Come, let's do something for Bhojpuri...
प्रणाम आ जय भोजपुरी
एह सुत्र मे हमनी के भोजपुरी के जेतना भी किताब बाडी स ओकनी के बारे मे ओकनी के नाव लेखक भा जवन भी पता रहे ओह के लिखल जाउ !
अगर केहु इहो लिख दी की ई कहा से मिली त अउरी नीमन होई !
एह सुत्र से भोजपुरी साहित्य के बारे मे जाने के मिली आ किताब खरीदे के मन भी करी आ लोग किताबियो खरीदी !
ई एगो जानकारी के काम करी आ केहु के आसानी रही ओह किताब के खोजे मे !
धन्यवाद आ जय भोजपुरी
Permalink Reply by Avanish Tiwari 20 hours ago सब केहू के जय भोजपुरी आ सादर सस्नेह प्रणाम बा..
एक भोजपुरी के किताब भेंटाइल ह, पढ़ रहला बानी अभी ओह किताब के जवना में सोरठा, दोहा, चौपाई, सवैया के भरपूर रस बा , त सोचनी ह कि रऊवा लोग से साझा करी ...
'एक हाली महाकवि अर्जुन सिंह "अशान्त जी" के रचित कालजयी भोजपुरी महाकाव्य "बुद्धायन" जरूर पढ़ी सभे, जवान की उन्ह के देह छोड़ला (३ जनवरी २००३) के करीब अढ़ाई साल बाद भोजपुरिया लोग के आर्थिक सहयोग से प्रकाशित भईल, जो की एक ऐतिहासिक पहल रहे ...
आ जब "अशान्त जी" के देहावसान हो गईल त ए महाकाव्य के पाण्डुलिपि बहुत जीर्ण-शीर्ण, छितराईल, आ काट-कूट से गजबजाइल रहे, जेकर संपादन के काम लिहनी आ सहर्ष पूरा कईनी भोजपूरी साहित्य के महान साधक "पाण्डेय कपिल जी"...
पाण्डेय कपिल जी लिखा तानी कि - "तुलसीदास- कृत रामायण बाँचे वाली भोजपुरी भाषी जनता के बुद्धायन बहुत रास आई".. आ सचहू एह किताब के एक बार जरूर पढ़ी सभे काहे कि हमरा ख्याल से तुलसीदास-कृत रामायण(जो कि अवधि में रचित बा) के बाद बुद्धायन ओह तर्ज एके एकमात्र महाकाव्य बा जवना में सोरठा, दोहा, चौपाई, सवैया के भरपूर रस बा ...'
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