संगे संगे कई गो जरत सवालन के भोजपुरिया लोगन के सोझा ठाढ करत ई लेख सोचे प मजबुर त कईये देत बा भले केहु कुछउ कहो । 

हमरा जहा तक जानकारी बा आ जवन अंजुरी भर भा अंगुरी के पोर भर अनुभव बा जतना हम दुनिया देखले बानी ओह आधार प हम कहत बानी कि जवन हमनी के रीढ के हाड रहे ओकरा के फिरंगिया नीमन से चवर चवर के बान्हि के धई लेहलन स । 

जतना कमजोरी हमनी के समाज मे रहे ओह ओह कमजोरी के धई लेहलन स आ ओकनी के ओजुगे से हमनी के संस्कृति , संस्कार , भाषा , रिति रिवाज जईसन बिरवाई रहे ओह के हेंगवल शुरु कई देहलन स । आ ओहि हेंगा देहला के नतीजा ह की आजुओ हमनी के ओहि मे उभु चुभु बानी जा । 

एकर उदाहरण बा एगो आजु के घटना जवन हमरा फेसबुक प पढे के मिलल ह - 

आज रिपब्लिक डे के मौके पर बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने माइक्रो ब्लॉगिंग साईट ट्विटर पर सबको गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं|हालांकि ऐसा करते हुए उन्होंने आज के इस खास दिन का कैसे मजाक उड़ा दिया उन्हें पता नहीं चला| 

सोनाक्षी ने शुभकामना ट्वीट में लिखा... Gantantantra diwas mubarak! cheers to all things indian, and cheers to being Indian! jai hind! यहां गणतंत्र लिखते हुए उनसे गलती हो गई जिसकी माफ़ी मांगते हुए उन्होंने लिखा,'उप्स गलती हो गई..गणतंत्र में एक एक्स्ट्रा टन जुड़ गया...टन टना टन टारा..हाहाहा..आप सबको गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं!'

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अब अईसन भाव उदबिलाव लेखा अपना गलती प आ उहो एह पावन दिन प करे के भाव रही ओजुगा का सोच बनि सकेला ई बुझल जा सकेला । 

ई पहिला भाग बा एह प हम आगहु लिखब अभी तनी एक जगहा जाये के बा एह से क्षमा चाहब । 

जय भोजपुरी 

प्रमोद जी , राउर उठावल मुद्दा आ ओह मे से निकलत सवालन के बात कईल जाउ त लगभग सब केहु के मन मे इहे सवाल हमेसा आवत होई , केहु तुरि तुरि के त केहु गोटे एह सवालन के उठावे ला भा उठावत होई । 

हम भिखारी ठाकुर प एगो किताब पढले रहनी जवना मे लिखल बा की भिखारी ठाकुर के ओह समय के भा आवे वाला समय के साहित्यकार लो एह से उनुका के भा उनुका रचना नाटक के भा उनुका नाव के धसोर दिहल लो काहे की दुसरा बिश्व युद्ध के घरी उ अंग्रेजन खाति ( सेना मे भरती होखे खाति ) आपन नाटक भा गीतन से सनेस पठावत रहले । 

खैर भिखारी ठाकुर एगो कलाकार रहले आ आ भिखारी ठाकुर अंग्रेजन के गुलामी के बिरोध मे भी गाना गवले बाडे आ तनी कगरी से देखल जाउ त अंग्रेजन के समर्थन मे ओह घरी के नरम दल पुरा तरिका से रहे ( पहिले बिरोध भईल बाद मे कुछ समझौता भईल ) , बाकी जवन राष्ट्रगान एह घरी बा आ जवना के रघुवीर सहाय जी के लाईन देखा रहल बिआ ओह प अगर बोल दिहल जाउ त ढेर लोगन के बकार बन हो जाई भा तरह तरह के बात बतावे लागी । 

हमनी के भीतरी एगो कमी बा आ ई कमी एह से बा काहे की हमने के गतरा गतरा , चवे चवे गुलामी के छाह परल बा , चाहे उ संस्कृति होखे चाहे उ राजनीति होखे चाहे उ साहित्य होखे , चाहे पढाई लिखाई होखे , चाहे उ रोजगार होखे आ ई एह से पडल बा काहे की कहल जाला शासन जेकर होखे ओकरे भाषा ओकरे संस्कृति ओकरे शिक्षा दीक्षा ओकरे तरिका के रोजगार चलेला । 

