Come, let's do something for Bhojpuri...
प्रणाम
जइसन की रउवा सभे जानत बानी...देश के वर्तमान हालत में जहा एक से बढ़ के एक बड़हन घोटाला जनता के सामने आवत बा..जनता के खून पसीना के कमी के बंदर बाट जारी बा लेकिन कौनों भी सरकार भ्रस्टाचार के ले के कौनों सार्थक कदम नइखे उठावत.
आज जब जनता भ्रस्टाचार के बिरोध में सड़क पे आ चुकल बिया त सरकार द्वारा ओह बिरोध के निर्दयता से कुचले के शिल्सिला जारी बा ...सरकार पछ त कुछ सुने के राजी नइखे उहा बिपच्छ के नियत भी पाक साफ नइखे ...
जहा भारत के रास्ट्रीय क्रांति में बिहार आ भोजपुरी के हमेसा बढ़ी चढ़ी के योगदान रहल बा आज के समस्या पे हमनी के का इतेफाक रखत बानी ...बिनम्र चर्चा के संगे बिचार आमंत्रित बा .. जय भारत ,जय भोजपुरी
Tags: भ्रस्टाचार
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on August 16, 2011 at 1:00pm ई सरकार निकम्मा बिआ , ई सरकार के जाये चाही !
उमेद बा दोसर पार्टी सत्ता मे आई त सब कुछ नीमन हो जाई !
जय भोजपुरी
Permalink Reply by प्रदीप भोजपुरियाPradeepBhojpuria on August 16, 2011 at 2:20pm
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on August 21, 2011 at 6:43am
Permalink Reply by FAIYAZ AHMAD [RINKU] on August 18, 2011 at 8:22pm पंकज भाई जय भोजपुरी,
नविन भाई के बात से हम पूरा तरह से सहमत बानी "की इ सरकार निक्कमा बावे" आज के नेता लोग के देख के रूह काँप जाता की हमनी के देश और समाज के का होई ?
कौनो भी नेता या पार्टी के मन में देश और जनता के प्रति कौनो ईमानदारी नईखे हर राजनितिक पार्टी के नेता बस लुट खसोट में लागल बा लोग और सत्तारूढ़ दल के नेता लोग ता हद कर देहले बा लोग ,अगर सुप्रीम कोर्ट न रहित ता राजा और करीम जईसन लोग आभियो मलाई के हड़िया में मुह लगायिले रहित लोग |
Permalink Reply by sanjay kumar singh on August 19, 2011 at 7:23pm
Permalink Reply by Vijay Sharma on August 20, 2011 at 12:36pm sabase pahile sab bhojpuria bhai ke jai bhojpuri
eh bisya par ham navin ji se etefak rakhat bani kahe ki raua log agar sarkar ke kathani par vichar kari ta saf ho jai ki eh sarkar ke aam aadami se kauno wasta naikhe. jab tak sata privartan na hoi desh ke sthiti na sudhari eh se ham sab bhojpuria bhai se nihora karab ki eh sarkar ke kendra se hi na balki pura desh se ukhad phekija.
jai bhojpuri aa jai bharat.
Permalink Reply by भास्कर रंजन "सूर्य" on August 20, 2011 at 2:36pm प्रवीण भाई परनाम,
बडा निमन बतकही शुरू कैइले बानी । बात सही बा कि आज पूरा देश एह बेमारी से लडत बा । अमीर से लेके गरीब ले ... छोट से बड ले । पर सभे बस मजबूरी के नाम प एकरा के या त ढोवत रहल ह भा इ कहीं की आजो ढोवत बा । आज लोग के भरोसा एतना खतम हो गइल बा कि केहू पर उ विश्वास नइखे क पावत । हजारे एगो रोसनी बनके आगा त आइल बाडन पर आजो अइसन लोग बा जेकरा अन्नो प भरोसा नइखे हो पावत । आज भ्रष्टाचार के लेके दूगो विचारधारा बन गइल बा ...
पहिलका जवना में लोग इ मानत बा कि पहिले बिमारी के इलाज होखे के चाही । ना पूरा त कुछुओ त आराम मिली । दरद के अहसास ओकरे होला जेकरा दरद रहेला । अगर दरद कम हो जाव त केतना आराम मरीज के मिलेला उ मरीजे बता सकेला । एहसे पहिले इलाज होखो ... आ एकरा खातीर जवन भी अंतीम उपाय हो सकेला उ होखो ।
दूसरका जवना के कारण अगर केहू निमन काम करतो बा त एह विचारधारा वाला लोग ओहपर भरोसा नइखे क पावत। काहेकि इ बात लोगन के दिमाग में बइठ गइल बा कि एकर कवन ठीक कि कहीं काल्ह होके ओह लोग के भी नियत बदल गइल त ! बस इहे बात सोची सोची के एह विचारधारा के लोग अन्ना के आन्दोलन के संगे नइखे । एह लोगन के कहनाम बा कि जब जनलोकपाल बेमारी के पूरा ठीक करे के गारंटी नइखे देत त फेर लोकपाल के विरोध के विरोध काहे ! इलाज होखे त पूरा होखे ना त जवन होता तवन होखे दियाव ।
हम त इहे कहत बानी कि बेमारी खतम होई कि ना इ त तब नु पाता चली जब ओकर इलाज कइल जाई । पूरा इलाज के भरोसा भले जनलोकपाल नइखे देत पर लोकपाल से अच्छा के त देत बा । दूसरका विचारधारा के लोग इहो पूछत बा कि एन जी ओ काहे जनलोकपाल से बाहर बा ... एकरा होखेके चाही ... त रोकत के बा सरकार एकरा के जोड देव । पर एकरा ले ढेर चीज बा जवन लोकपाल में नइखे ओकर बारे में केहू काहे नइखे बोलत । कुछ अइसन लोग भी बा जे अपना के तटस्थ कहत बा पर एकर का मतलब !!!!
