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गांव घर में कीरतन के बहुत नीक परंपरा रहल ह..लेकिन एहु के नज़र लाग गईल बा..आब ना उ बारामासा होला ना चैता. लेकिन हमरा गांव में कुछ नौजवान एकरा के जिया के राखे के प्रयास करता हमहुं ओ में सहयोगी बानी. खैर अपनहूं के गांव में होत होई त ओकरा बारे में लिखी . इहां कुछ कीर्तन भी सुन सकल जाता

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जय भोजपुरी आ प्रणाम अमितेश जी
हम त कीर्तन में इहे सुनले बानी जी ...........

हरे रामा हरे रामा ,..... राम रामs हरे हरे !

हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे !!

इ त अष्टजाम में होला..आ किर्तनों में होखेला

अमितेश भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी 

राउर बात बीस आना सही बा , कीर्तन त होत बा ( अष्टजाम ) रामाय्न पढात बा , बाकी बारहमासा नईखे होत , शवखे नईखे होत आ दुखो नईखे होत , अईसे त हमरा गावे बजावे ना आवेला बाकी गांवे देखनी ह लोग रोजी रोटी के चकर मे शहर मे चली गईल एह से अब गांव प बहुते कम लोग बाचल बा गावे बजावे वाला ! 

अईसे हमहु अबकी टीम बनावे के बेवस्था कई के आईल बानी देखी का होला ! 

राउर प्रयास अदभुत बा आ एह मे दु राय नईखे ! 

आ धीरे धीरे ई परम्परा ई साज बाज आ एह से निकलल आवाज अब बिलात बा जवना के बचावल बहुते जरुरी बा ! 

उमेद करत बानी एह प अउरी बिचार जाने सुने के मिली । 

जय भोजपुरी 

अमितेश भाई जी प्रणाम ,

राउर बात एकदम सही बा बाकी हरिकीर्तन हमने देने होते रहेला 
पर इ एगो परम्परा टूटत  जात बा बहुत नीमन कैनी रउरा एह विषय के उठा के 
जय भोजपुरी जिय भोजपुरी !

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