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Sudhir Kumar

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के बर्बादी खातिर जिम्मेदार के...?

पिछला साल करीब 100 गो भोजपुरी फिल्म बनल रहे, आ सच्चाई इहे बा कि ओह में से शायद 5% भी आपन लागत निकाले में सफल ना भइल। ओह में से कई गो त अभियो बक्सा में बाडी सन, एगो अदद डिस्ट्रीब्युटर के तलाश में। अगर रउआ के रोज नया-नया भोजपुरी फिल्मन के हिट होखे के खबर पढे के आदत बा, त शायद ई रिपोर्ट राउर आँख खोल दी।

त का एकर मतलब ई भइल कि भोजपुरी सिनेमा के ई सुनहरा दौर खतम हो चुकल बाटे? हमनी का एह बारे में कई गो भोजपुरी फिल्मकार, अभिनेता, समीक्षक अउर दर्शकन से बात कइनी जा, अउर भोजपुरी फिल्मन के एह हालत के पिछे जवन कारण निकलल, ऊ केहु के भी झकझोरे खातिर काफी बा।

समस्या #1 : कहानी
हमनी का जेतना लोगन से भी बात कइनी, ऊ लोग एक बात पर सहमत रहे कि भोजपुरी फिल्मन में माटी से जुडल मौलिक कहानी के अभाव बा। भोजपुरी के बहुत ही समृद्ध साहित्य बा, आ हर महीना सैकडन गो कहानी लिखल जात बाडी सन, लेकिन फिल्मकार ओकर इस्तेमाल ना कइल चाहेले सन। ज्यादातर फिल्मन के कहानी पुरान हिन्दी फिल्मन से कॉपी कइल जा रहल बाटे, जवन कि बहुत बडहन गलती हवे। हमनी के समझे के चाहीं कि हिन्दी अउर भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के दर्शक एके बाडे, त अगर केहु के पुरा कहानी पहिलहीं से पता बा, त फेर ऊ दोबारा ओह फिल्म के देखे काहें जाई?

समस्या #2 : लोकेशन
"अगर हम लंदन ब्रिज देखल चाह तानी, त हम भोजपुरी ना, बल्कि हॉलीवुड के फिल्म देखल पसंद करब, काहे कि ऊ लोग बेहतर तकनीक के इस्तेमाल करेला," एगो चर्चित गायक भोजपुरिया डॉट कॉम के कहलन। वइसे भी अगर बॉक्स-ऑफिस रेकार्ड देखल जाव त जवन भी भोजपुरी फिल्म के शूटिंग देश से बाहर भइल बा, ऊ दर्शकन के खींचे में नाकामयाब रहल बाडी सन। कारण बहुत ही साधारण बा - भोजपुरिया दर्शकन के ओह फिल्मन में अपना माटी के महक, अउर अपना संस्कारन के झलक ना मिलेला। लेकिन तबो फिल्मकार लोगन के एतना साधारण सा बात नइखे बुझात।

समस्या #3 : संगीत
"भोजपुरी फिल्मन के एह तिसरा दौर के बारे में मानल जाला कि एह में गायकन के बोलबाला बा। इंडस्ट्री के सबसे बढिया मानल जाये वाला चार गो अभिनेता में से तीन जाना के गायक के तौर पर जानल जाला। लेकिन तबो हमरा आज ले एको अइसन गीत ना मिलल, जवन कि दर्शकन के याद होखे। एकर तुलना जब हम 60 और 80 के दशक में बनल भोजपुरी फिल्मन से करेनी, त पता चलेला कि अबो लाखों लोग ओह गीतन के पसंद करेलन," हमनी के सहयोगी वेबसाइट जय भोजपुरी डॉट कॉम पर एगो सर्वे में ई बात निकलल।
 
सच्चाई त इहे बा कि ज्यादातर फिल्मकारन में वास्तविक भोजपुरी संगीत के ना त समझ बा, आ नाही समझे के इच्छा बा। ऊ लोग एगो संगीतकार से गाना रेकार्ड करे के कह देवेला, जेकि 2-3 गो रोमांटिक अउर 2-3 गो आइटम सांग मिला के दे देवेला, भले ही ऊ फिल्म के कहानी से मेल ना करत होखे। ओह लोगन के मकसद खाली अपना संगीत के बिकाऊ बनावल होला, अउर कुछ ना। कुछ लोग कहल की नयापन ले आये के कोशिश होता, लेकिन ओह नयापन जगह मिलल अश्लीलता से भोजपुरी संगीत के वास्तविक मर्म तोपा-ढांपा गइल।
 
