Come, let's do something for Bhojpuri...
जवन पाती तइयार भइल बा उ इहाँ लिख रहल बानी । रउआ सभे से निहोरा बा कि आपन सुझाव दी सभे ताकि जरूरत आ तर्क के हिसाब से एहमें बदलाव कके एकरा के अंतिम रूप दिहल जाव ...
( इ हिन्दी में बा जवना के भोजपुरी आ अंगरेजी में साथे साथे भेजल जाई ताकि भाषा के समझे के लेके कवनो बखेडा ना होखे )
आदरणीय महामहिम,
सविनय भोजपुरिया प्रणाम,
हम भोजपुरी-भाषी इस देश में 15 करोड़ से भी अधिक हैं परंतु आजतक हमारी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित नहीं किया गया है ! जबकि इस अनुसूची की 22 में से 21 भाषाओं की जनसंख्या हमसे आधे से भी कम है ! यह सरासर अन्याय नहीं तो क्या है ?
महामहिम, 1950 में संविधान बन जाने के उपरांत संशोधनों के द्वारा कई भाषाओं को आठवीं अनुसूची में ज़ोड़ा गया । आपसे अनुरोध है कि एक बार उन सभी संशोधनों हेतु पारित प्रस्तावों में जो लिखा गया है उसे स्वयं पढ़ने का कष्ट करें । इससे यह स्वतः स्पष्ट हो जाएगा कि अधिकांश भाषाओं को “शांति बहाल” करने के लिए आठवीं अनुसूची में जोड़ा गया है । अर्थात् जब भाषा के लिए आंदोलन हिंसक होने लगे अथवा उपद्रव का रूप लेने लगे तब-तब विवश होकर सरकार को ऐसा कदम उठाना पड़ा । इससे यह परिलक्षित होता है कि भोजपुरी-भाषियों नें शांति बनाए रखने का एवं देश के जिम्मेदार नागरिक होने का अपराध किया है । इसी के दण्ड स्वरूप हमारी भाषा को निरंतर तिरस्कृत किया जाता रहा है ।
क्या हमारी गलती यही है कि हमने उपद्रव नहीं किए ? भाषा के लिए सार्वजनिक संपत्ति को जलाया या बर्बाद नहीं किया ?
हिन्दी के बाद भारत में भोजपुरी-भाषियों की संख्या सबसे अधिक है । तीसरे स्थान पर बंगला भाषा है जिसे बोलने वालों की संख्या मात्र साढ़े आठ करोड़ है । भाषाविद् इस तथ्य को स्वीकार चुके हैं कि भोजपुरी की उत्पत्ति हिन्दी से भी पहले हुई है । ऐसे में भोजपुरी को हिन्दी के तहत् देखना कहाँ तक उचित है ?
अपार जनसंख्या वाली भोजपुरी-भाषी अपनी मातृभाषा की यह प्रताड़ना कब तक सहते रहें ?
भोजपुरी को प्रथम अंतर्राष्ट्रीय भारतीय भाषा होने का गौरव प्राप्त है । विश्व के कई देशों (मारिशस, त्रिनिदाद, फिजी आदि) में यह पढ़ी-लिखी और बोली जाती है और इसे अपने देश में भाषा का दर्जा भी दे रखा है । अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रभाव बढ़ाने के लिए भोजपुरी एक असरदार और मजबूत हथियार है । आज भोजपुरी कला-संस्कृति एवं फिल्में देश की अर्थव्यवस्था में एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है ।
महामहिम, इस बात पर ध्यान दें कि आठवीं अनुसूची में कितनी भाषाओं के अपने फिल्म उद्दोग हैं और कितने टी. वी. चैनल हैं !
