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नमस्कार और जय भोजपुरी बा पूरा जय भोज्पुरी परिवार के......हम पहले तः क्षमा चाहब सबसे इ  कह के की हम केहू के भक्ति और भावना के ठेस नईखी पहुचावल चाहत...इ बस हमार सोच बा..
हम महाराष्ट्र से  डेढ़ साल बाद अपना घर झारखण्ड के टाटा शहर में आइल बानी ...एहिजा एक चीज़ देख के सोच में पड़ गइनी की घरे घरे शिव चर्चा के बड़ा धूम बा...जहा देखा शिव चर्चा जहा देखा शिव चर्चा...लोग अपना काम धाम खासकर औरत लोग सब छोर छार के शिव चर्चा में लागल बड़ी जा...यहाँ तक की बिहार  में भी इहे हाल बा...शिव चर्चा बड़ा जोर शोर से फ़ैल गइल बा...पुछला पर हमार दादी से पता चलल शिव चर्चा  के मतलब  की शिव के अपना गुरु बना के का फायदा भइल बा सबसे चर्चा करे के बा...और सुना तानी की सही में लोग के बड़ा फायदा भइल बा....
हम इ कहल चाह तानी की का हमनी के शिव भगवान् जे इतना युग युग से विद्यमान बाड़े का उनकर चर्चा कईला  से हीं उ दर्शन दिहे और भला करिहें...इ शिव चर्चा खाली मिथ्या बा की एकरा पीछे कोई कहानी बा...एकर का सचचाई बा कृपया केहू बतावे के कष्ट करे.
जय भोजपुरी...

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सुमन जी प्रणाम आ जय भोजपुरी

 

हमरा एह बारे मे इचिको जानकारी नईखे , एह से एह पे कुछ कहल हमरा खातिर जायज ना होई ! बाकी आस्था मे बहुत कुछ बात निकलेली स , हो सकेला आस्था के ही एगो रुप होखे !

 

धन्यवाद आ जय भोजपुरी

सुमन जी प्रणाम आ जय भोजपुरी ,
                   देखि हमनी के देश धर्म प्रधान ह आ एइजा कई तरह के धरम के लोग मानेला ,सब जानता हिन्दू धरम भारत के पर्मुख धर्म ह , धर्म मे आस्था रखे के चाही ,लेकिन कुछ लोग ओ आस्था के एगो समूह मे लेबे लगेलन चर्चा पावे खातिर ,हिन्दू धरम मे कई गो देवी देवता के मानल जाला ,सबकर आपन अलग अलग महिमा ब़ा केहुके कमतर नइखे आंकल जा सकत ,दुनिया जानता शिव गुरु हवन हिन्दू धर्मके लोग उनकर पूजा करेला |बाकिर हमरा इ बात सही नइखे लागत कि शिव जी के कवनो अलग से समूह बना के उनकर चरचा आ पूजा काइल जरुरी ब़ा ,इकुछ लोग के निजी फायदा खातिर क़र रहल बाडन ,|एह तरे के चरचा से  समाज बट रहल ब़ा ,|अगर एगो गाँव मे शिव के अलग ,बिष्णु के अलग ब्रम्हा के अलग भक्त हो जैहन त स्थिति ठीक ना रहि जब कि इ तीनो लोग के स्थान बराबर ब़ा |
 कई जगह शिव चरचा हम सुनले बानी ओम हम अइसन कवनो बट नईखी देखले जवना से समाज आ संस्कार  के कवनो फायदा पहुंची |ह कुछ लोग एकरा से चर्चित जरुर हो जलन ,|लेकिन इ बट सही नइखे कि चरचा पावे खातिर हम धरम के सहारा लई |  कुछ लोग एमा रूचि लेट बाडन सबकर आपन सोच केहू के रोकल नइखे जा सकत काहेकी आस्था के अनंत रूप ब़ा ,वैसे कहल गइल भी ब़ा कि "जिनकी रहि भावना जैसी ,प्रभु मूरत देखि तिन तैसी "

sumanji pranam,

 Hum ta kauno sampraday ya samuh ke aalochna kaila ke thik naikhi samajhat. lekin je shiv charcha me ba

ulog ka bata sakat ba ki guru "sakar" mane je deh rup me maujud ba okra ke banawe ke chahi ya je "nirakar" ba okra ke guru manal jao. shiv charcha me shiv ke guru manal jala je ki nirakar bare. jekra ke kehu dekhle naikhe. soche ke

vishay ehe ba..