समस्या #4 : अश्लीलता
भोजपुरी एलबम का संगे-संगे भोजपुरी फिल्मन में आइटम सांग के नांव पर अश्लीलता के जवन तडका लगावल जा रहल बाटे, ऊ फिल्म इंडस्ट्री का संगे-संगे समाज के भी अंदर-ही-अंदर खोखला कइ रहल बाटे। आइटम सांग के शब्द एतना अश्लील होले सन कि का कहल जाव, अउर ओकर विडियो में आइटम गर्ल के पहनावा आ भाव-भंगिमा देख के शायद हॉलीवुड के कवनो एडल्ट फिल्म में काम करेवाली अभिनेत्री भी शरमा जाई। काल्ह पटना में एगो फिल्म के प्रचार के दौरान खुलेआम 'किस' करे के जवन हथकंडा अपनावल गइल, ऊ एह इंडस्ट्री के गिरत स्तर के सूचक हवे। कहल जाला कि फिल्म समाज के आइना होला, अउर खुलेआम अइसन बेहुदा हरकत करे वाला लोग समाज के कवन राह देखा रहल बाटे, ऊ केहु भी समझ सकेला। अगर अश्लीलता कवनो फिल्म के सफलता के मापदंड रहित, त शायद बी और सी ग्रेड के फिल्म भी करोडन के बिजनेस करित।
 
समस्या #5 : मीडिया
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के एह हालत खातिर मीडिया भी कम जिम्मेदार नइखे। नवहा निर्माता के दिग्भमित करे खातिर फिल्म के प्रचारकन के माध्यम से सुपर फ्लॉप फिल्मन के भी सुपरहिट के खबर बना के मुंबई अउर पटना से प्रकाशित ट्रेड पत्रिकन में छपवावल जाला। जेकरा परिणाम स्वरुप नया-नया लोग एह इंडस्ट्री के ग्लैमर में फंस के आपन सब कुछ लूटा देवेला। मीडिया के लोकतंत्र के चौथा स्तम्भ मानल जाला, लेकिन अपना कर्तव्य के भुला चुकल एह मीडियाकर्मी आ पीआरओ भाई लोग के जोकर के सुपरमैन आ सुपरमैन के जोकर बनावे में तनिको हाथ ना काँपेला।

समस्या #6 : बजट
कबो सोचले बानी कि ससुरा बडा पइसावाला, पंडितजी बताई ना बियाह कब होई अउर निरहुआ रिक्सावाला में का समानता बा? सबसे पहिला बात त ई कि ई मनोज तिवारी, रवि किशन अउर दिनेशलाल यादव निरहुआ के कैरियर के सबसे बड फिल्म बाडी सन, अउर दूसर बात ई कि ई सब कम बजट के फिल्म रहली सन। केहु माने या ना माने, लेकिन भोजपुरी फिल्मन के फ्लॉप भइला में ओकर बढत बजट के भूमिका से इंकार नइखे कइल जा सकत। मतलब बहुत साफ बा, अगर रउआ के आपन फिल्म के कुछ कमाये के बा, त कोशिश करीं कि ओकर बजट कम रहो। "मुन्नीबाई नौटंकीवाली" नियन फिल्मन के कामयाबी एह सिद्धांत के प्रामाणिकता एक बेर फेर साबित कइले बाटे।

भोजपुरी के राष्ट्रीय स्तर पर वर्चस्व के बावजुद सच्चाई इहे बा कि ज्यादातर भोजपुरी फिल्म खाली बिहार अउर मुंबई में ही रिलीज हो पायेली सन। 1 करोड से ज्यादा बजट वाली फिल्मन के लागत खाली बिहार से निकालल ओतना आसान नइखे। लेकिन कुछ लोग बा जे अपना फिल्मन के उत्तर प्रदेश, झारखंड, पंजाब अउर अन्य जगहन पर भी रिलीज कराये में सक्षम होला, आ ओह लोगन के फिल्मन के सफल होखे के उम्मेद भी ओतने बढ जाला।

