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का होई राष्ट्रकुल खेल के? का आयोजन सफल रही या ना?

 बहुत गर्व के साथ हमनी के कहत रहीं जा कि हमनी के देश में का कमी बा कि यहाँ आज तक ना त ओलंपिक भा कौनो अंतर राष्ट्रीय स्तर के बड़ा खेल हमनी के देश में ना हो सकेला? अगर क्रिकेट के हटा दीं त अभी तक कोई भी बड़ा प्रतियोगिता के आयोजन नइखे भईल हमनी के देश में! आ क्रिकेट के भी लेत बानी त वोक्रो जिमेवारी भी पूरी तरह से भारत के नइखे मिलल अभी पीछे मिलल भी रहे त दू-तीन देश के मिला के, त का सही में हमनी के देश एकर काबिल नइखे? या राजनेता लोग आपन कमाई खातिर एकरा के बेचत बारन? का एक्नी सब के देश हित से ज्यादा पार्टी फंड भा पार्टी बा? का होई राष्ट्रकुल खेल के? दिल्ली भा पूरा देश के खरबों रुपया एक्नी के ऊपर निछावर भईल देश के पर का देश के इज्ज़त बची?

नेता लोगन के राय त रवा सभे रोज ही देखत बानी जा, तनी सा जनता जनार्दन लोग आपन राय दिही जा
 

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Tags: आयोजन, खेल, दिल्ली, भारत, राष्ट्रकुल

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भैया हम त लाइव देखनी पर देख के बार बार मन में एहे आवत रहे... कि काश तैयारी भी पहिले हो गईल रहित, मछर कुकुर आ तईल्स ना गिरल रहित और त और उ पूल ना गिरल रहित???
एह सब के बीच एहे कहल जा सकेला कि अगर टार्गेट के २-.३ महिना पहिले पूरा कर दिहल गईल रहित त केहू के बोले के मौका ना मिलित.....

पर काल्हु के बेवस्था देख के और लोगन के जज्बा सब कुछ माफ़... जय हो सफलता पूर्वक सुरुवात खातिर... जय हो जय जय

जियो , उठो , बढो और जीतो !

जय हिन्द जय भारत !
अंत भला त सब भला.... एगो शानदार समापन समारोह के साथे आखिर दिल्ली राष्ट्रकुल खेल के समापन हो गईल...लेकिन सबसे बडका बात जे काफी गर्व के महसूस करा रहल बा..उ बा दूसरका स्थान पर भारत .............लेकिन साथे साथे एगो प्रश्न छोड़ जाता की खेल पर वास्तव में ध्यान दिहल जाओ त का भारत नम्बर १ नईखे बन सकत?
आशुतोष भाई

आजु हम एक जगह बातचीत मे शामिल रहनी हा त एगो उदाहरण हमरा मिलल हा प्रश्न के संगे संगे ..

चीन 1982-83 एसियाई खेल मे शामिल भईल रहे आ स्थिति ई भईल की बिजिंग ओलम्पिक मे उ अमेरिका के दबाई के नम्बर एक बन गईल ।

अब ई देखी कि 1982-83 अमेरिका विश्व शक्ति रहे , ओकरा पहिले रुस रहे आ अब चीन बढि रहल बा आ ठीक इहे हाल खेल मे भईल

अब देखि , भारत 2020 के टार्गेट कई के बढि रहल बा आ एशियाई खेल जवन भारत मे भईल रहे 1982-83 मे ओवह मे मेडल के संख्या बहुत कम रहे आ अबकि देखी , मय पिछ्ला संख्या के ध्वस्त कई देहल लोग ।

तैराकी , दौड जईसन प्रतियोगिता मे अभी भी भारत के बहुत कुछ करे के जरुरत बा , लेकिन एगो बात बा के ईंगलैंड के दुसरा नमर पे भेज देहलस ।

आ निशाने बाजी मे कई गो रेकार्ड बनल बा त इहे उमेद कईल जा रहल बा कि अगिला आवे वाला सालन मे भारत एगो बरियार रुप से उभरे वाला बा ।

बाकी देखी उमेद त बा आ विश्वास भी ।

जय भोजपुरी
एक से एक स एक तक के सफर ।

New Delhi,:It all started with a sole bronze in 1934 in the second edition of the Commonwealth Games and now India has finally breached the 100-mark in the medals tally of the event in the latest edition to occupy the second position in the overall standings.
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1934 मे भारत दुसरा कामनवेल्थ मे भाग लेहले रहल जवना मे ओकरा 1 पदक मिलल रहल , वोह घरी एकर नाव कामनवेल्थ ना रहे बलुक एकर नाव रहे ब्रिटिस एम्पायर गेम British Empire Games आ भारत ब्रिटिस कालोनी के नाव से भाग लेहले रहल आ एह मे रशीद अनवर के कांस्य पदक मिलल रहे । आ आजु 76 साल बाद भारत के 101 गो पदक मिलल बा ।

The country grabbed 10 medals in 1966, 16 in 1982, 25 in 1998 and 49 in the 2006 Commonwealth Games in Melbourne.

