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Come, let's do something for Bhojpuri...

प्रणाम आ जय भोजपुरी

 

भोजपुरी के बारे मे आ आगे का का करे के बा एह बात ब कई हाली बहस बतकही भईल बा आ हो रहल बा , भोजपुरी मे हाँही खा ले का का भईल बा आ हो रहल बा ओहु प बतकही हो रहल बा , बाकी एगो चीझु जवना प बतकही अभी ले नईखे भईल आ एह प जानकारी भी पुरा नईखे मिलल ओह विषय के हम शुरु करत बानी ! एह विषय प हमरा लगे जानकारी बहुत कम बा आ हम एडमिन जी से भी निहोरा कईल बानी की एह विषय प तनी जानकारी एजुगा पहुंचाई , बाकी कुछ जानकारी जवन हेने होने खोजला से मिलल ह ओह के हम लिखत बानी आ हम रउवा सभ से भी निहोरा करब की रवुआ सभ के लगे जवन जानकारी होखे भोजपुरी के इतिहास के बारे मे ओह के एजुगा लिखी सभे !

 

भोजपुरी भाषा के इतिहास आ काल विभाजन

 

 

श्री शंकर दयाल सिंह जी के लिखल किताब " बिहार : एक सांस्कृतिक वैभव " के हिसाब से भोजपुरी के जवन काल विभाजन बा उ कुछ अईसन बा -

 

किताब कहत बिआ की काल के विभाजन अतना आसान नईखे आ एगो सही आ निश्चित रुप से एकरा बारे मे कुछ कहल नईखे जा सकत तबो राजनैतिक , ऐतिहासिक , धार्मिक , समाजिक लोक साहित्य आ कुछ विद्वान लोगन के आपन आपन खोज के आधार प जवन लउकत बा ओहि के मानी के ई काल के विभाजन भईल बा !

 

प्रारम्भिक ( शुरु वाला , पहिला ) काल - सन 700 स से ले के 1100 ई. तकले

चारण काल - सन 1100 स से ले के 1400 ई. तकले

संत काल - सन 1400 स से ले के 1800 ई तकले

अध्य्यन काल ( एह मे ढेर लिखा पढी भईल बा ) - सन 1800 स से ले के 1900 ई. तकले

वर्तमान भा आधुनिक भा एह घरी वाला काल - 1900 स से ले के अब ले

 

प्रारम्भिक काल के बारे मे ई किताब लिखत बिआ की एह काल मे कुछ लिखाईल नईखे बाकी जवन सिद्ध लोग रहे ओह लोगन के प्राकृत भाषा से जन भाषा मे ( ध्यान देब एजुगा ई लउकत बा की जन भाषा मे भोजपुरी पहिले से बिआ ) आपन बात कहे लागल लो जवना मे भोजपुरी के शब्दन के काफी प्रयोग रहे ! एकरा माने इहे बुझात बा की सिद्ध लोग जब एह भाषा के अपनावल ल ओकरा पहिले से ई भाषा लोगन के बीचे रहल !

 

चारण काल असल मे प्रारम्भिक काल के ही एगो नाव ह जवन ग्रियरसन के दिहल ह अईसे एकरा के कई गो साहित्यकार लोग प्रारम्भिक काल , आदिकाल,  वीरगाथा काल , सिद्ध सामंत युग आदि नाव से भी पुकारे ला । ई प्रारम्भिक काल के ही अगिला भाग भा ह भा ओहि के एगो हिस्सा ह !

 

संत काल जईसे की नाव से मालुम परत बा , एह के भक्ति काल भी कहल जा सकेला ,एह समय मे भोजपुरी मे बहुत ज्यादा रचना भईल बाडी स , कब्रीदास ,धरमदास दरियादास , धरणीधर दास , शिवनारायण , लक्ष्मी सखी आदि लोगन के नाव बा जे भोजपुरी साहित्य मे अदभुत आ बरिआर रचना आवे वाला पीढी के देहलस !

