नेत्र दान के लिए हम भोजपुरी लोगन के आगे बढे के चाही , आज हम बनी -कल न रहेंम , आज के सांसारिक जीवन में बनी ,और आगे न रहेंम . इ विधाता के नियम बा | हम लोग हमेशा अपना ख़ुशी के खातिर मरे नि .
लेकिन हमरा के महात्मा गाँधी के कथन आज भी याद बा
" हम अपने जीवन में दुख और सुख को अनुभव करते है |
जब हम दुखी होते है तो अपने आप को कहते है हम सबसे बड़े दुखी इंशान है , लेकिन जब अपने से गरीब के दुख को देखे या समझे ,अपना दुख भी कम लगेगा |"
हम आज इ गो बात बता एम के चाहत बनी , जब कोए पयसा के देखी नि या कोए भूख लागल आदमी के देखी नि, जब हम या कहु भी उ आदमी के पानी या भोजन करावेला या दे ला .तब उ आदमी के दिल से उ ख़ुशी महशुश होला , उ अनुभव के हम वरणन कर सकत बनी . केतना ख़ुशी मेले ला . लगे ला की भगवन मिल गायनी .
हर आदमी के एक दिन जाये के बा . कुछ ऐसन करल जाये की इ संसार में न रह कर भी इ संसार में रही , हम न रही ,लेकिन अपन अखिया सबे के देखी . अपना देश के विकाश , अपना बिहार और उप के विकाश सर्वंगिग विकाश .
इ अपन अखिया JAI BHOJPURI के १०००००००००००००००००००००००००००० मेम्बर के वि देखी ,करेजा जुदा जाई . हम सब भोजपुरी से कहें के चाहत बनी की . रउरा भी आगे बढ़ी और दुसर लोगन के प्रेअरित करी . आज अपन भारत में बहुत ऐसन लोग बा ,जे नेत्र-हिन् बा , हमनी के उ लोगन के अख बन सके नि , अगर थोडा प्रयास करल जाये . और अपना प्रयास अपना भोजपुरी से कर्ट बानी .
अपना निकट " EYE DONATION " से संपर्क करी .
राउर आपन
अलोक र मिश्र " BABA "