इ बात में कवनो दूमत नइखे कि बिहार हमेशा से राह देखवले बा ... आजो देखावत बा ... आ आगे भी देखावत रही ... पूरा बिहार आ भोजपूरिया समाज भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा से बा आ रही ... बिहार में 15 अगस्त से शुरू भइल “सेवा के अधिकार” कानून एगो नजीर बा ... आ पंचायत स्तर प “राइट टू रिकॉल” भी लागू करे के तैयारी बिहार क रहल बा । जवना के सफल भइला प विधायक स्तर ले जाए के विचार बा । धीरे-धीरे देश के दोसर राज भी बिहार के देखावल अइसन रास्ता पर चले लागल बा ।
नवीन भाई के विचार से एजा हम सहमत नइखी ... सरकार के कोसला से कुछु ना होई । आ दोसरा केहू से भी आस कके हमनी के हाथ प हाथ धके नइखी बइठ सकत ... जरूरत बा खुद कुछ करेके ... सही आ गलत में फरक समझेके आ ओकरा अधार पर समर्थन भा विरोध करेके ... जवना तरेह से मात्र 1-2 फिसदी वोट अधिका आ गइला प लोग नेता चुना जाला ओही तरेह एह भ्रष्टाचार रूपी बेमारी के इलाज के ठीक करे में जवन कानून ज्यादा असरदार लउके ओकरा के चुने के चाही ,,,
जय भोजपुरी
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on August 21, 2011 at 7:05am भास्कर भाई रउवा हमरा से असहमत होखे के पुरा हक बा , बाकी हमरा जन लोकपल बिल से असहमत होखे के एक दम हक नईखे :-)
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on August 21, 2011 at 7:08am भास्कर भाई एगो बात त हम कहबे करब की हमरा देश के भ्रष्टाचार मिटावे खाति 6 गो लोग संविधान के अनुसार चुनाईल लोगन के कनपटी प बन्दुक लगा के कही की इहे सही बा आ इहे होखे के चाही त ई मान्य नईखे हमरा ! आ रउवा एहु से असहमत हो सकेनी भा होई !
हम कबहु ना चाहब की देश के मय बेवस्था केहु अईसना 6,8,10 के हाथ मे दिहल जाउ जेकरा जनता से कवनो जवाबदेही ना रहे !
जईसे की आजु के समय मे टीम अन्ना के 4 गो लोगन के आ ओह लोगन के संस्था के कवनो जवबदेही नईखे !
जहाँ पर बात भ्रष्टाचार और सरकार के आ गईल त उहाँ का भोजपुरी समाज, और का नागपुरी समाज, एह भ्रष्टाचार से सारा समाज दूषित हो गईल बा, रहल बात अनसन के त लोकतंत्र में अनसन, सत्याग्रह और शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर केहू रोक ना लगा सकेला इ लोकतंत्र के मौलिक अधिकार होला! रहल नवीन भैया के बात की सरकार निकम्मा बिया एकरा जाये के चाही त निकम्मा हो या ढेर कमासुत वैसन परस्थिति आईल त सरकार चलिए जाई, चाहे ऊ बिहार के आपन चारागाह समझे वाला लालू यादव की बात होखे भा पश्चिमबंगा के लेफ्ट के सरकार होखे जनता केहू के अति बर्दास्त ना करेला, कुछ संबैधानिक नियम बा आ समय हर चीज़ के निश्चित बा ऊ त वक़्त पे मालूम चल ही जाई! लेकिन एक बात हम ईहा इ भी कहल चाहम की भ्रष्टाचार ख़तम करे के छोड़ भ्रष्टाचार के बिरोध उठे वाला अवाज़ के दबावल ना त सरकार के हित में बा और नहीं लोकतंत्र के इ तरीका होला! आखिर जनता सरकार के कोई निति से सहमत नइखे त कैसे प्रकट करो? जहाँ तक हम समझत बानी लोकतंत्र में इहे होला अनसन और प्रदर्शन! त फिर का गलत बा? सरकार के चाही की दुनो बिल के सामने रख के जवन भी देशहित और जनहित में होखे ओकरा के संसद में पेश करो और पारित करी, ना की जवन केवल राजनेता के हित में होखे या कुछ लोग के फायदा के लायक होखे, संसद सर्वोपरि होला और रही पर संसद से पास भईल कानून भी ऐसन होखे के चाही जे सभके मान्य होखे और जनहित /देशहित में होखे, तभी लोकतंत्र सही रूप से चल सकेला!
हम रावा सभे के सामने एक आकड़ा रखत बानी घोटाला के जवन की आजादी के बाद अपना ही देश में आपन सरकार द्वारा कईल गईल बा प्रत्यक्छ रूप से या परोक्छ रूप से जरा निचे वाला फोटो देखि जा और खुद सोंची जा की अब ना त फिर कब?और कितना?भ्रस्टाचार के खिलाफ कड़ा कानून चाही या अभी रहे दिहल जाव? अभी कुछ और भी बा जवन के एह में नईखे लिखल!
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on August 21, 2011 at 7:04am
Permalink Reply by Atish Kumar on August 20, 2011 at 10:57pm © 2012 Created by Admin.