Come, let's do something for Bhojpuri...
जय भोजपुरी आउरि भोजपुरिया पिरवार !
संगीत से संस्कार आ संस्कार से समाज के बारे में पता चलेला | जब दुनिया पंडित रविशंकर के सुनेला ता वोकरा भारतीय संगीत, भारतीय संस्कार, आ भारतीय समाज के बारे में पता चलेला ! लोग भोजपुरी के विकाश के बात करेलन, भोजपुरी संस्कृत, भोजपुरी लोकगीत आज दुषित हो रहल बा । हमारा बहुत दुःख होला जब हम आजकल के भोजपुरी संगीत सुनेनी ! कौनो प्रकार से ई भोजपुरी संस्कार चाहे भोजपुरी समाज के तरह नइखे | पहिले क लोकगीत लोग काम करेँ जां त गावत चलेँ लेकिन आजकल के कैसेट के खोखा भी घरे रखल ठिक नइखे, पहिले त हम बता दि कि हमार उद्देश्य केहू के निचा देखावल ना बा, काहेँ से कि हमहु नया गीत सुनिलेँ । नया गायक लोग जेमे मनोज तिवारी,पवन सिँह, अरविन्द अकेला, सनी कुमार सनीया, दिवाकर, गुड्डू रंगीला इत्यादि लोगन से एकही सवाल बा का आप लोग भोजपुरी के नाम पर अइसन गाना काहे गावेलऽजा कि जेके घर मे चार लोगन के साम्हने ना सुनल जा सके, गाना सकेत होता राजा जी, चोलीया के हुंक राजा जी, जिँस ढिला करऽ, सानिया मिर्जा कट नथुनिया, कुकुहुकु, बजार तहार गरम बा, मिस काल मारतारु, जालिदार कुरती, मउसी प मारे लऽलाईन जइसन गाना से समाज मे का संदेष आप लोग दिहल चाहतानी हमरा समझ से बाहर बा ।
पईसा के दलदल में संगीत अईसन उलझ गईल बा की एकरा अच्छा बुरा के कौनो परवाह नईखे रह गईल | गायक लोग ये ईहो नईखे बुझात की एकर केतना बुरा असर हमरा समाज पर पड़ रहल बा | भोजपुरी भाषा के सारा शालीनता ख़तम कर देले बारा सन ई गाना | आजकल भोजपुरी के मतलब फुहरपन आ अश्लीलता ही रह गईल बा |
अईसन बात नईखे की सब गायक लोग अईसने बा लेकिन अधिकता के कारण ईहे लोग ज्यादा प्रचलित बा | हम आशा करा तानी की ये लोग बात समझ में आई आ ई लोग पईसा के चक्कर छोड़ के भोजपुरी संगीत पे ध्यान दी |
गाँव समाज खातिर ई समस्या कुछ ज्यादा ही बड़ा हो गइल बा | खास तौर में हमनी के भोजपुरी समाज में ई सब में दोष पूरा समाज के भी बा | पहिले हमनी के गाँव में पूजा पाठ हवन कीर्तन भजन आदि हमेशा होत रहत रल | सब लईका लड़की बुढ पुरनिया औरत मर्द सब लोग धर्म काम में लागत रहत रहे | ई सब से सबके मन पवित्र होत रहे आ सबलोग शान्ती से जीवन जीयत रहे लोग | अब गाँव में भी सबका घरे टीवी हो गइल बा आ सबकर मनोरंजन के साधन ईहे सब नाच गाना हो गइल बा | अब लईका लड़की जईसन देखहिये सन ओइसने नु काम कर्हियेसन |
अब हमनी के जरूरत बा फेन से आपन जीवन व्यवस्था के ठीक कईला के | आपन समाज आपन गाँव आ आपन धर्म के अच्छा से समझला के | अगर हमनि के अभी से ई सब शुरू ना करे के त होत देर हो जाई !
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Permalink Reply by Admin on September 29, 2010 at 11:42pm © 2013 Created by Admin.