समस्या #7 : वितरक
"हाँ, भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में सबसे बडहन समस्या फिल्म के वितरण के बा। हमार फिल्म रिलीज खातिर तैयार बाटे, लेकिन ओकर केहु खरीददार नइखे," अपना नांव ना छपला के शर्त पर एगो निर्माता कहलन। ऊ इहो कहलन कि अगर केहु राउर फिल्म के खरीदो लेता, तबो रउआ निश्चिंत नइखी बइठ सकत। एहिजा वितरक लोग अपना शर्त पर राउर फिल्म लेवेला, आ ज्यादातर समय नुकसान रउये के उठाये के पडेला। 

"ऊ लोग राउर फिल्म के गैर-भोजपुरिया क्षेत्र (जइसे दरभंगा) में खाली इहे साबित करे खातिर पहिला हफ्ता रिलीज कइ देला, कि राउर फिल्म फ्लॉप हो गइल। रउये बताईं कि का रउआ गैर-भोजपुरिया दर्शक से कवनो शो 'हाउसफुल' करे के उम्मीद कर सकेनी? पहिला बेर फिल्म बना रहल ज्यादातर निर्माता एह 'ट्रिक' से अनजान रहेला लोग, अउर ऊ लोग मान लेवेला कि उनकर फिल्म फ्लॉप हो गइल।" ऊ आगे कहलन। एह सब के बावजुद कई बेर अइसन भइल बा, जब बहुत बडहन हिट फिल्म के निर्माता के ओकरा फिल्म द्वारा कइल गइल कमाई के 30 फीसदी भी नइखे मिल पावल।

"अगर रउरा डिस्ट्रीब्यूटर नइखी, त रउआ एहिजा ना कमा सकेनी। कई बेर अइसन होला जब राउर फिल्म त सुपरहिट हो जाले, लेकिन वितरक रउआ के राउर हिस्सा देवे से इंकार देवेले सन। कई बेर त रउआ के ई पता भी ना रहेला कि राउर फिल्म अभियो कवनो सिनेमा हॉल में चल रहल बाटे, काहें कि वितकरन के कहला के अनुसार रउआ पहिला हफ्ता ही ओकरा के फ्लॉप मान के वापस मुंबई आ चुकल बानी," एगो प्रसिद्ध फिल्म निर्माता कहलन। ओहिजे दोसरा ओर, अगर रउआ वितरक हईं, त रउआ एगो साधारण फिल्म बना के भी सफलतापूर्वक पइसा कमा सकेनी, शायद इहे वजह बा कि इंडस्ट्री के सबसे बडहन माने जाये वाला कुछ निर्माता लोग वितरक भी हवन। ऊ लोग अगर एगो औसत दर्जा फिल्म भी बनायेला, त ओह लोगन का लगे डिस्ट्रीब्युशन चैनल होला, आपन लागत निकाले खातिर, लेकिन बाकी निर्माता लोग का लगे अइसन कुछ ना होला। एह वितरकन के कार्यप्रणाली आज भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री का लगे सबसे बडहन चुनौती बा।

हर दूसरा महीना फिल्मकार लोगन के बैठक होला, जवना में इंडस्ट्री के भविष्य पर चर्चा होला। कई गो नया निर्माता अइलन, अउर आपन पहिला फिल्म में ही एह वितरकन के हाथों सब कुछ लुटा गइलन, लेकिन एतना बड कलयुगी सच जनला के बादो कवनो निर्माता, निर्देशक, अभिनेता या टेक्निशियन के ई हिम्मत ना पडल कि ऊ वितरक से कवनो सवाल तक कर सको। आखिर बिलार के गला में घंटी बाँधी त के...? फिल्म हिट होखे या फ्लॉप, वितरक लोग हमेशा फायदा में रहेला। बिहार के प्रमुख शहरन में हमनी के द्वारा कइल गइल एगो सर्वे में ई बात खुल के सामने आइल कि कुछ लोग अबो फिल्म देखे आ रहल बाटे, जवना से कुछ ना कुछ कमाई त आजो होते बा। लेकिन एह पूरा प्रकरण में वितरक लोग के भूमिका संदिग्ध बा। वितरक लोग के रवैया का चलते ही कई गो अच्छा निर्माता लोग एक फिल्म के बाद दोसर फिल्म बनाये के हिम्मत नइखे कर पावत, जवना से नुकसान इंडस्ट्री के ही हो रहल बाटे। भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सुखद भविष्य खातिर ई जरुरी बा कि एकर एगो आपन पारदर्शी वितरण प्रणाली होखो, जवन सुचारु ढंग से फिल्मन के वितरण करो, अउर ईमानदारी के साथ फिल्मकारन के आगे आके फिल्म बनाये खातिर प्रोत्साहित करो।

