Come, let's do something for Bhojpuri...
योजना आयोग भारत सरकार के रिपोर्ट के अनुसार एक दिन मे 32 रु (बत्तीस रू) खर्च करे वाला कोइ भी भरतीय गरीब नैखे कहा सकत , माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ई रिपोर्ट पेश कयिल गयिल बा . रू 965 प्रति माह शहरी क्षेत्र औरी रू 781 ग्रामिण क्षेत्र मे खर्च करे वाला व्यक्ति के गरीब नैखे मानल जा सकत ...
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Permalink Reply by Rajesh Yadav on September 21, 2011 at 10:40am Pradeep Bhojpuriya Bai Jii Pranam aa Jay Bhojpuri,
Eh ankada ke hisaab se ta Bharat me gareebi haiye naikhe kahen se kii Hindustaan me sayad na ke barabre log hoi je mahina me eh ankada ke hisab se kharcha na karat hoi chahen uu majbooriye me kare ke parat hokhe jai se Dawai Biro khatir.
AA agar aisan ba ta chalin hamani ke DESH ta Gareeb Muktta ho gayel.
Jai Hind aa Jai Bhojpuri.
tab ta hamani ke karopati nani ja ,kahe se ki
hamar ta lagbhag 100 rupya kharcha ba roj ke|
jai bhojpuri a parnam |
sanjay pandey
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on September 21, 2011 at 11:18am नई दिल्ली। योजना आयोग की मानें तो देश में खाने पर 32 रुपये रोज खर्च करने वाले गरीब नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट को सौंपे अपने हलफनामें में योजना आयोग ने कहा है कि खानपान पर शहरों में 965 रुपये प्रति महीना और गांव में 781 रुपये प्रति महीना खर्च करने वाले शख्स को गरीब नहीं माना जा सकता है।
योजना आयोग के मुताबिक शहर में हर रोज 32 रुपये और गांव में 26 रुपये खर्च करने वाला शख्स बीपीएल परिवारों को मिलने वाली सुविधा पाने का हकदार नहीं है। आपको बता दें कि गरीबी की ये नई परिभाषा तेंदुलकर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है।
योजना आयोग का मानना है कि हर रोज 5.5 रुपये का अनाज, 1.02 रुपये की दाल, 2.33 रुपये का दूध और 1.55 रुपये का खाद्य तेल एक इंसान को सेहतमंद रखने के लिए काफी है। रिपोर्ट ये भी कहती है कि सब्जियों पर हर रोज 1.95 रुपये, फल पर 44 पैसे, चीनी पर 70 पैसे और नमक-मसाले पर 78 पैसे खर्च करना उचित होगा, जबकि 1.51 रुपये दूसरे खाद्य पदार्थों पर खर्च हो सकते हैं। किचन में गैस या दूसरे ईंधन पर रोजाना 3 रुपए 75 पैसे का खर्च प्रस्तावित है।
योजना आयोग की नई परिभाषा के मुताबिक दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर या चेन्नई जैसे शहरों में रहने वाले कोई परिवार अगर हर महीने 3890 रुपये खर्च करता है तो उसे गरीब नहीं माना जाएगा। इसी तरह मकान के किराए और आवाजाही पर 49.10 रुपये प्रति महीने का खर्च काफी बताया गया है। इसी तरह से स्वास्थ पर 39.70 रुपये और शिक्षा पर 29.60 रुपये प्रति महीने का खर्च,
कपड़ों पर 61.30 रुपये, जूते-चप्पल पर 9.6 रुपये और निजी खर्च के तौर पर 28.80 रुपये का खर्च काफी बताया गया है।
स्रोत - आई बी एन
ई उहे तेन्दुलकर कमेटी ह जवना के हिसाब से भारत मे 37.5 प्रतिशत गरीब रहेले , एकरा माने इहे भईल की भारत मे अईसन आदमी जवन 32 रुपिया से कम खर्चा रोज करेला , बाडे !
अब देखल जाउ गरीब का कहाला -
जेकरा खाये के नईखे मिलत
जेकरा पढे लिखे के नईखे मिलत
जेकरा पहिरे ओढे के नईखे मिलत
जेकरा रहे के ठिकाना नईखे मिलत
जेकरा खाति दवा - दारु के बेवस्था नईखे हो पावत
अब देखे के बा कि जे रोज 32 रुपिया खर्चा कई सकत बा का उ गरीब बा ? ( एजुगा गरीब से माने बी पी एल के सुविधा के बात होत बा )
अब बी पी एल मे का का आवेला ओह के देखल जाउ
- फि री मे मे मकान मिली
- फिरी मे इलाज होई ( निजी अस्पताल जवन सरकारी जमीन प भा रियायत मे जवना निजी अस्पताल के सरकार जमीन देले बिआ ओह मे भी फिरी मे इलाज )
- फिरी मे पढाई लिखाई
- फिरी मे अनाज राशन दोकान से
Permalink Reply by abhinandan gupta on September 21, 2011 at 7:42pm
Permalink Reply by प्रदीप भोजपुरियाPradeepBhojpuria on September 21, 2011 at 11:20pm
Permalink Reply by Bagesh Kumar Singh on November 14, 2011 at 9:00pm nice job
Permalink Reply by amitesh on September 22, 2011 at 1:08am
Permalink Reply by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on September 22, 2011 at 8:49pm
Permalink Reply by Anil Kumar Pandey on November 14, 2011 at 8:42pm
Permalink Reply by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on November 26, 2011 at 9:34am हा हा हा हा हा ;-)
Permalink Reply by प्रदीप भोजपुरियाPradeepBhojpuria on January 4, 2012 at 2:52pm © 2012 Created by Admin.