Come, let's do something for Bhojpuri...
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Permalink Reply by Manoj Kumar on March 29, 2011 at 8:59pm अनूप जी, प्रणाम आ जय भोजपुरी!
जे पूरा घर के संभालेली, सब केहु के ज़िम्मेवारी उठावेली, जेकरा ना रहला से घर, घर ना, श्मशान प्रतीत होला, ओही के प्रति बेरूख़ी आ समय के कमी ज़्यादातर जगहे देखे के मिलेला.
बहुत बढ़िया विषय उठवनी, रउआ. ई चर्चा से बहुत जने अपना अंतर्मन मे झाँकीहे आ सीख लिहें, अइसन बिस्वास बा.
जय भोजपुरी!
Permalink Reply by Shyam Narain Verma on March 30, 2011 at 4:37pm अनूप जी, प्रणाम
बहुत बढ़िया विषय उठवनी, रउआ.
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on March 30, 2011 at 11:35pm अनुप भाई प्रणाम आ जय भोजपुरी
फिलहाल समय के कमी बा बाकी हम अतने कहब की जहिया लोग एह कुल्हि चीजन के उपर सोचे लागी तहिये घर स्वर्ग बनी जाई !
धन्यवाद एह मुद्दा के उठावे खातिर बाकी बिस्तार से चर्चा कईल जाई काल्हु सांझि खा के बाद !
जय भोजपुरी
anup bhai ji parnam a jai bhojpuri |
bahut badhiy mudda utavani bhai ji |
sahi ba t bat kahala mehrau bechari hardam pareshan
rahele kam a pariwar ke le ke |e bat har adami ke soche ke chahi
lekin tabo kehu-kehu mehrau ke hi datele,e na bhail e na kailoo |
aisan an ahokhe ke chahi |
mudda bada jordar ba eh khatir bahut bahut dhanyavad |
jai bhojpuri
sanjay pandey
Permalink Reply by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on April 4, 2011 at 8:50pm niman mudda baa charcha ke anoop bhai samay nikaal ke likhab !
jai bhojpuri
अनूप भाई प्रणाम,
राउर प्रश्न वाजिब बा, आ एह तरह के प्रश्न से सभे रु बरु होत होई. राउर सिलसिलेवार प्रश्न के सिलसिलेवार ढंग से जवाब देवे के कोशिश करत बानी
1 - हमनी के बाहरी भाग दौड़ के साथे-साथ स्थान, परिवेश, लोग बदलत रहेला जौना से मन कुण्ठित ना होखे पावेला, जबकि, गृहणी के ज्यादातर समइया एगो सीमित परिधि मे बीतेला ।----------- हमनी के भी ज्यादातर समय आफिस के दायरा में आ सहकर्मी के संगे, आपन काम में बाझल निकल जाला.........यदि गृहिणी के बात करी त उहो लोग बाजार जाला, टी वी देखेला, घर में नोकारानी भा कई तरह के लोग आवत जात रहेला, पेपर पढ़ेला लो, फेरीवाला, ठेलीवाला आवेला, लईकन के पढावे में, इस्कूल से लावे लेजाये में .................दरअसल इ सब बात एहसे कहनी हाँ की खुश रहल एगो स्टेट ऑफ माईंड होला, इ बहुत कुछ इंडिविजुअल के सोंच पर भी निर्भर करेला.
2 - हमनी के दिनचर्या में, हफ्ता में, एगो छुट्टी होला, जबकि, एगो गृहणी के सगरो दिन कार के होला । बेमारी के हालात में भी ईहे छुट्टी वाला नियम लागू होला ।------- छुट्टी हमनी के एहसे खोजला काहे की हमनी के काम में संवेदना कम आ मशीनी ज्यादा होला, माने हमनी के उद्देश्य पईसा कमायील होला त नियोक्ता के उद्देश्य ओह पईसा के भरपूर उपयोग ....और बेमारी के हालत में त कवनो भी तरह से हेल्प त कराही के पड़ेला.
3 - हमनी के थकल हारल शरीर, घरे पहुँचला के इन्तजार में रहेला, जबकि, एगो गृहणी थकल हारल होखला के बावजूद हमनी के इन्तजार में, रहेले । ------हमनी के घरे जाए के इंतज़ार काहे रहेला? काहे की घरे गाईला पर परिवार से मिले के ख़ुशी से थकान दूर होखे में सहायता मिलेला...इहे बात पत्नी के संगे भी लागू होला.
बाकी राउर इ सोंच बहुत ही प्रशंसनीय बा, आ सभाकेहू थोड़ा थोड़ा सोंचे लागो त वैवाहिक जीवन और आनंददायी हो सकेला.
जय भोजपुरी
अनूप जी प्रणाम, जय भोजपूरी,
राउर कहल सोरहो आना सही बा.मलकिनी लोग त आपन सब कुछ तेजिये के नु मकान के मकान से घर बनावेला लोग.जहवा मरद आ मेहरारू में आरा हिसकी लाग जाई तहवा सुख सपना हो जाई.ई दुनो एक दूसरा के पूरक होखेले,प्रतिअस्पर्धि ना.
कबो -कबो अचके में घरे पहुच गईल करी सभे मलकिनी लोग के खुशी दुगुना हो जाई.
कहियो-कहियो ब्रेड आमलेट आपना हाथे बना दी (बनावे में सबसे आसान जलपान ह)
पढ़ साल गर्मी के छूती में मलकिनी के गावे छोड़ के आ गईल रही, का कही घरे जाये के मने ना करे फक्ट्रिये में लईका लोग भोजन पानी करा देत रहे लोग,मन मार के घरे १०-११ बजे जात रही आ भोरही ऑफिस पहुच जात रही.१ महीना १ बरिस नीयन बुझात रहे.
जय भोजपुरी
Permalink Reply by Raju Kumar on April 7, 2011 at 3:35pm Namaskar,
bahut sundar bichar ba
jekra se hamar bhavishya ba okera ke etana pareshani
akra par shoche ke chahi puri duniya ke
Permalink Reply by Anand Kumar Singh on April 29, 2011 at 9:17am
Permalink Reply by FAIYAZ AHMAD [RINKU] on April 30, 2011 at 10:03pm © 2012 Created by Admin.