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में पहिले जहाँ हर बडहन कलाकार के 2-3 हफ्ता में एगो फिल्म जरुर रिलीज हो जात रहे, ओहिजे अब कई-कई महीना पर एगो फिल्म नइखे आवत। एह से साफ पता चलता कि भोजपुरिया फिल्म इंडस्ट्री के ई दौर समाप्ति के कगार पर बाटे। दर्शक भी एह इंडस्ट्री के कार्यकलाप से खुश नइखन, जेकरा वजह से ज्यादातर फिल्म बॉक्स-ऑफिस पर मुँह के बल गिर रहल बाडी सन। वइसे ई अलग बात बा कि फिल्म के प्रचारक लोग फिल्म रिलीज होखे से पहिलहीं ओकर के सुपरहिट घोषित कइ देवेला। एह में एगो आश्चर्यजनक बात इहो बा कि निर्माता लोग हर फिल्म के रिलीज भइला के बाद ओकर सफलता के जश्न जरुर मनावेला, भले ही ऊ फिल्म तिसरके दिने सिनेमा हॉल से उतर चुकल होखे। एह पूरा प्रकरण में वितरक लोग का संगे-संगे ऊ निर्माता लोग भी कम दोषी नइखे, जे फिल्म रिलीज के दुसरके दिने मुंबई में ओकरा के सुपरहिट के भव्य पार्टी कर के नवागंतुक निर्मातन के एगो छ्द्म-छलावा दे जाला लोग। चूंकि फिल्म मुँबई में बनेला, आ रिलीज पटना में होला, त ओहिजा लोग एह कुल्ह चीजन पर विश्वास भी कर लेवेला, आ एकरा संगे तैयार हो जाला एगो अउर निर्दोष निर्माता, एह इंडस्ट्री में आपन सब-कुछ गँवाये खातिर। कुल मिला के कहल जा सकेला कि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के अभी बहुत कुछ सिखे के जरुरत बा, तबे ऊ खुद भी कमा पाई, अउर समाज के भी राह देखा पाई।

साभार : भोजपुरिया डॉट कॉम

Tags: इंडस्ट्री, के, खातिर, जिम्मेदार, फिल्म, बर्बादी, भोजपुरी

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सुधीर जी प्रणाम आ जय भोजपुरी

पहिले त बधाई स्वीकार करी की रउवा हिम्मत देखवनी असलियत ले आवे मे , नाही त आहे पे गरई पकडत रहनी हा जा आ कुछ मालुम आ कुछ हवा मे ...

हम भोजपुरिया पे पढले रहनी हा लेकिन तब हमारा मालुम ना रहल हा कि के लिखले बा लेकिन अब जब देखनी हा त मालुम पडल हा की हिम्मत रउवा कईले बानी ।

एगो बहुत दमदार लेख , एगो संतुलित लेख आ सच्चाई के नीमन से लोगन के देखावत ई लेख आज के भोजपुरिया सिनेमा के आ वोह इण्डस्ट्री के असलियत देखा देहलस ।

कुछ सदमा बा कुछ अचरज बा कुछ दुख बा कुछ खीस बा आ सब मिला के शर्म आवत बा की एह लोगन के वजह से ( फिल्म वाला ) हमनी के लगभग हर जगहा मुडी नीचे करे के पड जाति बा मुडी गाडि के चले के पडत बा ...