आ एह गुलामी से पहिले राजसी ठाट - बाट त प्रजा आ राजा के अतना बडहन प्रकोप रहला के कारन अबहियो लोगन के सोच नईखे बदलत आ बदले के सोचतो नईखे , जईसे परल पा ओहिंग परुआ बयल लेखा पटाईल बा फोंफ काटत बा बाकी एको हाली ई नईखे सोचत कि उ कहा परल बा आ ओकरा पटईला के का असर होई । 

हम इहे उमेद करब आ करsतानी की राउर एह लेख के असर कुछ लोगन के भले कुछुवे लोगन के लगे पहुंचो बाकि पहुंचो आ दिल दिमाग ले पहुंचो जवना से कुछ असर होखे आ असर होई त फेरु एकर असर जरुर लउकी । 

आ अंत मे हम इहे कहब की अपना कमजोरी के ताकत बनावे के जरुरत बा , अपना कमजोरी प केहु के चढे देहला के मोका ना देबे के चाही चाहे उ भाषा होखे संस्कार होखे राजनीति भा शिक्षा दीक्षा होखे आ जब ले ई ना होई तब ले बदले के उमेद पानी के टुकि टुकि कईला नियन बा । 

एगो जबरजस्त आ बेजोड लेख खाति बहुत बहुत धन्यवाद 

जय भोजपुरी 

नवीन भाई, धन्‍यवाद एतना समय निकलला खातिर। राउर खांटी भोजपुरी हमरा के बहुत नीमन लागेले। सांच कहीं त हमनी के भोजपुरी प हिंदी-अंग्रेजी के बहुत प्रभाव आ गइल बा। खैर कइसहूं काम चलावत बानीं। हमरा के लागेला कि हमनी के सबसे बड़ समस्‍या अपना भीतर विश्‍वास के कमी बा, एही से दूसरा के समान, भाषा आ पद आदि से हमनी तुरंते प्रभावित हो जानी आ अपना भाषा, संस्‍कृति, अपना ज्ञान के छोट मान के दूसरका के बड़का माने लागेनी। जेह दिन ई विश्‍वास आ जाई आ अपना भीतर के कमी के अहसास हो जाई ओह दिन बदलाव भी आ जाई। एक बार फेर रउआ के धन्‍यवाद

प्रमोद भईया एह बिसवास के तुरे वाला त उहे लोग बा जेकरा एह बिसवास के बरिआर करे काम दियाईल रहे ! एगो साधारन भा आम आदमी से ई उमेद कईल की उ अपना संस्कार रिति रिवाज भाषा के ले के चलो सही ना कहाई उहो तब जब ओकरा खाति अगिला दिन के खाये के जोगाड नईखे आ अईसन लोग ना हु तो भारत मे 20 परसेंट से उपरे होईहे । 

बकिया 30-40 परसेंट लो देखा देखी वाला बा जवना मे हमनियो के बानी जा आ हमनी के अगिला बीस परसेंट के देखि के आपन बिसवास तुरि रहल बानी जा ! आ उ लोग अपना आगे वाला के आ कुछ अईसही हमनी के प्राचीन सभ्यता टुटल आ अब संस्कार संस्कृति भाषा शिक्षा दीक्षा रोजगार बेवसाय टुटि रहल बा । 

अईसे जवन 30-40 वाला लोग बा ई लोग बात बुझि जाउ ( माने हमनी के ) त फेरु बहुत कुछ बदलाव के उमेद कईल जा सकेला ! आ राउर ई लेख कम से कम सोचे खाति त मजबुर कई देत बा । 