भोजपुरी की व्यापकता, भोजपुरी की शक्ति एवं भोजपुरी के प्रभाव से संबंधित तथ्यों का पुलिन्दा इतना व्यापक व विशाल है कि उसे देखकर इस भाषा का आठवीं अनुसूची में अबतक न होना एक बहुत बड़ा षड़्यंत्र दिखायी देता है ।
भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा न मिलने के कारण हम भोजपुरी-भाषी बहुसंख्यक होकर भी घुटा-घुटा महसूस करते हैं । अपने मातृभाषा में अवसरों की कमी एवं नौकरियों कि सिमित उपलब्धता के कारण मातृभाषा के प्रति हीन भावना से ग्रसित होना पड़ता है । यह समग्र राष्ट्र के लिए एक चिंता का विषय है क्योंकि जिनमें मातृभाषा एवं मातृभूमि के लिए गौरव-बोध नहीं होता वैसे लोग देश के लिए बोझ बन जाते हैं ।
महामहिम, अति ने भी अपनी सीमा का अतिक्रमण कर लिया है । भोजपुरी-भाषी अब यह तिरष्कार सहने को तैयार नहीं । आपसे यह हम 15 करोड़ से भी अधिक लोगों का सविनय अनुरोध है कि महामहिम केन्द्र सरकार को उपयुक्त निर्देश दें ताकि संसद के आगामी सत्र में प्रस्ताव पारित करके भोजपुरी को अविलम्ब संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कर लिया जाए ।
हम इस बात के प्रति जागरूक हैं कि “केन्द्रीय लोक सेवा आयोग” अपनी सेवाओं के लिए भोजपुरी का तुरंत प्रयोग कर पाने में कठिनाई अनुभव कर सकता है । अतः, कुछ वर्षों के लिए “केन्द्रीय लोक सेवा आयोग” को उचित छूट दी जा सकती है । परंतु यदि आठवीं अनुसूची का औचित्य बचाए रखना है तो भोजपुरी को इसमें सम्मिलित कर वे सभी उपयुक्त कदम उठाए जाएँ जिससे भारत की यह महान भाषा और भी सशक्त व समृद्ध हो एवं पूरी राष्ट्र इसके अतुलनीय लाभ से लाभान्वित हो ।
भोजपुरी जनता की भाषा है । करोड़ों के अन्तर्मन की अभिव्यक्ति है ।
यदि इस अन्तर्मन को यूँ ही आहत होते रहने दिया जाएगा तो कोई ठिकाना नहीं है कि कब इस अन्तर्मन से चिंगारी फूटे और उसके दाहक ताप से पूरा देश सुलगने लगे ।
महामहिम, आप स्वयं एक माता हैं । मातृभाषा एवं मातृ-संस्कृति की व्यथा यदि एक माता नहीं समझेगी तो और कौन समझेगा ? आशा है, आप 15 करोड़ से भी अधिक हम भोजपुरी-भाषियों की व्यथा भरी पुकार को सुनेंगी ।
जय भोजपुरी ... जय भारत ...
वन्देमातरम् ।
(साभार: यशेन्द्र प्रसाद जी )
Permalink Reply by Pankaj Praveen on December 15, 2011 at 9:48am सही बा ..एकर अंग्रेजी आ भोजपुरी प्रारूप भी इहा डालल जाइत त आच्छा रहित...
Permalink Reply by भास्कर रंजन "सूर्य" on December 31, 2011 at 1:04pm परवीन भाई, अगरेजी में हम तनी ढेर तेज हईं ... ;-) एहसे इ जिम्मा केहू अउर के दिया जाव । भोजपुरी में हम कोशिश करत बानी ।
Permalink Reply by Satyendra Upadhyay "भोजपुरम" on December 15, 2011 at 1:01pm bahute badhiya baate, 22 karod karin 15 karod naa
नमस्कार भास्कर जी।
राष्ट्रपति जी के नाम भोजपुरियन के पाती के रूप में सभ लोगन के राय-सलाह के बारे मे सुन के मन गदगद हो गइल।
भोजपुरी के इहे अपनापन आ सनेह लोगन के भोजपुरी भाषा, संस्कृति आ माटी के बारे में जाने आ एह से जुडे खातिर प्रेरित करत बा।
इ पाती के बारे मे हमरो कुछ सुझाव बा....
१.पाती के भाषा तनि अउर लचकदार आ मोलायम होइत त निमन रहित
२.अउर तथ्य होखे. जइसे विश्व के कई देशों में यह पढ़ी-लिखी और बोली जाती है एहिजा मारीशस अउर/भा ओह देशन के नाम डालल जरूरी बा जहवां भोजपुरी अपना रंग मे सभके रंगले बिया।
३.महामहिम, 1950 में संविधान बन जाने के उपरांत ...........निरंतर तिरस्कृत किया जाता रहा है । पहिल बात इ कि भारत के संविधान २६ नवंबर १९४९ के बनि के तइयार हो गइल रहे आ २६ जनवरी १९५० के लागू हो गइल। दोसर इ कि इ पैरा में अइसन लागता कि हमनी के महामाहिम राष्ट्रपति जी से अनुरोध ना कइके ऊहां के आदेश दे रहल बानी जा.
४.पाती के लंबाई तनिक कम रहि त हमनी के आपन बात अउर प्रभावशाली तरीका से कहि सकेनी जा.
आशा बा हमनी के ई छोटहन परयास जल्दीये आपन रंग देखाई.
ई पाती भोजपुरी के ८वीं अनुसूचि में जगह दियावे में बिलाइ मउसी वाली भूमिका निभाई.
धन्यवाद: श्री कृष्णा जी पाण्डेय
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on December 16, 2011 at 10:47am भास्कर भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी
हमरा ओरि से सही बुझात बा बस इहे की संख्या जवन दिहल गईल बा ओह के बतावल जरुरी नईखे बुझात काहे की अभी ले भोजपुरियन के गिनती भईल नईखे !