 

अध्ययन काल मे भोजपुरी लोक साहित्य के उपर काफी काम भईल बा , ग्रियर्सन भोजपुरी भाषा के व्याकरण , इतिहास , भुगोल से ले के सीमा तक फैलाव नक्सा के संगे संगे देखवले बाडे , एहि काल मे डा. बुकानन , जान वीम्स केलौग , हार्नले , फैलन , विलियम क्रुक , ह्युम फ्रेजर , एजी शिरेफ , ड्ब्ल्यु जी आर्चर जईसन विदेशी लोग भोजपुरी भाषा प काफी शोध कईल लो , गजेटियर बनल , जनगणना तकले भईल ! एह काल मे भोजपुरी के बहुत बरिआर स्थान मिलल रहे , उ भले लाठी के जोर रहे भा जवन होखे बाकी ई काल भोजपुरी के विकास खातिर सबसे बरिआर काल कहाउ त गलत ना कहाई । एहि घरी कुछ अउरी रचना भी आईल रहली स जईसे लाला खड्ग बहादुर के 1884 मे लिखल सुधा बुँद मे 60 गो कजरी  , पंडित रविदत्त शुक्ल के देवाक्षर चरित ( 1884 ) मे भोजपुरी भाषा स्थान ( नाटक रहाल ई  ) इनिकर लिखल  ' जंगल मे मंगल' किताब जवन बलिया की घटना पे रहल ( 1886 ) , राम गरीब चौबे के " नागरी विलाप " 1886  तेगअली के बदमाश दर्पण ( 1888 ) , दुधनाथ उपाध्याय जी के 'गोविलाप छन्दावली' अउर 'भर्ती के गीत' , बाबु रामकृष्ण वर्मा के लिखल " विरहा नायिका भेद " ( 1886 ) आ अईसन कतने रचना एह काल मे आईल रहली स !

 

 

आगे अउरी लिखाई ,,,,अभी जारी बा .........

 

 

रउवा सभ से निहोरा बा की जवन मालुम होखे भोजपुरी के इतिहास के बारे मे एजुगा लिखी , आधुनिक काल के भी हम लिखे के कोशिश करब ...

 

धन्यवाद आ जय भोजपुरी

 

Tags: इतिहास, के, भोजपुरी

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Replies to This Discussion

नवीन भाई प्रणाम आ जै भोजपुरी,

बहूते बरियार जानकारी दहलिन महाराज और एहके पड़ले की बाद इहे विचार मन मे आवाट है की आपण ई भाषा के इतिहास बड़ा ही गोरणवीत बटे.

धन्यवाद आपके एह अमूल्या जानकारी से अवगत कारावे खातिर.

जै हिंद आ जै भोजपुरी.
नवीन  भाई ,
प्रणाम आ जय भोजपुरी!
भोजपुरी के काल विभाजन के बारे में जवन जानकारी ढूंढ़ के निकालनी ह, सांचो बड़ा उपयोगी बा. एकरा बारे में अभी ले कहीं ना सुनले रहनी ह. 
साथे साथे भोजपुरी साहित्य के जवन झलक देखवनी, ऊ अपने आप में चमत्कारिक बा. बहुत ही बेजोड़ जानकारी!
बहुत बहुत धन्यवाद.
जय भोजपुरी! 