सुमन बहिन जय भोजपुरी ,

हम लगभग १ महिना से गाँव बानी औरु इ कुलही देखत बानी बेलौटी  में हरेंदर भईया औरु एगो बहिनि के नाव लिहल जात रहे पोखरा देने से आवाज आवत रहे हम हु सुनत रहनी भोरे से लोग शिव के बारे में चर्चा करत रहन ,

हम सोचे लगनी औरु एक दू आदमी से बात कैनी त केहू कहता कि थागत बाड़े लोग सीधा साधा भोला भाला लोग के लाखो रुपया बिहियां से बटोर के ले गैले लोग , औरु केहू कहत बा कि ना हमरा त बहुत फायदा भइल हम पूछनी कि का त कहले की हमरा लैका के नोकरी लाग गइल लेकी के बियाह हो गइल !

अब हम औरु सोच में पर गइनी हम उनका से पूछनी भाई जी रउवा रामायण औरू गीता  पढ़ले बानी  कहले कि ना हम कुछु बोलनी ना ,
रामायण , गीता , कुरान , बाईबल , गुरु ग्रन्थ साहिब , इ कुलही हमनी के धार्मिक ग्रन्थ हा एह के पढला से सामझिक  जीवन औरू अध्यात्म के जानकारी मिलेला !
रामायण के एक एक पंक्ति सामजिक जीवन जिए के प्रेरणा से भरपूर बा , जब बाली के वध करत बाड़े भगवान्  त बाली पुछले हमरा के काहे मरले त भगवान कहले

"अनुज  बधू  भगिनी  सुत नारी  सुन  सथकन्या  सम्याचारी ...इन्ही  कुदृष्टि  बिलोकेही  जोही ...ताहि  बधे  कछु  पाप  ना  होई ..."
 

जब भगवान् के जंगल मे सीता मैया के गहना गिरल मिळत बा त प्रभु पूछत बानी कि भाई कि तू गहना के चिन्हे ला त उंहा के बोलनी कि ना कर्ण फूल के हम ना चिन्ह पाइब प्रभु हम खाली पैर के अंगूरी मे पहिनल बिछुआ के चिन्ह सकेनी  , असही भरत जी अपना भाई के इंतजार कैलन औरू उनका पैर के खडाऊ से राज पाट चलवलन , श्रवण कुमार जैसन मात्री पित्री भक्त के भी चर्चा बा

भाई बहिन भाभी माँ बाप सामजिकता से जुडल हर पहलु के बहुत ही निमन तरह से रामायण मे वर्णन बा , एहिमे भगवन के द्वारा शिव आराधना भी कइल गइल बा रामेश्वरम में जौन १२ ज्योतिर्लिंग मे से एगो बानी आज भी  !

औरू देखी आदमी खुद अंधकार में बा प्रभु के लीला मे ओहिजे सपष्ट होत्बा कि राम से बड़ा राम का नाम उनका नाम के लिखल पत्थर पानी मे उतराए लागत बा !

अतना बात हम एह से लिखनी कि हमनी के आज स्वयं पथ भ्रस्ठ बानी जा  अपना स्वार्थ से शिव के चाहे कौनो नाव के लेत बानी जा !

एहिजे गीता के पढला पे मालुम चली जब भगवान् अर्जुन के युद्ध मैदान मे गीता के ज्ञान देत बानी त उ पूछत  बाड़े कि प्रभु उ मार्ग बतलाएं जौन से हम रउवा के देख पाइन औरू रउरा तक पहुँच पाइन , भगवान् ओहिजे उनका के उ दृष्टि प्रदान करत बाड़े जेकरा से उ प्रभु के द्वारा देखावल श्रिश्ठी चक्र के देख  पैलन औरू मार्ग बतवले बानी 'योग' तबे त भगवान के योगी राज भी कहल गइल बा  ओहिजे बतवले बानी योग द्वारा ही तुम अपनी इन्द्रयों को वश मे कर सकते हो  और सर्व कला सम्पूर्ण होकर ही मोक्ष कि प्राप्ति कर सकते हो !