बाकि हम त एह क्षेत्र से नईखी जुडल आ ना ही हम ढेर जानत बानी लेकिन एगो चीज हमरा हमेशा खटकत रहल हा की का कारण बा लोग भोजपुरी सिनेमा खातिर उत्साहित नईखे ?
का कारण बा की भोजपुरी मे अश्लीलता परोसल जात बा ?
का कारण बा की आजो भोजपुरी सिनेमा कबो मल्टीपलैक्स मे नईखे जा पावत ?
का कारण बा की लोगो कुछुवो करत बा भोजपुरी सिनेमा मे पईसा कमाये खातिर ?

लेकिन ई लेख पढला के बाद सब चीज साफ साफ लउके लागल , हकीकत के बटोर के एक जगह कई दिहल गईल बा एह लेख मे । पर्दा के पीछे , पर्दा पे आ पर्दा के बहरी जवन जवन घृणित , छुतिहर काम ई लोग कई रहल बा उ केहु के मुडि गाडे खातिर काफी बा ।

रउवा सही कहनी की सिनेमा समाज के आईना होला , त का हमनी के समाज अईसने बा ?

राजेन्द्र बाबु जब शाहाबादी के भोजपुरी मे फिलिम बनावे के कहलन त ओकरा कपीछे जवन मकसद रहे वोह केअ ई लोग भुला गईल बा ?

का ई मान के चलल जाउ की एह लोगन के भीतर तनकियो लाज शरम नईखे , का ई मान के चल जाउ की एह लोगन के आपन भी कवनो इज्जत नईखे ?

का अईसने होला भोजपुरी आ भोजपुरिया लोग ?

बहुत सारा अईसन जरत सवाल बा जवना के एक ना एक दिन भोजपुरिया समाज पुछी आ वोह दिन कवनो जाना के लुकाये के जगहि ना मिली ।

बहुत बहुत धन्यवाद एह लेख खातिर , एह लेख से ढेर लोगन के आंखि खुल जाई जे तिलिस्म मे जियत बा ।

बधाई के पात्र बानी सभे एह सच्चाई के सामने ले आवे खातिर ।

धन्यवाद आ जय भोजपुरी
नवीन भोजपुरियाजी,
राऊर रिपोर्ट के एवज में प्रतिक्रिया पढ़ि के ई भरोसा भइल जे आज रउआ अस लोग बा जेकरा मन में ई प्रश्न हींड़ोल भरि रहल बा .. ’का अईसने होला भोजपुरी आ भोजपुरिया लोग ?..’

साँच बात बा भाईजी, जे भोजपुरिया लोग अतना छुतहर ना होखे जइसन देखावल जाला. बाते-बाते में ऊ कवनो राह चलत लइकी के बदन का पाछा अतना ना मता जाला, जइसन देखावल जाला.
राऊर प्रतिक्रिया पर साधुवाद.
sudhir bhai pranam
bahut badhiya lekh ba raur aa bilkul sahi bhi ba aaj ke bhojpuri cinema ka pripekshay me.
ham ta n.c.r. me rahina jaha bhojpuri bole walan ke bahut accha najar se na dekhal jala lekin eha bhi ham aapan college me bhojpuri bhashian ke ekattha kar ke aapan bhasha bole khatir protshahit karina
lekin ehija ke log jab film aa gana( kuch ke chhodke )ke baat karelan ja ki bhojpuri film aa gana ashlil holan sa aa hindi se chorawal haolan sa ta hamke kawano jawab na samajh me awela.
raura ke ham ego ghatna batawat bani. ek bar hamra college me ego karyakrm hokhe ke rahe ta ham kahani ki egi bhojpuri gana ke bhi karyakram rahi ta hamke hamar co-ordinator mana ka dehalan .u kahalan ki ye sab bahut ashlil hote hai.
ekar wajah rahe ki uu kuchh din pahile mahuaa par kawano bhojpuri film dekhle rahalan jeme kawano bahut ashlil wordings rahe.khair ham unke original bhojpuri wala ego gana sunaini ta u man gailan.
lekin hamke ta ehe lagal ki unka jaisan jetna log je pahila bar bhojpuri dekhale hoi u ehe dharna bana lei ki bhojpuri ashlil bhasha ha.
jab hamra jaisan ego laika ke ee baat bujha ta ki bhojpuriha log parampara,sanskriti pasand log ha ta e filmakaran ke e baat kahe naikhe samajh me awat.
khali puran film(hindi) ka kahani leke aa ghatiya kism ka item gana daal ke agar film banawe ke ba ta hamar ta ehe prarthana ba ki aap sab film banawal band kadi sabhe.
aapsab(filmkar)agar bhojpuri ke naam naikhi dila sakat ta please eke badnam mat kari.ese bhojpuri areas ka bahar rahke bhojpuri ke baat karewalan ke bada sharmindagi uthawe ke parela.
ant me ehe ummeed karab ki raur lekh se ehanlog ka buddhi kuchh sudhari aa bhojpuri ka kuchh vikas hoi
jai bhojpuri..........
सुधीर जी परनाम आ जय भोजपुरी