महेन्दर नाथ शास्त्री ( 1901 -1972)

 

बिहार के मशहुर सांस्कृतिक आ राजनैतिक कार्यकर्ता , काशी विद्यापीठ से स्नातक , इँहा के कई गो संस्कृत महाविद्यालयन के अध्यापक रहनी , संस्कृत , हिन्दी आ भोजपुरी के बहुत बरिआर लेखक आ पत्रकार, स्वतंत्रता आन्दोलन आ किसान आन्दोलन के एगो योद्धा , भोजपुरी साहित्य सम्मेलन आ अईसन कई गो संस्था के संस्थापक, " भोजपुरी " नाव से एगो तीनमाही पत्रिका भी इँहा के चलवनी , इँहा के आधुनिक भोजपुरी के जनमदाता भी कहल गईल ।

अपनी मातृभाषा भोजपुरी का महत्व मैने धीरे धीरे पहचाना , केदार जी कहते है कि जो निकट होता है उन्हे धीरे ही पहचाना जाता है , शुरु मे लगता था की भोजपुरी अविकसीत भाषा है ये हमारे बालमन मे बैठा दिया गया था , यह भ्रम पिछले कुछ वर्षो से टुट गया है । जब मैने भोजपुरी की शक्ति से साक्षत्कार किया तब लगा कि इसमे कुछ रचनात्मक कार्य किया जाना चाहिये । 

- केदारनाथ सिंह " अमराई " किताब मे
नवीन भाई जी प्रणाम ,

बहुत सुंदर जानकारी रउरा देले बानी , पर एगो बात बा जौन सभे से कहल चाहब की काल्हु आरा स्टेसन पे हम भोजपुरी कवि औरू भोजपुरी से जुडल कौनो किताब मंगनी त उंहा के चिहा के देखे लगनी औरू ना में गर्दन हिला देहनी !
हमनी के इतिहास त जन लेहनी जा पर भविष्य हमनी के हाथ में बा अगर हम खेसारी के गाना चाहे औरू के गाना के किताब माँगती त मिल जाइत पर बहुत दुःख के बात बा की वर्तमान में इ दशा बा बा इहे चिंता के विषय बा त आईं जा सभे मिलके आज भोजपुरी के भविष्य के सुधरिन बनाईं जा !

एक हाली औरू हार्दिक धन्यवाद राउर !

जय भोजपुरी जीय भोजपुरी !

राजीव भाई प्रणाम आ जय भोजपुरी

 

रउवा टीसन प के बात करत बानी हमरा पटना पुस्तक मेला मे भोजपुरी के किताब ना मिलली स आ बहुत खोजला प दु गो किताब मिलली स भाग एक भाग दो आ उ कुल्हि जमा चार गो रहली स आ 5 मिनट मे चारो बेचा गईली स ! एगो उमिरदार भाई रहलन उ हमरा देखले किनत त तुरते उहो कीन लेहले ! चारो कितबिया फटलाह रहली स !

 

बाकी अब धीरे धीरे अईसही लोग मांगी आ फेरु किनाई किताब !

जी भाई जी हिया हिया से उठे के चाहीं अब आवाज !

जय भोजपुरी जीय भोजपुरी !

 

navin bhai a rajeev bhai parnam |

ego baat hamahu bataem ki, 17 jun ham banaras tesan par 6-7 book beche wala se

bhojpuri mati bha kavno bhojpuri kavita ya kahani ke kitab magani  ta u kahe bhojpuri mati

patrika ha ? hamara ke ta malume na ,dusar leve ke ba ta la na ta chala hone baitha,kah ke

2-3 log hans delas log ,ham kahani ki kahe hasat bada ta u kahale du saal me tohai ek bhojpuri

mati wala grahak milala bake kehu na |ham kahani jab banaras me na mili ta kaha mili ho bhojpuri ?

bakir u log hamar majake udave ke koshis kail hamara bada bura lagal ,agar hamar babu ji,bhaiya a hamar parivar

na rahal hot ta sayad mari-mara ho jat |jab bhojpuri ke kshetra me e hal ba bhojpuri a bhojpuria ke ta baki jagah

ka hoi|e baat sahi ba ki jab magal jai ta ek na ek deen jarur mili
jai bhojpuri

sanjay pandey

राजीव भाई संजय भाई प्रणाम आ जय भोजपुरी

 

भोजपुरी साहित्यकार आ नीमन नीमन फिल्मकार गायकार गीतकार संगीतकार के सहायता करे के बा आ भोजपुरी के विकास करे के बा त एगो बडा नीमन उपाय बा !


