Come, let's do something for Bhojpuri...
गांव घर में कीरतन के बहुत नीक परंपरा रहल ह..लेकिन एहु के नज़र लाग गईल बा..आब ना उ बारामासा होला ना चैता. लेकिन हमरा गांव में कुछ नौजवान एकरा के जिया के राखे के प्रयास करता हमहुं ओ में सहयोगी बानी. खैर अपनहूं के गांव में होत होई त ओकरा बारे में लिखी . इहां कुछ कीर्तन भी सुन सकल जाता
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Permalink Reply by Brij Kishor Tiwari on December 7, 2011 at 10:39pm जय भोजपुरी आ प्रणाम अमितेश जी
हम त कीर्तन में इहे सुनले बानी जी ...........
हरे रामा हरे रामा ,..... राम रामs हरे हरे !
हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे !!
Permalink Reply by amitesh on December 7, 2011 at 10:45pm इ त अष्टजाम में होला..आ किर्तनों में होखेला
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on December 11, 2011 at 5:08am अमितेश भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी
राउर बात बीस आना सही बा , कीर्तन त होत बा ( अष्टजाम ) रामाय्न पढात बा , बाकी बारहमासा नईखे होत , शवखे नईखे होत आ दुखो नईखे होत , अईसे त हमरा गावे बजावे ना आवेला बाकी गांवे देखनी ह लोग रोजी रोटी के चकर मे शहर मे चली गईल एह से अब गांव प बहुते कम लोग बाचल बा गावे बजावे वाला !
अईसे हमहु अबकी टीम बनावे के बेवस्था कई के आईल बानी देखी का होला !
राउर प्रयास अदभुत बा आ एह मे दु राय नईखे !
आ धीरे धीरे ई परम्परा ई साज बाज आ एह से निकलल आवाज अब बिलात बा जवना के बचावल बहुते जरुरी बा !
उमेद करत बानी एह प अउरी बिचार जाने सुने के मिली ।
जय भोजपुरी
Permalink Reply by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on December 12, 2011 at 1:02pm अमितेश भाई जी प्रणाम ,
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