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सोलह वर्ष की उम्र से क्रिकेट खेलते-खेलते अब सचिन ऐसे पड़ाव पर पहुँच गए हैं कि बिना विशेषण के उनका नाम लिखा ही नहीं जाता. महान बल्लेबाज़, मास्टर ब्लास्टर आदि-आदि.
अब माँग की जा रही है कि सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिया जाना चाहिए.
मेजर ध्यानचंद और मिल्खा सिंह से लेकर पीटी उषा तक बहुत से खिलाड़ियों का अब कोई नामलेवा नहीं दिखाई देता.
तो क्या यह मान लेना चाहिए कि सचिन तेंदुलकर भारत के अब तक के सबसे महान खिलाड़ी हैं?
कुछ लोगों का तर्क है कि सचिन तेंदुलकर ने जिस उम्र से खेलना शुरु किया और उनको जितने मौक़े मिले, उतने अगर किसी को भी मिलते तो वह उतने ही रिकॉर्ड अपने नाम क़ायम कर लेता.
कुछ लोगों को आपत्ति है कि सचिन तेंदुलकर का व्यक्तित्व बहुत आत्मकेंद्रित है.
सचिन तेंदुलकर के क़द के पीछे क्रिकेट की अपार लोकप्रियता की भूमिका कितनी है? अगर क्रिकेट भारत में इतना लोकप्रिय नहीं होता तो भी क्या दुनिया उन्हें इतना ही महान खिलाड़ी मानती?
यह बाज़ार की माया तो नहीं है?
e forum ke BBC se lel gai baa
jai bhojpuri
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Permalink Reply by शशि कुमार सिंह (SHASHI) on April 24, 2010 at 2:17am
Permalink Reply by शशि कुमार सिंह (SHASHI) on April 24, 2010 at 10:42pm 
Permalink Reply by Varun Kumar on April 26, 2010 at 2:34pm
Permalink Reply by Ravi Pratap Shahi on April 26, 2010 at 4:39pm
Permalink Reply by शशि कुमार सिंह (SHASHI) on April 27, 2010 at 1:39am 
Permalink Reply by Anand Bihari Vishwakarma on April 27, 2010 at 1:10pm
Permalink Reply by Vikash Kumar Singh on May 2, 2010 at 7:02pm
Permalink Reply by SANJAY on May 2, 2010 at 11:08pm
Permalink Reply by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on May 3, 2010 at 11:47am © 2012 Created by Admin.