बाकई इ रपट भोजपुरी फिल्मी दुनिया के पतन के कहानी कहत बा। सच कहल गईल बा कि बिना सोचे समझे पत्थर मरबअ त कपारे फुटी। भोजपुरी फिल्मन में भी इहे होत बा। निरमाता लोग के चाह बा कि अश्लीलता के सहारे सफलता मिले। कहानी, अभिनय, गीत-संगीत पर के नजर डालेला, लेकिन दर्शक के बहुत दिन तक मुरख नहीं बनावल जा सकेला। भोजपुरी फिल्मन के दर्शक अब ऊब चुकल बाडऩ। भोजपुरी प्रेमी लोगन के अच्छा और नया कहानी के इंतजार बा। हम गारंटी से कहत बानी कि अच्छा कहानी अउरी साफ सुथरी फिल्म आज भी पसंद कइल जाई। बशर्तें केहू एइसन फिल्म बनावे त।

धन्यवाद आ जय भोजपुरी
सुधीर जी जय भोजपुरी ..........
भोजपुरी सिनेमा पर रउवा इतना बिस्तृत जानकारी देहनी ,पाहिले त रउवा के एह खातिर बहुत बहुत बधाई .........
पर हम अभी इ तय नईखी क पावत की केहर से चालू करी ...........
सबसे पहिले त हमरा देखे में भोजपुरी सिनेमा के देखे और गाना के सुने वाला "ज्यादातर लोगन" के मनोरंजन के लेवल तनी स्तरहीन बा ,ध्यान देब "ज्यादातर लोगन" के ........,सब के ना ,एह में उ लोग जादा बा जैसे मजदूर श्रेणी ,ट्रक के ड्राईवर आ तनी सरहंग किसिम के टिनिहिया लोग.................इ लोग के मनोरंजन के स्तर कुछ एही तरह के बा ,जवना में कि दुअर्थी बोल होखे ,कुछ अश्लीलता होखे ..........,
त जब तक इ जवन "जादातर लोग' बा ,जले इ लोग में जागरूकता ना आई कि हमें का देखे आ सुने चाही ,तले त तनि मुश्किल बा ........
लेकिन उ दिन दूर नईखे जब इ लोग में भी बदलाव आई ............,आ साफ़ सुथरा भोजपुरी के सुने आ देखे वाला के संख्या सत प्रतिशत होई ,
ओह दिन से भोजपुरी फिल्म इन्द्रस्त्री आ music इंडस्ट्री के दिन फिर जाई ........................

चुकी रउवा हर विषय पर इतना बिस्तृत तरीका से बात राख देले बानी कि ...........एह विषय पर कमेन्ट लिखल सुरुज के दिया देखावल होई एह से ,हमार कमेन्ट तनी विषय से हट के हो सकेला ..........एही के स्वीकार करी .
जय भोजपुरी .............
सब के ना ,एह में उ लोग जादा बा जैसे मजदूर श्रेणी ,ट्रक के ड्राईवर आ तनी सरहंग किसिम के टिनिहिया लोग.................इ लोग के मनोरंजन के स्तर कुछ एही तरह के बा ,जवना में कि दुअर्थी बोल होखे ,कुछ अश्लीलता होखे ..........,

बृज भाई इयाद बा रामायण , भा नदिया के पार , अरे हम दुर का जाई , हम है आपके कौन ? वईसे त रउवा हमरा से पुरान बानी त ओकरा पहिले के भी फिल्मन के मालुम होई लेकिन हम एह तीन गो चीजन के नाव काहे लेत बानी उ बतावल चाहत बानी

रामायण - भक्ति पे आधारित बा आ हम देखले बानी की कर्फ्यु लागि जात रहे जब रामायण आवत रहे , का भक्ति पे फिल्म ना बनि सकेली स .. ?