अब एहिजा औरू एगो वाकया बा पौन्ड्रक राजा के जे अपना के भगवान् कहत रहे औरू चक्र धारण कैले रहे ! एह समाज मे ऐसानी जाने कतना पोंड्रक घूमत बाड़े फर्क  बस अतना बा कि ओकर जे पूजा करत रहे उ धान धन्य देत रहे औरू जे ना करत रहे ओकरा के मर्देत रहे  आज के पौन्ड्रक जनता के माल से राजा बन जात बाड़े औरू जे ना माने उनका के ओकरा के मूर्ख कहत बाड़े !

रहल बात इश्वेर के त सच्चा मान से जब जब याद कैले बा केहू इश्वेर ओकरा के अहसास दियाव्ले बाड़े कि हाँ हम बानी तहरा संगे !
गीता मे त लिखले बा

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥७॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥८॥


औरू जतना गुरु( कबीर दास , गुरु नानक , साईं बाबा ) भईले उ इहे बतवले इश्वेर एक है  कबीर जी त कहले बानी

एक साधे सभ सधे सभ साधे सभ जाये,  माली सीचे सौ घड़ा कभ्हूँ फल नहीं खाए !

बस प्रभु को सचे मान से आराध्य करिए सत मार्ग पर चलते हुए सभ ठीक हो जाता है आप को अपने धर्म ग्रंथो को पढना है

सभी धर्म ग्रन्थ यही कहते है प्रभु एक है !

बाकि एह पर चर्चा बहुत हो सकेला ,,,,,,,,,,,,,, हम जौन लिखले बानी खाली एगो विचार हा केहू के आस्था के चोट ना पहुंची अइसन हमार उम्मीद बा !
 कन्हैया कन्हैया  तुझे आना पड़ेगा वचन गीता वाला निभाना पड़ेगा !

जय भोजपुरी जीय भोजपुरी !









jeke kawno kaam na ba u shivcharcha me jaat ba. ghare ka kaam na kare ke parat ba. saach kahat baani hamahu bhagwaan shiw ke bhakt baani lekin ekre khlaaf baani. i hamri iha (purwanchal/ghazipur) me bhi kuchh din pahile jor shor se chalal lkin ab kuchh bhail ba.

:-D :-D :-D

 

नमस्कार !!!!!!!!!!!!!
शिव के चर्चा त युग युग सही रहे और अभी भी सही बा .................लेकिन जवन शिव चर्चा अभी गली गली देखे  के मिलत बा उ असली हर्चा न है ...उ त सिर्फ एक तांत्रिक के तंत्र विद्या हँ........इ हम काहे कहाँ तानी ....क्योकि वोह शिव चर्चा में कही भी "ऊं" शबह के  जिगर नएखे. इ सब हमु देखले बानी अपने  गाव में.
 
और हम एकर खूब विरोध करले बानी !!!!!!!!!!!!!!!! हम्निके सभे कोई एकर विरोध करे के चाही और आपन सभ भाई बहन जो यह ब्रह्म में गलत चर्चा  करत बा उकराके सही रास्ता बतावे के चाही.
ये सिर्फ हमार विचार बा ....अगर कोई के गलत लागल होई तो  हमरा के छमा कर देब जा !!!!!!!!!!!!!!
जय भोजपुरिया !!!!!!!!!!!!
jai ho raura sapast wadita ke pranam ba ! jai ho jai bhojpuri jiya bhojpuri !
Ham bhi rauwa sathe bani.
ei sab bevkufi ba....shiv ji hamani ke devta baran, guru naikhe.
hamahun dehri jab gaini ta shiv charcha ke dhum dekhni. par ek baat
jawan hum mark kaile baani ke shiv charcha ke samuh me unpar aur
lower class ke logan hi bare.

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