पहिलका गोल्ड फ्लाईंग सिख मिल्खा सिंह के मिलल रहे 1958 मे । India`s first gold medal was bagged by `Flying Sikh` Milkha Singh who won the 440 yards track event in the sixth edition of the Games in 1958 in Cardiff.

The event was renamed as the British Empire and Commonwealth Games in 1954, the British Commonwealth Games in 1970, and got its current title in 1978.

There are currently 54 members of the Commonwealth of Nations.

स्रोत - जी न्युज
नविन जी....एह जानकारी के बांटे खातिर धन्यवाद....हम देखत रहनी हाँ...समापन समारोह लाईव टीवी पर...ह्रदय गर्व से भर गईल हा...आ साँचो में आँखी से आँशु निकल आईल हा......बहुते गर्व आ ख़ुशी के अनुभिती भईल हा.....

लेकिन ख़तम भईला के १ घंटा बाद सोंचे लगनी हाँ...पूरा घटनाक्रम आँखी के सामने घूमे लागल हा.....हेतना पईसा लागल.....केतना लोग लाल हो गईल एह पईसा से??? का एकर राज कबो खुली? का असली लो के चेहरा सामने आई? का दोषियाँ के सजा मिली? की एह शानदार समारोह के सफलतापूर्वक समापन कईला के नाव पर एह सब पर पर्दा डाल दिहल जाई??

का इहे सुन्दरता बरकरार रही दिल्ली के? का इहे शिष्ट दिल्ली पुलिस आगहू नजर आई? का इहे सुरक्षा दिल्ली के जनता के हमेशा मिली? का आगहू खेल में हमनी के प्रदर्शन निमन रही? का हरियाणा से सबक लेके दोसर प्रदेश भी जे अपना आप के देश के विकसित राज्य कहाए के दावा करता खेल के एहिंगा प्रोत्साहित करी? की इ पानी के बूलबूला ही बन के रह जाई?


रौवा हमार सोंच नकारात्मक लाग सकता....लेकिन का हमार सवाल एकदम से बेबुनियाद आ गैरवाजिब बा?


जय भोजपुरी
राउर सवाल एक दम सही बा आ राउर शंका भी जायज बा ।

अगर खेल के दृष्टि से देखल जाउ त ई बहुत ही सफल आयोजन बडुवे , जे ई बुझत रहल हा कि भारत एह के सम्पन्न ना करा पाई त गलत साबित हो गईल ।

बाकि जहा तक घोटाला बा वोह के पर्दाफास होखे के चाही आ एह बात के हमहु समर्थन करत बानी , बाकि आजुवे मोंटु भाई से बात होत रहल हा कि बहुत लोगन के जे गरीब बा जे मजदुर बा आ जे झुग्गी झोपडी मे रहत बा वोह लोगन के दिल्ली से हटावल गईल रहल हा त ई सबसे बडहन चीज बा की आखिर एह आधार पे सफल भईल ता का मतलब ।

शायद सरकार के एह बात के बुझे के जरुरत बा कि दिल्ली अभी बहुत कुछ मांगत बिया आ वोह बहुत कुछ मे गरीब लोगन के सबसे पहिले आसरा आ रोज के काम करे के जोगाड जरुरी बा ।

जनता के अलगा से पईसा भरे के परल हा नियम तुरला पे त जनता के भी बुझे के जरुरत बा की हमनी के आपन का कर्तव्य बाटे ।

जहा तक घोटाला के बात बा त जांच त शुरु बा लेकिन बाकी घोटाला नियन इहो टाँय टाँय फिस्स हो जाई लेकिन अगर जनता जनार्दन टाईट रही त जोरदार तबडाक देबे के चाही एह से जुडल लोगन के ।

अब देखे के बा की लोगन के का रुख बा आ जवन गलती भईल बा वोह से के का सिखले बा ।

जय भोजपुरी
देखी भैया अब एह बात के एकदम भुला जायीं जा, waise राउर सवाल एक दम सही बा, नविन जी लिखालाही बारन की हर घोटाला की तरह एहो टायं टायं फिस्स हो जाई, लेकिन जनता के सोंचे के चाही. आगे केकरा के करे के बा. हमनी के देश १० कदम आगे बढ़त बा ता ४ कदम पीछे खींचे वाला लोग भी एहिजे बा .

एके शब्द में " भारत में भ्रष्टाचार भी भ्रष्ट हो गया है "

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