नदिया के पार - मत पुछी बलिया मे आजो लागेला त गाँव के गाँव टुट पडेला , काहे ? सोचे वाली बात बिया

हम आपके है कौन - ई त हम देखले बानी की लोग झारि के गईल रहे देखे खातिर 16 -16 आदमी झुंड बना के एक संगे कमांडर जीप मे बईठ के आवस देखे खातिर ( हम बलिया रहनी ओह घरी ) जबकि ई हिन्दी रहे ..

कामन का बा तीनो मे ? कांसेप्ट आ अगर कांसेप्ट सही बा त फेरु वोह फिल्म के चले से केहु ना रोक सकेला ।

का कवनो अईसन भाषा बा जवना मे अश्लीलता ना होखे ? कवनो अईसन भाषा ? कवनो ना लेकिन हँ भोजपुरी के दुर्भाग्य बा की आज के समय मे खाली आ खाली अश्लील गीतन से भरल फिल्म आवत बाडी स । आ एह वजह से ई फ्लाप हो रहल बाडी स ।

आज भी हमनी के क्षेत्र मे मजदुर वर्ग ज्यादा बा लेकिन तबो उ लोग भी एह फिल्मन के ओर ध्यान नईखे देत त काहे ? काहे कि फिल्म के के काम हवे मनोरंजन दिहल टेंशन ना आ टेंशन देबे लागी त फेरु केहु ना देखे आई ...

बाकि कुछ हद तक हम राउर बात से सहमत बानी की बदलाव आई काहे कि ढेर दिन ले ई कुल ना चलि पाई ।
सुधीर जी प्रणाम

एक दम सही बात कहनी, हमारा बिचार से नक़ल त कराही के न चाही. जवन अपन बा ओकरा के दिखाई. जब हम भोजपुरी फिल्म देखे जयेम त हमारा दिमाग भोजपुरी बसल रही नु. आज कल भोजपुरी फिल्म अईसन बनत बा की अशलीलता में हिंदी फिल्म के पीछे छोड़ देले बा. भोजपुरी फिल्म त अईसन बनत बा की आपना परिवार के साथै बैठ के देखे के मन ना करेला. फिल्म का हमेसा समाज के प्रतिबिम्ब होखे के चाही.

