प्रणाम आ जय भोजपुरी,
जय भोजपुरी डॉट कॉम के पहिला स्थापना दिवस समारोह के तुरंत बाद वेबसाइट के कुछ वरिष्ठ सदस्य लोग मिल के भोजपुरिया माटी के लाल डा. राजेन्द्र प्रसाद के जन्मभूमि जीरादेई (सिवान) पर उनुका जन्मदिन के आसपास एगो विशाल समारोह के कल्पना कइल। एगो छोट ख्वाब जवन कि एहिजा हमनी के चौपाल में शुरु भइल, ओकरा के मूर्त रुप देवे खातिर हमनी के वरिष्ठ सदस्य श्री संजय कुमार सिंह जी "
आईं, चलल जाव जीरादेई..." नाम से एगो डिस्कशन शुरु कइले रहनी, जवना पर काफी लोगन के उत्साहवर्द्धक सुझाव आइल।
ओही सुझाव के आधार पर कार्यक्रम के एगो रुपरेखा बनावल गइल बाटे, जवन कि निचे दिहल जा रहल बा:
कार्यक्रम के तारीख : 5 दिसम्बर 2010दिन में 12:00 बजे - कार्यक्रम के उदघाटन
1:00 से 2:00 बजे - बतकही (विषय: "देशरत्न के भाषा आ माटी के उपेक्षा काहें?")
नया पीढी के भोजपुरी बोले खातिर उत्साहित करे के उद्देश्य से एह बतकही में कुछ बुद्धिजीवी लोगन के अलावा सिवान स्थित सभ स्कूल-कॉलेज के विधार्थियन के भागीदारी रही।
2:00 से 4:00 बजे - कवि सम्मलेन अउर अलंकरण समारोह
4:30 से कार्यक्रम के अंत ले - सांस्कृतिक कार्यक्रम
(प्रसिद्ध भोजपुरी लोकगायकन अउर स्थानीय कलाकारन द्वारा)
एक कार्यक्रम के बाद बाहर से ओहिजा आ रहल सदस्यन खातिर रात्रि-विश्राम के व्यवस्था रही. एह कार्यक्रम के संयोजक श्री संजय जी बानी, आ कार्यक्रम शुरु भइला के 3-4 दिन पहिले से हमनी के एगो आयोजन समिति जीरादेई में कैम्प करी, आ बाकी सदस्यन के ओह लोगन के फोन नम्बर उपलब्ध करा दिहल जाई। कार्यक्रम के संबंध में राउर विचार/सुझाव आमंत्रित बा।
एह से संबंधित पुरान डिस्कशन एहिजा देखल जा सकेला:
आईं, चलल जाव जीरादेई...हमनी के प्रयास बा कि जीरादेई में होखे जा रहल ई कार्यक्रम भोजपुरी भाषा आ भोजपुरिया समाज खातिर मील के एगो पत्थर साबित होखे। हमनी का चाहब जा कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में जय भोजपुरी परिवार के सदस्य लोग एह कार्यक्रम में शामिल होखो, आ एह ऐतिहासिक पल के साक्षी बनो। अपना गाँव में रहे वाला भाईयन के जोडला बिना हमनी के प्रयास सफल नइखे कहल जा सकत। हमनी का मिल के कोशिश कइल जाव ओह घर में एगो दिया जराये के, जहाँ सदियन से अँधेरा बा। ओह लोगन के जिनगी में कुछ खुशी के पल ले आवल जाव, जे हमनी के भाषा आ संस्कृति के अपना वास्तविक स्वरुप में सहेज के रखले बा।
आईं, भोजपुरी खातिर कुछ कइल जाव...