जय भोजपुरी 

प्रमोद जी, प्रणाम आ जय भोजपुरी,
  
राउर लेख पढनी ह, त लागल ह कि केहु नींद से झकझोर के उठा दीहल। भारतीय लोगन के राष्ट्रवाद, अउर एगो राष्ट्र के तौर पर भारत के बडाई करे वाला त ढेर लोग बाडन, लेकिन व्यवस्था पर सवाल उठाये वाला लोगन के संख्या ना के बराबर बाटे। वायसराय हाउस के राष्ट्रपति भवन बनला से लेके कलक्टर लोगन के रवैया तक एह देश के "शासक" वर्ग के तस्वीर जवन उभर के सामने आइल ह, ऊ आम आदमी के सोच से परे रहे।
   
शिक्षा जगत पर उठ रहल राउर सवालन के देख के कइ बेर अइसन लागल ह कि सांचो "आजादी" देश के एगो खास वर्ग के ही मिलल बाटे, बाकी लोग त "सेवा" करे खातिर पैदा भइल बाटे। जवना तरह से स्कूलन में राष्ट्रपर्व के दिने छुट्टी दिहल जाता, ओह से राष्ट्रवाद के भावना अगिला पीढी में कम ही होई। ओकरा बाद अगर उहे लइका जब स्कूल से निकलला के बाद एह देश के रहे लायक नइखन मानत, त एह में एह शिक्षा व्यवस्था से बडहन गुनाहगार के बा?
   
कहीं (शायद फेसबुक पर) पढले रहनी कि हमनी के देश में 32-33 साल के क्रिकेटर लोगन के "बुढ" मानल जाला, अउर 55-60 के नेता लोगन के "युवा"। राउर आलेख एह बात के तस्दीक कइ रहल बाटे कि कइसे एह देश में ज्यादातर लोगन के साथ दोयम दर्जा के व्यावहार हो रहल बाटे, लेकिन तबो ऊ लोग सब कुछ सह के भी देश खातिर जान देवे खातिर तैयार रहेला, आ दोसरा ओर कुछ खास लोग के ध्यान ना दिहला का वजह से सेना में "अफसरन" के सीट खाली बाटे। शायद ओह लोगन के ई लागत होखे कि एतना पढला-लिखला के बाद आखिर जान देवे के जाई...?
   
स्कूलन के हालत से लेके अफसर लोगन के रवैया तक पर सवाल उठावत ई आलेख एह देश के जनता के आँखि खोले खातिर काफी बा, अउर शायद एगो खास वर्ग के एह पर खासा आपत्ति हो सकेला, लेकिन "सच" हमेशा कडवा होला। एह सच के दुनिया के सामने ले आये खातिर हम रउआ के धन्यवाद दिहल चाहेब।
   
जय भोजपुरी।
 

प्रमोद जी प्रनाम

"सांच कहीं त हमनी के भोजपुरी प हिंदी-अंग्रेजी के बहुत प्रभाव आ गइल बा। खैर कइसहूं काम चलावत बानीं। हमरा के लागेला कि हमनी के सबसे बड़ समस्‍या अपना भीतर विश्‍वास के कमी बा, एही से दूसरा के समान, भाषा आ पद आदि से हमनी तुरंते प्रभावित हो जानी आ अपना भाषा, संस्‍कृति, अपना ज्ञान के छोट मान के दूसरका के बड़का माने लागेनी। जेह दिन ई विश्‍वास आ जाई आ अपना भीतर के कमी के अहसास हो जाई ओह दिन बदलाव भी आ जाई।"

राउर एक एक बात सोरहो आना सांच  बा....   


जय भोजपुरी

pramod bhiya pranam aa jai bhojpuri.etna neeman lekh likhe bade bahut dhanyvaad ,neeman ta iho lagal ki app desh auri dshvashian bade etna sochat bani.

hamni na ta aksham bani na ta moorkh hamni neediaiyal bani ja jaise sutla me chale k bemari hokhele vaise beemar bani ja.hamni k khud naikhe pata ba ki hamni kehar jaat banija.hamni k matdata hain desh k bhgyabidhata hain ja.pramod bhaiya app akhir me jawan vyavgarik baat likhale bani ki hamni k bhagya likhewala ihe log ba,lekin hamra k lagat ba ki hamni khud apan bhagya unkara haath me deve wala bani ja.jaroorat ba ki hamni sutla se jagee auri apan bhagya khud likhee............................. 

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