एगो प्वाईंट इहो जोड दिहल जाउ की बिदेस मे कई गो देसन मे एह भाषा के आधिकारिक भासा के रुप मे संवैधानिक दर्जा मिलल बा आ ई भासा कई गो अउरी देसन मे बोलल जाले ओजुगा बाकायदा पढाई लिखाई एह मे होला ।
धन्यवाद आ जय भोजपुरी
Permalink Reply by भास्कर रंजन "सूर्य" on December 31, 2011 at 1:25pm नवीन भाइया परनाम
तनी डीटेल होखे त दी ताकि जोड दिहल जाव ।
धन्यबाद
जय भोजपुरी
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on December 17, 2011 at 9:09pm एक हाली एह न्युज के ठीक से पढल जाउ ....
राजस्थानी भाषा को मान्यता की मांग : सांसद भी देंगे साथ
राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लेकर अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में अमेरिका से भारत आकर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह से मुलाकात करेगा। अमेरिका से आने वाले इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रेम भंडारी कर रहे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल के साथ कुछ राजस्थानी सांसद भी शिरकत करेंगे।
संघर्ष समिति के अन्तरराष्ट्रीय संयोजक तथा राजस्थान ऐसोसिएशन ऑफ नॉथ अमेरिका (राना) के मीडिया चेयरमैन प्रेम भंडारी ने बताया कि प्रवासी राजस्थानी बरसों से राजस्थानी को मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जुलाई 2003 में जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत न्यूयार्क आए तो प्रवासियों ने पुरजोर शब्दों में इस मांग को रखा और उसके कुछ दिनों बाद ही विधानसभा में सर्वसम्मत संकल्प प्रस्ताव पारित किया गया। उस प्रस्ताव के आठ वर्ष पश्चात भी केन्द्र सरकार के पास यह मांग लम्बित है। गौरतलब है कि इस मांग को लेकर भंडारी व अभिषेक मनु सिंघवी के नेतृत्व में 15 सदस्यों का एक प्रतिनिधि मंडल अगस्त माह में महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटील से भी मुलाकात कर चुका है। प्रधानमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में भंडारी के अतिरिक्त राजस्थान फाउंडेशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका के अध्यक्ष केके मेहता, कनाडा राना अध्यक्ष तथा संघर्ष समिति के कनाडा संयोजक वाईके शर्मा, अमेरिकन ऐसोसिएशन फीजिशियन ऑफ इंडियन ऑरिजन (आपी) के पूर्व अध्यक्ष तथा नोमिनेशन कमेटी के चेयरमैन डॉ. अजीत सिंघवी, केलिफोर्निया राना के पूर्व अध्यक्ष तथा संघर्ष समिति के केलिफोर्निया संयोजक संजय भंडारी, इंडियन डायमंड कलर ऐसोसिएशन न्यूयार्क के अध्यक्ष सुशील गोयल, केलिफोर्निया राना अध्यक्ष विक्रम भंडारी, कनाडा राना के पैट्रन मैंबर सम्पत पोद्दार तथा केलिफोर्निया की सॉफ्टवेयर कम्पनी के सीईओ ओपी चौधरी शामिल होंगे। भंडारी ने बताया कि इस मौके पर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा। उन्होंने कई राजस्थानी सांसदों से दूरभाष पर बातचीत कर प्रतिनिधिमंडल का साथ देने का आग्रह किया है। भंडारी के अनुसार इस मांग को लेकर सभी सांसद एकमत हैं तथा डॉ. गिरिजा व्यास, चंद्रेश कुमारी, प्रभा ठाकुर, रघुवीर मीणा, अर्जुनराम मेघवाल, किरोड़ीलाल मीणा, गोपालसिंह शेखावत, ताराचंद भगोरा, देवजी पटेल, हरीश चौधरी, लालचंद कटारिया व ज्ञानप्रकाश पिलानिया ने उनके आग्रह को सहर्ष स्वीकारा है तथा प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए वे प्रतिनिधिमंडल के साथ जाएंगे।
Permalink Reply by भास्कर रंजन "सूर्य" on December 31, 2011 at 12:54pm मोंटू भाई से निहोरा बा कि कापी प के पहिला पन्ना के डिजायन बनइती । हमार बिचार बा कि सब कापी के भीतरी इ पाती लिखल रही आ ओकरा आगे लोगन के साइन करावल जाई । बाकी रउआ सभे आपन सुझाव दिही ।
bhaiya parnam a jai bhojpuri |
bahut sunar likhail ba |
aksam ehe bat angreji a bhojpuri me hokhe ke chahi |
aur aab ee agaj na ruke ke chai |
hamaro lagat ba ki bhojpuri bole wala ke ginati 150000 se jada hi hoi
eh se ginaval na jav ta badhiya rahi,aur kavna kavna desh me bolal jat ba
okaro naam bataval thik rahi |
bahut bahut dhanyavad
jai bhojpuri
sanjay paney
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