कम से कम भोजपुरी क्षेत्र मे कवनो किताब के दोकानि देखी त ओजुगा भोजपुरी के किताब पुछी की बा की ना आ कवनो कैसेट विडियो के दोकान देखी त ओह गायकार भा फिलिम के पुछी की ओकरा लगे बा की ना !

मिली त ले ली ना मिली त तीन चार हाली पुछाई त उ अपने राखे लगिहन।

 

हम आपन अनुभव बतावत बानी , पिछिला साल पटना पुस्तक मेला मे हम मय दोकानि छाभि मरनी बाकी हमरा एकहु किताब भोजपुरी मे भा भोजपुरी खाती लिखल होखे , ना मिलल हमार मेहरारु कहली की भोजपुरी ओतना टांठ नईखे भईल की ओकर किताब रवुआ बाजार मे मिली , तबो हम हारी ना मननी आ एक जगहा हमरा डा. कृष्णदेव उपधिया के लिखल दुनो भाग भेंटा गईल , ओकरा लगे दुनो भाग के दु दु गो कापी रहल , बुझि ली की उ बहुत पुरान छपाईल किताब रहे आ हम खरीदनी ना की एगो तनी बुढाठ आदमी रहलन उहो चट दे दुसरका दुनो कितबिया किन लेहलन !

हमरा तबे बुझाईल की किताब खरीदे वाला बाडे बाकी उ खोजत नईखन आ जहिया से खोजे लगिहन , किताब अपने आप भेंटाये लागी !

 

जय भोजपुरी

भोजपुरी के पहिलका निबंध १९४७ मे    ' पानी ' नाव से लिखाइल रहे ,जेकर  लेखक  रहनी आचार्य  महेंद्र शास्त्री जी जिह्नका भोजपुरी के पहिलका मुक्कमल पत्रिका " भोजपुरी" मे लिखले रहनी जवन १९४१८ मे बरसात के दिन मे प्रकाशित भइल रहे ओकर संपादक भी इहेका रहनी ,बाकिर "भोजपुरी " एखाली के बाद दुबारा प्रकाशित ना हो पावल  |
प्रणाम भाई लोग
हम त भोजपुरी के इतिहास जान के अपने के गौरान्वित मानत बानी की इ हमार मातृभाषा हs I जेकर इतिहास एतना पुरान बा
जय भोजपुरी
नविन भाई जय भोजपुरी,
बहुत सुंदर और ज्ञान्वर्धक जानकारी रौवा देहले बानी भोजपुरी भाषा के बारे में और हमरा खेयाल से इ एगो रौवा अईसन जानकारी के खजाना जुटावे के शुरुवात कईले बानी जुना से आभी तक बहुत से हमरा खानी भोजपुरी भासी लोग महरूम बावे|
हमरा उम्मीद बा की एह जानकारी के खजाना में रोज एक से एक नया नया जानकारी रूपी रतन जुड़त जाई |
विकिपीडिया में एक बार हम पढले रहनी की भोजपुरी भाषा के नाम करन के तरह से भईल,लेकिन इ जानकारी केतना सही बा हमरा नईखे मालूम|अगर रौवा लोगन के एह बारे में कुछ जानकारी होखो तो ज़रूर बताईं | 
"बिहार के आरा जिला में एगो गाँव बा "भोजपुर" एही गाँव के नाम पर भोजपुरी भाषा के नाम कारन कईल गईल बा |
मानल जाला की मध्य काल में उज्जएं से आईल भोजवंशी परमार वंश के राजा लोग एह गाँव के बसावल और एह गाँव के नाम भोजपुर रखल और एह गाँव के आस पास बोलल जाये वाला भाषा के भोजपुरी कहल गईल|"

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