प्रशांत कुमार द्विवेदी
सबसे पहीले त आप सब लोगन के प्रणाम बा, कुछ काम मे एटना व्यस्तता रहे की हम चाह के भी ऑनलाइन ना हो पावत रहनी. सुधीर जी, आपके एह निचोड़ खातिर जेटना प्रसंसा काइल जाउ उ कम बा. हम आपसे और नवीन भाई , दूनो जन से सहमत बानी. हमनी के पासे आपन संस्कृति के थाती बा, इतिहास के धरोहर बा, अद्भुत कलाकारण के जनम देवे वाली माटी बिया, लेकिन सब होखला के वावजूद भी देखल जाउ त हमणी के हाथ खाली बा| हमणि के फ़िल्मन मे एट्ना असलीलता बा की हमणि के सभ्य समाज पूरा परिवार के साथे ए फिल्म ना देख सकेनी जा चाहे उ रवि किशन के होखे या मनोज तिवारी के| अगर आज से 15 साल पहीले के भोजपुरी फ़िल्मन के देखी ता वोमे के फ़िल्मन के गाना आजुओ घर मे बजा सकेनी जा लेकिन आज काल्हू के गाना ना | ए फिल्म इंडस्ट्री जब तक अश्लीलता और द्वियार्थी शब्द फ़िल्मन मे परोसत रही सभ्या समाज ए फ़िल्मन से दूर ही रही और ऐसहि दुर्दासा होखत रही|
सुधीर जी प्रणाम आ जय भोजपुरी,
भोजपुरी फ़िल्मन के बारे मे बतकही के मुद्दा राउर बहुते जायज आ जरूरी रहल जवन कि रौआ शुरु कईली.बहुत दिन से बहरा रहला कि कारन हम कुछ लिख ना पावत रहनी ह बाकिर मन बहुते बेचैन रहत रहल ह.
भोजपुरी फ़िल्मन के बात कईल जाऊ आ नवका दौर के बात कईल जाऊ त फ़िल्म देखते पहिला बात साफ़ नज़र आवेला की आजकल जवन भी फ़िल्म बन तारी सन ओमे होमवर्क तनिको नईखे.कहानी के कमजोरी त गीनाही के नईखे काहे की आजकल फ़िल्म लोग-बाग खातिर ना बल्कि बेचे खातिर बनता जवन की भोजपुरी मे ऊहो नईखे हो पावत .देखल जाऊ त आजकल फ़िल्म बनावे वाला लोगन मे पहिला नंबर ऊ बा जेके आपन पसन्द चाही,आपन हितई-नतई सधा जाऊ,घरऊ फ़िल्म बन जाता,दूसरा नंबर ऊ बा जेके समाज मे जनता मे आपन परचार करे के बा,फ़िल्म बनवलस ऊ सामाजिक अ राजनीतिक हो जाता,आ तिसरा नंबर के ओ तरे के लोग बा जे कवनो तरे भोजपुरी के नाम पर कुछ्हु परोस के कमावल चाहता,ऊ ग्लैमर फ़िल्म हो जाता.जे पईसा लगावता ऊ नोटे छापल चाहता,आ जे कलाकार बा ओकरी मन मे हिट के भूत समाइल बा,ऊ जल्दी से हिट होखल चाहता. एह तरे ई कुल कारण मिल के भोजपुरी के ,भोजपुरी फ़िल्मन के अपनंगता की ओर ले जाता.लिखे खातिर बहुत बा बकिर कम्मे के ढेर जानल जाऊ. एतना सुन्दर आ शसक्त लेख खातिर एक बेर अऊरो बहुत धन्यबाद.
नमस्कार.
प्रणाम आ जय भोजपुरी
Sudhir g Pranam,

Raua jetna poit bataini ha sab sahi ba lekin sabse badka sawwal ee baa k ee saara point ke taraf bhojpuri film makers ke dhyan kaise aakarsit kail jaao.Abhi jo bhojpuri film ban rahal baa ooo khali naam k bhojpuri ha.Bhojpuri film ke abhi jaroorat baa Prakash jha/Madhur bhandarkar/ashutosh gwarikar/mehul kumar jaisan soch waale director ke, abhi ke bhojpuri film me naa to songs ke original dhuna rahela nahi oo geet me bhojpuri maati ke mahak. par ee sab baat samjhal bhojpuri film makers ke bahot jaroori ba na ta bhojpuri film industry ek baar phir dum tori...............
सभके प्रणाम.....
जब तक भोजपुरी से प्यार करे वाला लोग इंडस्ट्री से ना जुड़ी... इहे हाल होत रही.... सुधीर भाई के आलेख में जवन चिन्ता जाहिर कईल गईल बा, उ काबिले गौर बा.
Sudhir ji pranam aa jay bhojpuri,

Bahut bahut dhanyawad aur badhai aapke eh lekh ke likhala khatir, ekdam sachaai se abhibhut ba raur ii lekhani.
Bhojpuri.com ke madhyam se eh bat jab yuva aur sichhit varg ke bich me pahunchi ta nahin jyada ta thodahun agar log eh bat per gour kari ta sudhar ke asha kail ja sakela aur jarror hoi kahen ki suruaat ho rahal ba.

Pura vishwas ba aawe wala din me haman ke sharmindaggi na uthaweke padi balki garrave mahasoos hoi jab bhojpuria samaaj ego saf suthara sanskritti ke sathe apan pahachan duniya me banawale me safal hoi.

Rauwan ke koti koti dhanyawad ba eh survey aur sachhai ke haman se awagat karawala khatir.


Jay Hind aur Jay Bhojpuri.

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